एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून पर 1,423.30 करोड़ रुपये जारी
सामाजिक न्याय मंत्रालय के अनुसार तीन वित्त वर्षों में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 1,423.30 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई है।

चर्चा में क्यों
1 अक्टूबर 2026 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने बताया कि नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के क्रियान्वयन के लिए तीन वित्त वर्षों में राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को 1,423.30 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2026 को बताया कि नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के क्रियान्वयन के लिए तीन वित्त वर्षों में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 1,423.30 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इन दोनों कानूनों को लागू करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेश प्रशासनों की है; केंद्र एक केंद्र प्रायोजित योजना के जरिए सहायता देता है।
वर्ष के हिसाब से जारी राशि
| 2022-23 | 392.71 करोड़ रुपये |
| 2023-24 | 535.30 करोड़ रुपये |
| 2024-25 | 495.29 करोड़ रुपये |
| तीन वर्ष का कुल | 1,423.30 करोड़ रुपये |
इस योजना से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति संरक्षण प्रकोष्ठ तथा विशेष पुलिस थानों को मजबूत किया जाता है, न्यायिक तंत्र को सबल बनाया जाता है, पीड़ितों को राहत और पुनर्वास दिया जाता है, अंतरजातीय विवाह पर प्रोत्साहन मिलता है और जागरूकता का काम होता है। इन्हीं तीन वर्षों में क्रमशः 88,172, 79,667 और 99,216 पीड़ितों को योजना के तहत राहत मिलने की जानकारी दी गई है।
शीघ्र सुनवाई के लिए अदालतें
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की रिपोर्ट के अनुसार 1989 के अधिनियम के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए 15 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में 217 विशिष्ट विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं। जहां मामलों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है, वहां अधिनियम संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से जिले के सत्र न्यायालय को विशेष न्यायालय घोषित करने की अनुमति देता है।
संबल हेल्पलाइन
मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में अत्याचार के विरुद्ध राष्ट्रीय हेल्पलाइन शुरू की थी, जिसका नाम बाद में संबल रखा गया। इसके जरिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्य 1989 के अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करा सकते हैं और उसकी प्रगति देख सकते हैं। हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर 1800-202-1989 तथा शॉर्ट कोड 14566 पर उपलब्ध है।
अंतरजातीय विवाह
योजना के तहत उस अंतरजातीय विवाह के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है जिसमें दो जीवनसाथियों में से एक अनुसूचित जाति का हो। प्रोत्साहन पाने वाले जोड़ों की संख्या 2022-23 के 14,225 से बढ़कर 2024-25 में 26,050 हो गई।
अपराध के आंकड़े
अधिनियम के तहत दर्ज मामले 2024 में 65,646 रहे, जबकि 2023 में यह संख्या 70,725 और 2022 में 67,633 थी। वर्ष 2024 के अंत में 3,92,006 मामले सुनवाई के इंतजार में थे। लंबित मामलों का यही आंकड़ा बताता है कि मंत्रालय ने विशिष्ट अदालतों, समय पर जांच और तुरंत राहत पर जोर क्यों दिया है, और राज्य केंद्रीय सहायता से जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा शिविर क्यों चलाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मंत्रालय | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता |
|---|---|
| अधिनियम | नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 |
| केंद्रीय सहायता | तीन वित्त वर्षों में 1,423.30 करोड़ रुपये |
| वर्षवार राशि | 392.71 करोड़ (2022-23), 535.30 करोड़ (2023-24), 495.29 करोड़ रुपये (2024-25) |
| विशिष्ट विशेष न्यायालय | 217, 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में |
| हेल्पलाइन | संबल, पहले अत्याचार के विरुद्ध राष्ट्रीय हेल्पलाइन, दिसंबर 2021 में शुरू |
| हेल्पलाइन नंबर | टोल-फ्री 1800-202-1989 और शॉर्ट कोड 14566 |
| अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन | 2022-23 में 14,225 जोड़े, 2024-25 में 26,050 |
| लंबित मामले | 2024 के अंत में 3,92,006 |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें — दोनों अधिनियम और उनके वर्ष (नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 तथा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989), मंत्रालय (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता), तीन वर्ष की केंद्रीय सहायता (1,423.30 करोड़ रुपये), विशिष्ट विशेष न्यायालयों की संख्या (15 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में 217), हेल्पलाइन (संबल, पहले अत्याचार के विरुद्ध राष्ट्रीय हेल्पलाइन, दिसंबर 2021 में शुरू, नंबर 1800-202-1989, शॉर्ट कोड 14566) और 2024 के अंत में लंबित मामले (3,92,006)।
अभ्यास प्रश्न
पीसीआर और अत्याचार निवारण अधिनियम के लिए तीन वित्त वर्षों में राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को कितनी केंद्रीय सहायता जारी की गई?
- A.1,423.30 करोड़ रुपये
- B.1,234.30 करोड़ रुपये
- C.2,423.30 करोड़ रुपये
- D.923.30 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 1,423.30 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर है 1,423.30 करोड़ रुपये। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने बताया कि दोनों अधिनियमों के लिए चल रही केंद्र प्रायोजित योजना के तहत तीन वित्त वर्षों में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यही राशि जारी की गई। वर्षवार ब्यौरा भी इसी आंकड़े तक पहुंचता है — 2022-23 में 392.71 करोड़, 2023-24 में 535.30 करोड़ और 2024-25 में 495.29 करोड़ रुपये। विकल्प B, C और D में दिए अंक आसपास के हैं और परीक्षक ऐसे विकल्प तब रखता है जब केवल एक कुल राशि सामने आई हो; तीनों गलत हैं। एक अच्छी आदत यह है कि जांच लें कि हिस्से जोड़कर कुल बनता है या नहीं, जो यहां बनता है, इसलिए वर्षवार आंकड़े याद रहने पर कुल राशि निकाली जा सकती है। इस धन से संरक्षण प्रकोष्ठ, विशेष पुलिस थाने, न्यायिक तंत्र, पीड़ितों की राहत और अंतरजातीय विवाह का प्रोत्साहन जैसे काम होते हैं।
एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अपराधों के लिए कितने विशिष्ट विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं?
- A.127
- B.171
- C.217
- D.271
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 217
व्याख्या
सही उत्तर है 217। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की रिपोर्ट के अनुसार 1989 के अधिनियम के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए 15 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में 217 विशिष्ट विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य शीघ्र सुनवाई और मामलों का तेज निपटारा है। विकल्प A, B और D में वही तीन अंक आगे-पीछे कर दिए गए हैं, जो यह जांचने का आम तरीका है कि आंकड़ा ध्यान से पढ़ा गया है या आधा-अधूरा याद है। व्यवस्था का दूसरा हिस्सा भी देखें — जहां जिले में मामलों की संख्या कम है, वहां अधिनियम संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से सत्र न्यायालय को विशेष न्यायालय घोषित करने की अनुमति देता है। ऐसी अदालतों की जरूरत लंबित मामलों से साफ है, क्योंकि 2024 के अंत में 3,92,006 मामले सुनवाई के इंतजार में थे।
दिसंबर 2021 में शुरू हुई अत्याचार के विरुद्ध राष्ट्रीय हेल्पलाइन का नाम बाद में क्या रखा गया?
- A.समर्थ
- B.संबल
- C.सहायक
- D.संकल्प
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. संबल
व्याख्या
सही उत्तर है संबल। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में अत्याचार के विरुद्ध राष्ट्रीय हेल्पलाइन शुरू की थी और बाद में इसी सेवा को यह नाम दिया गया। इसके जरिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्य अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करा सकते हैं और फिर उस पर हुई कार्रवाई देख सकते हैं; यह टोल-फ्री नंबर 1800-202-1989 तथा शॉर्ट कोड 14566 पर उपलब्ध है। विकल्प A, C और D ऐसे नाम हैं जो सरकार की दूसरी पहलों से मिलते-जुलते लगते हैं और इसी कारण यहां रखे गए हैं। हेल्पलाइन को उसके मूल अधिनियम के साथ जोड़कर याद रखें, क्योंकि प्रश्न नाम देकर अधिनियम भी पूछ सकता है। यह भी देखें कि अंतरजातीय विवाह पर प्रोत्साहन पाने वाले जोड़े 2022-23 के 14,225 से बढ़कर 2024-25 में 26,050 हो गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीसीआर और अत्याचार निवारण अधिनियम के लिए कितनी केंद्रीय सहायता जारी हुई है?
तीन वित्त वर्षों में 1,423.30 करोड़ रुपये — 2022-23 में 392.71 करोड़, 2023-24 में 535.30 करोड़ और 2024-25 में 495.29 करोड़ रुपये, एक केंद्र प्रायोजित योजना के तहत।
संबल क्या है?
यह अत्याचार के विरुद्ध राष्ट्रीय हेल्पलाइन का नया नाम है, जिसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में शुरू किया था। इस पर अनुसूचित जाति और जनजाति के सदस्य 1989 के अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कर उसकी प्रगति देख सकते हैं — नंबर 1800-202-1989 या शॉर्ट कोड 14566।
अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कितने विशिष्ट विशेष न्यायालय काम कर रहे हैं?
15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 217 विशिष्ट विशेष न्यायालय स्थापित हैं। जहां मामले कम हैं, वहां उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से सत्र न्यायालय को विशेष न्यायालय घोषित किया जा सकता है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2317515 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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