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GK24
पर्यावरणआसान

अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को पहुंच और लाभ साझाकरण ढांचे के तहत कितनी राशि मिली?

  1. A.5.68 करोड़ रुपए
  2. B.9.68 करोड़ रुपए
  3. C.19.68 करोड़ रुपए
  4. D.96.80 करोड़ रुपए

सही उत्तर

B. 9.68 करोड़ रुपए

व्याख्या

सही उत्तर 9.68 करोड़ रुपए है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 की छमाही में भारत के जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं से यह राशि प्राप्त हुई, जो जैविक विविधता अधिनियम, 2002, जिसमें 2023 में संशोधन हुआ, तथा पहुंच और लाभ साझाकरण विनियमों के अनुसार मिली। इस कुल राशि में से 9.56 करोड़ रुपए विशेष रूप से विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों द्वारा जैविक संसाधनों तक पहुंच के लिए चुकाए गए और शेष छोटी राशि बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े आवेदनों तथा अन्य मदों से आई। विकल्प A, C और D जानबूझकर वास्तविक आंकड़े के आसपास रखे गए हैं, क्योंकि इस विज्ञप्ति पर प्रश्न गोल संख्या के बजाय ठीक राशि पर आने की संभावना अधिक है। इसे याद रखने का अच्छा तरीका है कि मुख्य आंकड़े 9.68 करोड़ रुपए के साथ पहुंच वाले हिस्से 9.56 करोड़ रुपए और सबसे बड़े क्षेत्र कृषि बीज के 7.16 करोड़ रुपए को जोड़कर याद रखा जाए।

पूरा लेख पढ़ें: एनबीए को एबीएस ढांचे के तहत 9.68 करोड़ रुपए प्राप्त हुए

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Q1.पर्यावरणमध्यम

इन प्राप्तियों में सबसे बड़ा हिस्सा किस क्षेत्र से आया?

  1. A.खाद्य एवं पेय पदार्थ
  2. B.पशुपालन
  3. C.कृषि और बीज
  4. D.सौंदर्य प्रसाधन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कृषि और बीज

व्याख्या

सही उत्तर कृषि और बीज है। कृषि बीज क्षेत्र से प्राप्तियों का सबसे बड़ा हिस्सा 7.16 करोड़ रुपए आया, जो हर दूसरी श्रेणी से काफी आगे है। विकल्प A यानी खाद्य एवं पेय पदार्थ 1.59 करोड़ रुपए के साथ दूसरे स्थान पर रहा। विकल्प B यानी पशुपालन 62.01 लाख रुपए के साथ तीसरे स्थान पर था। विकल्प D यानी सौंदर्य प्रसाधन सबसे छोटी मदों में शामिल था, जिससे 0.04 करोड़ रुपए मिले, जबकि लाल चंदन की लकड़ी से 0.06 करोड़ रुपए और आयुष से 0.21 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। यही क्रम पूछे जाने की सबसे अधिक संभावना रखता है, क्योंकि इससे पता चलता है कि देश की जैविक संपदा का व्यावसायिक पैमाने पर उपयोग कौन से उद्योग करते हैं। यह उन संसाधनों की सूची से भी मेल खाता है, जिन पर भुगतान हुआ और जिसमें चना, लाल मसूर, हरी मूंग, कुलथी, ग्वार गोंद, भिंडी और बैंगन जैसी फसलें प्रमुख हैं।

Q2.पर्यावरणमध्यम

जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं से पहुंच और लाभ साझाकरण भुगतान किस कानून के तहत वसूला जाता है?

  1. A.पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
  2. B.वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972
  3. C.जैविक विविधता अधिनियम, 2002, संशोधन 2023
  4. D.वन संरक्षण अधिनियम, 1980
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जैविक विविधता अधिनियम, 2002, संशोधन 2023

व्याख्या

सही उत्तर जैविक विविधता अधिनियम, 2002, संशोधन 2023 है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की प्राप्तियां इसी अधिनियम और पहुंच तथा लाभ साझाकरण विनियमों के तहत आती हैं, जिनके अनुसार भारतीय जैविक संसाधनों के उपयोगकर्ताओं को देश तथा उन समुदायों के साथ लाभ साझा करना होता है, जो इन संसाधनों का संरक्षण करते हैं। विकल्प A, B और D में दिए कानून पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण कानून हैं, लेकिन इनमें से कोई भी जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से लाभ साझाकरण को नियंत्रित नहीं करता, क्योंकि पहला व्यापक पर्यावरण संरक्षण से, दूसरा वन्य प्रजातियों और संरक्षित क्षेत्रों से तथा तीसरा वन भूमि के अन्य उपयोग में परिवर्तन से संबंधित है। सही अधिनियम के तहत जुटाया गया धन राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश परिषदों के माध्यम से जन जैव विविधता रजिस्टरों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, अनुसंधान तथा स्थानीय समुदायों के सीधे लाभ पर खर्च होता है।

Q3.पर्यावरणकठिन

इस अवधि में सबसे बड़ा एकल एबीएस भुगतान किस कंपनी ने किया?

  1. A.मैसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया लिमिटेड
  2. B.मैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड
  3. C.मैसर्स टाटा केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड
  4. D.मैसर्स ननहेम्स इंडिया लिमिटेड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड

व्याख्या

सही उत्तर मैसर्स सिनर्जिया लाइफ साइंस लिमिटेड है, जिसका 1.17 करोड़ रुपए का भुगतान इस अवधि का सबसे बड़ा एकल भुगतान रहा। यहां ध्यान रखने योग्य अंतर कुल सबसे बड़े अंशदाता और सबसे बड़े एकल भुगतान के बीच है। विकल्प A यानी मैसर्स ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया लिमिटेड कुल मिलाकर सबसे बड़ा अंशदाता रहा और उसने लगभग 2.01 करोड़ रुपए दिए, लेकिन यह राशि एक बार में नहीं, बल्कि कई किस्तों में चुकाई गई। विकल्प C यानी मैसर्स टाटा केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड ने 52.06 लाख रुपए दिए और वह उन बड़े अंशदाताओं में शामिल रहा, जिनमें मैसर्स इंडेना इंडिया 45.89 लाख रुपए, मैसर्स ग्रो इंडिगो 45.79 लाख रुपए, मैसर्स नोवोजाइम्स साउथ एशिया 44.11 लाख रुपए और मैसर्स नोंगवू सीड इंडिया 40.53 लाख रुपए के साथ हैं। विकल्प D यानी मैसर्स ननहेम्स इंडिया लिमिटेड ने लगभग 1.64 करोड़ रुपए का अग्रिम भुगतान किया। अंशदाताओं में श्रीलंका, जर्मनी, फ्रांस, दक्षिण कोरिया गणराज्य और भूटान की संस्थाएं भी शामिल रहीं।

Q4.पर्यावरणकठिन

एनएचएआई दस्तावेज में संरचनात्मक वन्यजीव शमन खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा किस मद का है?

  1. A.पशु अंडरपास
  2. B.पशु ओवरपास
  3. C.वायाडक्ट
  4. D.सुरंगें
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. वायाडक्ट

व्याख्या

सही उत्तर वायाडक्ट है, जिन पर लगभग 8,300 करोड़ रुपये लगे हैं और यह संरचनात्मक ब्योरे की सबसे बड़ी एकल मद है। विकल्प ए पशु अंडरपास दूसरे स्थान पर है, जिन पर लगभग 4,600 करोड़ रुपये खर्च हुए, इसलिए जो अभ्यर्थी मान लेता है कि पशुओं के नाम वाली संरचना पर ही सबसे अधिक खर्च होगा, वह चूक जाता है। विकल्प डी सुरंगों पर लगभग 2,800 करोड़ रुपये हैं। विकल्प बी पशु ओवरपास इनमें सबसे कम लगभग 650 करोड़ रुपये हैं, जबकि बड़े पुल लगभग 2,500 करोड़ और छोटे पुल लगभग 500 करोड़ रुपये के साथ सूची पूरी करते हैं। ये संरचनाएं पशुओं को राजमार्ग गलियारे सुरक्षित पार करने देती हैं और दोनों ओर के आवासों को जोड़े रखती हैं। 2,150 से अधिक संरचनाओं की कुल संख्या तथा 300 किलोमीटर से अधिक गाइड फेंसिंग व ध्वनि अवरोधक के आंकड़े भी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Q5.पर्यावरणमध्यम

‘वन्यजीव शमन उपाय एवं संरचना’ दस्तावेज किसने और किस आयोजन में जारी किया?

  1. A.पर्यावरण मंत्री ने, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में
  2. B.नितिन गडकरी ने, गुजरात के एकता नगर में चिंतन शिविर में
  3. C.एनएचएआई अध्यक्ष ने, नई दिल्ली में पत्रकार वार्ता में
  4. D.प्रधानमंत्री ने, गांधीनगर में वन्यजीव सम्मेलन में
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नितिन गडकरी ने, गुजरात के एकता नगर में चिंतन शिविर में

व्याख्या

सही उत्तर नितिन गडकरी ने, गुजरात के एकता नगर में चिंतन शिविर में है। वे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री हैं और दस्तावेज उन्होंने उसी चिंतन शिविर में जारी किया; इसके बाद प्राधिकरण ने इसे 2 से 8 अक्टूबर 2026 तक मनाए गए राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह के उपलक्ष्य में प्रकाशित किया। विकल्प ए गलत है क्योंकि इस प्रकाशन में पर्यावरण मंत्रालय अथवा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की कोई भूमिका नहीं थी, हालांकि वन्यजीव उसी मंत्रालय का विषय है और इसी कारण यह विकल्प आकर्षक लगता है। विकल्प सी गलत है क्योंकि प्राधिकरण के अध्यक्ष की किसी पत्रकार वार्ता का उल्लेख नहीं है। विकल्प डी गलत है क्योंकि गांधीनगर में ऐसा कोई सम्मेलन शामिल नहीं है; गुजरात से जुड़ाव एकता नगर का है। दस्तावेज एनएचएआई की वेबसाइट पर संदर्भ ढांचे के रूप में उपलब्ध है।