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एसआरसीसी सम्मेलन: समुद्र मंथन योजना को 84,084 करोड़ रुपये

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 16 अक्टूबर 2026 को एसआरसीसी के दो दिवसीय शताब्दी सम्मेलन का समापन किया और 84,084 करोड़ रुपये की समुद्र मंथन योजना का जिक्र किया।

लेखक प्रकाशित · अपडेट · 2 मिनट
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एसआरसीसी सम्मेलन: समुद्र मंथन योजना को 84,084 करोड़ रुपये

चर्चा में क्यों

16 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने नई दिल्ली में एसआरसीसी के शताब्दी सम्मेलन 'विकसित भारत की राह' के समापन सत्र को संबोधित किया और 84,084 करोड़ रुपये की समुद्र मंथन योजना का उल्लेख किया।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 16 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय सम्मेलन 'विकसित भारत की राह: शताब्दी सम्मेलन' के समापन सत्र को संबोधित किया। दो दिन चले इस आयोजन की मेजबानी दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) ने की थी। कार्यक्रम नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर स्थित स्टाइन ऑडिटोरियम में हुआ और कॉलेज के शताब्दी वर्ष से जुड़ा था। इसमें शिक्षक, अर्थशास्त्री, नीति निर्माता और छात्र शामिल हुए।

समुद्र मंथन योजना

मंत्री ने अपने संबोधन में समुद्र मंथन योजना का उल्लेख किया, जिसे राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना भी कहा जाता है। सरकार ने इसे 84,084 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। इसका मकसद समुद्र के भीतर मौजूद हाइड्रोकार्बन भंडार तक पहुंच बनाना और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना है। योजना के चार मुख्य बिंदु हैं — अन्वेषण में तेजी, आधुनिक तकनीक का उपयोग, साझा बुनियादी ढांचा और घरेलू विनिर्माण को बल देना।

कचरे से कमाई का रास्ता

श्री पुरी ने एक अक्टूबर को शुरू हुई गोबरधन योजना का भी हवाला दिया। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के 'अपशिष्ट से धन' और 'अन्नदाता से ऊर्जादाता' वाले विचार से जोड़ा। उनका कहना था कि खेती के अवशेष और जैविक कचरे से घरेलू ईंधन बनाना किसान के लिए कमाई का व्यावहारिक रास्ता है, इससे आर्थिक प्रतिफल मिलता है और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी बढ़ती है।

ईंधन की आपूर्ति बनी रही

वैश्विक उथल-पुथल पर मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालिया संकटों के दौरान भारत ने खरीद के स्रोत बढ़ाकर और घरेलू क्षमता मजबूत करके जरूरी ईंधन की आपूर्ति बनाए रखने में सफलता पाई।

छात्रों से आह्वान

दार्शनिक अल्फ्रेड नॉर्थ व्हाइटहेड का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय का काम कल्पनाशीलता और अनुभव को आपस में जोड़ना है, और जो संस्थान यह आदान-प्रदान बनाए रखता है वह अपने बौद्धिक जीवन को नया रूप देता रहता है। उन्होंने वाणिज्य तथा अर्थशास्त्र पढ़ रहे छात्रों से कहा कि वे बनी-बनाई धारणाओं पर सवाल उठाएं और ऊर्जा, वित्त एवं लॉजिस्टिक्स की दिक्कतों को उद्यम में बदलें। प्रधानमंत्री की हालिया एसआरसीसी यात्रा को याद करते हुए उन्होंने पूछा कि जब भारतीय प्रतिभाएं दुनिया की बड़ी कंपनियों का नेतृत्व कर रही हैं, तो भारतीय उद्यम दुनिया में अगुवा क्यों नहीं बन सकते। अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि आज के युवा 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अगुवा भूमिका निभाएंगे।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजन'विकसित भारत की राह: शताब्दी सम्मेलन', दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन
आयोजकश्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी), दिल्ली विश्वविद्यालय
स्थानस्टाइन ऑडिटोरियम, इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली
समापन भाषणहरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री
उल्लिखित योजनासमुद्र मंथन योजना (राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना)
परिव्यय84,084 करोड़ रुपये
योजना का फोकसअन्वेषण में तेजी, आधुनिक तकनीक, साझा बुनियादी ढांचा, घरेलू विनिर्माण
अन्य योजनागोबरधन, एक अक्टूबर को शुरू
नारे'अपशिष्ट से धन' और 'अन्नदाता से ऊर्जादाता'
लक्ष्य2047 तक विकसित भारत

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें — योजना का नाम (समुद्र मंथन यानी राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना), उसका परिव्यय (84,084 करोड़ रुपये) और संबंधित मंत्रालय (पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस); सम्मेलन का आयोजक (श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय), उसका नाम, स्थान (स्टाइन ऑडिटोरियम, इंडिया हैबिटेट सेंटर) तथा समापन भाषण देने वाले मंत्री; गोबरधन योजना की शुरुआत की तारीख (एक अक्टूबर); और 'अपशिष्ट से धन' व 'अन्नदाता से ऊर्जादाता' नारे।

अभ्यास प्रश्न

Q1.शिखर सम्मेलनमध्यम

समुद्र मंथन योजना, यानी राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना, का स्वीकृत परिव्यय कितना है?

  1. A.48,048 करोड़ रुपये
  2. B.84,084 करोड़ रुपये
  3. C.64,064 करोड़ रुपये
  4. D.94,094 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 84,084 करोड़ रुपये

भारत सरकार ने समुद्र मंथन योजना को, जिसे राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना भी कहा जाता है, इसी परिव्यय के साथ मंजूरी दी है।

Q2.शिखर सम्मेलनआसान

दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'विकसित भारत की राह: शताब्दी सम्मेलन' का आयोजन किस संस्थान ने किया?

  1. A.श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय
  2. B.भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद
  3. C.जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
  4. D.दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली विश्वविद्यालय

एसआरसीसी नाम से पहचाने जाने वाले इस कॉलेज ने अपने शताब्दी वर्ष के अवसर पर यह दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया और इसके सत्र नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर स्थित स्टाइन ऑडिटोरियम में हुए।

Q3.शिखर सम्मेलनमध्यम

समुद्र मंथन योजना को और किस नाम से जाना जाता है?

  1. A.राष्ट्रीय गहरे जल मिशन
  2. B.नीली अर्थव्यवस्था अन्वेषण कार्यक्रम
  3. C.राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना
  4. D.अपतटीय ऊर्जा सुरक्षा मिशन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना

समुद्र मंथन इस योजना का प्रचलित नाम है, जबकि राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना इसका औपचारिक नाम है।

Q4.शिखर सम्मेलनमध्यम

केंद्रीय मंत्री ने 'अपशिष्ट से धन' और 'अन्नदाता से ऊर्जादाता' के उदाहरण के रूप में किस योजना का उल्लेख किया?

  1. A.पीएम-कुसुम
  2. B.गोबरधन
  3. C.सतत
  4. D.उज्ज्वला योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गोबरधन

ऊर्जा क्षेत्र और सतत आर्थिक विकास पर बोलते हुए हरदीप सिंह पुरी ने एक अक्टूबर को शुरू हुई इस योजना का हवाला दिया और इसे प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण से जोड़ा जिसमें कचरे को धन में बदलने तथा किसान को अन्न देने वाले से ऊर्जा देने वाले में बदलने की…

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समुद्र मंथन योजना का परिव्यय कितना है?

84,084 करोड़ रुपये। समुद्र मंथन योजना को राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना भी कहा जाता है और सरकार ने इसे भारत की अपतटीय हाइड्रोकार्बन संभावनाओं का दोहन करने तथा ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए मंजूरी दी है।

'विकसित भारत की राह' शताब्दी सम्मेलन किसने आयोजित किया?

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) ने। दो दिवसीय यह राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर स्थित स्टाइन ऑडिटोरियम में हुआ और 16 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने समापन भाषण दिया।

'अन्नदाता से ऊर्जादाता' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है किसान का अन्न देने वाले से ऊर्जा देने वाले में बदलना। हरदीप सिंह पुरी ने इसे 'अपशिष्ट से धन' के साथ एक अक्टूबर को शुरू हुई गोबरधन योजना के संदर्भ में कहा, जिसके तहत कृषि अवशेष और जैविक कचरे को ऊर्जा में बदला जाता है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 16 अक्टूबर 2026

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