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रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 2.12 लाख करोड़ के प्रस्ताव मंजूर किए

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने तीनों सेनाओं के लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति दी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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चर्चा में क्यों

26 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने थल सेना, नौसेना और वायु सेना के लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति प्रदान की।

रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक 26 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई। इसमें तीनों सेनाओं के कई पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) दी गई। इन प्रस्तावों की अनुमानित लागत करीब 2,12,000 करोड़ रुपये यानी लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपये है। एओएन सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी होती है, जिसके बाद खरीद की प्रक्रिया शुरू होती है; अनुबंध पर हस्ताक्षर बाद के चरण में होते हैं।

थल सेना के लिए क्या मंजूर हुआ

मंजूरी का सबसे बड़ा हिस्सा थल सेना के उपकरणों से जुड़ा है। इसमें गतिशीलता, मारक क्षमता, वायु रक्षा और ड्रोन युद्ध, सभी शामिल हैं।

  • उच्च गतिशीलता वाहन (एचएमवी), जो कठिन इलाकों में सैनिकों और साजो-सामान की आवाजाही तथा रसद सहायता को मजबूत करेंगे।
  • स्व-चालित ट्रैक्ड गन प्रणाली, ताकि तोपखाना मशीनीकृत सैन्य टुकड़ियों के साथ कदम मिलाकर चल सके।
  • गन शॉट रिस्पांस सिस्टम (जीएसआरएस), जिसे बल गुणक माना गया है क्योंकि यह सैनिकों को गोलीबारी की तुरंत जानकारी देता है।
  • हल्के बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर (एलएमआरएच), जिनका उपयोग थल सेना और वायु सेना दोनों टोही, निगरानी, युद्ध, सैनिकों की खोज और बचाव तथा आपदा राहत में करेंगी।
  • अति लघु दूरी वायु रक्षा प्रणाली (वीशोराड्स), जो नई पीढ़ी के छोटे आकार के हवाई खतरों को निशाना बनाएगी।

ड्रोन और निगरानी प्रणालियां

इस सूची में ड्रोन दोनों तरफ दिखते हैं। प्लेटफॉर्म आधारित काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (सी-यूएएस) को मंजूरी दी गई, जो आधुनिक युद्धक्षेत्र में टैंकों की सुरक्षा बढ़ाएगा। हमलावर क्षमता के लिए सेना को ब्रिक श्रेणी की लंबी दूरी की मानवरहित हवाई प्रणाली, निगरानी यूएवी, एकीकृत निगरानी और प्रहार प्रणाली तथा लंबी दूरी की कामिकेज ड्रोन प्रणाली मिलेगी। इनका उद्देश्य लक्ष्य को खोजने और भेदने की क्षमता को तेज करना है।

नौसेना और वायु सेना

नौसेना के लिए परिषद ने सक्रिय ऑफबोर्ड डिकॉय प्रणाली (एओडीएस) को मंजूरी दी, जो शत्रु की आधुनिक पोत-रोधी मिसाइलों के विरुद्ध मिसाइल रक्षा को भरोसेमंद बनाती है। इसके साथ देश में ही डिजाइन और निर्मित बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं। वायु सेना को हेलीकॉप्टर, वायु रक्षा प्रणालियां और हथियार मिलेंगे, तथा मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार प्रणाली भी, जो अग्रिम क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता की स्थानीय मौसम निगरानी देगी। इसी मंजूरी में शामिल विशेष उपयोगी हेलीकॉप्टर हवाई परिवहन की जरूरतें पूरी करेंगे।

स्वदेशी हिस्सेदारी

मंजूर खरीद का लगभग 82 प्रतिशत भारतीय उद्योग से लिया जाएगा, जिससे यह निर्णय रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के अनुरूप बैठता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

संस्थारक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी)
अध्यक्षतारक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह
बैठक की तिथि26 अक्टूबर 2026
दी गई मंजूरीआवश्यकता की स्वीकृति (एओएन), सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी
अनुमानित लागतलगभग 2,12,000 करोड़ रुपये (2.12 लाख करोड़ रुपये)
थल सेना की प्रणालियांएचएमवी, स्व-चालित ट्रैक्ड गन प्रणाली, जीएसआरएस, एलएमआरएच, वीशोराड्स, सी-यूएएस, निगरानी यूएवी, कामिकेज ड्रोन
नौसेना की प्रणालीसक्रिय ऑफबोर्ड डिकॉय प्रणाली (एओडीएस) और स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म
वायु सेना की प्रणालियांहेलीकॉप्टर, वायु रक्षा प्रणालियां, हथियार, मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर मौसम रडार प्रणाली
स्वदेशी हिस्सेदारीभारतीय उद्योग से लगभग 82 प्रतिशत

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: संस्था (रक्षा अधिग्रहण परिषद), अध्यक्ष (रक्षा मंत्री), राशि (लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपये), एओएन का अर्थ, स्वदेशी हिस्सा (लगभग 82 प्रतिशत) और कौन सी प्रणाली किस सेना की है: वीशोराड्स व जीएसआरएस थल सेना, एओडीएस नौसेना, मोबाइल एक्स-बैंड डॉप्लर रडार वायु सेना।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षाआसान

26 अक्टूबर 2026 को लगभग 2.12 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी देने वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद की अध्यक्षता कौन करता है?

  1. A.प्रमुख रक्षा अध्यक्ष
  2. B.रक्षा सचिव
  3. C.रक्षा मंत्री
  4. D.राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. रक्षा मंत्री

26 अक्टूबर 2026 को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने की और इसमें तीनों सेनाओं के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को लगभग 2,12,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर आवश्यकता की स्वीकृति दी गई।

Q2.रक्षामध्यम

इस मंजूरी में शामिल सक्रिय ऑफबोर्ड डिकॉय प्रणाली (एओडीएस) किस सेना के लिए स्वीकृत की गई?

  1. A.भारतीय थल सेना
  2. B.भारतीय नौसेना
  3. C.भारतीय वायु सेना
  4. D.भारतीय तटरक्षक बल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारतीय नौसेना

इस दौर की मंजूरियों में नौसेना के लिए सक्रिय ऑफबोर्ड डिकॉय प्रणाली स्वीकृत की गई, जो शत्रु की आधुनिक पोत-रोधी मिसाइलों के विरुद्ध मिसाइल रक्षा की विश्वसनीयता बढ़ाती है, और इसके साथ देश में डिजाइन तथा निर्मित बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं।

Q3.रक्षामध्यम

इस बैठक में मंजूर खरीद का लगभग कितना हिस्सा भारतीय उद्योग से लिया जाएगा?

  1. A.लगभग 52 प्रतिशत
  2. B.लगभग 68 प्रतिशत
  3. C.लगभग 82 प्रतिशत
  4. D.लगभग 95 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लगभग 82 प्रतिशत

इस बैठक में दी गई कुल आवश्यकता स्वीकृतियों में से करीब 82 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से की जाएगी, जिससे यह निर्णय रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा के अनुरूप बैठता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

26 अक्टूबर 2026 को डीएसी ने कितने मूल्य के प्रस्ताव मंजूर किए?

लगभग 2,12,000 करोड़ रुपये, यानी करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये के। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने इन्हें आवश्यकता की स्वीकृति दी।

आवश्यकता की स्वीकृति का अर्थ क्या है?

यह पूंजीगत खरीद प्रस्ताव को दी जाने वाली सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी है। इसके बाद खरीद प्रक्रिया शुरू होती है और अनुबंध पर हस्ताक्षर आगे के चरण में होते हैं।

सक्रिय ऑफबोर्ड डिकॉय प्रणाली किस सेना के लिए है?

भारतीय नौसेना के लिए। एओडीएस शत्रु की आधुनिक पोत-रोधी मिसाइलों के विरुद्ध मिसाइल रक्षा की विश्वसनीयता बढ़ाती है।

मंजूर खरीद का कितना हिस्सा भारतीय उद्योग से आएगा?

इस बैठक में दी गई कुल आवश्यकता स्वीकृतियों में से लगभग 82 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से की जाएगी।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 26 अक्टूबर 2026

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