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एनबीए को एबीएस ढांचे के तहत 9.68 करोड़ रुपए प्राप्त हुए

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं से 9.68 करोड़ रुपए मिले, सबसे अधिक कृषि बीज क्षेत्र से।

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एनबीए को एबीएस ढांचे के तहत 9.68 करोड़ रुपए प्राप्त हुए — GK24 title card

चर्चा में क्यों

8 अक्टूबर 2026 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान पहुंच और लाभ साझाकरण ढांचे के तहत 9.68 करोड़ रुपए प्राप्त हुए।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) को 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 की छमाही में भारत के जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं से 9.68 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। यह राशि जैविक विविधता अधिनियम, 2002, जिसमें 2023 में संशोधन हुआ, तथा पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) विनियमों के अनुसार मिली। कुल राशि में से 9.56 करोड़ रुपए विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों ने जैविक संसाधनों तक पहुंच के लिए चुकाए।

किस क्षेत्र से सबसे अधिक

कृषि और बीज क्षेत्र से सबसे बड़ा हिस्सा 7.16 करोड़ रुपए आया, इसके बाद खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र से 1.59 करोड़ रुपए और पशुपालन से 62.01 लाख रुपए प्राप्त हुए। आयुष से 0.21 करोड़ रुपए, लाल चंदन की लकड़ी से 0.06 करोड़ रुपए और सौंदर्य प्रसाधन से 0.04 करोड़ रुपए मिले। बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े आवेदनों के अंतर्गत वर्गीकृत राशि 11.24 लाख रुपए रही।

सबसे बड़े अंशदाता

इस अवधि में सर्वाधिक अंशदान मैसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया लिमिटेड का रहा, जिसने कई किस्तों में लगभग 2.01 करोड़ रुपए दिए, जबकि सबसे बड़ा एकल भुगतान मैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड का 1.17 करोड़ रुपए था। अन्य बड़ी राशियां मैसर्स टाटा केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड से 52.06 लाख रुपए, मैसर्स इंडेना इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से 45.89 लाख रुपए, मैसर्स ग्रो इंडिगो लिमिटेड से 45.79 लाख रुपए, मैसर्स नोवोजाइम्स साउथ एशिया से 44.11 लाख रुपए और मैसर्स नोंगवू सीड इंडिया से 40.53 लाख रुपए प्राप्त हुईं। मैसर्स ननहेम्स इंडिया लिमिटेड ने लगभग 1.64 करोड़ रुपए का अग्रिम भुगतान किया। भारतीय कंपनियों के अलावा श्रीलंका, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण कोरिया गणराज्य और भूटान की संस्थाओं ने भी अंशदान दिया।

किन संसाधनों पर, और धन कहां जाता है

भुगतान संसाधनों की विस्तृत श्रेणी के उपयोग पर हुए, जिनमें चना, लाल मसूर, हरी मूंग, कुलथी, अलसी, ग्वार गोंद, साबूदाना, कुट्टू, फूलगोभी, भिंडी, बैंगन और तोरी जैसी फसलें, अश्वगंधा, शतावरी, कालमेघ, मुलेठी, अर्जुन, ब्राह्मी तथा मोरिंगा जैसे औषधीय पौधे, एज़ोस्पिरिलम, एज़ोटोबैक्टर, राइज़ोबियम और ट्राइकोडर्मा जैसे मृदा सूक्ष्मजीव तथा मिथुन, जर्सी गाय और मुर्रा भैंस के जमे हुए वीर्य जैसे पशुधन आनुवंशिक संसाधन शामिल हैं। प्राधिकरण ने 2008 से अब तक इस माध्यम से लगभग 278 करोड़ रुपए जुटाए हैं और जैव विविधता संरक्षण तथा लाभार्थियों के लिए 200 करोड़ रुपए से अधिक वितरित किए हैं। यह धन राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के माध्यम से जन जैव विविधता रजिस्टरों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, अनुसंधान तथा स्थानीय समुदायों के लाभ पर खर्च होता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

संस्थाराष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए)
प्राप्त राशि9.68 करोड़ रुपए
अवधि1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026
संसाधनों तक पहुंच के लिएकुल में से 9.56 करोड़ रुपए
कानूनजैविक विविधता अधिनियम, 2002, संशोधन 2023, तथा एबीएस विनियम
सबसे बड़ा क्षेत्रकृषि बीज, 7.16 करोड़ रुपए
दूसरा और तीसरा क्षेत्रखाद्य एवं पेय पदार्थ 1.59 करोड़ रुपए, पशुपालन 62.01 लाख रुपए
सबसे बड़ा अंशदातामैसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया लिमिटेड, लगभग 2.01 करोड़ रुपए
सबसे बड़ा एकल भुगतानमैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड, 1.17 करोड़ रुपए
2008 से अब तकलगभग 278 करोड़ रुपए की वसूली, 200 करोड़ रुपए से अधिक वितरित
मंत्रालयपर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: राशि (9.68 करोड़ रुपए), अवधि (अप्रैल से सितंबर 2026), कानून (जैविक विविधता अधिनियम, 2002, संशोधन 2023), सबसे बड़ा क्षेत्र (कृषि बीज, 7.16 करोड़ रुपए), सबसे बड़ा अंशदाता (ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया) और सबसे बड़ा एकल भुगतान (सिनर्जिया लाइफ साइंस, 1.17 करोड़ रुपए), तथा 2008 से अब तक लगभग 278 करोड़ रुपए की वसूली और 200 करोड़ रुपए से अधिक का वितरण।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को पहुंच और लाभ साझाकरण ढांचे के तहत कितनी राशि मिली?

  1. A.5.68 करोड़ रुपए
  2. B.9.68 करोड़ रुपए
  3. C.19.68 करोड़ रुपए
  4. D.96.80 करोड़ रुपए
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 9.68 करोड़ रुपए

व्याख्या

सही उत्तर 9.68 करोड़ रुपए है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 की छमाही में भारत के जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं से यह राशि प्राप्त हुई, जो जैविक विविधता अधिनियम, 2002, जिसमें 2023 में संशोधन हुआ, तथा पहुंच और लाभ साझाकरण विनियमों के अनुसार मिली। इस कुल राशि में से 9.56 करोड़ रुपए विशेष रूप से विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों द्वारा जैविक संसाधनों तक पहुंच के लिए चुकाए गए और शेष छोटी राशि बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े आवेदनों तथा अन्य मदों से आई। विकल्प A, C और D जानबूझकर वास्तविक आंकड़े के आसपास रखे गए हैं, क्योंकि इस विज्ञप्ति पर प्रश्न गोल संख्या के बजाय ठीक राशि पर आने की संभावना अधिक है। इसे याद रखने का अच्छा तरीका है कि मुख्य आंकड़े 9.68 करोड़ रुपए के साथ पहुंच वाले हिस्से 9.56 करोड़ रुपए और सबसे बड़े क्षेत्र कृषि बीज के 7.16 करोड़ रुपए को जोड़कर याद रखा जाए।

Q2.पर्यावरणमध्यम

इन प्राप्तियों में सबसे बड़ा हिस्सा किस क्षेत्र से आया?

  1. A.खाद्य एवं पेय पदार्थ
  2. B.पशुपालन
  3. C.कृषि और बीज
  4. D.सौंदर्य प्रसाधन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कृषि और बीज

व्याख्या

सही उत्तर कृषि और बीज है। कृषि बीज क्षेत्र से प्राप्तियों का सबसे बड़ा हिस्सा 7.16 करोड़ रुपए आया, जो हर दूसरी श्रेणी से काफी आगे है। विकल्प A यानी खाद्य एवं पेय पदार्थ 1.59 करोड़ रुपए के साथ दूसरे स्थान पर रहा। विकल्प B यानी पशुपालन 62.01 लाख रुपए के साथ तीसरे स्थान पर था। विकल्प D यानी सौंदर्य प्रसाधन सबसे छोटी मदों में शामिल था, जिससे 0.04 करोड़ रुपए मिले, जबकि लाल चंदन की लकड़ी से 0.06 करोड़ रुपए और आयुष से 0.21 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। यही क्रम पूछे जाने की सबसे अधिक संभावना रखता है, क्योंकि इससे पता चलता है कि देश की जैविक संपदा का व्यावसायिक पैमाने पर उपयोग कौन से उद्योग करते हैं। यह उन संसाधनों की सूची से भी मेल खाता है, जिन पर भुगतान हुआ और जिसमें चना, लाल मसूर, हरी मूंग, कुलथी, ग्वार गोंद, भिंडी और बैंगन जैसी फसलें प्रमुख हैं।

Q3.पर्यावरणमध्यम

जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं से पहुंच और लाभ साझाकरण भुगतान किस कानून के तहत वसूला जाता है?

  1. A.पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
  2. B.वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972
  3. C.जैविक विविधता अधिनियम, 2002, संशोधन 2023
  4. D.वन संरक्षण अधिनियम, 1980
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जैविक विविधता अधिनियम, 2002, संशोधन 2023

व्याख्या

सही उत्तर जैविक विविधता अधिनियम, 2002, संशोधन 2023 है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की प्राप्तियां इसी अधिनियम और पहुंच तथा लाभ साझाकरण विनियमों के तहत आती हैं, जिनके अनुसार भारतीय जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं को देश तथा उन समुदायों के साथ लाभ साझा करना होता है, जो इन संसाधनों का संरक्षण करते हैं। विकल्प A, B और D में दिए कानून पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण कानून हैं, लेकिन इनमें से कोई भी जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से लाभ साझाकरण को नियंत्रित नहीं करता, क्योंकि पहला व्यापक पर्यावरण संरक्षण से, दूसरा वन्य प्रजातियों और संरक्षित क्षेत्रों से तथा तीसरा वन भूमि के अन्य उपयोग में परिवर्तन से संबंधित है। सही अधिनियम के तहत जुटाया गया धन राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश परिषदों के माध्यम से जन जैव विविधता रजिस्टरों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, अनुसंधान तथा स्थानीय समुदायों के सीधे लाभ पर खर्च होता है।

Q4.पर्यावरणकठिन

इस अवधि में सबसे बड़ा एकल एबीएस भुगतान किस कंपनी ने किया?

  1. A.मैसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया लिमिटेड
  2. B.मैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड
  3. C.मैसर्स टाटा केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड
  4. D.मैसर्स ननहेम्स इंडिया लिमिटेड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड

व्याख्या

सही उत्तर मैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड है, जिसका 1.17 करोड़ रुपए का भुगतान इस अवधि का सबसे बड़ा एकल भुगतान रहा। यहां ध्यान रखने योग्य अंतर कुल सबसे बड़े अंशदाता और सबसे बड़े एकल भुगतान के बीच है। विकल्प A यानी मैसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया लिमिटेड कुल मिलाकर सबसे बड़ा अंशदाता रहा और उसने लगभग 2.01 करोड़ रुपए दिए, लेकिन यह राशि एक बार में नहीं, बल्कि कई किस्तों में चुकाई गई। विकल्प C यानी मैसर्स टाटा केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड ने 52.06 लाख रुपए दिए और वह उन बड़े अंशदाताओं में शामिल रहा, जिनमें मैसर्स इंडेना इंडिया 45.89 लाख रुपए, मैसर्स ग्रो इंडिगो 45.79 लाख रुपए, मैसर्स नोवोजाइम्स साउथ एशिया 44.11 लाख रुपए और मैसर्स नोंगवू सीड इंडिया 40.53 लाख रुपए के साथ हैं। विकल्प D यानी मैसर्स ननहेम्स इंडिया लिमिटेड ने लगभग 1.64 करोड़ रुपए का अग्रिम भुगतान किया। अंशदाताओं में श्रीलंका, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण कोरिया गणराज्य और भूटान की संस्थाएं भी शामिल रहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस छमाही में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को एबीएस के तहत कितनी राशि मिली?

प्राधिकरण को 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच 9.68 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जिनमें से 9.56 करोड़ रुपए विभिन्न क्षेत्रों से जैविक संसाधनों तक पहुंच के लिए थे।

सबसे अधिक अंशदान किस क्षेत्र से आया?

कृषि बीज क्षेत्र से, जिसने 7.16 करोड़ रुपए दिए। इसके बाद खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र से 1.59 करोड़ रुपए और पशुपालन से 62.01 लाख रुपए आए, जबकि आयुष से 0.21 करोड़ रुपए प्राप्त हुए।

यह भुगतान किस कानून के तहत वसूला जाता है?

जैविक विविधता अधिनियम, 2002, जिसमें 2023 में संशोधन हुआ, तथा पहुंच और लाभ साझाकरण विनियमों के तहत। यह धन राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के माध्यम से जमीन तक पहुंचता है।

2008 से अब तक कितनी वसूली और वितरण हुआ है?

प्राधिकरण ने 2008 से अब तक पहुंच और लाभ साझाकरण के माध्यम से लगभग 278 करोड़ रुपए जुटाए हैं और जैव विविधता संरक्षण तथा समुदायों, किसानों, संस्थानों व अन्य लाभार्थियों के लिए 200 करोड़ रुपए से अधिक वितरित किए हैं।

स्रोत

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