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एनबीए ने 29 राज्य जैव विविधता बोर्डों को 1.19 करोड़ रुपये दिए

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने पहुंच एवं लाभ साझाकरण के 1.19 करोड़ रुपये 29 राज्य जैव विविधता बोर्डों और एक केंद्रशासित परिषद को जारी किए।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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चर्चा में क्यों

17 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने पहुंच एवं लाभ साझाकरण के 1.19 करोड़ रुपये 29 राज्य जैव विविधता बोर्डों और एक केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को जारी करने की घोषणा की, जो आर्मेनिया में होने वाले सीबीडी कॉप 17 से पहले आई है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने पहुंच एवं लाभ साझाकरण (एबीएस) व्यवस्था के तहत जमा हुए 1.19 करोड़ रुपये 29 राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा एक केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को जारी किए हैं। यह राशि उन कंपनियों से मिली है जिन्होंने कृषि से जुड़े जैविक संसाधनों का उपयोग शोध और व्यावसायिक कार्यों में किया। इसे संरक्षण, जैविक संसाधनों के टिकाऊ उपयोग और स्थानीय समुदायों के कल्याण पर खर्च किया जाएगा।

बंटवारे का तरीका

संबंधित जैविक संसाधन बाजार या व्यापारियों से खरीदे गए थे, इसलिए अलग-अलग लाभ दावेदारों की पहचान संभव नहीं थी। ऐसे में प्राधिकरण ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर बनी और प्राधिकरण से स्वीकृत व्यवस्था अपनाई। हर राज्य को उस संसाधन के अनुमानित खेती क्षेत्र के अनुपात में हिस्सा मिला, और यह अनुमान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि सांख्यिकी के एकीकृत पोर्टल के आंकड़ों से लिया गया।

सबसे अधिक किसे मिला

आवंटन सूची में महाराष्ट्र पहले स्थान पर रहा। राजस्थान दूसरे और मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल का क्रम आया, और शेष राशि बाकी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेश में बांटी गई। कुल वितरण 1,18,61,655 रुपये का हुआ।

फसलें और कंपनियां

यह भुगतान मक्का, धान, बाजरा और कपास के उपयोग से जुड़ा है। बीज और फसल विज्ञान से जुड़ी कंपनियों ने मक्का और स्वीट कॉर्न की किस्मों, मक्का, धान तथा बाजरा के संकर बीजों और शोध व व्यावसायिक बिक्री में प्रयुक्त कपास की किस्मों व संकरों के लिए अंशदान दिया।

खर्च की शर्त

यह राशि केवल जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 32(2) में गिनाए गए कार्यों पर ही खर्च हो सकती है। इनमें जैव विविधता का प्रलेखन, संरक्षण और टिकाऊ उपयोग, स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन को मजबूत करना, शोध, क्षमता निर्माण तथा समुदायों की आजीविका सुधारना शामिल है।

बड़ी तस्वीर

प्राधिकरण अब तक अकेले कृषि क्षेत्र से प्राप्त 86 करोड़ रुपये और कुल मिलाकर 203 करोड़ रुपये से अधिक बांट चुका है। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब भारत जैव विविधता अभिसमय के पक्षकारों के सत्रहवें सम्मेलन की तैयारी कर रहा है, जो 19 से 30 अक्टूबर 2026 तक आर्मेनिया के येरेवान में होगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

संस्थाराष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए)
मंत्रालयपर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
व्यवस्थापहुंच एवं लाभ साझाकरण (एबीएस)
वितरित राशि1.19 करोड़ रुपये (1,18,61,655 रुपये)
प्राप्तकर्ता29 राज्य जैव विविधता बोर्ड और एक केंद्रशासित प्रदेश परिषद
सर्वाधिक हिस्सामहाराष्ट्र, आवंटन सूची में पहले स्थान पर
दूसरा और तीसराराजस्थान दूसरे और मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर
संबंधित फसलेंमक्का, धान, बाजरा और कपास
खर्च का प्रावधानजैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 32(2)
अब तक कुल वितरण203 करोड़ रुपये से अधिक, जिसमें कृषि क्षेत्र से 86 करोड़ रुपये
आगामी आयोजनसीबीडी कॉप 17, येरेवान, आर्मेनिया, 19 से 30 अक्टूबर 2026

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: संस्था (राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण), व्यवस्था (पहुंच एवं लाभ साझाकरण), राशि (1.19 करोड़ रुपये, ठीक-ठीक 1,18,61,655 रुपये), प्राप्तकर्ता (29 राज्य बोर्ड और एक केंद्रशासित परिषद), शीर्ष राज्य (महाराष्ट्र), कानून (जैव विविधता अधिनियम 2002 की धारा 32(2)), कुल वितरण (कृषि से 86 करोड़, कुल 203 करोड़ से अधिक) तथा सीबीडी कॉप 17, येरेवान, आर्मेनिया, 19 से 30 अक्टूबर 2026।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने पहुंच एवं लाभ साझाकरण व्यवस्था के तहत राज्य जैव विविधता बोर्डों को कितनी राशि वितरित की?

  1. A.1.19 करोड़ रुपये
  2. B.11.9 करोड़ रुपये
  3. C.86 लाख रुपये
  4. D.2.3 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 1.19 करोड़ रुपये

वितरण का सटीक आंकड़ा एक करोड़ अठारह लाख इकसठ हजार छह सौ पचपन रुपये बैठता है।

Q2.पर्यावरणमध्यम

इस वितरण में सबसे बड़ा हिस्सा किस राज्य को मिला?

  1. A.राजस्थान
  2. B.मध्य प्रदेश
  3. C.महाराष्ट्र
  4. D.कर्नाटक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. महाराष्ट्र

राजस्थान दूसरे और मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर रहे, इसलिए विकल्प ए और बी अगले दो स्थानों को बताते हैं, शीर्ष को नहीं।

Q3.पर्यावरणकठिन

राज्य जैव विविधता बोर्डों को मिली यह राशि किस प्रावधान के अंतर्गत खर्च करनी होगी?

  1. A.जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 32(2)
  2. B.पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 15
  3. C.वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 8
  4. D.वन संरक्षण अधिनियम की धारा 41
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 32(2)

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को दी गई राशि केवल उसी प्रावधान में गिनाए गए कार्यों पर खर्च होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनबीए ने इस बार पहुंच एवं लाभ साझाकरण के तहत कितनी राशि बांटी?

1.19 करोड़ रुपये, यानी ठीक-ठीक 1,18,61,655 रुपये, जो 29 राज्य जैव विविधता बोर्डों और एक केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को दिए गए। यह राशि कृषि जैविक संसाधनों का उपयोग करने वाली कंपनियों से मिली थी।

सबसे बड़ा हिस्सा किस राज्य को मिला?

महाराष्ट्र को। राजस्थान दूसरे और मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर रहे, और कुल वितरण 1,18,61,655 रुपये का हुआ। हिस्सा हर संसाधन के अनुमानित खेती क्षेत्र के आधार पर तय हुआ।

सीबीडी कॉप 17 कहां होगा?

आर्मेनिया के येरेवान में, 19 से 30 अक्टूबर 2026 तक। यह जैव विविधता अभिसमय के पक्षकारों का सत्रहवां सम्मेलन है।

स्रोत

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