एक्स-रे स्रोत ULX-8 के पीछे ब्लैक होल, भारतीय अध्ययन
भारतीय खगोलविदों के 24 वर्ष लंबे एक्स-रे अध्ययन में पाया गया कि पड़ोसी आकाशगंगा का NGC 4490 ULX-8 एडिंग्टन सीमा से आगे पदार्थ खींचते ब्लैक होल से चमकता है।

चर्चा में क्यों
2 नवंबर 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि भारतीय तारा भौतिकी संस्थान समेत एक टीम ने 2000 से 2024 तक के प्रेक्षणों से NGC 4490 ULX-8 के एक्स-रे व्यवहार का रहस्य सुलझाया है।
भारतीय खगोलविदों ने लगभग पौन सदी के चौथाई हिस्से तक नजर रखकर NGC 4490 ULX-8 के बदलते एक्स-रे व्यवहार का रहस्य खोल दिया है। यह पड़ोसी आकाशगंगा के सबसे चमकीले एक्स-रे स्रोतों में एक है। अध्ययन बताता है कि इसे एक तारकीय द्रव्यमान वाला ब्लैक होल चमकाता है, जो पदार्थ को उस सीमा पर या उससे भी तेज निगल रहा है जिसे ऐसी वस्तुओं के लिए अधिकतम माना जाता है।
अति-चमकीला एक्स-रे स्रोत क्या है
अति-चमकीले एक्स-रे स्रोत यानी ULX पड़ोसी आकाशगंगाओं के सबसे चमकीले एक्स-रे स्रोत होते हैं, आकाशगंगा के केंद्र में बैठे अति विशाल ब्लैक होल को छोड़कर। माना जाता है कि ULX में न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल होता है, जो साथी तारे से गैस खींचता है। भीतर गिरते हुए यह गैस गरम होती है और तेज एक्स-रे छोड़ती है। दिलचस्प बात है कि ULX एडिंग्टन सीमा से भी ज्यादा चमकीले दिखते हैं। यह सीमा वह चमक है जहाँ विकिरण का बाहर धकेलना और गुरुत्व का भीतर खींचना बराबर हो जाता है, और इसे ही पदार्थ खींचती वस्तु की अधिकतम चमक का पैमाना माना जाता है।
अध्ययन कैसे हुआ
भारतीय तारा भौतिकी संस्थान और रामन अनुसंधान संस्थान, जो दोनों विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान हैं, की टीम ने आईयूसीएए तथा अन्य संस्थानों के साथ काम किया। उन्होंने परस्पर क्रिया करती आकाशगंगा जोड़ी NGC 4490/4485 में मौजूद ULX-8 के पुराने और नए प्रेक्षण मिलाए, जो चंद्रा, एक्सएमएम-न्यूटन तथा स्विफ्ट अंतरिक्ष दूरबीनों से 2000 से 2024 के बीच लिए गए थे। संस्थान की सह-लेखिका अरु बेरी ने इसे इस स्रोत के अब तक के सबसे लंबे एक्स-रे अध्ययनों में बताया।
क्या मिला
- पूरे प्रेक्षण काल में यह स्रोत असाधारण रूप से चमकीला रहा, हालाँकि इसकी चमक काफी घटती-बढ़ती रही।
- ब्लैक होल एक्स-रे युग्मों में आमतौर पर दिखने वाले अवस्था परिवर्तन इसमें नहीं दिखे।
- इसका उत्सर्जन लगातार सक्रिय अति-चमकीले प्रवाह के लक्षण बनाए रखा।
- लंबी अवधि के स्पेक्ट्रमी बदलाव बताते हैं कि वस्तु के आसपास की स्थितियाँ बदल रही हैं।
कुल मिलाकर प्रमाण उस ब्लैक होल के पक्ष में हैं जो एडिंग्टन सीमा से आगे की दर पर पदार्थ खींच रहा है, जिससे यह तंत्र ऐसी चरम स्थितियों के अध्ययन की प्राकृतिक प्रयोगशाला बन जाता है।
लेखक और आगे की राह
यह शोधपत्र आईआईएसईआर मोहाली के छात्र तरंग वशिष्ठ ने अरु बेरी तथा आईयूसीएए और रामन अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं के साथ लिखा और यह मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुआ। आगे यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का न्यूअथीना मिशन और भारत का प्रस्तावित अगली पीढ़ी का टाइमिंग एवं स्पेक्ट्रोस्कोपी मिशन एक्ससैट ऐसे स्रोतों के अध्ययन में बेहतर संवेदनशीलता देंगे।
महत्वपूर्ण तथ्य
| अध्ययन की वस्तु | NGC 4490 ULX-8, एक अति-चमकीला एक्स-रे स्रोत |
|---|---|
| स्थिति | परस्पर क्रिया करती आकाशगंगा जोड़ी NGC 4490/4485 |
| प्रेक्षण अवधि | 2000 से 2024, लगभग 24 वर्ष |
| उपयोग की गई दूरबीनें | चंद्रा, एक्सएमएम-न्यूटन तथा स्विफ्ट |
| निष्कर्ष | एडिंग्टन सीमा पर या उससे आगे पदार्थ खींचते तारकीय द्रव्यमान वाले ब्लैक होल से संचालित |
| प्रमुख संस्थान | भारतीय तारा भौतिकी संस्थान तथा रामन अनुसंधान संस्थान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान |
| अन्य संस्थान | आईयूसीएए तथा आईआईएसईआर मोहाली |
| नामित लेखक | तरंग वशिष्ठ (आईआईएसईआर मोहाली) तथा अरु बेरी (भारतीय तारा भौतिकी संस्थान) |
| पत्रिका | मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी |
| आगामी मिशन | यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का न्यूअथीना तथा भारत का प्रस्तावित एक्ससैट |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें स्रोत (NGC 4490 ULX-8, परस्पर क्रिया करती जोड़ी NGC 4490/4485 में), तीन दूरबीनें (चंद्रा, एक्सएमएम-न्यूटन, स्विफ्ट), अवधि (2000 से 2024), संबंधित अवधारणा (एडिंग्टन सीमा तथा उससे आगे पदार्थ खींचना), संस्थान (भारतीय तारा भौतिकी संस्थान तथा रामन अनुसंधान संस्थान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत, आईयूसीएए तथा आईआईएसईआर मोहाली के साथ), और आगामी मिशन न्यूअथीना तथा एक्ससैट।
अभ्यास प्रश्न
नए अध्ययन में NGC 4490 ULX-8 के एक्स-रे प्रेक्षण लगभग कितनी अवधि तक देखे गए?
- A.6 वर्ष
- B.12 वर्ष
- C.24 वर्ष
- D.40 वर्ष
उत्तर देखें
इस स्रोत के पुराने और नए प्रेक्षण चंद्रा, एक्सएमएम-न्यूटन तथा स्विफ्ट अंतरिक्ष दूरबीनों से लिए गए, जो 2000 से 2024 के वर्षों को समेटते हैं, और यही इसे इस वस्तु के अब तक के सबसे लंबे एक्स-रे अध्ययनों में शामिल करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वह कौन-सी सीमा है जहाँ विकिरण का बाहर की ओर दबाव गुरुत्व के भीतर खींचने के बराबर हो जाता है?
- A.चंद्रशेखर सीमा
- B.एडिंग्टन सीमा
- C.रॉश सीमा
- D.श्वार्जशिल्ड त्रिज्या
उत्तर देखें
इसे पदार्थ खींचती वस्तु की अधिकतम चमक का पैमाना माना जाता है, क्योंकि इससे आगे विकिरण का बाहर धकेलना गुरुत्व के खींचने पर भारी पड़ने लगेगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ULX-8 के व्यवहार की व्याख्या करने वाली शोध टीम मुख्य रूप से किन संस्थानों से थी?
- A.भारतीय तारा भौतिकी संस्थान तथा रामन अनुसंधान संस्थान
- B.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला तथा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र
- C.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान तथा भारतीय विज्ञान संस्थान
- D.राष्ट्रीय रेडियो खगोल भौतिकी केंद्र तथा आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान
उत्तर देखें
शोधपत्र आईआईएसईआर मोहाली के छात्र तरंग वशिष्ठ ने भारतीय तारा भौतिकी संस्थान की अरु बेरी तथा आईयूसीएए और रामन अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं के साथ लिखा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →घोषणा में भारत के प्रस्तावित अगली पीढ़ी के टाइमिंग एवं स्पेक्ट्रोस्कोपी मिशन का नाम क्या बताया गया है?
- A.एस्ट्रोसैट
- B.न्यूअथीना
- C.एक्ससैट
- D.आदित्य
उत्तर देखें
घोषणा में इसे भारत का प्रस्तावित अगली पीढ़ी का टाइमिंग एवं स्पेक्ट्रोस्कोपी मिशन बताया गया है, जो अन्य भावी वेधशालाओं के साथ अति-चमकीले एक्स-रे स्रोतों के अध्ययन में बेहतर संवेदनशीलता और निगरानी क्षमता देगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अति-चमकीला एक्स-रे स्रोत क्या होता है?
ULX पड़ोसी आकाशगंगा के सबसे चमकीले एक्स-रे स्रोतों में होता है, आकाशगंगा के केंद्र के अति विशाल ब्लैक होल को छोड़कर। माना जाता है कि इसमें न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल साथी तारे से पदार्थ खींचता है, जो गरम होकर तेज एक्स-रे छोड़ता है।
एडिंग्टन सीमा क्या है?
यह वह चमक है जहाँ विकिरण का बाहर की ओर दबाव गुरुत्व के भीतर खींचने के बराबर हो जाता है, और इसे पदार्थ खींचती वस्तु की अधिकतम चमक का पैमाना माना जाता है। ULX इससे आगे चमकते दिखते हैं, इसीलिए वे पहेली बने रहे हैं।
आंकड़े किन दूरबीनों से मिले?
चंद्रा, एक्सएमएम-न्यूटन तथा स्विफ्ट, तीन अंतरिक्ष आधारित एक्स-रे दूरबीनों से। 2000 से 2024 के बीच लिए पुराने और नए प्रेक्षणों का विश्लेषण हुआ, जो इस स्रोत का अब तक का सबसे लंबा एक्स-रे अध्ययन है।
आगे कौन से मिशन ऐसे स्रोतों का अध्ययन करेंगे?
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का न्यूअथीना मिशन और भारत का प्रस्तावित अगली पीढ़ी का टाइमिंग एवं स्पेक्ट्रोस्कोपी मिशन एक्ससैट। दोनों से अति-चमकीले एक्स-रे स्रोतों की निगरानी और संवेदनशीलता बेहतर होगी।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2331589 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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