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एपीएआरसी महासभा 2026 आईआईटीएम पुणे में शुरू

विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम से जुड़ी एपीएआरसी महासभा 2026 आईआईटीएम पुणे में शुरू हुई, जिसमें दुनिया भर से 550 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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एपीएआरसी महासभा 2026 आईआईटीएम पुणे में शुरू

चर्चा में क्यों

12 अक्टूबर 2026 को विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम की मुख्य परियोजना एपीएआरसी की महासभा 2026 का उद्घाटन पुणे के भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान में हुआ, जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है।

जलवायु में वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और उनकी भूमिका (एपीएआरसी) की महासभा 2026 का उद्घाटन भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे में हुआ। भारत पहली बार इस आयोजन की मेजबानी कर रहा है, जिसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने ऐतिहासिक अवसर बताया, क्योंकि यह महासभा हर चार वर्ष पर ही होती है।

उद्घाटन किसने किया

मुख्य अतिथि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला थे, जो ऑनलाइन जुड़े। सम्मानित अतिथि विश्व मौसम विज्ञान संगठन की उप महासचिव को बैरेट रहीं, जो भी ऑनलाइन शामिल हुईं। इस अवसर पर विश्व मौसम विज्ञान संगठन में विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम की डॉ. हिंदुमती पलानीसामी, एपीएआरसी की सह-अध्यक्ष डॉ. स्टेफनी एवान, जो फ्रांस के रीयूनियन द्वीप स्थित वायुमंडल एवं चक्रवात प्रयोगशाला की वैज्ञानिक हैं, जर्मनी के डीएलआर वायुमंडलीय भौतिकी संस्थान की डॉ. हेला गार्नी, आईआईटीएम के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव तथा वैज्ञानिक आयोजन समिति की अध्यक्ष और आईआईटीएम के जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र की परियोजना निदेशक डॉ. सुवर्णा फडणवीस उपस्थित रहीं।

आयोजन का आकार

  • यह महासभा पांच दिन चलेगी, 12 से 16 अक्टूबर 2026 तक
  • यूरोप, अमेरिका महाद्वीप, दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया से 550 से अधिक प्रतिभागी इसमें शामिल हैं
  • इनमें 380 प्रतिभागी प्रत्यक्ष रूप से आए हैं, जिनमें 250 भारतीय और 130 विदेशी प्रतिनिधि हैं, तथा लगभग 180 शोधकर्ता ऑनलाइन जुड़े हैं
  • वैज्ञानिक कार्यक्रम में 67 मौखिक प्रस्तुतियां हैं, जिनमें नौ मुख्य व्याख्यान शामिल हैं, तथा 400 से अधिक पोस्टर प्रस्तुतियां हैं
  • 120 से अधिक विद्यार्थी और 150 नवोदित शोधकर्ता इसमें भाग ले रहे हैं

चर्चा के विषय

डॉ. सूर्यचंद्र राव ने उद्घाटन व्याख्यान मानसून के मॉडलिंग पर दिया और बताया कि मानसून की संभावित पूर्वानुमेयता तथा वास्तविक पूर्वानुमान कौशल के बीच का अंतर कैसे घटाया जाए। महासभा छह मुख्य विषयों पर केंद्रित है: जलवायु तंत्र का उच्च विभेदन चित्रण; बदलती जलवायु में वायुमंडलीय संरचना और उसका उतार-चढ़ाव; जलवायु प्रेरण के गतिकीय तथा तापगतिकीय चिह्न; उष्णकटिबंध में संचरण, संरचना और अतिचरम घटनाएं; उप-मौसमी से दशकीय पैमाने तक जलवायु पूर्वानुमान; तथा समाज के साथ और समाज के लिए एपीएआरसी विज्ञान। जलवायु मॉडलिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग, वायुमंडलीय रसायन तथा अतिचरम घटनाओं के पूर्वानुमान पर विशेष ध्यान है।

एपीएआरसी और डब्ल्यूसीआरपी

एपीएआरसी विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम (डब्ल्यूसीआरपी) की एक मुख्य परियोजना है और यह मौसम के स्वरूप तथा वैश्विक जलवायु की गतिशीलता तय करने वाली वायुमंडलीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करती है। इसकी महासभा शोध की कमियां पहचानने, वैज्ञानिक साझेदारी मजबूत करने और जलवायु की गंभीर चुनौतियों पर व्यावहारिक रूपरेखा बनाने का वैश्विक मंच है। परीक्षार्थियों के लिए मेजबान संस्थान, शहर, मूल कार्यक्रम, चार वर्ष का चक्र और भारत की पहली मेजबानी याद रखने योग्य बिंदु हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनएपीएआरसी महासभा 2026
पूरा नामजलवायु में वायुमंडलीय प्रक्रियाएं और उनकी भूमिका
स्थानभारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे
तिथियां12 से 16 अक्टूबर 2026, पांच दिन
मूल कार्यक्रमविश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम (डब्ल्यूसीआरपी)
आयोजन चक्रहर चार वर्ष पर
प्रतिभागी550 से अधिक, जिनमें 380 प्रत्यक्ष, 250 भारतीय और 130 विदेशी
मुख्य अतिथिडॉ. श्रीनिवास कुमार तुम्माला, सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
सम्मानित अतिथिको बैरेट, उप महासचिव, विश्व मौसम विज्ञान संगठन
आईआईटीएम निदेशकडॉ. सूर्यचंद्र राव, जिन्होंने मानसून मॉडलिंग पर उद्घाटन व्याख्यान दिया

परीक्षा की दृष्टि से

एपीएआरसी का पूरा नाम, मूल कार्यक्रम (डब्ल्यूसीआरपी), मेजबान संस्थान (आईआईटीएम) और शहर (पुणे), चार वर्ष का चक्र, तिथियां 12 से 16 अक्टूबर 2026, 550 से अधिक प्रतिभागी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से मुख्य अतिथि तथा डब्ल्यूएमओ से सम्मानित अतिथि याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.शिखर सम्मेलनआसान

एपीएआरसी महासभा 2026 का उद्घाटन किस संस्थान में हुआ?

  1. A.भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे
  2. B.भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली
  3. C.राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र, नोएडा
  4. D.भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र, हैदराबाद
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे

व्याख्या

सही उत्तर भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान, पुणे है। महासभा का उद्घाटन समारोह वहीं हुआ और संस्थान के निदेशक ने मानसून की मॉडलिंग पर उद्घाटन व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि मानसून की संभावित पूर्वानुमेयता और वास्तविक पूर्वानुमान कौशल के बीच का अंतर कैसे घटाया जा सकता है। वैज्ञानिक आयोजन समिति की अध्यक्ष इसी संस्थान के जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र की प्रमुख भी हैं। विकल्प B, विकल्प C और विकल्प D पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से जुड़े संस्थान हैं, इसलिए इनमें भ्रम हो सकता है, पर इस महासभा की मेजबानी इनमें से किसी ने नहीं की। पहला देश के मौसम पूर्वानुमान जारी करता है, दूसरा मध्यम अवधि की मॉडलिंग पर काम करता है और तीसरा महासागर सूचना सेवाओं पर। मंत्रालय के सचिव मुख्य अतिथि थे और ऑनलाइन जुड़े थे।

Q2.शिखर सम्मेलनमध्यम

एपीएआरसी, जिसकी महासभा 2026 की मेजबानी भारत कर रहा है, किस कार्यक्रम की मुख्य परियोजना है?

  1. A.विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम
  2. B.वैश्विक वायुमंडल निगरानी कार्यक्रम
  3. C.अंतरराष्ट्रीय भूमंडल-जैवमंडल कार्यक्रम
  4. D.अंतर सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम

व्याख्या

सही उत्तर विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम है, जिसे संक्षेप में डब्ल्यूसीआरपी कहा जाता है। जलवायु में वायुमंडलीय प्रक्रियाएं और उनकी भूमिका इसकी एक मुख्य परियोजना है, जो मौसम के स्वरूप तथा वैश्विक जलवायु की गतिशीलता तय करने वाली वायुमंडलीय प्रक्रियाओं पर काम करती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन में इसी कार्यक्रम की एक वैज्ञानिक अधिकारी उद्घाटन समारोह में उपस्थित थीं और संगठन की उप महासचिव सम्मानित अतिथि रहीं। विकल्प B, विकल्प C और विकल्प D पृथ्वी विज्ञान से जुड़े वास्तविक अंतरराष्ट्रीय प्रयास हैं, इसलिए ये विकल्प भ्रमित कर सकते हैं, लेकिन पुणे में हो रही महासभा विकल्प A में दिए जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम की है। यह महासभा हर चार वर्ष पर होती है और शोध की कमियां पहचानने तथा साझेदारी बनाने का वैश्विक मंच है।

Q3.शिखर सम्मेलनमध्यम

एपीएआरसी महासभा का आयोजन कितने अंतराल पर होता है?

  1. A.हर वर्ष
  2. B.हर दो वर्ष पर
  3. C.हर चार वर्ष पर
  4. D.हर पांच वर्ष पर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. हर चार वर्ष पर

व्याख्या

सही उत्तर हर चार वर्ष पर है, इसी कारण इस बैठक को चतुर्वार्षिक कहा जाता है और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भारत की मेजबानी को ऐतिहासिक अवसर बताया। पुणे में हो रही यह महासभा पांच दिन चलती है, 12 से 16 अक्टूबर 2026 तक, और इसमें यूरोप, अमेरिका महाद्वीप, दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया तथा ऑस्ट्रेलिया से 550 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं, जिनमें 380 प्रत्यक्ष रूप से और लगभग 180 ऑनलाइन जुड़े हैं। विकल्प A और विकल्प B बहुत छोटा चक्र बताते हैं, जिसमें इतना बड़ा वैश्विक आयोजन व्यावहारिक नहीं होता, और विकल्प D अंतराल को एक वर्ष बढ़ा देता है। महासभा के चार वर्ष के चक्र और इस संस्करण की पांच दिन की अवधि में अंतर ध्यान रखें, क्योंकि परीक्षा में ये दोनों संख्याएं आपस में बदल दी जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एपीएआरसी का पूरा नाम क्या है और यह किस कार्यक्रम से जुड़ा है?

एपीएआरसी का अर्थ है जलवायु में वायुमंडलीय प्रक्रियाएं और उनकी भूमिका। यह विश्व जलवायु अनुसंधान कार्यक्रम की मुख्य परियोजना है और मौसम के स्वरूप तथा वैश्विक जलवायु को तय करने वाली वायुमंडलीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करती है।

एपीएआरसी महासभा 2026 कहां हो रही है?

पुणे के भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान में, 12 से 16 अक्टूबर 2026 तक। भारत इस महासभा की मेजबानी कर रहा है, जिसमें कई महाद्वीपों से 550 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।

एपीएआरसी महासभा कितने समय पर होती है?

हर चार वर्ष पर। यह शोध की कमियां पहचानने, वैज्ञानिक साझेदारी मजबूत करने तथा जलवायु की गंभीर चुनौतियों पर कार्ययोजना बनाने का वैश्विक मंच है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 12 अक्टूबर 2026

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