मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24

कांडला में देश का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र

गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण में देश के पहले बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र की आधारशिला रखी गई, लागत 2,300 करोड़ रुपये है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
Read in English
कांडला में देश का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र

चर्चा में क्यों

26 सितंबर 2026 को गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण में देश के पहले बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र की आधारशिला गुजरात और असम के मुख्यमंत्रियों तथा केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने रखी।

भारत का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र गुजरात के कांडला में दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (डीपीए) के परिसर में लगेगा। इसकी आधारशिला 26 सितंबर 2026 को गांधीधाम स्थित डीपीए प्रदर्शनी मैदान में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने रखी। यह संयंत्र भारत को दुनिया के जहाजों के लिए स्वच्छ ईंधन बेचने वाला देश बनाने की दिशा में पहला कदम है।

संयंत्र क्या बनाएगा

यहां हर दिन 150 टन ई-मेथनॉल तैयार होगा। नवीकरणीय बिजली, पानी और जैविक स्रोतों से मिली कार्बन डाइऑक्साइड को मिलाकर यह हरित ईंधन बनाया जाएगा, जिससे जहाज परंपरागत तेल की तुलना में कहीं अधिक स्वच्छ ईंधन जला सकेंगे। यह ईंधन एशिया-यूरोप अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारे पर चलने वाले जहाजों को दिया जाएगा, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। सस्ती नवीकरणीय बिजली और बंदरगाह पर ही आपूर्ति के कारण कांडला का हरित मेथनॉल केवल 750 अमेरिकी डॉलर प्रति टन पर मिलेगा, जबकि वैश्विक कीमत करीब 1,300 अमेरिकी डॉलर प्रति टन है।

लागत, चरण और साझेदार

  • कुल निवेश: 2,300 करोड़ रुपये
  • पहला चरण: 1,200 करोड़ रुपये से 50 टन प्रतिदिन क्षमता, जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
  • दूसरा चरण: 1,100 करोड़ रुपये से 100 टन प्रतिदिन अतिरिक्त क्षमता, मार्च 2027 तक
  • साझेदार: दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण और नामरूप स्थित असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड, पूंजी अनुपात 76:24
  • रोजगार: 3,500 से अधिक प्रत्यक्ष और अपरोक्ष अवसर

बंदरगाह प्राधिकरण 567.32 करोड़ रुपये की इक्विटी के साथ 75 एकड़ भूमि, अलवणीकृत जल और हरित हाइड्रोजन के रूप में नवीकरणीय ऊर्जा देगा। संयंत्र मॉड्यूल के रूप में चरणबद्ध ढंग से बनेगा और देश की सबसे बड़ी ई-मेथनॉल इकाइयों में गिना जाएगा। इससे कच्छ में परिवहन, भंडारण और आपूर्ति से जुड़ी पूरी हरित ऊर्जा मूल्य श्रृंखला खड़ी होगी।

महत्व क्यों

यह परियोजना 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़ी है। सरकार अगले पांच वर्षों में वाणिज्यिक बेड़े में 100 नए जहाज जोड़ना चाहती है और 2047 तक भारत को दुनिया के शीर्ष पांच जहाज मालिक देशों में लाना चाहती है। कंपनी मार्स्क ने भारत में बने कंटेनर मंगाने शुरू कर दिए हैं। इसी बंदरगाह प्राधिकरण की वाडिनार में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ 1,520 करोड़ रुपये की जहाज निर्माण परियोजना भी चल रही है, और पोरबंदर के कुचहाड़ी में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण व मरम्मत क्लस्टर को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। श्री सोनोवाल ने कहा कि कांडला सिंगापुर-रॉटरडैम मार्ग पर हरित ईंधन का केंद्र बनेगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

परियोजनादेश का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र
स्थानदीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण, कांडला, गांधीधाम, गुजरात
क्षमता150 टन ई-मेथनॉल प्रतिदिन
निवेश2,300 करोड़ रुपये, दो चरणों में
साझेदारदीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (नामरूप), पूंजी अनुपात 76:24
आधारशिलाभूपेंद्र पटेल, सर्बानंद सोनोवाल और डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा
ईंधन की कीमत750 अमेरिकी डॉलर प्रति टन, वैश्विक दर लगभग 1,300 डॉलर
रोजगार3,500 से अधिक प्रत्यक्ष व अपरोक्ष
तिथि26 सितंबर 2026

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र, स्थान दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण कांडला (गुजरात), क्षमता 150 टन प्रतिदिन, कुल लागत 2,300 करोड़ रुपये (1,200 और 1,100 करोड़ रुपये के दो चरण), साझेदार असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (नामरूप) तथा 750 अमेरिकी डॉलर प्रति टन की कीमत बनाम वैश्विक 1,300 डॉलर।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

देश का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र किस बंदरगाह पर लगाया जा रहा है?

  1. A.जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह, महाराष्ट्र
  2. B.दीनदयाल बंदरगाह, कांडला, गुजरात
  3. C.पारादीप बंदरगाह, ओडिशा
  4. D.कोचीन बंदरगाह, केरल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. दीनदयाल बंदरगाह, कांडला, गुजरात

व्याख्या

सही उत्तर दीनदयाल बंदरगाह, कांडला, गुजरात है। देश के पहले बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र की आधारशिला 26 सितंबर 2026 को गांधीधाम स्थित कांडला में दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण के परिसर में रखी गई। इसे गुजरात और असम के मुख्यमंत्रियों तथा केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने संयुक्त रूप से रखा। यहां प्रतिदिन 150 टन हरित ईंधन बनेगा, जो एशिया-यूरोप अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारे पर चलने वाले जहाजों को मिलेगा। विकल्प A जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह, विकल्प C पारादीप बंदरगाह और विकल्प D कोचीन बंदरगाह गलत हैं, क्योंकि यह संयंत्र केवल दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण का है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का नाम केवल वाडिनार की अलग जहाज निर्माण परियोजना में आता है, जिसकी लागत 1,520 करोड़ रुपये है। परीक्षार्थी बंदरगाह के साथ राज्य गुजरात और असम के साझेदार को जोड़कर याद रखें।

Q2.पर्यावरणमध्यम

कांडला के बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र में कुल कितना निवेश होगा?

  1. A.1,200 करोड़ रुपये
  2. B.1,520 करोड़ रुपये
  3. C.2,300 करोड़ रुपये
  4. D.3,500 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 2,300 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 2,300 करोड़ रुपये है। संयंत्र दो चरणों में बनेगा। पहले चरण में 1,200 करोड़ रुपये के निवेश से 50 टन प्रतिदिन क्षमता जुड़ेगी, जिसका लक्ष्य जनवरी 2027 है। दूसरे चरण में 1,100 करोड़ रुपये से 100 टन प्रतिदिन अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी, जिसका लक्ष्य मार्च 2027 है। इस तरह कुल निवेश 2,300 करोड़ रुपये हो जाता है। विकल्प A केवल पहले चरण की राशि है, इसलिए अधूरा है। विकल्प B वाडिनार में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ चल रही अलग जहाज निर्माण परियोजना की लागत है। विकल्प D में पैसे और रोजगार का भ्रम है, क्योंकि 3,500 का आंकड़ा संयंत्र से बनने वाले प्रत्यक्ष व अपरोक्ष रोजगार का है। दोनों साझेदारों के बीच पूंजी अनुपात 76:24 है। परीक्षार्थी कुल लागत के साथ दोनों चरणों की अलग-अलग राशि और उन्हें पूरा करने की समय-सीमा जोड़कर याद रखें।

Q3.पर्यावरणमध्यम

कांडला के ई-मेथनॉल संयंत्र में दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण के साथ कौन संस्था जुड़ी है?

  1. A.असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड
  2. B.इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड
  3. C.गुजरात राज्य पेट्रोलियम निगम
  4. D.ऑयल इंडिया लिमिटेड
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड

व्याख्या

सही उत्तर असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड है, जो असम के नामरूप में स्थित है और जिसने इस परियोजना के लिए दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण से हाथ मिलाया है। दोनों के बीच पूंजी योगदान का अनुपात 76:24 है। बंदरगाह प्राधिकरण 567.32 करोड़ रुपये की इक्विटी के साथ 75 एकड़ भूमि, अलवणीकृत जल और हरित हाइड्रोजन के रूप में नवीकरणीय ऊर्जा दे रहा है। विकल्प B, C और D में दी गई कंपनियां ऊर्जा क्षेत्र की हैं, लेकिन इस संयंत्र में उनकी कोई भूमिका नहीं है, इसलिए वे गलत हैं। इस पहल को एक भारत श्रेष्ठ भारत का उदाहरण बताया गया, क्योंकि यह असम और गुजरात की क्षमताओं को एक साथ लाती है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह कंपनी उनके डिब्रूगढ़ निर्वाचन क्षेत्र के नामरूप में है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देश का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र कहां बन रहा है?

गुजरात के गांधीधाम स्थित कांडला में दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण के परिसर में। आधारशिला 26 सितंबर 2026 को रखी गई और यहां प्रतिदिन 150 टन ई-मेथनॉल बनेगा।

कांडला ई-मेथनॉल परियोजना पर कुल कितना खर्च होगा?

कुल 2,300 करोड़ रुपये। पहले चरण में 1,200 करोड़ रुपये से 50 टन प्रतिदिन क्षमता जनवरी 2027 तक और दूसरे चरण में 1,100 करोड़ रुपये से 100 टन प्रतिदिन क्षमता मार्च 2027 तक जोड़ी जाएगी।

इस संयंत्र में दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण का साझेदार कौन है?

असम के नामरूप स्थित असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड। दोनों की पूंजी हिस्सेदारी 76:24 है और बंदरगाह प्राधिकरण 567.32 करोड़ रुपये की इक्विटी, 75 एकड़ भूमि, अलवणीकृत जल तथा हरित हाइड्रोजन देगा।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 26 सितंबर 2026

  1. विश्व पर्यटन दिवस 2026: थीम में एआई और डिजिटल एजेंडामहत्वपूर्ण दिवस
  2. संयुक्त राष्ट्र बैठक में भारत ने न्यायसंगत पीएबीएस मांगाअंतरराष्ट्रीय
  3. विशेष अभियान 6.0 का क्रियान्वयन 2 अक्टूबर से शुरू होगाराष्ट्रीय
  4. स्वच्छता ही सेवा 2026 की थीम और आईसीएआर-सीआईआरबी संवादराष्ट्रीय
  5. गुंटूर-नंबूर में 108 करोड़ रुपये का चार लेन रोड ओवर ब्रिजराष्ट्रीय
  6. सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर ने पांच भाषाओं में विज्ञान पत्रिकाएं शुरू कींविज्ञान और प्रौद्योगिकी
  7. निर्वाचन आयोग ने दिल्ली एसआईआर की समय-सीमा 30 अक्टूबर कीराष्ट्रीय
  8. शी मार्ट की शुरुआत केरलम से, महिलाओं को सीधा बाजारसरकारी योजनाएं
आज का क्विज25 प्रश्नपूरा संस्करण पढ़ें →
इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS