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GK24
पर्यावरणमध्यम

मध्य-कैरियर प्रशिक्षण चरण-तीन कार्यक्रम में कितने अधिकारी शामिल हैं और वे कितने कैडरों से आए हैं?

  1. A.12 कैडरों से 48 अधिकारी
  2. B.18 कैडरों से 68 अधिकारी
  3. C.21 कैडरों से 86 अधिकारी
  4. D.24 कैडरों से 108 अधिकारी

सही उत्तर

B. 18 कैडरों से 68 अधिकारी

व्याख्या

सही उत्तर 18 कैडरों से 68 अधिकारी है। इस पाठ्यक्रम में इतने ही प्रतिभागी हैं और वे अठारह अलग-अलग राज्य कैडरों से आए हैं, इसीलिए मंत्रालय ने इस समूह को मैदानी तथा नीतिगत अनुभव का मिश्रण बताया, जिसकी रुचियां वन्यजीव संरक्षण प्रशासन से लेकर जलवायु-सहिष्णु वानिकी, आवास बहाली और पर्यावरण नीति के क्रियान्वयन तक फैली हैं। विकल्प A दोनों आंकड़े घटा देता है और किसी विवरण से मेल नहीं खाता। विकल्प C में प्रतिभागियों की संख्या के अंक उलट दिए गए हैं और कैडर की संख्या बढ़ा दी गई है, जो उस अभ्यर्थी के लिए जाल है जिसे संख्या का आकार याद है पर क्रम नहीं। विकल्प D दोनों में अधिक है। सेवा की अवधि भी याद रखनी चाहिए, क्योंकि यह पाठ्यक्रम सात से नौ वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों के लिए है, और यह बारह अक्टूबर से छह नवंबर तक चलेगा।

पूरा लेख पढ़ें: आईजीएनएफए में 68 वन सेवा अधिकारियों का मध्य-कैरियर प्रशिक्षण

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Q1.पर्यावरणमध्यम

12 अक्टूबर 2026 को आरंभ हुआ भारतीय वन सेवा अधिकारियों का मध्य-कैरियर प्रशिक्षण चरण-तीन कार्यक्रम किस संस्थान द्वारा कराया जा रहा है?

  1. A.लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी
  2. B.इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी
  3. C.वन अनुसंधान संस्थान
  4. D.भारतीय वन्यजीव संस्थान
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी

व्याख्या

सही उत्तर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी है, जिसे संक्षेप में आईजीएनएफए कहा जाता है और जो चरण-तीन का उन्नीसवां पाठ्यक्रम बारह अक्टूबर से छह नवंबर तक अठारह कैडरों के अड़सठ अधिकारियों के लिए करा रही है। विकल्प A उस अकादमी का नाम है जहां प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को प्रशिक्षण मिलता है और वह इस वानिकी पाठ्यक्रम को नहीं करा रही। विकल्प C का वन अनुसंधान संस्थान एक शोध संस्था है, वह इस कार्यक्रम के लिए नामित प्रशिक्षण अकादमी नहीं है। विकल्प D का भारतीय वन्यजीव संस्थान वन्यजीव शोध और भिन्न प्रकार के प्रशिक्षण पर काम करता है, और यद्यपि वन्यजीव प्रबंधन इस पाठ्यक्रम के दौरों का एक विषय है, फिर भी आयोजक अकादमी ही है। श्री राजेंद्र प्रसाद खजूरिया इसके निदेशक हैं और नई दिल्ली में जब केंद्रीय पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्री ने प्रतिभागियों से संवाद किया तब वे उपस्थित थे।

Q2.पर्यावरणमध्यम

आईएफएस प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने निम्नलिखित में से किसे नागरिकों को जोड़ने वाली संरक्षण पहल के रूप में गिनाया?

  1. A.नमामि गंगे मिशन
  2. B.एक पेड़ मां के नाम
  3. C.अटल भूजल योजना
  4. D.जल जीवन मिशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एक पेड़ मां के नाम

व्याख्या

सही उत्तर एक पेड़ मां के नाम है। अधिकारियों को संबोधित करते हुए मंत्री ने उन पहलों की ओर ध्यान दिलाया जो नागरिकों को संरक्षण के काम से जोड़ती हैं और इस वृक्षारोपण मुहिम का नाम मिष्टी, अरावली ग्रीन वॉल तथा नगर वन योजना के साथ लिया, जब वे वन और वृक्ष आवरण की वृद्धि, कार्बन संचय, वनों एवं आर्द्रभूमियों के संरक्षण तथा भूदृश्य की बहाली में भारत की प्रगति गिना रहे थे। विकल्प A नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम है और इस अवसर पर गिनाई गई पहलों में नहीं था। विकल्प C भूजल से जुड़ी योजना है और विकल्प D पेयजल से जुड़ा मिशन है, और दोनों में समुदाय की भागीदारी होते हुए भी इनका नाम यहां नहीं लिया गया। इन चार वानिकी पहलों को एक साथ याद रखना ऐसे प्रश्न का सबसे सुरक्षित उत्तर है, और इन्हें विकसित भारत@2047 के लक्ष्य से जोड़कर रखना चाहिए, जिसमें मंत्री के अनुसार आर्थिक विकास और पारिस्थितिक सुरक्षा एक साथ आनी चाहिए।

Q3.पर्यावरणकठिन

जैविक विविधता अभिसमय के पक्षकारों का सत्रहवां सम्मेलन कहां आयोजित हो रहा है?

  1. A.येरेवन, आर्मेनिया
  2. B.कुनमिंग, चीन
  3. C.मॉन्ट्रियल, कनाडा
  4. D.नागोया, जापान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. येरेवन, आर्मेनिया

व्याख्या

सही उत्तर येरेवन, आर्मेनिया है, जहां जैविक विविधता अभिसमय के पक्षकारों का सत्रहवां सम्मेलन इसी महीने के उत्तरार्ध में शुरू हो रहा है। भारत ने इसी तैयारी के बीच अपनी पहुंच एवं लाभ साझाकरण व्यवस्था का ब्योरा सामने रखा। विकल्प बी का कुनमिंग, चीन और विकल्प सी का मॉन्ट्रियल, कनाडा इस सम्मेलन के स्थान के रूप में गलत हैं, हालांकि इन दोनों शहरों के नाम पर वह वैश्विक जैव विविधता ढांचा बना है जिसके लाभ बंटवारे तथा संसाधन जुटाने वाले लक्ष्यों का भारत समर्थन करता है। विकल्प डी का नागोया, जापान अभिसमय के तहत बने लाभ साझाकरण प्रोटोकॉल से जुड़ा है, इसलिए वह आकर्षक लगता है, पर वह भी इस सम्मेलन का स्थान नहीं है। परीक्षा में अभिसमय, प्रोटोकॉल और वैश्विक ढांचे से जुड़े शहरों के नाम आपस में उलझाकर पूछे जाते हैं, इसलिए हर नाम को उसकी घटना के साथ जोड़कर याद रखें।

Q4.पर्यावरणमध्यम

भारत के पहुंच एवं लाभ साझाकरण ढांचे का आधार कौन सा कानून है?

  1. A.पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
  2. B.वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972
  3. C.जैव विविधता अधिनियम, 2002
  4. D.वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जैव विविधता अधिनियम, 2002

व्याख्या

सही उत्तर जैव विविधता अधिनियम है, जिसके तहत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव विविधता बोर्ड तथा केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदें काम करती हैं और पहुंच एवं लाभ साझाकरण लागू होता है। यह ढांचा राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्य योजना के साथ भी जुड़ा है। विकल्प ए का पर्यावरण संरक्षण कानून सामान्य पर्यावरणीय शक्तियों से जुड़ा है, आनुवंशिक संसाधनों के लाभ बंटवारे से नहीं। विकल्प बी का वन्यजीव कानून प्रजातियों तथा उनके आवासों की सुरक्षा अनुसूचियों और अभयारण्यों के जरिये करता है, जो अलग व्यवस्था है। विकल्प डी का वन कानून वन भूमि के गैर-वन उपयोग में बदलाव को नियंत्रित करता है और इससे इसका संबंध नहीं है। सही विकल्प वाला अधिनियम ही प्राधिकरण की स्थापना का आधार है।

Q5.पर्यावरणमध्यम

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने बीज क्षेत्र के पहुंच एवं लाभ साझाकरण अंशदान से कितनी राशि वितरित की?

  1. A.1.43 करोड़ रुपये
  2. B.2.02 करोड़ रुपये
  3. C.20.2 करोड़ रुपये
  4. D.202 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2.02 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 2.02 करोड़ रुपये है, जो प्राधिकरण ने सत्ताईस राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के बीच बीज कंपनियों से मिले अंशदान के हिस्से के रूप में जारी किया। विकल्प ए में दी राशि केवल शीर्ष दस प्राप्तकर्ता राज्यों का हिस्सा है, यानी कुल राशि का एक भाग, पूरी राशि नहीं। विकल्प सी आंकड़े को दस गुना पढ़ने की गलती है और घोषणा में ऐसी कोई राशि नहीं है। विकल्प डी प्राधिकरण के अब तक के कुल वितरण को बताता है, जो इस ताजा राशि के जुड़ने के बाद उस स्तर पर पहुंचा, इसलिए वह पूरे रिकॉर्ड का आंकड़ा है, इस एक भुगतान का नहीं। तीनों आंकड़ों को अलग-अलग याद रखना चाहिए, क्योंकि प्रश्न इन्हें आपस में उलझाकर पूछे जाते हैं।