राज्य जैव विविधता बोर्डों को मिली यह राशि किस प्रावधान के अंतर्गत खर्च करनी होगी?
- A.जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 32(2)
- B.पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 15
- C.वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 8
- D.वन संरक्षण अधिनियम की धारा 41
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 32(2) है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषद को दी गई राशि केवल उसी प्रावधान में गिनाए गए कार्यों पर खर्च होगी। इन कार्यों में जैव विविधता का प्रलेखन, जैविक संसाधनों का संरक्षण और टिकाऊ उपयोग, स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन को सुदृढ़ करना, शोध, क्षमता निर्माण तथा समुदायों की आजीविका में सुधार शामिल हैं। विकल्प बी, सी और डी में अन्य पर्यावरणीय कानूनों की धाराएं दी गई हैं, जो अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण होते हुए भी पहुंच एवं लाभ साझाकरण की राशि के उपयोग को नियंत्रित नहीं करतीं। अभ्यर्थियों को इस अधिनियम से बनी त्रिस्तरीय व्यवस्था याद रखनी चाहिए, अर्थात केंद्र में राष्ट्रीय प्राधिकरण, राज्यों में राज्य बोर्ड और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियां।
पूरा लेख पढ़ें: एनबीए ने 29 राज्य जैव विविधता बोर्डों को 1.19 करोड़ रुपये दिए
अभ्यास प्रश्न
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने पहुंच एवं लाभ साझाकरण व्यवस्था के तहत राज्य जैव विविधता बोर्डों को कितनी राशि वितरित की?
- A.1.19 करोड़ रुपये
- B.11.9 करोड़ रुपये
- C.86 लाख रुपये
- D.2.3 करोड़ रुपये
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वितरण का सटीक आंकड़ा एक करोड़ अठारह लाख इकसठ हजार छह सौ पचपन रुपये बैठता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इस वितरण में सबसे बड़ा हिस्सा किस राज्य को मिला?
- A.राजस्थान
- B.मध्य प्रदेश
- C.महाराष्ट्र
- D.कर्नाटक
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राजस्थान दूसरे और मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर रहे, इसलिए विकल्प ए और बी अगले दो स्थानों को बताते हैं, शीर्ष को नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सीएक्यूएम की समीक्षा में पराली जलाने की निगरानी के लिए किन दो तकनीकों पर बल दिया गया?
- A.उपग्रह और भूमि रडार
- B.ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर
- C.मौसम गुब्बारे और लिडार
- D.चल प्रयोगशालाएं और स्मॉग टावर
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समीक्षा में इनकी तैनाती पर चर्चा हुई ताकि तकनीक आधारित निगरानी हो सके और खेतों में आग की प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया जा सके।
पूरी व्याख्या पढ़ें →समीक्षा में चर्चा में आई सीआरएम मशीनों का पूरा नाम क्या है?
- A.फसल चक्र प्रबंधन मशीनें
- B.फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें
- C.जलवायु जोखिम न्यूनीकरण मशीनें
- D.केंद्रीय ग्रामीण मशीनीकरण उपकरण
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ये वही मशीनें हैं जो कटाई के बाद खेत में बची पराली को संभालती हैं, और आयोग ने दोनों जिलों में इनकी उपलब्धता तथा वास्तविक तैनाती दोनों की समीक्षा की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →फिरोजपुर और फरीदकोट में पराली प्रबंधन की समीक्षा करने वाले सीएक्यूएम दल का नेतृत्व किसने किया?
- A.डॉ. टी. एस. पंवार, सदस्य (तकनीकी)
- B.सीएक्यूएम के अध्यक्ष
- C.मोगा के उपायुक्त
- D.पंजाब के मुख्य सचिव
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उन्हीं की अगुवाई में उच्चस्तरीय दल पंजाब के इन दो जिलों में गया और देखा कि कटाई के मौसम में पराली जलाने से रोकने के उपाय किस तरह लागू हो रहे हैं।
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