डीडब्ल्यूबीडीएनसी शासी निकाय के दो नए सदस्यों ने शपथ ली
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने नारायण देवासी और स्वरूप सिंह बंजारा को डीडब्ल्यूबीडीएनसी शासी निकाय के सदस्य की शपथ दिलाई।

चर्चा में क्यों
7 अक्टूबर 2026 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव तथा डीडब्ल्यूबीडीएनसी के अध्यक्ष श्री सुधांश पंत ने मंत्रालय के कार्यालय में बोर्ड के शासी निकाय के दो नवनियुक्त सदस्यों को पद की शपथ दिलाई।
विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों के लिए काम करने वाले बोर्ड के सर्वोच्च निकाय को दो नए सदस्य मिले हैं। 7 अक्टूबर 2026 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के कार्यालय में मंत्रालय के सचिव तथा विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के विकास एवं कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी) के अध्यक्ष श्री सुधांश पंत ने श्री नारायण देवासी और श्री स्वरूप सिंह बंजारा को पद की शपथ दिलाई।
शपथ में क्या
दोनों सदस्यों ने भारत के संविधान में सच्ची निष्ठा और श्रद्धा रखने तथा देश की संप्रभुता और अखंडता बनाए रखने की शपथ ली। उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि वे सदस्य के दायित्वों का निर्वाह निष्ठा और विवेक के साथ करेंगे और बोर्ड की संदर्भ शर्तों के अनुसार विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू (डीएनटी) समुदायों के प्रत्येक व्यक्ति के साथ भय या पक्षपात, स्नेह या दुर्भाव के बिना न्याय करेंगे।
नियुक्ति और कार्यकाल
| नियुक्ति करने वाला विभाग | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय |
| कार्यकाल | कार्यग्रहण की तिथि से तीन वर्ष, अथवा अगले आदेश तक, जो पहले हो |
| श्री स्वरूप सिंह बंजारा | 17 सितंबर को कार्यभार ग्रहण |
| श्री नारायण देवासी | 25 सितंबर 2026 को कार्यभार ग्रहण |
| शपथ दिलाई | श्री सुधांश पंत, सचिव तथा अध्यक्ष, डीडब्ल्यूबीडीएनसी |
बोर्ड का कार्य
यह बोर्ड विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समूहों के सामने आने वाले कल्याण तथा विकास से जुड़े प्रश्नों पर काम करने और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने वाले उपायों को सहयोग देने के लिए बनाया गया है। इसके कार्यक्रमों का उद्देश्य इन समुदायों का कल्याण, सामाजिक-आर्थिक विकास और सशक्तीकरण है। ये समुदाय देश की सर्वाधिक गतिशील और सबसे कम स्थिर आबादी में रहे हैं, इसलिए सामान्य सरकारी योजनाओं की पहुंच इन तक सबसे कठिन रही है।
महत्व
समारोह के बाद सचिव ने आशा व्यक्त की कि दोनों सदस्यों के आने से शासी निकाय अपने अधिदेश को आगे बढ़ाने तथा इन समुदायों के कल्याण, सामाजिक-आर्थिक प्रगति और सशक्तीकरण का कार्य बढ़ाने में अधिक सक्षम होगा। परीक्षार्थियों के लिए ध्यान देने की बात संस्थागत श्रृंखला है: बोर्ड सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत है, इसके अध्यक्ष उसी मंत्रालय के सचिव हैं, और शासी निकाय के सदस्यों की नियुक्ति सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तीन वर्ष के लिए करता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| बोर्ड | विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के विकास एवं कल्याण बोर्ड (डीडब्ल्यूबीडीएनसी) |
|---|---|
| संबंधित मंत्रालय | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय |
| बोर्ड के अध्यक्ष | श्री सुधांश पंत, सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय |
| नए सदस्य | श्री नारायण देवासी और श्री स्वरूप सिंह बंजारा |
| नियुक्ति | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा |
| कार्यकाल | कार्यग्रहण की तिथि से तीन वर्ष अथवा अगले आदेश तक |
| कार्यभार ग्रहण | स्वरूप सिंह बंजारा 17 सितंबर; नारायण देवासी 25 सितंबर 2026 |
| संबंधित समुदाय | विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू (डीएनटी) समुदाय |
परीक्षा की दृष्टि से
संक्षिप्त नाम डीडब्ल्यूबीडीएनसी का पूरा रूप, बोर्ड के अध्यक्ष का पद (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव), दोनों नए सदस्यों के नाम, नियुक्ति करने वाला विभाग और कार्यग्रहण से तीन वर्ष का कार्यकाल याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
डीडब्ल्यूबीडीएनसी के शासी निकाय के नवनियुक्त सदस्यों को पद की शपथ किसने दिलाई?
- A.केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री
- B.श्री सुधांश पंत, सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
- C.राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष
- D.मंत्रिमंडल सचिव
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. श्री सुधांश पंत, सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर श्री सुधांश पंत, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव हैं, जो बोर्ड के अध्यक्ष पद पर भी हैं और इसी हैसियत से उन्होंने मंत्रालय के कार्यालय में दोनों नए सदस्यों को शपथ दिलाई। विकल्प A गलत है क्योंकि शपथ मंत्रालय के प्रमुख केन्द्रीय मंत्री ने नहीं, बल्कि बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में सचिव ने दिलाई। विकल्प C गलत है क्योंकि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एक पृथक संवैधानिक निकाय है जिसका अपना अधिदेश है और इस बोर्ड के शासी निकाय के गठन में उसकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि संघ सरकार के सर्वोच्च सिविल अधिकारी होने के नाते मंत्रिमंडल सचिव इस प्रकार के कल्याण बोर्ड के सदस्यों को शपथ नहीं दिलाते। परीक्षार्थी दोहरी भूमिका याद रखें: मंत्रालय के सचिव ही बोर्ड के अध्यक्ष हैं।
डीडब्ल्यूबीडीएनसी, जिसके शासी निकाय में दो नए सदस्य शामिल हुए, किन समुदायों के लिए कार्य करता है?
- A.वन क्षेत्रों में रहने वाली अनुसूचित जनजातियां
- B.विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय
- C.ट्रांसजेंडर व्यक्ति और भिक्षावृत्ति में लगे लोग
- D.सफाई कर्मचारी और हाथ से मैला ढोने वाले
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय
व्याख्या
सही उत्तर विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय है। बोर्ड का नाम ही विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के विकास एवं कल्याण बोर्ड है, और इसके सदस्यों द्वारा ली गई शपथ में बोर्ड की संदर्भ शर्तों के अनुसार इन समूहों के प्रत्येक व्यक्ति के साथ न्याय करने का संकल्प शामिल है। विकल्प A गलत है क्योंकि वनवासियों सहित अनुसूचित जनजातियों का कल्याण एक पृथक मंत्रालय और पृथक संस्थाएं देखती हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए कल्याणकारी उपाय इसी मंत्रालय के अंतर्गत होने पर भी इस विशेष बोर्ड का अधिदेश नहीं हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि सफाई कर्मचारियों के प्रश्न एक अलग राष्ट्रीय आयोग के माध्यम से देखे जाते हैं। ये समुदाय देश के सर्वाधिक गतिशील समूहों में हैं, इसीलिए इनके लिए अलग बोर्ड बनाया गया।
डीडब्ल्यूबीडीएनसी के शासी निकाय के नवनियुक्त सदस्यों की नियुक्ति कितनी अवधि के लिए की गई है?
- A.कार्यग्रहण की तिथि से दो वर्ष
- B.कार्यग्रहण की तिथि से तीन वर्ष अथवा अगले आदेश तक
- C.कार्यग्रहण की तिथि से पांच वर्ष
- D.65 वर्ष की आयु पूरी होने तक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कार्यग्रहण की तिथि से तीन वर्ष अथवा अगले आदेश तक
व्याख्या
सही उत्तर कार्यग्रहण की तिथि से तीन वर्ष अथवा अगले आदेश तक, जो पहले हो है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने दोनों सदस्यों को बोर्ड के शासी निकाय में इसी शर्त पर नियुक्त किया है। विकल्प A में अवधि कम बताई गई है और विकल्प C में अधिक; नियुक्ति आदेश से दोनों मेल नहीं खाते। विकल्प D में आयु आधारित शर्त जोड़ी गई है, जो भारत में कई न्यायिक तथा आयोग के पदों पर लागू होती है, परंतु इन सदस्यों के पद धारण का आधार वह नहीं है। परीक्षार्थी उन तिथियों पर भी ध्यान दें जिन पर दोनों ने कार्यभार संभाला, जिसमें एक ने सितंबर की सत्रह तारीख और दूसरे ने पच्चीस तारीख को पदभार लिया, जबकि शपथ अगले माह मंत्रालय के कार्यालय में बोर्ड के अध्यक्ष सचिव की उपस्थिति में दिलाई गई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
डीडब्ल्यूबीडीएनसी का पूरा नाम क्या है?
विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के विकास एवं कल्याण बोर्ड। यह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत इन समुदायों के कल्याण, सामाजिक-आर्थिक विकास और सशक्तीकरण पर कार्य करता है।
नए सदस्यों को शपथ किसने दिलाई?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत ने, जो बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं, मंत्रालय के कार्यालय में शपथ दिलाई।
शासी निकाय के सदस्य का कार्यकाल कितना होता है?
कार्यग्रहण की तिथि से तीन वर्ष अथवा अगले आदेश तक, जो पहले हो। यह नियुक्ति सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग करता है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2320110 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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