111 राष्ट्रीय जलमार्ग: सुरक्षित नौवहन की नई व्यवस्था
देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं, कुल लंबाई 20,187 किलोमीटर है, 2025-26 में 21.8 करोड़ मीट्रिक टन माल ढोया गया और ब्रह्मपुत्र पर पहले नदी प्रकाशस्तंभ बन रहे हैं।

चर्चा में क्यों
पत्र सूचना कार्यालय ने 16 अक्टूबर 2026 को जारी पृष्ठभूमि सामग्री में बताया कि देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं, इनकी लंबाई 20,187 किलोमीटर है, 2025-26 में 21.8 करोड़ मीट्रिक टन माल ढुलाई हुई और ब्रह्मपुत्र पर पहले नदी प्रकाशस्तंभ बन रहे हैं।
भारत अपने नदी परिवहन को एक सीधे विचार पर खड़ा कर रहा है, कि जहाज को नदी की स्थिति पहले से पता होनी चाहिए। पत्र सूचना कार्यालय की 16 अक्टूबर 2026 की पृष्ठभूमि सामग्री बताती है कि राष्ट्रीय जलमार्गों पर जल सर्वेक्षण, नौवहन सहायक प्रणालियां और डिजिटल मंच किस तरह मिलकर काम कर रहे हैं।
आज का नेटवर्क
देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं। इनकी कुल लंबाई 20,187 किलोमीटर है और ये 23 राज्यों तथा 4 केंद्रशासित प्रदेशों तक फैले हैं। इनमें से 32 पर अभी परिचालन हो रहा है। माल ढुलाई तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2014-15 में यह 2.9 करोड़ मीट्रिक टन थी, जो 2025-26 में 21.8 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच गई। यह 20.13 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर है। समुद्री भारत दृष्टिकोण 2030 के 20 करोड़ मीट्रिक टन के लक्ष्य को यह पहले ही पार कर चुकी है। जल मार्ग से एक टन माल ढोने का खर्च सड़क का लगभग एक-तिहाई और रेल का आधा पड़ता है, और कार्बन उत्सर्जन भी बहुत कम होता है।
नदी को जानना
भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण जल सर्वेक्षण कराता है, जिसमें गहराई, तल की बनावट, रेत के टीले और प्रवाह मापा जाता है। थालवेग सर्वेक्षण नदी के सबसे गहरे नौगम्य मार्ग को चिह्नित करते हैं। सितंबर 2026 तक ऐसे नियमित सर्वेक्षण 22 जलमार्गों पर हो रहे थे, जो साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक आधार पर कराए जाते हैं। भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग का भारतीय हिस्सा भी इसमें शामिल है। इनका सबसे अहम नतीजा न्यूनतम उपलब्ध गहराई है, जो तय करती है कि जहाज कितना डूबकर चल सकता है और कितना माल ले जा सकता है।
नौवहन सहायक प्रणालियां
बोय, रडार संकेतक, मार्ग संकेतक और प्रकाशस्तंभ समुद्री नौवहन सहायक अधिनियम, 2021 के तहत मान्य हैं। तट पर इनका जिम्मा प्रकाशस्तंभ और प्रकाशपोत महानिदेशालय का है। केरल के राष्ट्रीय जलमार्ग-3 यानी पश्चिमी तट नहर पर 312 सौर ऊर्जा चालित प्रकाशयुक्त एफआरपी बोय और 17 प्रकाश संकेतक खंभे लगे हैं।
पहले नदी प्रकाशस्तंभ
मार्च 2026 में ब्रह्मपुत्र यानी राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर देश के पहले चार नदी प्रकाशस्तंभों की घोषणा हुई। ये पांडु, बोगीबील, सिलघाट और बिश्वनाथ घाट में 74 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे हैं। हर प्रकाशस्तंभ 20 मीटर ऊंचा होगा, इसकी भौगोलिक सीमा 14 समुद्री मील और प्रकाश सीमा 8 से 10 समुद्री मील रहेगी। ये सौर ऊर्जा से चलेंगे और मौसम सेंसर से लैस होंगे। राष्ट्रीय जलमार्ग-2 असम में धुबरी से सदिया तक 891 किलोमीटर लंबा है और देश का सबसे लंबा नौगम्य हिस्सा है। इस पर माल ढुलाई 2024-25 के 9 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 12.9 लाख मीट्रिक टन हो गई।
डिजिटल नौवहन
सितंबर 2026 तक 18 परिचालित और ज्वारीय जलमार्गों के लिए इलेक्ट्रॉनिक नौवहन चार्ट तैयार हो चुके थे, जबकि 2014 से पहले यह सुविधा केवल राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर थी। ये पानी पोर्टल और आईडब्ल्यूएआई पोत ट्रैकर पर उपलब्ध हैं। नौदर्शिका नाम की राष्ट्रीय नदी यातायात एवं नौवहन प्रणाली 2025 में शुरू हुई। गंगा पर नदी सूचना सेवाएं हल्दिया-फरक्का, फरक्का-पटना और पटना-वाराणसी खंडों में चल रही हैं, जिनमें 4 नियंत्रण केंद्र, 13 आधार केंद्र और 30 विभागीय जहाजों पर कंसोल शामिल हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| राष्ट्रीय जलमार्ग | 111, कुल लंबाई 20,187 किलोमीटर, 32 परिचालित |
|---|---|
| विस्तार | 23 राज्य और 4 केंद्रशासित प्रदेश |
| माल ढुलाई 2025-26 | 21.8 करोड़ मीट्रिक टन, 2014-15 में 2.9 करोड़ मीट्रिक टन थी |
| वृद्धि दर | 20.13 प्रतिशत सीएजीआर, 2030 के 20 करोड़ मीट्रिक टन लक्ष्य को पार |
| पहले नदी प्रकाशस्तंभ | पांडु, बोगीबील, सिलघाट, बिश्वनाथ घाट, जलमार्ग-2, 74 करोड़ रुपये |
| राष्ट्रीय जलमार्ग-2 | धुबरी से सदिया, असम, 891 किलोमीटर, सबसे लंबा नौगम्य खंड |
| राष्ट्रीय जलमार्ग-3 | पश्चिमी तट नहर, केरल, 312 प्रकाशयुक्त बोय और 17 संकेतक खंभे |
| डिजिटल प्रणालियां | पानी पोर्टल, आईडब्ल्यूएआई पोत ट्रैकर, नौदर्शिका, नदी सूचना सेवाएं |
| संस्था | भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय |
परीक्षा की दृष्टि से
आंकड़े याद रखें, 111 राष्ट्रीय जलमार्ग, 20,187 किलोमीटर लंबाई, 32 परिचालित, 23 राज्य और 4 केंद्रशासित प्रदेश। माल ढुलाई 2025-26 में 21.8 करोड़ मीट्रिक टन और वृद्धि दर 20.13 प्रतिशत। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 गंगा प्रणाली है, जलमार्ग-2 ब्रह्मपुत्र है जो धुबरी से सदिया तक 891 किलोमीटर लंबा है, और जलमार्ग-3 केरल की पश्चिमी तट नहर है। पहले नदी प्रकाशस्तंभ पांडु, बोगीबील, सिलघाट और बिश्वनाथ घाट में हैं।
अभ्यास प्रश्न
भारत में इस समय कितने राष्ट्रीय जलमार्ग हैं?
- A.101
- B.106
- C.111
- D.121
उत्तर देखें
नौवहन और जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए गए हैं। इनकी कुल लंबाई 20,187 किलोमीटर है और ये 23 राज्यों तथा 4 केंद्रशासित प्रदेशों में फैले हुए हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →देश के पहले नदी प्रकाशस्तंभ किस नदी पर बनाए जा रहे हैं?
- A.गंगा, राष्ट्रीय जलमार्ग-1
- B.ब्रह्मपुत्र, राष्ट्रीय जलमार्ग-2
- C.पश्चिमी तट नहर, राष्ट्रीय जलमार्ग-3
- D.गोदावरी, राष्ट्रीय जलमार्ग-4
उत्तर देखें
देश में किसी अंतर्देशीय जलमार्ग पर पहली बार प्रकाशस्तंभ बन रहे हैं और ये चार प्रकाशस्तंभ पांडु, बोगीबील, सिलघाट तथा बिश्वनाथ घाट में स्थापित किए जा रहे हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वर्ष 2025-26 में अंतर्देशीय जलमार्गों पर कितनी माल ढुलाई हुई?
- A.11.8 करोड़ मीट्रिक टन
- B.16.8 करोड़ मीट्रिक टन
- C.21.8 करोड़ मीट्रिक टन
- D.31.8 करोड़ मीट्रिक टन
उत्तर देखें
अंतर्देशीय जलमार्गों पर माल ढुलाई वर्ष 2014-15 में 2.9 करोड़ मीट्रिक टन थी, जो बढ़कर 2025-26 में 21.8 करोड़ मीट्रिक टन हो गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में कितने राष्ट्रीय जलमार्ग हैं?
देश में 111 राष्ट्रीय जलमार्ग हैं, जिनकी कुल लंबाई 20,187 किलोमीटर है। ये 23 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों में फैले हैं और इनमें से 32 पर अभी परिचालन हो रहा है।
देश के पहले नदी प्रकाशस्तंभ कहां बन रहे हैं?
ब्रह्मपुत्र यानी राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर पांडु, बोगीबील, सिलघाट और बिश्वनाथ घाट में। मार्च 2026 में घोषित इस परियोजना की लागत 74 करोड़ रुपये है और हर प्रकाशस्तंभ 20 मीटर ऊंचा होगा।
न्यूनतम उपलब्ध गहराई क्या है?
यह नौवहन मार्ग में उपलब्ध पानी की सबसे कम गहराई है, जो किसी खंड और अवधि के लिए आंकी जाती है। इसी से तय होता है कि जहाज कितना डूबकर चल सकता है और कितना माल ले जा सकता है।
स्रोत
- भारत के जलमार्गों का विकास: एक सुरक्षित और बेहतर जलमार्ग नेटवर्क का निर्माण (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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