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ई85 और ई100 फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए मोटर वाहन नियम संशोधित

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन कर वाहनों के उत्सर्जन प्रमाणन में ई85 के साथ ई100 को भी शामिल किया है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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ई85 और ई100 फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए मोटर वाहन नियम संशोधित — GK24 title card

चर्चा में क्यों

26 अक्टूबर 2026 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किए और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के उपयोग को आसान बनाने के लिए उत्सर्जन प्रमाणन में ई85 के साथ ई100 को जोड़ा।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किए हैं, जिससे ई85 और अन्य उच्च एथेनॉल ईंधनों पर चलने वाले फ्लेक्स फ्यूल वाहनों का रास्ता खुलेगा। इस बदलाव में उत्सर्जन प्रमाणन के प्रावधानों को इस तरह लिखा गया है कि ई85 के साथ ई100 का नाम स्पष्ट रूप से जुड़ जाए। इन ईंधनों के लिए प्रमाणित किसी भी वाहन को अपनी श्रेणी पर लागू उत्सर्जन और सुरक्षा शर्तें पूरी करनी ही होंगी।

ई85 और ई100 का अर्थ

इस संकेत पद्धति में अक्षर ई का अर्थ एथेनॉल है और उसके बाद का अंक ईंधन में एथेनॉल का हिस्सा बताता है। इसलिए ई85 पेट्रोल और एथेनॉल का वह मिश्रण है जिसमें आयतन के हिसाब से 85 प्रतिशत तक एथेनॉल रहता है, जबकि ई100 मुख्य रूप से एथेनॉल से बना ईंधन है।

फ्लेक्स फ्यूल वाहन कैसे चलता है

फ्लेक्स फ्यूल तकनीक नई नहीं है; ब्राजील और अमेरिका में इसका व्यापक उपयोग पहले से होता है। ऐसा वाहन एक ही ईंधन टैंक से एथेनॉल और पेट्रोल के कई मिश्रणों पर चलने के लिए बनाया जाता है। उसकी बनावट और प्रमाणन के अनुसार यह दायरा ई85 या ई100 तक भी जा सकता है। ईंधन प्रणाली के पुर्जे और सामग्री स्वीकृत मिश्रणों के हिसाब से चुने जाते हैं और इंजन नियंत्रण टैंक में मौजूद ईंधन की बनावट के अनुसार अपने आप समायोजित हो जाते हैं। इससे चालक निर्माता द्वारा प्रमाणित और घोषित दायरे में कोई भी ईंधन चुन सकता है।

सरकार इसे क्यों चाहती है

देश में बना एथेनॉल आयातित कच्चे तेल की खरीद का एक हिस्सा ले सकता है, जिससे वह निर्भरता घटेगी। इसके लिए बने वाहनों में एथेनॉल के उपयोग से कुछ निकास प्रदूषक भी कम हो सकते हैं और ईंधन के उत्पादन तथा उपयोग की पूरी अवधि में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घट सकता है, हालांकि यह कच्चे माल और उत्पादन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

पुराने वाहन मालिकों के लिए इसका अर्थ

यह अधिसूचना केवल उन वाहनों पर लागू है जो विशेष रूप से इन ईंधनों के लिए बने और प्रमाणित हैं। अब तक आम तौर पर बिकने या चलने वाले वाहनों पर यह लागू नहीं होगी। मंत्रालय ने साफ किया कि केवल ई10 या ई20 के अनुकूल होना किसी वाहन को ई85 के लिए उपयुक्त नहीं बनाता, और किसी भी पुराने वाहन मालिक को अब या आगे ईंधन बदलने या वाहन में बदलाव कराने की जरूरत नहीं है। वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि पंप पर ईंधन चुनने से पहले वाहन पर लगे ईंधन अनुकूलता स्टिकर को देखें और मालिक पुस्तिका का पालन करें। संशोधनों में बायोडीजल से जुड़े प्रावधान भी बदले गए हैं तथा तकनीकी सुधार किए गए हैं, और नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे।

महत्वपूर्ण तथ्य

मंत्रालयसड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ)
संशोधित नियमकेंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989
किया गया बदलावउत्सर्जन प्रमाणन प्रावधानों में ई85 के साथ ई100 स्पष्ट रूप से शामिल
ई85पेट्रोल और एथेनॉल का मिश्रण, आयतन के हिसाब से 85 प्रतिशत तक एथेनॉल
ई का अर्थएथेनॉल; अंक ईंधन में एथेनॉल का अनुपात बताता है
ई100मुख्य रूप से एथेनॉल से बना ईंधन
पहले से उपयोग करने वाले देशब्राजील और अमेरिका
ईंधन टैंकएक ही टैंक, इंजन नियंत्रण ईंधन की बनावट के अनुसार स्वयं समायोजित
बताए गए लाभआयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी, कुछ निकास प्रदूषक और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होंगे
पुराने वाहनई85 पर जाने या बदलाव कराने की बाध्यता नहीं; ई10 या ई20 की अनुकूलता ई85 के लिए पर्याप्त नहीं
अन्य बदलावबायोडीजल से जुड़े प्रावधान और तकनीकी सुधार
प्रभावी तिथिराजपत्र में प्रकाशन की तिथि से

परीक्षा की दृष्टि से

मंत्रालय (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग), संशोधित नियम (केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989), बदलाव (उत्सर्जन प्रमाणन में ई85 के साथ ई100 का नाम), ई85 का अर्थ (आयतन में 85 प्रतिशत तक एथेनॉल वाला पेट्रोल-एथेनॉल मिश्रण, ई का अर्थ एथेनॉल), फ्लेक्स फ्यूल का उपयोग करने वाले देश (ब्राजील और अमेरिका) तथा यह बात याद रखें कि ई10 या ई20 की अनुकूलता ई85 के लिए पर्याप्त नहीं है।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

ई85 और ई100 फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने किन नियमों में संशोधन किया है?

  1. A.मोटर वाहन अधिनियम, 1988
  2. B.केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989
  3. C.पर्यावरण संरक्षण नियम, 1986
  4. D.ऊर्जा संरक्षण नियम, 2001
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989

मंत्रालय ने इन नियमों में संशोधन अधिसूचित किए, जिससे ई85 और अन्य उच्च एथेनॉल ईंधनों पर चलने में सक्षम वाहनों का प्रमाणन और उपयोग संभव हो सके।

Q2.पर्यावरणआसान

ई85 ईंधन में आयतन के हिसाब से कितने प्रतिशत तक एथेनॉल होता है?

  1. A.20 प्रतिशत
  2. B.50 प्रतिशत
  3. C.85 प्रतिशत
  4. D.100 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 85 प्रतिशत

ई85 पेट्रोल और एथेनॉल का वह मिश्रण है जिसमें एथेनॉल आयतन के हिसाब से इतने हिस्से तक रहता है।

Q3.पर्यावरणआसान

फ्लेक्स फ्यूल तकनीक का व्यापक उपयोग करने वाले किन दो देशों का उल्लेख किया गया?

  1. A.ब्राजील और अमेरिका
  2. B.जर्मनी और जापान
  3. C.चीन और दक्षिण कोरिया
  4. D.ऑस्ट्रेलिया और कनाडा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ब्राजील और अमेरिका

संशोधन समझाते हुए मंत्रालय ने बताया कि फ्लेक्स फ्यूल तकनीक इन देशों में पहले से उपयोग में है, जहां वाहन एक ही ईंधन टैंक से लिए गए एथेनॉल और पेट्रोल के कई मिश्रणों पर चलने के लिए बनाए जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई85 का क्या अर्थ है?

पेट्रोल और एथेनॉल का वह मिश्रण जिसमें आयतन के हिसाब से 85 प्रतिशत तक एथेनॉल होता है। अक्षर ई का अर्थ एथेनॉल है और अंक ईंधन में उसका अनुपात बताता है, इसलिए ई100 मुख्य रूप से एथेनॉल से बना ईंधन है।

फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए मंत्रालय ने किन नियमों में संशोधन किया है?

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में। संशोधनों से उत्सर्जन प्रमाणन प्रावधानों में ई85 के साथ ई100 जुड़ा है, तथा बायोडीजल प्रावधान भी बदले गए और तकनीकी सुधार किए गए हैं।

ई20 पर चलने वाला वाहन ई85 पर भी चल सकता है?

नहीं। मंत्रालय ने कहा कि केवल ई10 या ई20 के अनुकूल होना ई85 के लिए उपयुक्तता सिद्ध नहीं करता। केवल वही वाहन इन ईंधनों का उपयोग कर सकते हैं जो विशेष रूप से ई85 या ई100 के लिए बने और प्रमाणित हैं।

फ्लेक्स फ्यूल तकनीक का उपयोग कौन से देश पहले से करते हैं?

ब्राजील और अमेरिका। वहां फ्लेक्स फ्यूल वाहन एक ही ईंधन टैंक से एथेनॉल और पेट्रोल के कई मिश्रणों पर चलते हैं और इंजन नियंत्रण ईंधन की बनावट के अनुसार स्वयं समायोजित हो जाते हैं।

स्रोत

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