भारत-मर्कोसुर पीटीए: प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर, विस्तार वार्ता शुरू
भारत और मर्कोसुर ने इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों के लिए तरजीही व्यापार समझौते के प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए और समझौते के विस्तार की वार्ता शुरू की।

चर्चा में क्यों
14 सितंबर 2026 को भारत और मर्कोसुर ने तरजीही व्यापार समझौते के प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए, जिससे इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्र मान्य होंगे, और समझौते के विस्तार की वार्ता शुरू करने की घोषणा की।
भारत और मर्कोसुर ने एक ही दिन अपने व्यापार समझौते पर दो कदम उठाए। दोनों ने भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते के प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए। साथ ही उन्होंने इस समझौते का दायरा बढ़ाने के लिए वार्ता शुरू करने की घोषणा भी की। मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का व्यापार समूह है, जिसके सदस्यों में अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे और उरुग्वे शामिल हैं।
प्रोटोकॉल से क्या बदलेगा
इस प्रोटोकॉल से इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी मूल प्रमाणपत्र स्वीकार किए जा सकेंगे। ऐसे प्रमाणपत्र की कानूनी वैधता कागज पर जारी प्रमाणपत्र के बराबर होगी। इन्हें हर पक्ष के अपने कानून के अनुसार अधिकृत अधिकारियों द्वारा जारी और इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित करना होगा। प्रोटोकॉल समझौते के परिशिष्ट III के अनुच्छेद 16 में संशोधन करता है, जिसमें मूल नियमावली दी गई है। इस बदलाव का मकसद प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन में लगने वाली लागत और समय घटाना है। दोनों पक्षों की आंतरिक प्रक्रियाएं पूरी होने और एक-दूसरे को सूचना देने के बाद यह लागू होगा।
किसने हस्ताक्षर किए
भारत की ओर से वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने हस्ताक्षर किए। दूसरी ओर से भारत में उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो गुआनी और भारत में पैराग्वे के राजदूत फ्लेमिंग राउल डुआर्टे रामोस ने हस्ताक्षर किए। उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन मर्कोसुर की कार्यवाहक अध्यक्षता के नाते इस अवसर पर उपस्थित रहे। अर्जेंटीना और ब्राजील के दूतावासों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
समझौते के विस्तार की वार्ता
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और मारियो लुबेटकिन ने तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार के लिए वार्ता शुरू करने की घोषणा की। दोनों पक्ष आपसी हित के क्षेत्रों को जोड़ने पर सहमत हुए, ताकि आर्थिक रिश्ते गहरे हों और उनके निजी क्षेत्रों को लाभ मिले। अब संदर्भ की शर्तें तय की जा रही हैं, जो विस्तारित समझौते का दायरा और ढांचा निर्धारित करेंगी।
समझौता एक नजर में
| समझौता | भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता |
| हस्ताक्षर तिथि | 25 जनवरी 2004 |
| लागू | 1 जून 2009 से |
| भारत की रियायतें | 450 टैरिफ लाइनें |
| मर्कोसुर की रियायतें | 452 टैरिफ लाइनें |
| संशोधित अनुच्छेद | परिशिष्ट III का अनुच्छेद 16, मूल नियमावली |
प्रोटोकॉल कैसे बना
यह विचार समझौते की संयुक्त प्रशासनिक समिति से निकला। 27 नवंबर 2025 को हुई इसकी चौथी बैठक में दोनों पक्षों ने डिजिटल मूल प्रमाणपत्रों के उपयोग के लिए समझौते को अद्यतन करने का समर्थन किया। इसके बाद 9 अप्रैल 2026 को हुई समिति की पांचवीं बैठक में अतिरिक्त प्रोटोकॉल का प्रस्ताव आपसी सहमति से स्वीकार कर लिया गया।
महत्वपूर्ण तथ्य
| समझौता | भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता (पीटीए) |
|---|---|
| नया दस्तावेज | प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल, इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों के लिए |
| भारत की ओर से हस्ताक्षर | वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल |
| मर्कोसुर की ओर से हस्ताक्षर | भारत में उरुग्वे और पैराग्वे के राजदूत |
| उपस्थिति | उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन |
| मर्कोसुर की कार्यवाहक अध्यक्षता | उरुग्वे के पास |
| पीटीए पर हस्ताक्षर | 25 जनवरी 2004 |
| पीटीए लागू | 1 जून 2009 |
| टैरिफ लाइनें | भारत 450, मर्कोसुर 452 |
| विस्तार वार्ता | पीयूष गोयल और मारियो लुबेटकिन द्वारा घोषित |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें कि मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का समूह है, पीटीए पर हस्ताक्षर 2004 में हुए और यह 2009 में लागू हुआ, दोनों पक्षों की टैरिफ लाइनें 450 और 452 हैं, संशोधित अनुच्छेद परिशिष्ट III का अनुच्छेद 16 है, तथा वाणिज्य सचिव और वाणिज्य मंत्री के नाम क्या हैं।
अभ्यास प्रश्न
भारत और मर्कोसुर के बीच हस्ताक्षरित प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
- A.इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता
- B.कृषि उत्पादों पर सभी शुल्क हटाना
- C.द्विपक्षीय व्यापार के लिए साझा मुद्रा
- D.शैक्षणिक डिग्रियों की पारस्परिक मान्यता
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता
व्याख्या
सही उत्तर इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की स्वीकार्यता है। प्रोटोकॉल में प्रावधान है कि इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी मूल प्रमाणपत्र की कानूनी वैधता और मूल्य कागज पर जारी प्रमाणपत्र के समान होगा, बशर्ते उसे हर पक्ष के अपने घरेलू कानून के अनुसार अधिकृत संस्थाओं और अधिकारियों द्वारा जारी तथा इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया हो। यह काम तरजीही व्यापार समझौते के परिशिष्ट III के अनुच्छेद 16 में संशोधन के जरिए किया गया है, जिसमें मूल नियमावली रखी गई है, और इससे प्रमाणपत्र जारी करने तथा जांचने की लागत और समय घटने की उम्मीद है। विकल्प B गलत है, क्योंकि प्रोटोकॉल शुल्क दरों को छूता ही नहीं; रियायतें भारत की ओर से 450 और मर्कोसुर की ओर से 452 टैरिफ लाइनों पर बनी हुई हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि किसी मुद्रा व्यवस्था की घोषणा नहीं हुई। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह व्यापार दस्तावेज शिक्षा से जुड़ा नहीं है।
भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता कब लागू हुआ था?
- A.25 जनवरी 2004
- B.1 जून 2009
- C.27 नवंबर 2025
- D.9 अप्रैल 2026
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1 जून 2009
व्याख्या
सही उत्तर 1 जून 2009 है। यहां अभ्यर्थियों को दो तिथियां अलग-अलग याद रखनी होंगी, क्योंकि विज्ञप्ति में दोनों एक ही वाक्य में आती हैं। विकल्प A यानी 25 जनवरी 2004 वह तिथि है जब तरजीही व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, और हस्ताक्षर से लागू होने के बीच पांच वर्ष से अधिक का अंतर रहा। विकल्प C गलत है, क्योंकि 27 नवंबर 2025 को समझौते की संयुक्त प्रशासनिक समिति की चौथी बैठक हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने डिजिटल मूल प्रमाणपत्रों की अनुमति देने के विचार का समर्थन किया। विकल्प D गलत है, क्योंकि 9 अप्रैल 2026 को इसी समिति की पांचवीं बैठक हुई, जिसमें अतिरिक्त प्रोटोकॉल का प्रस्ताव आपसी सहमति से स्वीकार हुआ। चारों तिथियों को एक क्रम में पढ़ना आसान रहता है: 2004 में हस्ताक्षर, 2009 में लागू, 2025 में समर्थन, 2026 में प्रस्ताव स्वीकार और सितंबर 2026 में प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर।
भारत सरकार की ओर से प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किसने किए?
- A.वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल
- B.वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल
- C.विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन
- D.राजदूत अल्बर्टो गुआनी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल
व्याख्या
सही उत्तर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल है, जिन्होंने भारत सरकार की ओर से हस्ताक्षर किए। विकल्प A गलत है और यही इस प्रश्न का जाल है: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल उसी दिन की खबर में हैं, पर उनकी भूमिका उरुग्वे के साथ मिलकर तरजीही व्यापार समझौते के विस्तार की वार्ता शुरू करने की घोषणा करने की थी, प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने की नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन मर्कोसुर की कार्यवाहक अध्यक्षता के नाते इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने हस्ताक्षर स्वयं नहीं किए। विकल्प D दूसरे ढंग से गलत है: भारत में उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो गुआनी ने हस्ताक्षर तो किए, पर मर्कोसुर पक्ष की ओर से, भारत की ओर से नहीं, और उनके साथ पैराग्वे के राजदूत फ्लेमिंग राउल डुआर्टे रामोस भी थे। समारोह में अर्जेंटीना और ब्राजील के दूतावासों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत और मर्कोसुर के बीच प्रथम अतिरिक्त प्रोटोकॉल से क्या होगा?
इलेक्ट्रॉनिक रूप में जारी मूल प्रमाणपत्रों को कागजी प्रमाणपत्रों के समान कानूनी वैधता मिलेगी। इसके लिए तरजीही व्यापार समझौते के परिशिष्ट III के अनुच्छेद 16 में संशोधन किया गया है।
भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कब हुए थे?
25 जनवरी 2004 को, और यह 1 जून 2009 से लागू हुआ। इसके तहत भारत 450 टैरिफ लाइनों और मर्कोसुर 452 टैरिफ लाइनों पर रियायतें देता है।
समझौते के विस्तार की वार्ता की घोषणा किसने की?
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन के साथ, जिनके देश के पास मर्कोसुर की कार्यवाहक अध्यक्षता है।
स्रोत
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