अगस्त 2026 तक भारत में कितनी पंप भंडारण क्षमता चालू थी?
- A.4.95 गीगावाट
- B.7.43 गीगावाट
- C.15.87 गीगावाट
- D.26.69 गीगावाट
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 7.43 गीगावाट है, जो दस परियोजनाओं में फैली है और इनमें प्रत्येक की स्थापित क्षमता पच्चीस मेगावाट से अधिक है। विकल्प C गलत है, क्योंकि वह आंकड़ा ग्यारह परियोजनाओं की निर्माणाधीन या कार्यान्वयन चरण की क्षमता का है, पहले से चल रही क्षमता का नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि वह केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2031-32 के लिए अनुमानित भंडारण आवश्यकता में पंप भंडारण की हिस्सेदारी है, और उस अनुमान में बैटरी भंडारण का हिस्सा भी शामिल रहता है। विकल्प A केवल एक कम संख्या है, जिसका कोई आधार नहीं है। अभ्यर्थियों को तीनों चरण अलग-अलग याद रखने चाहिए, अर्थात चालू क्षमता, निर्माणाधीन क्षमता तथा वह क्षमता जिसे सहमति या मूल्यांकन मिला है पर काम शुरू नहीं हुआ, क्योंकि प्रश्न में इनमें से एक देकर दूसरा पूछ लिया जाता है।
पूरा लेख पढ़ें: पंप भंडारण: 7.43 गीगावाट चालू, 345.38 गीगावाट संभावना
अभ्यास प्रश्न
भारत में पंप भंडारण की सर्वाधिक चिह्नित संभावना किस क्षेत्र में है?
- A.उत्तरी क्षेत्र
- B.दक्षिणी क्षेत्र
- C.पश्चिमी क्षेत्र
- D.पूर्वी क्षेत्र
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प्राधिकरण इसका कारण वहां की भू-आकृति और पश्चिमी घाट से निकलने वाली नदियों के तीव्र ढाल को मानता है, क्योंकि पंप भंडारण परियोजना के लिए कम दूरी में दो भिन्न ऊंचाइयों पर जलाशय चाहिए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप पंप भंडारण योजना का सही विवरण कौन है?
- A.दोनों जलाशय नदी, धारा या नाले पर स्थित होते हैं
- B.एक जलाशय जलधारा पर होता है और दूसरा नहीं
- C.कोई भी जलाशय नदी या सदानीरा धारा पर नहीं होता
- D.दोनों जलाशय किसी मौजूदा सिंचाई नहर के भीतर बनाए जाते हैं
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पंप भंडारण योजनाओं का वर्गीकरण इस आधार पर होता है कि उनके जलाशयों का प्राकृतिक जलधाराओं से क्या संबंध है, और क्लोज्ड-लूप प्रकार में दोनों जलाशय उनसे दूर रखे जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर दिए गए हैं। इनमें से कौन एक है?
- A.जोधपुर
- B.कांडला
- C.तूतीकोरिन
- D.पारादीप
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मिशन के तहत दिए गए चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर जोधपुर, ओडिशा, पुणे और केरल हैं। ये क्लस्टर उत्पादन, खपत तथा अधोसंरचना को एक ही क्षेत्र में लाते हैं, जिससे परियोजना की व्यवहार्यता बढ़ती है और पैमाने का लाभ मिलता है, क्योंकि हाइड्रोजन का परिवहन कठिन होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →31 दिसंबर 2030 तक शुरू होने वाले हरित हाइड्रोजन संयंत्रों को अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क से कितने वर्ष की छूट है?
- A.10 वर्ष
- B.15 वर्ष
- C.20 वर्ष
- D.25 वर्ष
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दिसंबर 2030 के अंत तक शुरू होने वाले हरित हाइड्रोजन तथा हरित अमोनिया संयंत्रों को पच्चीस वर्ष तक अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली के शुल्क से छूट है, जिससे ऐसे संयंत्रों तक नवीकरणीय बिजली पहुँचाने की लागत घटती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के हरित हाइड्रोजन मानक के अनुसार हाइड्रोजन को हरित कहलाने के लिए अधिकतम उत्सर्जन कितना हो सकता है?
- A.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 1 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- B.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- C.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 5 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- D.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 9 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
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यह मानक नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अगस्त 2023 में अधिसूचित किया, इसे वेल-टू-गेट आधार पर मापा जाता है और बारह महीने के औसत के रूप में आँका जाता है, जिससे भारत हरित हाइड्रोजन की औपचारिक परिभाषा तय करने वाले पहले कुछ देशों में आ गया।
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