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पहला फ्लीट सपोर्ट शिप एफएसएस-1 विशाखापत्तनम में लॉन्च

भारतीय नौसेना के पहले फ्लीट सपोर्ट शिप एफएसएस-1 को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम में लॉन्च किया गया, इसमें 82 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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पहला फ्लीट सपोर्ट शिप एफएसएस-1 विशाखापत्तनम में लॉन्च

चर्चा में क्यों

6 अक्टूबर 2026 को भारतीय नौसेना के पहले फ्लीट सपोर्ट शिप एफएसएस-1 को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में लॉन्च किया गया और एफएसएस-5 की कील रखी गई।

भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे फ्लीट सपोर्ट शिप (बेड़ा सहायक पोत) श्रेणी के पहले पोत एफएसएस-1 को 6 अक्टूबर 2026 को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल), विशाखापत्तनम में पानी में उतारा गया। रक्षा मंत्रालय ने इसकी जानकारी 7 अक्टूबर 2026 को साझा की। समारोह में मुख्य अतिथि रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह उपस्थित रहे।

समारोह में क्या हुआ

  • नौसेना की पुरानी परंपरा के अनुसार पोत को श्रीमती लैला स्वामीनाथन, अध्यक्ष, नौसेना कल्याण एवं स्वास्थ्य संघ (एनडब्ल्यूडब्ल्यूए) ने लॉन्च किया।
  • इसी अवसर पर श्रेणी के पांचवें पोत एफएसएस-5 की कील रखी गई।
  • रक्षा मंत्री ने एचएसएल में निर्माण सुविधाओं के बड़े उन्नयन के रूप में संवर्धित स्लिपवे का उद्घाटन भी किया।
  • नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन के साथ नौसेना, रक्षा मंत्रालय और शिपयार्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

स्वदेशी निर्माण

इस श्रेणी के पोतों का डिजाइन और निर्माण दोनों देश के भीतर एचएसएल, विशाखापत्तनम ने किया है। इनमें स्वदेशी सामग्री 82 प्रतिशत से ऊपर है। मंत्रालय इसे नौसेना, शिपयार्ड, रक्षा उद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के बीच गहरे सहयोग का प्रमाण मानता है। परियोजना को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का अग्रदूत तथा देश के जहाज निर्माण उद्योग के लिए बड़ा प्रोत्साहन बताया गया है।

नौसेना को इनकी जरूरत क्यों

फ्लीट सपोर्ट शिप समुद्र में चलती-फिरती आपूर्ति चौकी की तरह काम करता है। सेवा में आने के बाद ये पोत युद्धपोतों को समुद्र में ही ईंधन, रसद और सामग्री देंगे, जिससे बेड़े को बार-बार बंदरगाह लौटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे नौसेना की ब्लू वॉटर क्षमता बढ़ेगी और परिचालन रसद, रणनीतिक पहुंच तथा गतिशीलता तीनों मजबूत होंगी।

दूसरी भूमिका में ये पोत मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) तथा गैर-लड़ाकू निकासी अभियान (एनईओ) चला सकते हैं, यानी राहत सामग्री तेजी से पहुंचाना और लोगों को सुरक्षित निकालना।

लॉन्च हुआ पोतएफएसएस-1, पहला फ्लीट सपोर्ट शिप
कील रखी गईएफएसएस-5, श्रेणी का पांचवां पोत
शिपयार्डहिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम
स्वदेशी सामग्री82 प्रतिशत से अधिक

महत्वपूर्ण तथ्य

पोतएफएसएस-1, फ्लीट सपोर्ट शिप श्रेणी का पहला पोत
लॉन्च तिथि6 अक्टूबर 2026
शिपयार्डहिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल), विशाखापत्तनम
लॉन्च कियाश्रीमती लैला स्वामीनाथन, अध्यक्ष, नौसेना कल्याण एवं स्वास्थ्य संघ
मुख्य अतिथिरक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह
नौसेना प्रमुखएडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन
स्वदेशी सामग्री82 प्रतिशत से अधिक
समारोह में अन्यएफएसएस-5 की कील रखना और संवर्धित स्लिपवे का उद्घाटन
दूसरी भूमिकाएचएडीआर तथा गैर-लड़ाकू निकासी अभियान (एनईओ)

परीक्षा की दृष्टि से

पोत का नाम (एफएसएस-1), शिपयार्ड (हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम), लॉन्च करने वाली (एनडब्ल्यूडब्ल्यूए अध्यक्ष श्रीमती लैला स्वामीनाथन), मुख्य अतिथि (रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह), नौसेना प्रमुख (एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन), स्वदेशी सामग्री (82 प्रतिशत से अधिक), उसी दिन कील रखा गया पोत (एफएसएस-5) और भूमिकाएं - समुद्र में पुनःपूर्ति, एचएडीआर तथा एनईओ याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षाआसान

भारतीय नौसेना के पहले फ्लीट सपोर्ट शिप एफएसएस-1 को किस शिपयार्ड में लॉन्च किया गया?

  1. A.मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, मुंबई
  2. B.गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता
  3. C.हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम
  4. D.कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम

व्याख्या

सही उत्तर हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम है। फ्लीट सपोर्ट शिप श्रेणी के पोत एचएसएल, विशाखापत्तनम में बन रहे हैं और श्रेणी के पहले पोत एफएसएस-1 को वहीं 6 अक्टूबर 2026 को लॉन्च किया गया, जिसमें रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि थे। रक्षा मंत्रालय के विवरण के अनुसार पूरी श्रेणी का डिजाइन और निर्माण इसी शिपयार्ड ने देश में किया है, और लॉन्च के दिन इसी यार्ड में निर्माण सुविधाओं के उन्नयन के रूप में संवर्धित स्लिपवे का उद्घाटन भी हुआ। विकल्प A यानी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, मुंबई गलत है क्योंकि इस परियोजना के संबंध में मुंबई के किसी यार्ड का उल्लेख नहीं है। विकल्प B यानी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता इसी कारण गलत है, क्योंकि समारोह विशाखापत्तनम में हुआ था। विकल्प D यानी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, कोच्चि भी गलत है, क्योंकि विवरण में केवल एचएसएल, उसके स्लिपवे और उसके वरिष्ठ अधिकारियों की चर्चा है।

Q2.रक्षामध्यम

भारतीय नौसेना के फ्लीट सपोर्ट शिप में स्वदेशी सामग्री कितनी बताई गई है?

  1. A.50 प्रतिशत से अधिक
  2. B.65 प्रतिशत से अधिक
  3. C.82 प्रतिशत से अधिक
  4. D.95 प्रतिशत से अधिक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 82 प्रतिशत से अधिक

व्याख्या

सही उत्तर 82 प्रतिशत से अधिक है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार फ्लीट सपोर्ट शिप का डिजाइन और निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम ने स्वदेशी रूप से किया है और इनमें स्वदेशी सामग्री 82 प्रतिशत से ऊपर है, जिसे मंत्रालय नौसेना, शिपयार्ड, रक्षा उद्योग तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के बीच उच्चतम स्तर के सहयोग का संकेत मानता है। विकल्प A और B यानी 50 प्रतिशत से अधिक तथा 65 प्रतिशत से अधिक इस आंकड़े को कम करके बताते हैं; ऐसे हिस्से पुराने युद्धपोत कार्यक्रमों के लिए कहे जाते रहे हैं, पर इस घोषणा में यही आंकड़ा नहीं दिया गया। विकल्प D यानी 95 प्रतिशत से अधिक आंकड़े को बढ़ाकर बताता है और इससे गलत धारणा बनेगी कि इन पोतों में आयातित उपकरण लगभग नहीं हैं। परियोजना को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का अग्रदूत कहा गया है।

Q3.रक्षामध्यम

एफएसएस-1 जैसे फ्लीट सपोर्ट शिप की मुख्य भूमिका क्या है?

  1. A.सोनार से शत्रु पनडुब्बियों की खोज करना
  2. B.समुद्र में ही बेड़े के पोतों की पुनःपूर्ति करना
  3. C.समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाना और हटाना
  4. D.लड़ाकू विमानों को ले जाना और संचालित करना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. समुद्र में ही बेड़े के पोतों की पुनःपूर्ति करना

व्याख्या

सही उत्तर समुद्र में ही बेड़े के पोतों की पुनःपूर्ति करना है। सेवा में आने पर ये पोत चलते हुए युद्धपोतों को ईंधन और रसद देंगे, जिससे नौसेना की ब्लू वॉटर क्षमता बढ़ेगी तथा परिचालन रसद, बेड़े की रणनीतिक पहुंच और गतिशीलता काफी मजबूत होगी। विकल्प A गलत है क्योंकि पनडुब्बी रोधी खोज विशेष फ्रिगेट, कोरवेट और विमानों का काम है, सहायक पोत का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि बारूदी सुरंगें बिछाने और हटाने का काम माइनस्वीपर तथा माइन काउंटरमेजर पोत करते हैं, जिनकी चर्चा इस विवरण में नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि लड़ाकू विमानों का संचालन विमानवाहक पोत की भूमिका है। विवरण में इन पोतों की दूसरी भूमिका भी दी गई है - मानवीय सहायता एवं आपदा राहत तथा गैर-लड़ाकू निकासी अभियान, ताकि राहत सामग्री जल्दी पहुंचे और लोगों को निकाला जा सके।

Q4.रक्षाकठिन

विशाखापत्तनम के समारोह में नौसेना परंपरा के अनुसार एफएसएस-1 को किसने लॉन्च किया?

  1. A.श्रीमती लैला स्वामीनाथन, अध्यक्ष, नौसेना कल्याण एवं स्वास्थ्य संघ
  2. B.रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह
  3. C.नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन
  4. D.हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. श्रीमती लैला स्वामीनाथन, अध्यक्ष, नौसेना कल्याण एवं स्वास्थ्य संघ

व्याख्या

सही उत्तर श्रीमती लैला स्वामीनाथन, अध्यक्ष, नौसेना कल्याण एवं स्वास्थ्य संघ (एनडब्ल्यूडब्ल्यूए) है। नौसेना की परंपरा में युद्धपोत को कोई महिला लॉन्च करती है, और विवरण के अनुसार उन्होंने मुख्य अतिथि की उपस्थिति में यह कार्य किया। विकल्प B गलत है क्योंकि रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे; उन्होंने संवर्धित स्लिपवे का उद्घाटन किया और उसी अवसर पर एफएसएस-5 की कील रखने का कार्यक्रम भी हुआ। विकल्प C गलत है क्योंकि नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का नाम उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में है, लॉन्च करने वाले के रूप में नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि विवरण में नौसेना, रक्षा मंत्रालय और एचएसएल के वरिष्ठ अधिकारियों का उल्लेख केवल उपस्थित लोगों के रूप में है, शिपयार्ड प्रमुख को लॉन्च का श्रेय नहीं दिया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पहला फ्लीट सपोर्ट शिप एफएसएस-1 कहां लॉन्च किया गया?

हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल), विशाखापत्तनम में 6 अक्टूबर 2026 को। मुख्य अतिथि रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह थे और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन उपस्थित रहे।

फ्लीट सपोर्ट शिप में स्वदेशी सामग्री कितनी है?

82 प्रतिशत से अधिक। इनका डिजाइन और निर्माण एचएसएल, विशाखापत्तनम ने देश में ही किया है और मंत्रालय इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया का अग्रदूत बताता है।

ये पोत भारतीय नौसेना के लिए क्या करेंगे?

ये समुद्र में ही बेड़े के पोतों की पुनःपूर्ति करेंगे, जिससे नौसेना की ब्लू वॉटर क्षमता, परिचालन रसद, रणनीतिक पहुंच और गतिशीलता बढ़ेगी। दूसरी भूमिका में ये एचएडीआर और गैर-लड़ाकू निकासी अभियान चला सकते हैं।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 7 अक्टूबर 2026

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