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डीआरडीओ का उच्च ऊंचाई प्लेटफॉर्म 21 किमी तक पहुंचा

डीआरडीओ ने स्वदेशी उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म का सफल उड़ान परीक्षण किया, जो समुद्र तल से 21 किलोमीटर तक पहुंचा और 20 किलोमीटर पर 30 मिनट से अधिक बना रहा।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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डीआरडीओ का उच्च ऊंचाई प्लेटफॉर्म 21 किमी तक पहुंचा — GK24 title card

चर्चा में क्यों

6 अक्टूबर 2026 को डीआरडीओ ने स्वदेशी उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म के सफल उड़ान परीक्षण की घोषणा की, जो समुद्र तल से 21 किलोमीटर तक पहुंचा और 20 किलोमीटर पर 30 मिनट से अधिक बना रहा।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी रूप से विकसित उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म (एचएपीएस) का सफल उड़ान परीक्षण पूरा किया। रक्षा मंत्रालय ने इसकी घोषणा 6 अक्टूबर 2026 को की। प्रायोगिक उड़ान में यह प्लेटफॉर्म समुद्र तल से 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक गया और नीचे उतरने का निर्देश मिलने से पहले 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक बना रहा। प्रणाली सुरक्षित वापस प्राप्त कर ली गई और उड़ान के आंकड़ों का अध्ययन किया गया।

परीक्षण में क्या दिखा

पूरी उड़ान के दौरान वास्तविक समय का वीडियो तथा वाहन से जुड़े सभी मापदंड ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक पहुंचते रहे और आंकड़े उसी प्रदर्शन के अनुरूप रहे जिसकी रूपरेखा बनाई गई थी। प्लेटफॉर्म पर उपकरण और नियंत्रण से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक पैकेज लगाए गए थे, जिनमें जड़त्वीय मापन इकाई, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊंचाई नियंत्रण तंत्र शामिल थे।

एचएपीएस क्या है

यह हवा से हल्की प्रणाली है, जिसे लंबे समय तक आकाश में टिके रहने वाले समतापमंडलीय हवाई निगरानी मंच के रूप में तैयार किया जा रहा है। चूंकि यह जोर के बल पर उड़ने की जगह हवा में तैरता है, इसलिए किसी विमान की तुलना में बहुत अधिक देर तक ऊपर रह सकता है और समतापमंडल से विस्तृत क्षेत्र पर नजर रख सकता है। इसका विकास आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एडीआरडीई) कर रहा है।

शामिल एजेंसियां

  • भारतीय वायु सेना
  • सीईएमआईएलएसी
  • नागर विमानन महानिदेशालय
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण तथा अन्य नागरिक प्राधिकरण

इस तरह के परीक्षण में नागर विमानन संस्थाओं की सहमति आवश्यक होती है, क्योंकि प्लेटफॉर्म ऊपर जाते और नीचे आते समय उस वायु क्षेत्र से गुजरता है जिसका उपयोग नागरिक उड़ानें करती हैं।

किसने क्या कहा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, सार्वजनिक उपक्रमों और उद्योग को बधाई दी तथा इसे समतापमंडलीय एयरशिप की दिशा में आत्मनिर्भर भारत यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। रक्षा सचिव तथा डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने संबंधित टीमों को बधाई दी।

एक नजर में

प्रणालीउच्च ऊंचाई वाला प्लेटफॉर्म (एचएपीएस)
प्राप्त ऊंचाईसमुद्र तल से 21 किलोमीटर
ठहराव20 किलोमीटर पर 30 मिनट से अधिक
विकासकर्ताएडीआरडीई, आगरा

महत्वपूर्ण तथ्य

प्रणालीउच्च ऊंचाई वाला प्लेटफॉर्म (एचएपीएस), स्वदेशी
संगठनरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ)
प्राप्त ऊंचाईसमुद्र तल से 21 किलोमीटर
ठहरावसमुद्र तल से 20 किलोमीटर पर 30 मिनट से अधिक
स्वरूपहवा से हल्की, लंबी अवधि की समतापमंडलीय निगरानी प्रणाली
विकासकर्ता प्रयोगशालाएरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (एडीआरडीई), आगरा
लगे उपकरणजड़त्वीय मापन इकाई, जीपीएस रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे, ऊंचाई नियंत्रण तंत्र
सहयोगी एजेंसियांभारतीय वायु सेना, सीईएमआईएलएसी, डीजीसीए, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण
डीआरडीओ अध्यक्षराजेश कुमार सिंह, जो रक्षा सचिव भी हैं

परीक्षा की दृष्टि से

प्रणाली का नाम (उच्च ऊंचाई वाला प्लेटफॉर्म, एचएपीएस), प्राप्त ऊंचाई (21 किलोमीटर), ठहराव (20 किलोमीटर पर 30 मिनट से अधिक), इसका स्वरूप (हवा से हल्की समतापमंडलीय निगरानी प्रणाली), विकासकर्ता प्रयोगशाला (एडीआरडीई, आगरा) और सहयोगी एजेंसियां याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षामध्यम

अक्टूबर 2026 में परीक्षण किए गए उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म का विकास डीआरडीओ की कौन सी प्रयोगशाला कर रही है?

  1. A.एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, आगरा
  2. B.डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लैबोरेटरी, हैदराबाद
  3. C.एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, बेंगलुरु
  4. D.रिसर्च सेंटर इमारत, हैदराबाद
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, आगरा

व्याख्या

सही उत्तर एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, आगरा है। विज्ञप्ति के अनुसार यही प्रयोगशाला उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म का डिजाइन और विकास कर रही है। यह हवा से हल्की प्रणाली है, जिसे लंबे समय तक आकाश में टिके रहने वाले समतापमंडलीय हवाई निगरानी मंच के रूप में तैयार किया जा रहा है। विकल्प B गलत है, क्योंकि हैदराबाद की इलेक्ट्रॉनिक्स प्रयोगशाला को इस प्लेटफॉर्म के विकासकर्ता के रूप में नहीं बताया गया। विकल्प C गलत है, क्योंकि बेंगलुरु की संस्था का नाम इस परीक्षण में नहीं आता। विकल्प D भी इसी कारण गलत है; इस प्रणाली के संदर्भ में ऐसे किसी केंद्र का उल्लेख नहीं है। याद रखने का सरल तरीका यह है कि आगरा की यह प्रयोगशाला हवाई आपूर्ति और हवा से हल्की प्रणालियों पर काम करती है, इसलिए एयरशिप परियोजना भी उसी के पास है। परीक्षण भारतीय वायु सेना, सीईएमआईएलएसी, डीजीसीए और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सहयोग से हुआ।

Q2.रक्षाआसान

प्रायोगिक उड़ान में प्लेटफॉर्म समुद्र तल से कितनी ऊंचाई तक पहुंचा?

  1. A.12 किलोमीटर
  2. B.17 किलोमीटर
  3. C.21 किलोमीटर
  4. D.35 किलोमीटर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 21 किलोमीटर

व्याख्या

सही उत्तर 21 किलोमीटर है। प्रायोगिक उड़ान में उच्च ऊंचाई वाला प्लेटफॉर्म समुद्र तल से इतनी ऊंचाई तक गया और इसके बाद नीचे उतरने का निर्देश मिलने से पहले 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक बना रहा। प्रणाली को सुरक्षित वापस प्राप्त किया गया और उड़ान के प्रदर्शन संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। विकल्प A गलत है, क्योंकि प्लेटफॉर्म इससे काफी अधिक ऊपर गया। विकल्प B गलत है, क्योंकि ऊपर जाते समय प्लेटफॉर्म उस स्तर से गुजरा अवश्य, परंतु परीक्षण में प्राप्त ऊंचाई उससे अधिक रही। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस उड़ान में प्लेटफॉर्म ने ऐसी कोई ऊंचाई नहीं छुई। परीक्षा के लिए दोनों ऊंचाइयों को अलग-अलग याद रखें, एक वह जो अधिकतम रही और दूसरी वह जिस पर प्लेटफॉर्म ठहरा, साथ में ठहरने की अवधि भी।

Q3.रक्षाआसान

उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म के बारे में कौन सा कथन सही है?

  1. A.यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है
  2. B.यह हवा से हल्की समतापमंडलीय निगरानी प्रणाली है
  3. C.यह पनडुब्बी से छोड़ा जाने वाला ड्रोन है
  4. D.यह उपग्रह प्रक्षेपण यान है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. यह हवा से हल्की समतापमंडलीय निगरानी प्रणाली है

व्याख्या

सही उत्तर यह है कि यह हवा से हल्की समतापमंडलीय निगरानी प्रणाली है। विज्ञप्ति में उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म को हवा से हल्की प्रणाली बताया गया है, जिसे लंबे समय तक टिके रहने वाले समतापमंडलीय हवाई निगरानी मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है, और रक्षा मंत्री ने इसे समतापमंडलीय एयरशिप की दिशा में उपलब्धि कहा। विकल्प A गलत है, क्योंकि यह किसी प्रकार की मिसाइल नहीं है; इस पर जड़त्वीय मापन इकाई, जीपीएस रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊंचाई नियंत्रण तंत्र जैसे उपकरण लगे थे। विकल्प C गलत है, क्योंकि यह न पनडुब्बी से छोड़ा जाता है और न छोटा ड्रोन है; यह समतापमंडल तक गया और निर्देश मिलने पर नीचे आकर सुरक्षित प्राप्त किया गया। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह उपग्रह प्रक्षेपित नहीं करता। ध्यान रखें कि पूरी उड़ान के दौरान आंकड़े ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक पहुंचते रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उड़ान परीक्षण में एचएपीएस कितनी ऊंचाई तक पहुंचा?

यह समुद्र तल से 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक गया और फिर नीचे उतरने का निर्देश मिलने से पहले 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक बना रहा। बाद में प्रणाली सुरक्षित वापस प्राप्त कर ली गई।

एचएपीएस का विकास कौन कर रहा है?

आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट इसका डिजाइन और विकास कर रहा है। यह हवा से हल्की प्रणाली है और इसे लंबे समय तक टिकने वाले समतापमंडलीय निगरानी मंच के रूप में तैयार किया जा रहा है।

परीक्षण में कौन-कौन शामिल रहे?

यह परीक्षण भारतीय वायु सेना, सीईएमआईएलएसी, नागर विमानन महानिदेशालय, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और अन्य नागरिक प्राधिकरणों के समन्वय से किया गया, क्योंकि प्लेटफॉर्म नागरिक उड़ानों वाले वायु क्षेत्र से गुजरता है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 6 अक्टूबर 2026

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