पंप भंडारण: 7.43 गीगावाट चालू, 345.38 गीगावाट संभावना
भारत में 10 परियोजनाओं से 7.43 गीगावाट पंप भंडारण क्षमता चालू है और 320 स्थलों पर कुल 345.38 गीगावाट की संभावना चिह्नित की गई है, पीआईबी दस्तावेज में बताया गया।

चर्चा में क्यों
2 नवंबर 2026 को जारी सरकारी पृष्ठभूमि दस्तावेज में भारत की पंप भंडारण जल विद्युत स्थिति दी गई है: 10 परियोजनाओं से 7.43 गीगावाट चालू, 320 स्थलों पर 345.38 गीगावाट की संभावना और 2035-36 तक 105.56 गीगावाट संचयी क्षमता का मार्ग।
पंप भंडारण जल विद्युत को अक्सर जल बैटरी कहा जाता है। इसमें अतिरिक्त बिजली से पानी ऊपरी जलाशय में चढ़ाया जाता है और जरूरत पड़ने पर उसे टर्बाइन से छोड़कर बिजली बनाई जाती है। 2 नवंबर 2026 को जारी सरकारी पृष्ठभूमि दस्तावेज में बताया गया है कि यह पुरानी तकनीक भारत की स्वच्छ ऊर्जा योजना में क्यों केंद्रीय हो गई है। सितंबर 2026 तक देश में गैर-जीवाश्म स्रोतों से बिजली उत्पादन की स्थापित क्षमता 308.027 गीगावाट थी और वित्त वर्ष 2025-26 में इसमें लगभग 55.29 गीगावाट जुड़ा। लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता का है।
भंडारण क्यों जरूरी
सौर और पवन उत्पादन धूप, मौसम तथा दिन के समय के साथ घटता-बढ़ता है, इसलिए जब उत्पादन मांग से अधिक हो तब बिजली भंडारित करनी पड़ती है और जब कम हो तब उसे निकालना पड़ता है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुमान के अनुसार 2031-32 तक 73.93 गीगावाट भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी, जिसमें पंप भंडारण परियोजनाओं से 26.69 गीगावाट और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों से 47.24 गीगावाट शामिल है। बैटरी तेजी से प्रतिक्रिया देती है और आवृत्ति नियंत्रण तथा छोटी अवधि की मांग के लिए उपयुक्त है, जबकि पंप भंडारण बड़ी मात्रा में बिजली को लंबी अवधि तक स्थानांतरित करता है और दशकों चलता है, पर इसके लिए उपयुक्त भूभाग चाहिए।
तीन प्रकार
- ऑन-स्ट्रीम: दोनों जलाशय नदी, धारा या नाले पर स्थित होते हैं
- ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप: एक जलाशय जलधारा पर होता है और दूसरा नहीं
- ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप: कोई भी जलाशय नदी या सदानीरा धारा पर नहीं होता, इसीलिए इन्हें तेज मंजूरी और जलीय पारिस्थितिकी पर कम असर के कारण प्राथमिकता दी जाती है
भारत की स्थिति
अगस्त 2026 तक 10 परियोजनाओं से 7.43 गीगावाट क्षमता चालू थी और इनमें प्रत्येक की क्षमता 25 मेगावाट से अधिक है। इसके अलावा 11 परियोजनाओं की 15.87 गीगावाट क्षमता निर्माणाधीन या कार्यान्वयन के चरण में है तथा 8 परियोजनाओं की 10.40 गीगावाट क्षमता को प्राधिकरण की सहमति या मूल्यांकन मिल चुका है। कुल मिलाकर 320 पंप भंडारण स्थल चिह्नित किए गए हैं, जिनकी संयुक्त संभावना 345.38 गीगावाट है। इनमें 62 ऑन-स्ट्रीम योजनाओं की 56.67 गीगावाट और 258 ऑफ-स्ट्रीम योजनाओं की 288.71 गीगावाट हिस्सेदारी है।
क्षेत्रवार संभावना
| क्षेत्र | संभावना |
| पश्चिमी | 129.72 गीगावाट, जिसमें महाराष्ट्र 67.36 और गुजरात 33.36 गीगावाट |
| दक्षिणी | 97.76 गीगावाट, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु अग्रणी |
| पूर्वी | 53.41 गीगावाट, जिसमें ओडिशा की 41.53 गीगावाट |
| उत्तरी | 50.32 गीगावाट, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश अग्रणी |
| पूर्वोत्तर | 14.18 गीगावाट |
पश्चिमी क्षेत्र आगे है, क्योंकि पश्चिमी घाट से निकलने वाली नदियों का ढाल तीव्र है, जो दो भिन्न ऊंचाइयों पर जलाशय बनाने के लिए अनुकूल रहता है। आगे के लिए प्राधिकरण ने 2035-36 तक 100.81 गीगावाट क्षमता चालू करने का मार्ग तय किया है, जिससे संचयी पंप भंडारण क्षमता 105.56 गीगावाट हो जाएगी।
सरकार के उपाय
इन परियोजनाओं को बढ़ावा देने वाले दिशानिर्देश अप्रैल 2023 में अधिसूचित हुए और शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धी बोली के दिशानिर्देश फरवरी 2025 में आए। बजटीय सहायता में सड़क, पुल, रेल साइडिंग, रोपवे और पारेषण लाइनें शामिल हैं। 30 जून 2028 तक निर्माण के लिए आवंटित परियोजनाओं को व्यावसायिक संचालन से 25 वर्ष तक अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क में पूरी छूट मिलेगी। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर सहमति की समय-सीमा 90 दिन से घटाकर 50 दिन कर दी गई है, पात्र योजनाओं के लिए पर्यावरणीय मूल्यांकन सरल किया गया है और प्राधिकरण की सहमति के लिए पूंजीगत व्यय की सीमा संशोधित कर 3,000 करोड़ रुपये की गई है, जबकि क्लोज्ड-लूप ऑफ-स्ट्रीम योजनाओं को इससे पूरी तरह छूट दी गई है।
विश्व की तस्वीर
बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण का सबसे प्रचलित रूप पंप भंडारण ही है। 2025 के अंत तक विश्व की स्थापित क्षमता 159.8 गीगावाट थी, जिसमें चीन की हिस्सेदारी करीब 66 गीगावाट, जापान की लगभग 22 गीगावाट और अमेरिका की करीब 19 गीगावाट रही। भारत उस समय 7.18 गीगावाट के साथ चौथे स्थान पर था, जो अब बढ़कर 7.43 गीगावाट हो गया है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| उपनाम | जल बैटरी, क्योंकि यह पानी और गुरुत्व से बिजली भंडारित करती है |
|---|---|
| चालू क्षमता | अगस्त 2026 तक 10 परियोजनाओं से 7.43 गीगावाट |
| निर्माणाधीन | 11 परियोजनाओं की 15.87 गीगावाट; 8 अन्य की 10.40 गीगावाट को सहमति या मूल्यांकन |
| चिह्नित संभावना | 320 स्थलों पर 345.38 गीगावाट: 62 ऑन-स्ट्रीम (56.67 गीगावाट) और 258 ऑफ-स्ट्रीम (288.71 गीगावाट) |
| अग्रणी क्षेत्र | पश्चिमी क्षेत्र, 129.72 गीगावाट; महाराष्ट्र 67.36 और गुजरात 33.36 गीगावाट |
| सीईए अनुमान | 2031-32 तक 73.93 गीगावाट, जिसमें 26.69 गीगावाट पंप भंडारण और 47.24 गीगावाट बैटरी |
| नियोजित वृद्धि | 2035-36 तक 100.81 गीगावाट, जिससे संचयी क्षमता 105.56 गीगावाट |
| गैर-जीवाश्म क्षमता | सितंबर 2026 तक 308.027 गीगावाट, लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट |
| नीति | विद्युत मंत्रालय के अप्रैल 2023 के दिशानिर्देश; फरवरी 2025 के प्रतिस्पर्धी बोली दिशानिर्देश |
| आईएसटीएस छूट | 30 जून 2028 तक निर्माण के लिए आवंटित परियोजनाओं को 25 वर्ष तक पूरी छूट |
| विश्व क्षमता | 2025 के अंत तक 159.8 गीगावाट; चीन करीब 66 गीगावाट, भारत 7.18 गीगावाट के साथ चौथा |
परीक्षा की दृष्टि से
पंप भंडारण के तीन प्रकार, 10 परियोजनाओं की 7.43 गीगावाट चालू क्षमता, 320 स्थलों पर 345.38 गीगावाट संभावना, पश्चिमी क्षेत्र की 129.72 गीगावाट और महाराष्ट्र की 67.36 गीगावाट हिस्सेदारी, 2031-32 तक 73.93 गीगावाट भंडारण का अनुमान, 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म लक्ष्य, अप्रैल 2023 के दिशानिर्देश, 30 जून 2028 तक आवंटित परियोजनाओं को छूट तथा विश्व क्षमता 159.8 गीगावाट याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
अगस्त 2026 तक भारत में कितनी पंप भंडारण क्षमता चालू थी?
- A.4.95 गीगावाट
- B.7.43 गीगावाट
- C.15.87 गीगावाट
- D.26.69 गीगावाट
उत्तर देखें
सही उत्तर 7.43 गीगावाट है, जो दस परियोजनाओं में फैली है और इनमें प्रत्येक की स्थापित क्षमता पच्चीस मेगावाट से अधिक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में पंप भंडारण की सर्वाधिक चिह्नित संभावना किस क्षेत्र में है?
- A.उत्तरी क्षेत्र
- B.दक्षिणी क्षेत्र
- C.पश्चिमी क्षेत्र
- D.पूर्वी क्षेत्र
उत्तर देखें
प्राधिकरण इसका कारण वहां की भू-आकृति और पश्चिमी घाट से निकलने वाली नदियों के तीव्र ढाल को मानता है, क्योंकि पंप भंडारण परियोजना के लिए कम दूरी में दो भिन्न ऊंचाइयों पर जलाशय चाहिए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप पंप भंडारण योजना का सही विवरण कौन है?
- A.दोनों जलाशय नदी, धारा या नाले पर स्थित होते हैं
- B.एक जलाशय जलधारा पर होता है और दूसरा नहीं
- C.कोई भी जलाशय नदी या सदानीरा धारा पर नहीं होता
- D.दोनों जलाशय किसी मौजूदा सिंचाई नहर के भीतर बनाए जाते हैं
उत्तर देखें
पंप भंडारण योजनाओं का वर्गीकरण इस आधार पर होता है कि उनके जलाशयों का प्राकृतिक जलधाराओं से क्या संबंध है, और क्लोज्ड-लूप प्रकार में दोनों जलाशय उनसे दूर रखे जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पंप भंडारण जल विद्युत क्या है?
यह बिजली भंडारित करने का तरीका है, जिसे जल बैटरी भी कहा जाता है। अतिरिक्त बिजली से पानी ऊपरी जलाशय में चढ़ाया जाता है और मांग बढ़ने पर उसे टर्बाइन से छोड़कर बिजली बनाई जाती है।
भारत में पंप भंडारण की चालू क्षमता कितनी है?
अगस्त 2026 तक 10 परियोजनाओं से 7.43 गीगावाट चालू थी। इसके अलावा 15.87 गीगावाट निर्माणाधीन है और 10.40 गीगावाट को सहमति या मूल्यांकन मिल चुका है।
सबसे अधिक चिह्नित संभावना किस क्षेत्र में है?
पश्चिमी क्षेत्र में, जहां राष्ट्रीय कुल 345.38 गीगावाट में से 129.72 गीगावाट है। महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 67.36 और गुजरात की 33.36 गीगावाट है, जिसका कारण पश्चिमी घाट से निकलने वाली नदियों का तीव्र ढाल है।
पंप भंडारण योजनाओं के तीन प्रकार कौन हैं?
ऑन-स्ट्रीम, जिसमें दोनों जलाशय जलधारा पर होते हैं; ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप, जिसमें केवल एक जलाशय जलधारा पर होता है; और ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप, जिसमें कोई भी जलाशय नदी या सदानीरा धारा पर नहीं होता।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2331580 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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