किश्तवाड़ में भूकंप वेधशाला शुरू, जम्मू-कश्मीर में अब चार
डॉ. जितेंद्र सिंह ने किश्तवाड़ में भूकंप वेधशाला का उद्घाटन किया, जो जम्मू-कश्मीर की चौथी वेधशाला है और आंकड़े नई दिल्ली के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को भेजेगी।

चर्चा में क्यों
2 नवंबर 2026 को डॉ. जितेंद्र सिंह ने किश्तवाड़ में भूकंप वेधशाला का उद्घाटन किया, जो जम्मू-कश्मीर की चौथी वेधशाला है, और 2014 के बाद क्षेत्र में मौसम निगरानी तंत्र के विस्तार का ब्योरा दिया।
जम्मू-कश्मीर के ऊँचे भूकंपीय क्षेत्र में बसे किश्तवाड़ में नई भूकंप वेधशाला शुरू हो गई है। इसका उद्घाटन डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान के स्वतंत्र प्रभार वाले केंद्रीय राज्य मंत्री हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग तथा अंतरिक्ष विभाग में भी राज्य मंत्री हैं। यह सुविधा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के जरिये स्थापित की गई है।
वेधशाला क्या करेगी
इस केंद्र में आधुनिक डिजिटल भूकंपीय उपकरण लगे हैं और यह दर्ज होते ही आंकड़े नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के चौबीसों घंटे चलने वाले भूकंप निगरानी केंद्र को भेजेगा। इस जुड़ाव के बाद जम्मू-कश्मीर में कुल चार भूकंप वेधशालाएँ हो गई हैं, बाकी तीन जम्मू, श्रीनगर और उधमपुर में हैं। मंत्री ने कहा कि भूकंपीय हलचल पर लगातार नजर रखने से इलाके के खतरों की समझ बेहतर होगी, जिला प्रशासन तथा राहत दलों को तेज कार्रवाई में मदद मिलेगी और सुरक्षित निर्माण की योजना बनाना आसान होगा।
रडार, मौसम केंद्र और वर्षामापी
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2014 के बाद इस क्षेत्र में भारत मौसम विज्ञान विभाग का जाल कितना फैला है। पहले यहाँ एक भी डॉपलर मौसम रडार नहीं था; उसके बाद बनिहाल, जोत, जम्मू और श्रीनगर में चार रडार लगाए गए। चार और रडार 2027 में डोडा, किश्तवाड़, अनंतनाग तथा बारामुला में शुरू होंगे, जिससे कुल संख्या आठ हो जाएगी। स्वचालित मौसम केंद्र उधमपुर, कठुआ और रामबन के तीन से बढ़कर बारह हो गए हैं, जिनमें चार नए किश्तवाड़ में, दो-दो डोडा तथा रामबन में और एक कठुआ में हैं। संसदीय क्षेत्र के पाँच जिलों में वर्षामापी केंद्र नौ से बढ़कर पंद्रह हो गए हैं।
पंचायत तक पहुँचा पूर्वानुमान
इन पाँच जिलों की हर पंचायत तक मौसम का पूर्वानुमान पहुँच रहा है और मौसम तथा कृषि-मौसम सलाह सेवाओं का लाभ 5,467 लोगों तक पहुँचा है। क्षेत्र में पटनीटॉप पर उच्च तुंगता बादल भौतिकी प्रयोगशाला भी है, जबकि जम्मू को पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी के लिए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र मिला है। इनमें से कई सुविधाएँ पिछले वर्ष की चसोटी बादल फटने की घटना के बाद जोड़ी गईं।
चेतावनी का मोल उसे मानने में है
मंत्री ने जोर दिया कि वैज्ञानिक चेतावनी तभी जान बचाती है जब लोग उस पर अमल करें। उन्होंने एक चेतावनी के बाद लगाई गई यातायात रोक और उसके बाद राजमार्ग को हुए नुकसान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सूचना जरूरी है, पर सूचना का पालन भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि अफवाह और डर फैलाने वाली बातों का जवाब भरोसेमंद वैज्ञानिक स्रोतों के प्रमाण से दिया जाना चाहिए।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सुविधा | भूकंप वेधशाला, किश्तवाड़, जम्मू-कश्मीर |
|---|---|
| उद्घाटन | डॉ. जितेंद्र सिंह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान के स्वतंत्र प्रभार वाले केंद्रीय राज्य मंत्री |
| स्थापना | पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के जरिये |
| आंकड़े कहाँ जाएँगे | राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली का चौबीसों घंटे चलने वाला भूकंप निगरानी केंद्र |
| जम्मू-कश्मीर में वेधशालाएँ | चार, यानी जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर और किश्तवाड़ |
| डॉपलर मौसम रडार | 2014 में शून्य; बनिहाल, जोत, जम्मू तथा श्रीनगर में चार लगे; 2027 में डोडा, किश्तवाड़, अनंतनाग तथा बारामुला में चार और |
| स्वचालित मौसम केंद्र | तीन (उधमपुर, कठुआ, रामबन) से बारह |
| वर्षामापी केंद्र | पाँच जिलों में नौ से पंद्रह |
| कृषि-मौसम सलाह के लाभार्थी | 5,467 |
| अन्य सुविधाएँ | पटनीटॉप पर उच्च तुंगता बादल भौतिकी प्रयोगशाला; जम्मू में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र |
| सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय | डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें स्थान (किश्तवाड़), मंत्री (डॉ. जितेंद्र सिंह) और मंत्रालय (पृथ्वी विज्ञान); जम्मू-कश्मीर में अब जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर तथा किश्तवाड़ में चार भूकंप वेधशालाएँ हैं; आंकड़े नई दिल्ली के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र को जाते हैं; और आँकड़े, यानी डॉपलर रडार 2014 में शून्य से चार और 2027 में चार और, स्वचालित मौसम केंद्र तीन से बारह, वर्षामापी नौ से पंद्रह, तथा 5,467 लाभार्थी।
अभ्यास प्रश्न
डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई भूकंप वेधशाला का उद्घाटन किस स्थान पर किया?
- A.उधमपुर
- B.किश्तवाड़
- C.बारामुला
- D.पटनीटॉप
उत्तर देखें
यह वेधशाला पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के जरिये बनी है, इसमें आधुनिक डिजिटल भूकंपीय उपकरण लगे हैं और यह आंकड़े दर्ज होते ही नई दिल्ली के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के चौबीसों घंटे चलने वाले निगरानी केंद्र को भेजती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नई वेधशाला के आंकड़े किस संस्था के भूकंप निगरानी केंद्र को तुरंत भेजे जाएँगे?
- A.भारत मौसम विज्ञान विभाग
- B.राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
- C.राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र
- D.भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण
उत्तर देखें
सही उत्तर राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र है, जिसका नई दिल्ली स्थित भूकंप निगरानी केंद्र चौबीसों घंटे काम करता है और किश्तवाड़ की रीडिंग दर्ज होते ही उसे मिलेगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उधमपुर, कठुआ और रामबन के पहले के तीन केंद्रों के मुकाबले क्षेत्र में अब कितने स्वचालित मौसम केंद्र हैं?
- A.8
- B.10
- C.12
- D.15
उत्तर देखें
उधमपुर, कठुआ और रामबन के तीन केंद्रों में नौ और जोड़े गए, जिससे कुल बारह हो गए; नए केंद्रों में चार किश्तवाड़ में, दो-दो डोडा तथा रामबन में और एक कठुआ में हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →क्षेत्र में मौसम पूर्वानुमान तथा कृषि-मौसम सलाह सेवाओं का लाभ कितने लाभार्थियों तक पहुँचा है?
- A.1,467
- B.3,540
- C.5,467
- D.9,675
उत्तर देखें
मंत्री ने बताया कि पाँच जिलों की सभी पंचायतों में पंचायत स्तर पर पूर्वानुमान पहुँचाया जा रहा है और मौसम पूर्वानुमान तथा कृषि-मौसम सलाह सेवाओं का लाभ इतने लोगों तक पहुँचा है, जिससे किसानों और निवासियों को मौसम की जानकारी व्यापक रूप से मिल रही है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जम्मू-कश्मीर में अब कितनी भूकंप वेधशालाएँ हैं?
चार। किश्तवाड़ की नई सुविधा के साथ बाकी जम्मू, श्रीनगर और उधमपुर में हैं। किश्तवाड़ केंद्र अपने आंकड़े नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के भूकंप निगरानी केंद्र को तुरंत भेजता है।
क्षेत्र में डॉपलर मौसम रडार कहाँ-कहाँ हैं?
बनिहाल, जोत, जम्मू और श्रीनगर में चार रडार काम कर रहे हैं, जबकि 2014 में एक भी नहीं था। चार और रडार 2027 में डोडा, किश्तवाड़, अनंतनाग तथा बारामुला में शुरू होंगे, जिससे कुल आठ हो जाएँगे।
किश्तवाड़ वेधशाला किस मंत्रालय ने स्थापित की?
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान के स्वतंत्र प्रभार वाले केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसका उद्घाटन किया और मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला भी मौजूद रहे।
मौसम तथा कृषि-मौसम सलाह सेवाओं का लाभ कितने लोगों को मिला है?
इन सेवाओं का लाभ 5,467 लोगों तक पहुँचा है, और पाँच जिलों की हर पंचायत के लिए पूर्वानुमान जारी किया जाता है, जिससे भूकंप तथा भूस्खलन की आशंका वाले इलाके में आपदा तैयारी मजबूत होती है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2331574 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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