कांडला के ई-मेथनॉल संयंत्र में दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण के साथ कौन संस्था जुड़ी है?
- A.असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड
- B.इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड
- C.गुजरात राज्य पेट्रोलियम निगम
- D.ऑयल इंडिया लिमिटेड
सही उत्तर
A. असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड
व्याख्या
सही उत्तर असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड है, जो असम के नामरूप में स्थित है और जिसने इस परियोजना के लिए दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण से हाथ मिलाया है। दोनों के बीच पूंजी योगदान का अनुपात 76:24 है। बंदरगाह प्राधिकरण 567.32 करोड़ रुपये की इक्विटी के साथ 75 एकड़ भूमि, अलवणीकृत जल और हरित हाइड्रोजन के रूप में नवीकरणीय ऊर्जा दे रहा है। विकल्प B, C और D में दी गई कंपनियां ऊर्जा क्षेत्र की हैं, लेकिन इस संयंत्र में उनकी कोई भूमिका नहीं है, इसलिए वे गलत हैं। इस पहल को एक भारत श्रेष्ठ भारत का उदाहरण बताया गया, क्योंकि यह असम और गुजरात की क्षमताओं को एक साथ लाती है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह कंपनी उनके डिब्रूगढ़ निर्वाचन क्षेत्र के नामरूप में है।
पूरा लेख पढ़ें: कांडला में देश का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र
अभ्यास प्रश्न
देश का पहला बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र किस बंदरगाह पर लगाया जा रहा है?
- A.जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह, महाराष्ट्र
- B.दीनदयाल बंदरगाह, कांडला, गुजरात
- C.पारादीप बंदरगाह, ओडिशा
- D.कोचीन बंदरगाह, केरल
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सही उत्तर: B. दीनदयाल बंदरगाह, कांडला, गुजरात
व्याख्या
सही उत्तर दीनदयाल बंदरगाह, कांडला, गुजरात है। देश के पहले बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र की आधारशिला 26 सितंबर 2026 को गांधीधाम स्थित कांडला में दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण के परिसर में रखी गई। इसे गुजरात और असम के मुख्यमंत्रियों तथा केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने संयुक्त रूप से रखा। यहां प्रतिदिन 150 टन हरित ईंधन बनेगा, जो एशिया-यूरोप अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारे पर चलने वाले जहाजों को मिलेगा। विकल्प A जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह, विकल्प C पारादीप बंदरगाह और विकल्प D कोचीन बंदरगाह गलत हैं, क्योंकि यह संयंत्र केवल दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण का है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का नाम केवल वाडिनार की अलग जहाज निर्माण परियोजना में आता है, जिसकी लागत 1,520 करोड़ रुपये है। परीक्षार्थी बंदरगाह के साथ राज्य गुजरात और असम के साझेदार को जोड़कर याद रखें।
कांडला के बंदरगाह आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र में कुल कितना निवेश होगा?
- A.1,200 करोड़ रुपये
- B.1,520 करोड़ रुपये
- C.2,300 करोड़ रुपये
- D.3,500 करोड़ रुपये
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सही उत्तर: C. 2,300 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 2,300 करोड़ रुपये है। संयंत्र दो चरणों में बनेगा। पहले चरण में 1,200 करोड़ रुपये के निवेश से 50 टन प्रतिदिन क्षमता जुड़ेगी, जिसका लक्ष्य जनवरी 2027 है। दूसरे चरण में 1,100 करोड़ रुपये से 100 टन प्रतिदिन अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी, जिसका लक्ष्य मार्च 2027 है। इस तरह कुल निवेश 2,300 करोड़ रुपये हो जाता है। विकल्प A केवल पहले चरण की राशि है, इसलिए अधूरा है। विकल्प B वाडिनार में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ चल रही अलग जहाज निर्माण परियोजना की लागत है। विकल्प D में पैसे और रोजगार का भ्रम है, क्योंकि 3,500 का आंकड़ा संयंत्र से बनने वाले प्रत्यक्ष व अपरोक्ष रोजगार का है। दोनों साझेदारों के बीच पूंजी अनुपात 76:24 है। परीक्षार्थी कुल लागत के साथ दोनों चरणों की अलग-अलग राशि और उन्हें पूरा करने की समय-सीमा जोड़कर याद रखें।
गणेश पंडाल के जागरूकता कार्यक्रम में लोगों से किन मूर्तियों को पीने के पानी की टंकियों में विसर्जित न करने को कहा गया?
- A.मिट्टी से बनी मूर्तियां
- B.प्लास्टर ऑफ पेरिस और हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां
- C.कागज की लुगदी से बनी मूर्तियां
- D.हल्दी से बनी मूर्तियां
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सही उत्तर: B. प्लास्टर ऑफ पेरिस और हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां
व्याख्या
सही उत्तर प्लास्टर ऑफ पेरिस और हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां है। कार्यक्रम में लोगों को पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों के बारे में जागरूक किया गया और सलाह दी गई कि प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी या हानिकारक रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां पीने के पानी की टंकियों में विसर्जित न करें। विकल्प A गलत है, क्योंकि मिट्टी की मूर्तियां ही वह विकल्प थीं जिन्हें अपनाने की सलाह दी गई, न कि जिनसे मना किया गया। विकल्प C और D में दी गई सामग्री की चर्चा इस कार्यक्रम में हुई ही नहीं। मूर्ति की सामग्री के अलावा लोगों से यह भी कहा गया कि वे विसर्जन के लिए तय स्थानों का ही उपयोग करें, मूर्तियों और पूजा सामग्री को प्राकृतिक जल स्रोतों में न डालें तथा विसर्जन स्थलों पर सफाई और सुरक्षा का ध्यान रखें, क्योंकि जल स्रोतों की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी और लोगों की भागीदारी पर टिकी है।
गणेश विसर्जन के बाद आईसीएआर के ये जागरूकता और सफाई कार्यक्रम किस अभियान के तहत आयोजित किए गए?
- A.नमामि गंगे
- B.मिशन लाइफ
- C.स्वच्छता ही सेवा
- D.जल जीवन मिशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. स्वच्छता ही सेवा
व्याख्या
सही उत्तर स्वच्छता ही सेवा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अपने संस्थानों में जागरूकता और सफाई की ये पहलें इसी अभियान के तहत आयोजित कीं, जिनका ध्यान गणेश विसर्जन के बाद की सफाई, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता और कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन पर था। विकल्प A यानी नमामि गंगे गंगा नदी के कायाकल्प से जुड़ा कार्यक्रम है और यहां उसका नाम नहीं आया। विकल्प B यानी मिशन लाइफ पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देता है, लेकिन ये कार्यक्रम उसके तहत नहीं हुए। विकल्प D यानी जल जीवन मिशन घरों तक नल से पानी पहुंचाने से जुड़ा है और इस अभियान से उसका कोई संबंध नहीं है। इस अभियान के तहत लोगों को मिट्टी की मूर्तियों, तय विसर्जन स्थलों के उपयोग तथा फूल, पूजा सामग्री, प्लास्टिक और थर्मोकोल के सही निपटान के बारे में जागरूक किया गया।
गणेश विसर्जन के बाद इकट्ठा की गई सड़ने वाली सामग्री से किन दो आईसीएआर संस्थानों ने जैविक खाद तैयार की?
- A.आईसीएआर-सीआईआरबी, हिसार और आईसीएआर-आईएआरआई, नई दिल्ली
- B.आईसीएआर-एनआईएसए, रांची और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई
- C.आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल और आईसीएआर-सीआईएफटी, कोच्चि
- D.आईसीएआर-आईआईएचआर, बेंगलुरु और आईसीएआर-सीआईसीआर, नागपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आईसीएआर-एनआईएसए, रांची और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई
व्याख्या
सही उत्तर आईसीएआर-एनआईएसए, रांची और आईसीएआर-सीआईआरसीओटी, मुंबई है। इनमें से एक संस्थान झारखंड में और दूसरा महाराष्ट्र में है। यहां फूल तथा अन्य पूजा सामग्री जैसे आसानी से सड़ने वाले पदार्थ इकट्ठा कर बाकी कचरे से अलग किए गए और खाद बनाने लायक सामग्री को खाद केंद्रों में संसाधित कर जैविक खाद तैयार की गई। इस तरह विसर्जन के दौरान निकला कचरा मिट्टी के लिए उपयोगी संसाधन बन गया। विकल्प A, C और D में परिषद के दूसरे जाने-माने संस्थानों के नाम दिए गए हैं, लेकिन इस खाद बनाने के काम में उनका उल्लेख नहीं था, इसलिए वे गलत हैं। यह पूरा काम आईसीएआर संस्थानों में चल रहे स्वच्छता ही सेवा अभियान का हिस्सा था, जिसके तहत स्थानीय गणेश पंडाल में जागरूकता कार्यक्रम, आसपास के इलाके की सफाई और कचरे को अलग करने का काम भी हुआ।