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आईजीएनएफए में 68 वन सेवा अधिकारियों का मध्य-कैरियर प्रशिक्षण

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 18 कैडरों के 68 भारतीय वन सेवा अधिकारियों से मध्य-कैरियर प्रशिक्षण के दौरान संवाद किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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आईजीएनएफए में 68 वन सेवा अधिकारियों का मध्य-कैरियर प्रशिक्षण

चर्चा में क्यों

12 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के मध्य-कैरियर प्रशिक्षण चरण-तीन कार्यक्रम में शामिल 18 कैडरों के 68 भारतीय वन सेवा अधिकारियों से संवाद किया, जो 6 नवंबर 2026 तक चलेगा।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के उन अधिकारियों के साथ समय बिताया जो मध्य-कैरियर प्रशिक्षण (एमसीटी) चरण-तीन कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। यह पाठ्यक्रम इस श्रृंखला का उन्नीसवां है और इसे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) करा रही है।

कौन उपस्थित रहे

मंत्री के साथ इस अवसर पर मंत्रालय के सचिव श्री नरेंद्र भूषण, महानिदेशक (वन) एवं विशेष सचिव श्री संतोष तिवारी, अपर महानिदेशक (वन्यजीव) श्री रमेश पांडेय तथा आईजीएनएफए के निदेशक श्री राजेंद्र प्रसाद खजूरिया भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम एक नजर में

विवरणब्योरा
पाठ्यक्रममध्य-कैरियर प्रशिक्षण चरण-तीन, श्रृंखला का उन्नीसवां
आयोजकइंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए)
अवधि12 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026
पात्रतासात से नौ वर्ष की सेवा वाले आईएफएस अधिकारी
प्रतिभागी18 कैडरों से 68 अधिकारी
विषयगत दौरेउत्तराखंड और उत्तर प्रदेश

मंत्री ने अधिकारियों से क्या कहा

श्री यादव ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल नियामक की भूमिका से आगे बढ़कर टिकाऊ विकास के अगुवा, नवप्रवर्तक और सहायक बनें। उन्होंने देश के वनों, वन्यजीवों और पारिस्थितिक विरासत की रक्षा में इस सेवा के योगदान को सराहा और उपलब्धियों में वन तथा वृक्ष आवरण की वृद्धि, कार्बन का संचय, वनों एवं आर्द्रभूमियों की देखभाल तथा नागरिकों को जोड़ने वाली पहलों से भूदृश्य की बहाली को गिना, जिनमें एक पेड़ मां के नाम, मिष्टी, अरावली ग्रीन वॉल और नगर वन योजना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य में आर्थिक वृद्धि और पारिस्थितिक सुरक्षा साथ चलनी चाहिए, और आगे की कठिन चुनौतियों में मानव-वन्यजीव संघर्ष, वनों की आग, बदलती जलवायु तथा विकास और संरक्षण के बीच संतुलन को रखा, जिनके लिए वैज्ञानिक तरीके और समुदाय की भागीदारी चाहिए।

तकनीक और मैदान

मंत्री ने भौगोलिक सूचना तंत्र, सुदूर संवेदन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए उपकरणों के उपयोग पर जोर दिया, साथ में निरंतर क्षमता निर्माण और परंपरागत ज्ञान का सहारा लेकर समुदायों के साथ काम करने की बात कही। उन्होंने जैव संसाधनों को इस ग्रह का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन बताया और कहा कि इसी कारण अधिकारियों को मंत्रालय स्तर की नीति-निर्माण प्रक्रिया के साथ-साथ मैदानी कार्यान्वयन का अनुभव भी दिया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से लीक से हटकर सोचने, अपनी संस्थाओं को मजबूत करने और नए दृष्टिकोण से वन प्रबंधन योजनाएं तैयार करने को कहा।

पाठ्यक्रम की बनावट

लाइन मिनिस्ट्री मॉड्यूल अधिकारियों को केंद्रीय मंत्रालयों और संगठनों तक ले जाएगा, जिससे वे विभिन्न क्षेत्रों के आपसी जुड़ाव को समझें। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के दौरे वन्यजीव प्रबंधन, जैव विविधता, पारिस्थितिक पर्यटन और समुदाय आधारित वन प्रबंधन पर केंद्रित रहेंगे। प्रबंधन मॉड्यूल में नेतृत्व, निर्णय लेना, मानव संसाधन, वित्त, वन सामुदायिक संपत्ति का प्रशासन, वार्ता, परिवर्तन प्रबंधन और नैतिकता शामिल हैं, जबकि वानिकी मॉड्यूल में पर्यावरण संधियां, वानिकी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल बदलाव, जैव विविधता प्रशासन, जलवायु वित्त, वन अधिकार से जुड़े विषय, जलग्रहण प्रबंधन, वन संरक्षण कानून में हाल के संशोधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष रखे गए हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

मंत्रीश्री भूपेंद्र यादव, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन
पाठ्यक्रममध्य-कैरियर प्रशिक्षण (एमसीटी) चरण-तीन, श्रृंखला का उन्नीसवां
आयोजकइंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए)
अवधि12 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026
प्रतिभागी18 कैडरों से 68 आईएफएस अधिकारी
पात्रतासात से नौ वर्ष की सेवा वाले आईएफएस अधिकारी
सचिव, पर्यावरण मंत्रालयश्री नरेंद्र भूषण
महानिदेशक (वन) एवं विशेष सचिवश्री संतोष तिवारी
अपर महानिदेशक (वन्यजीव)श्री रमेश पांडेय
निदेशक, आईजीएनएफएश्री राजेंद्र प्रसाद खजूरिया
नामित पहलेंएक पेड़ मां के नाम, मिष्टी, अरावली ग्रीन वॉल, नगर वन योजना
विषयगत दौरेउत्तराखंड और उत्तर प्रदेश

परीक्षा की दृष्टि से

अकादमी (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी), पाठ्यक्रम (मध्य-कैरियर प्रशिक्षण चरण-तीन, श्रृंखला का उन्नीसवां), अवधि (12 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026), 18 कैडरों के 68 प्रतिभागी, सात से नौ वर्ष की सेवा की पात्रता, मंत्री (श्री भूपेंद्र यादव) और उपस्थित अधिकारी, चार संरक्षण पहलें, विकसित भारत@2047 का संदर्भ तथा दौरे वाले राज्य याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

12 अक्टूबर 2026 को आरंभ हुआ भारतीय वन सेवा अधिकारियों का मध्य-कैरियर प्रशिक्षण चरण-तीन कार्यक्रम किस संस्थान द्वारा कराया जा रहा है?

  1. A.लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी
  2. B.इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी
  3. C.वन अनुसंधान संस्थान
  4. D.भारतीय वन्यजीव संस्थान
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी

व्याख्या

सही उत्तर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी है, जिसे संक्षेप में आईजीएनएफए कहा जाता है और जो चरण-तीन का उन्नीसवां पाठ्यक्रम बारह अक्टूबर से छह नवंबर तक अठारह कैडरों के अड़सठ अधिकारियों के लिए करा रही है। विकल्प A उस अकादमी का नाम है जहां प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को प्रशिक्षण मिलता है और वह इस वानिकी पाठ्यक्रम को नहीं करा रही। विकल्प C का वन अनुसंधान संस्थान एक शोध संस्था है, वह इस कार्यक्रम के लिए नामित प्रशिक्षण अकादमी नहीं है। विकल्प D का भारतीय वन्यजीव संस्थान वन्यजीव शोध और भिन्न प्रकार के प्रशिक्षण पर काम करता है, और यद्यपि वन्यजीव प्रबंधन इस पाठ्यक्रम के दौरों का एक विषय है, फिर भी आयोजक अकादमी ही है। श्री राजेंद्र प्रसाद खजूरिया इसके निदेशक हैं और नई दिल्ली में जब केंद्रीय पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री ने प्रतिभागियों से संवाद किया तब वे उपस्थित थे।

Q2.पर्यावरणमध्यम

मध्य-कैरियर प्रशिक्षण चरण-तीन कार्यक्रम में कितने अधिकारी शामिल हैं और वे कितने कैडरों से आए हैं?

  1. A.12 कैडरों से 48 अधिकारी
  2. B.18 कैडरों से 68 अधिकारी
  3. C.21 कैडरों से 86 अधिकारी
  4. D.24 कैडरों से 108 अधिकारी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 18 कैडरों से 68 अधिकारी

व्याख्या

सही उत्तर 18 कैडरों से 68 अधिकारी है। इस पाठ्यक्रम में इतने ही प्रतिभागी हैं और वे अठारह अलग-अलग राज्य कैडरों से आए हैं, इसीलिए मंत्रालय ने इस समूह को मैदानी तथा नीतिगत अनुभव का मिश्रण बताया, जिसकी रुचियां वन्यजीव संरक्षण प्रशासन से लेकर जलवायु-सहिष्णु वानिकी, आवास बहाली और पर्यावरण नीति के क्रियान्वयन तक फैली हैं। विकल्प A दोनों आंकड़े घटा देता है और किसी विवरण से मेल नहीं खाता। विकल्प C में प्रतिभागियों की संख्या के अंक उलट दिए गए हैं और कैडर की संख्या बढ़ा दी गई है, जो उस अभ्यर्थी के लिए जाल है जिसे संख्या का आकार याद है पर क्रम नहीं। विकल्प D दोनों में अधिक है। सेवा की अवधि भी याद रखनी चाहिए, क्योंकि यह पाठ्यक्रम सात से नौ वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों के लिए है, और यह बारह अक्टूबर से छह नवंबर तक चलेगा।

Q3.पर्यावरणमध्यम

आईएफएस प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने निम्नलिखित में से किसे नागरिकों को जोड़ने वाली संरक्षण पहल के रूप में गिनाया?

  1. A.नमामि गंगे मिशन
  2. B.एक पेड़ मां के नाम
  3. C.अटल भूजल योजना
  4. D.जल जीवन मिशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एक पेड़ मां के नाम

व्याख्या

सही उत्तर एक पेड़ मां के नाम है। अधिकारियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने उन पहलों की ओर ध्यान दिलाया जो नागरिकों को संरक्षण के काम से जोड़ती हैं और इस वृक्षारोपण मुहिम का नाम मिष्टी, अरावली ग्रीन वॉल तथा नगर वन योजना के साथ लिया, जब वे वन और वृक्ष आवरण की वृद्धि, कार्बन संचय, वनों एवं आर्द्रभूमियों के संरक्षण तथा भूदृश्य की बहाली में भारत की प्रगति गिना रहे थे। विकल्प A नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम है और इस अवसर पर गिनाई गई पहलों में नहीं था। विकल्प C भूजल से जुड़ी योजना है और विकल्प D पेयजल से जुड़ा मिशन है, और दोनों में समुदाय की भागीदारी होते हुए भी इनका नाम यहां नहीं लिया गया। इन चार वानिकी पहलों को एक साथ याद रखना ऐसे प्रश्न का सबसे सुरक्षित उत्तर है, और इन्हें विकसित भारत@2047 के लक्ष्य से जोड़कर रखना चाहिए, जिसमें मंत्री के अनुसार आर्थिक विकास और पारिस्थितिक सुरक्षा एक साथ आनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएफएस अधिकारियों का मध्य-कैरियर प्रशिक्षण चरण-तीन कार्यक्रम कौन करा रहा है?

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए)। चरण-तीन का उन्नीसवां कार्यक्रम 12 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक चलेगा और इसमें 18 कैडरों से 68 प्रतिभागी हैं।

इस प्रशिक्षण के लिए कौन से अधिकारी पात्र हैं?

सात से नौ वर्ष की सेवा पूरी कर चुके भारतीय वन सेवा के अधिकारी। पाठ्यक्रम नेतृत्व, नीति के क्रियान्वयन और मैदानी वन प्रशासन को मजबूत करने के लिए बनाया गया है, जिसमें उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश के दौरे शामिल हैं।

मंत्री ने किन संरक्षण पहलों का उल्लेख किया?

एक पेड़ मां के नाम, मिष्टी, अरावली ग्रीन वॉल और नगर वन योजना, साथ ही वन तथा वृक्ष आवरण की वृद्धि, कार्बन संचय, आर्द्रभूमि संरक्षण और भूदृश्य बहाली की उपलब्धियां।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS