टीडीबी और क्यूएनयू लैब्स में 150 करोड़ रुपये का क्वांटम समझौता
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बेंगलुरु की क्यूएनयू लैब्स के साथ आरडीआई कोष से 150 करोड़ रुपये की सहायता के लिए समझौता किया, परियोजना लागत 300 करोड़ रुपये है।

चर्चा में क्यों
16 अक्टूबर 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने बेंगलुरु की क्यूएनयू लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ स्वदेशी क्वांटम सुरक्षा ढांचे के लिए आरडीआई कोष से 150 करोड़ रुपये की सहायता का समझौता किया।
क्वांटम सुरक्षित संचार के क्षेत्र में भारत को 16 अक्टूबर 2026 को बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धता मिली। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित क्यूएनयू लैब्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया। इसके तहत अनुसंधान विकास एवं नवाचार (आरडीआई) कोष से 150 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
परियोजना के आंकड़े
| कुल परियोजना लागत | 300 करोड़ रुपये |
| टीडीबी सहायता | 150 करोड़ रुपये |
| सहायता का स्वरूप | वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण (ओसीडी) |
| लक्ष्य | टीआरएल 4-5 से टीआरएल-9 तक |
यह राशि भारत के क्वांटम सुरक्षित एवं संवेदन नेटवर्क (आईक्यूएसएन) के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी आधार तैयार करने पर खर्च होगी। लक्ष्य है कि जो प्रौद्योगिकियां अभी प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर चार और पांच पर हैं, उन्हें विकास, एकीकरण और सत्यापन के जरिये टीआरएल-9 तक पहुंचाया जाए, जहां प्रणाली वास्तविक उपयोग में सिद्ध मानी जाती है।
चार स्तंभ
यह कार्यक्रम चार परस्पर जुड़े स्तंभों पर खड़ा है:
- पहचान सुरक्षा: क्वांटम सुरक्षित भौतिक अननुकरणीय फलन (पीयूएफ) और क्वांटम सुरक्षित विश्वसनीय प्लेटफॉर्म मॉड्यूल (टीपीएम), जो उपकरण की पहचान को हार्डवेयर से जोड़ देते हैं।
- स्थिति अखंडता: विद्युत चुंबकीय छेड़छाड़ पकड़ने और उपग्रह संकेत बाधित होने पर नौवहन के लिए सूक्ष्म क्वांटम मैग्नेटोमीटर, जिनका उपयोग रक्षा तथा अन्य महत्वपूर्ण मंचों पर होगा।
- नेटवर्क सुरक्षा: चिप आधारित तथा उपग्रह आधारित क्वांटम कुंजी वितरण (क्यूकेडी), क्वांटम सुरक्षित संचार मॉड्यूल और एन्क्रिप्शन प्रणालियां।
- समय अखंडता: स्वदेशी परमाणु घड़ी प्रौद्योगिकी और क्यूकेडी से प्रमाणित सुरक्षित समय समन्वयन, जिस पर दूरसंचार, वित्तीय प्रणालियां और रक्षा निर्भर हैं।
महत्व क्यों
डिजिटल ढांचा जितना जुड़ता जा रहा है, उतना ही उपकरणों की प्रामाणिकता, नौवहन की अखंडता, समय समन्वयन की विश्वसनीयता और संदेशों की गोपनीयता एक साथ सुरक्षा का विषय बन रही है। पारंपरिक कूटलेखन बदलते साइबर खतरों के सामने सीमित पड़ सकता है, इसलिए क्वांटम तकनीक नया रास्ता देती है। चारों स्तंभ मिलकर एक समेकित क्वांटम विश्वास ढांचा बनाएंगे।
अधिकारियों का कथन
टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकियां साइबर सुरक्षा, संचार, नौवहन और महत्वपूर्ण अवसंरचना की जटिल चुनौतियों से निपटने के नए रास्ते खोल रही हैं, और आरडीआई कोष ऐसी उन्नत तकनीकों को अनुसंधान से तैनाती योग्य प्रणालियों तक पहुंचाने में सहायक है। क्यूएनयू लैब्स के संस्थापक ने कहा कि इस सहायता से कंपनी का अनुसंधान खाका तेज होगा और काम चिप एवं उपग्रह आधारित क्यूकेडी, क्वांटम संवेदन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक फैलेगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
| समझौता करने वाला बोर्ड | प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग |
|---|---|
| कंपनी | क्यूएनयू लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु, कर्नाटक |
| सहायता | आरडीआई कोष से 150 करोड़ रुपये |
| कुल परियोजना लागत | 300 करोड़ रुपये |
| सहायता का स्वरूप | वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण (ओसीडी) |
| लक्ष्य | टीआरएल 4-5 से टीआरएल-9 तक |
| कार्यक्रम | भारत के क्वांटम सुरक्षित एवं संवेदन नेटवर्क (आईक्यूएसएन) |
| चार स्तंभ | पहचान सुरक्षा, स्थिति अखंडता, नेटवर्क सुरक्षा, समय अखंडता |
| टीडीबी सचिव | श्री राजेश कुमार पाठक |
परीक्षा की दृष्टि से
बोर्ड (प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड, डीएसटी), कंपनी (क्यूएनयू लैब्स, बेंगलुरु), सहायता राशि (150 करोड़ रुपये), कुल लागत (300 करोड़ रुपये), कोष (आरडीआई), स्वरूप (ओसीडी), लक्ष्य स्तर (टीआरएल-9), कार्यक्रम का नाम (आईक्यूएसएन) और चार स्तंभ याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने क्वांटम सुरक्षित प्रौद्योगिकी सहायता के लिए किस कंपनी से समझौता किया?
- A.क्यूएनयू लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु
- B.क्यूपीआई एआई इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पुणे
- C.बोसोनक्यू साई प्राइवेट लिमिटेड, भोपाल
- D.क्वांटम इकोसिस्टम प्रौद्योगिकी परिषद
उत्तर देखें
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने कर्नाटक की इस कंपनी के साथ अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष से वित्तीय सहायता का समझौता किया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →क्यूएनयू लैब्स की क्वांटम परियोजना में टीडीबी सहायता और कुल लागत कितनी है?
- A.250 करोड़ रुपये की परियोजना में 100 करोड़ रुपये की सहायता
- B.300 करोड़ रुपये की परियोजना में 150 करोड़ रुपये की सहायता
- C.400 करोड़ रुपये की परियोजना में 200 करोड़ रुपये की सहायता
- D.500 करोड़ रुपये की परियोजना में 250 करोड़ रुपये की सहायता
उत्तर देखें
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष से परियोजना लागत का आधा हिस्सा दे रहा है और यह सहायता वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के माध्यम से मिलेगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →टीडीबी समर्थित क्वांटम कार्यक्रम के चार स्तंभों में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है?
- A.पहचान सुरक्षा
- B.स्थिति अखंडता
- C.समय अखंडता
- D.जलवायु सहनशीलता
उत्तर देखें
कार्यक्रम के चार स्तंभ पहचान सुरक्षा, स्थिति अखंडता, नेटवर्क सुरक्षा और समय अखंडता हैं। पहचान सुरक्षा के अंतर्गत क्वांटम सुरक्षित भौतिक अननुकरणीय फलन तथा क्वांटम सुरक्षित विश्वसनीय प्लेटफॉर्म मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे, जिससे उपकरण की पहचान हार्डवेयर स्तर पर पक्की हो।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
टीडीबी ने क्यूएनयू लैब्स को कितनी सहायता दी और किस कोष से?
अनुसंधान विकास एवं नवाचार (आरडीआई) कोष से 150 करोड़ रुपये, जो वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के रूप में दिए जाएंगे। परियोजना की कुल लागत 300 करोड़ रुपये है और इससे स्वदेशी क्वांटम सुरक्षा एवं संवेदन ढांचा तैयार होगा।
कार्यक्रम के चार स्तंभ कौन से हैं?
पहचान सुरक्षा, स्थिति अखंडता, नेटवर्क सुरक्षा और समय अखंडता। ये मिलकर उपकरण की प्रामाणिकता, भरोसेमंद नौवहन, सुरक्षित संचार और छेड़छाड़ रोधी समय समन्वयन का समेकित क्वांटम विश्वास ढांचा बनाएंगे।
इस परियोजना में टीआरएल-9 का क्या अर्थ है?
टीआरएल का अर्थ प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर है। कार्यक्रम उन तकनीकों को, जो अभी स्तर चार और पांच पर हैं, टीआरएल-9 तक पहुंचाएगा, जहां प्रौद्योगिकी पूर्ण विकसित, एकीकृत और तैनाती के लिए सत्यापित मानी जाती है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2324307 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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