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परनूर में तमिलनाडु का पहला बैरियर-मुक्त एमएलएफएफ टोल शुरू

एनएचएआई ने एनएच-179बी के तांबरम-तिंडीवनम खंड पर बने परनूर टोल प्लाजा में तमिलनाडु की पहली बैरियर-मुक्त मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्रणाली चालू की है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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परनूर में तमिलनाडु का पहला बैरियर-मुक्त एमएलएफएफ टोल शुरू — GK24 title card

चर्चा में क्यों

एनएचएआई ने एनएच-179बी के तांबरम-तिंडीवनम खंड पर परनूर टोल प्लाजा में तमिलनाडु की पहली बैरियर-मुक्त मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्रणाली शुरू की, जो एएनपीआर कैमरों और फास्टैग से चलती है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने तमिलनाडु में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली की शुरुआत कर दी है। इस व्यवस्था में प्लाजा पर कोई बैरियर नहीं होता, इसलिए वाहन को शुल्क चुकाने के लिए रुकना नहीं पड़ता।

कहां शुरू हुई

यह प्रणाली परनूर टोल प्लाजा पर चालू हुई है, जो एनएच-179बी के तांबरम-तिंडीवनम खंड पर स्थित है। राज्य में फ्री फ्लो वसूली की ओर बढ़ने वाला यह पहला प्लाजा है।

प्रणाली काम कैसे करती है

इसमें दो तकनीकें साथ काम करती हैं। ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे हर गुजरते वाहन की नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं और फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन जुड़े खाते से शुल्क काट लेता है। हाथ से जांच की जरूरत न रहने के कारण टोल वसूली में कर्मचारियों की भूमिका बहुत घट जाती है।

राजमार्ग उपयोगकर्ता को लाभ

  • प्लाजा पर कतार और ब्रेक नहीं, जिससे समय और ईंधन दोनों बचते हैं
  • लेन पर भीड़ कम होने से वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन घटता है
  • बैरियर वाले बड़े प्लाजा की तुलना में वसूली का हिसाब अधिक पारदर्शी और सस्ता

वाहन चालकों से कहा गया है कि वे अपना फास्टैग चालू रखें और उसमें पर्याप्त राशि रखें। खाली या खराब टैग वाले वाहन के पार होने पर मालिक को इलेक्ट्रॉनिक नोटिस (ई-नोटिस) भेजा जाता है।

पहले से एमएलएफएफ वाले प्लाजा

एनएचएआई चरणबद्ध ढंग से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यह प्रणाली ले जा रहा है। अब तक बदले गए प्लाजा इस प्रकार हैं।

टोल प्लाजाखंड और राज्य
चोर्यासीएनएच-48 का सूरत-भरूच खंड, गुजरात
मुंडका-बक्करवालाअर्बन एक्सटेंशन रोड-II, दिल्ली-एनसीआर
शाहजहांपुर, दौलतपुरा और मनोहरपुराएनएच-48 का दिल्ली-जयपुर खंड, राजस्थान
घरौंडाएनएच-44 का पानीपत-जालंधर खंड, हरियाणा

महत्व क्यों

फास्टैग से इलेक्ट्रॉनिक वसूली ने टोल लेन से नकदी हटाई थी, अब फ्री फ्लो प्रणाली बैरियर को ही हटा रही है। सरकार इसे तकनीक के सहारे जीवन सुगमता और कारोबार सुगमता बढ़ाने के अपने बड़े लक्ष्य से जोड़ती है। एनएचएआई का कहना है कि इससे पारदर्शिता मजबूत होती है और भौतिक टोल प्लाजा बनाने तथा चलाने का खर्च घटता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

प्राधिकरणभारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई)
टोल प्लाजापरनूर टोल प्लाजा
राजमार्गएनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड
राज्यतमिलनाडु (राज्य का पहला एमएलएफएफ प्लाजा)
प्रणालीमल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) बैरियर-मुक्त टोल वसूली
इस्तेमाल तकनीकऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) और फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन
फास्टैग में राशि कम होने परइलेक्ट्रॉनिक नोटिस (ई-नोटिस)
अन्य एमएलएफएफ प्लाजाचोर्यासी (गुजरात), मुंडका-बक्करवाला (दिल्ली-एनसीआर), शाहजहांपुर, दौलतपुरा, मनोहरपुरा (राजस्थान), घरौंडा (हरियाणा)

परीक्षा की दृष्टि से

राज्य (तमिलनाडु), प्लाजा (परनूर), राजमार्ग (एनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड), प्राधिकरण (एनएचएआई), एमएलएफएफ और एएनपीआर के पूरे नाम, फास्टैग की भूमिका, ई-नोटिस तथा पहले से एमएलएफएफ वाले प्लाजा और उनके राज्य याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

तमिलनाडु की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली किस टोल प्लाजा पर शुरू की गई है?

  1. A.चोर्यासी टोल प्लाजा
  2. B.घरौंडा टोल प्लाजा
  3. C.परनूर टोल प्लाजा
  4. D.मनोहरपुरा टोल प्लाजा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. परनूर टोल प्लाजा

व्याख्या

सही उत्तर परनूर टोल प्लाजा है। यह एनएच-179बी के तांबरम-तिंडीवनम खंड पर स्थित है और तमिलनाडु का वह पहला स्थल बन गया है, जहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बैरियर के बिना टोल वसूलता है, यानी वाहन चलते रहते हैं और कैमरे तथा फास्टैग मिलकर शुल्क निपटा देते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि चोर्यासी प्लाजा एनएच-48 के सूरत-भरूच खंड पर गुजरात में पड़ता है, तमिलनाडु में नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि घरौंडा प्लाजा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-जालंधर खंड पर हरियाणा में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि मनोहरपुरा एनएच-48 के दिल्ली-जयपुर खंड पर राजस्थान के तीन प्लाजा में से एक है, बाकी दो शाहजहांपुर और दौलतपुरा हैं। ये तीनों पहले ही फ्री फ्लो प्रणाली में बदले गए थे, लेकिन इनमें कोई तमिलनाडु में नहीं है, इसलिए यहां पूछे गए प्रश्न का उत्तर केवल परनूर ही है।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्रणाली गुजरते वाहन की पहचान मुख्य रूप से किस तकनीक से करती है?

  1. A.ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन
  2. B.हर वाहन की उपग्रह आधारित जीपीएस निगरानी
  3. C.चेसिस नंबर का रेडियो प्रसारण
  4. D.टोल कर्मचारियों द्वारा नंबर हाथ से दर्ज करना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन

व्याख्या

सही उत्तर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन है, जिसे संक्षेप में एएनपीआर कहा जाता है। प्लाजा पर लगे कैमरे हर गुजरते वाहन की नंबर प्लेट पढ़ लेते हैं और फिर फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन उस वाहन से जुड़े खाते से शुल्क काट लेता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि परनूर में लागू फ्री फ्लो व्यवस्था नंबर प्लेट पढ़ने और फास्टैग पर टिकी है, अलग-अलग वाहनों की उपग्रह निगरानी पर नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि इस व्यवस्था में चेसिस नंबर का कोई प्रसारण नहीं होता, चेसिस नंबर निर्माण से जुड़ी पहचान है और टोल वसूली में उसकी कोई भूमिका नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि बदलाव का मकसद इसका उलट है, फ्री फ्लो प्रणाली वसूली में मानवीय हस्तक्षेप घटाने के लिए है, इसलिए कर्मचारी गुजरते वाहनों के नंबर टाइप नहीं करते। एएनपीआर और फास्टैग मिलकर बिना रुके शुल्क लेना संभव बनाते हैं।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

परनूर टोल प्लाजा किस राष्ट्रीय राजमार्ग खंड पर स्थित है?

  1. A.एनएच-48 का सूरत-भरूच खंड
  2. B.एनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड
  3. C.एनएच-44 का पानीपत-जालंधर खंड
  4. D.दिल्ली-एनसीआर की अर्बन एक्सटेंशन रोड-II
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड

व्याख्या

सही उत्तर एनएच-179बी का तांबरम-तिंडीवनम खंड है। यह खंड तमिलनाडु में पड़ता है और एनएचएआई ने यहीं से राज्य में फ्री फ्लो टोल वसूली की शुरुआत की है। परनूर टोल प्लाजा इसी खंड पर खड़ा है और यही वह हिस्सा है, जहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने तमिलनाडु को उसकी पहली बैरियर-मुक्त टोल व्यवस्था दी है। विकल्प A गलत है, क्योंकि एनएच-48 के सूरत-भरूच खंड पर गुजरात का चोर्यासी प्लाजा पड़ता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पानीपत-जालंधर खंड पर हरियाणा का घरौंडा प्लाजा है। विकल्प D गलत है, क्योंकि दिल्ली-एनसीआर की अर्बन एक्सटेंशन रोड-II पर मुंडका-बक्करवाला प्लाजा है। ये तीनों असली फ्री फ्लो स्थल हैं, इसी कारण ये अच्छे भ्रमकारी विकल्प बनते हैं, लेकिन प्रश्न विशेष रूप से परनूर के बारे में है और वह प्लाजा तमिलनाडु में एनएच-179बी के तांबरम-तिंडीवनम खंड का हिस्सा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल प्लाजा कौन सा है?

परनूर टोल प्लाजा, जो एनएच-179बी के तांबरम-तिंडीवनम खंड पर है। एनएचएआई ने इसे राज्य का पहला बैरियर-मुक्त टोल स्थल बनाया है।

एमएलएफएफ प्रणाली किन तकनीकों से चलती है?

ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे वाहन की पहचान करते हैं और फास्टैग आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन शुल्क काट लेता है, इसलिए बैरियर या रुकने की जरूरत नहीं रहती।

एमएलएफएफ प्लाजा पर फास्टैग में राशि न हो तो क्या होता है?

बैरियर न होने से वाहन निकल जाता है, लेकिन मालिक को इलेक्ट्रॉनिक नोटिस (ई-नोटिस) मिलता है। एनएचएआई ने चालू फास्टैग में पर्याप्त राशि रखने को कहा है।

स्रोत

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