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GK24
रक्षाआसान

प्रायोगिक उड़ान में प्लेटफॉर्म समुद्र तल से कितनी ऊंचाई तक पहुंचा?

  1. A.12 किलोमीटर
  2. B.17 किलोमीटर
  3. C.21 किलोमीटर
  4. D.35 किलोमीटर

सही उत्तर

C. 21 किलोमीटर

व्याख्या

सही उत्तर 21 किलोमीटर है। प्रायोगिक उड़ान में उच्च ऊंचाई वाला प्लेटफॉर्म समुद्र तल से इतनी ऊंचाई तक गया और इसके बाद नीचे उतरने का निर्देश मिलने से पहले 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से अधिक समय तक बना रहा। प्रणाली को सुरक्षित वापस प्राप्त किया गया और उड़ान के प्रदर्शन संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। विकल्प A गलत है, क्योंकि प्लेटफॉर्म इससे काफी अधिक ऊपर गया। विकल्प B गलत है, क्योंकि ऊपर जाते समय प्लेटफॉर्म उस स्तर से गुजरा अवश्य, परंतु परीक्षण में प्राप्त ऊंचाई उससे अधिक रही। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस उड़ान में प्लेटफॉर्म ने ऐसी कोई ऊंचाई नहीं छुई। परीक्षा के लिए दोनों ऊंचाइयों को अलग-अलग याद रखें, एक वह जो अधिकतम रही और दूसरी वह जिस पर प्लेटफॉर्म ठहरा, साथ में ठहरने की अवधि भी।

पूरा लेख पढ़ें: डीआरडीओ का उच्च ऊंचाई प्लेटफॉर्म 21 किमी तक पहुंचा

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Q1.रक्षामध्यम

अक्टूबर 2026 में परीक्षण किए गए उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म का विकास डीआरडीओ की कौन सी प्रयोगशाला कर रही है?

  1. A.एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, आगरा
  2. B.डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लैबोरेटरी, हैदराबाद
  3. C.एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, बेंगलुरु
  4. D.रिसर्च सेंटर इमारत, हैदराबाद
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, आगरा

व्याख्या

सही उत्तर एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, आगरा है। विज्ञप्ति के अनुसार यही प्रयोगशाला उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म का डिजाइन और विकास कर रही है। यह हवा से हल्की प्रणाली है, जिसे लंबे समय तक आकाश में टिके रहने वाले समतापमंडलीय हवाई निगरानी मंच के रूप में तैयार किया जा रहा है। विकल्प B गलत है, क्योंकि हैदराबाद की इलेक्ट्रॉनिक्स प्रयोगशाला को इस प्लेटफॉर्म के विकासकर्ता के रूप में नहीं बताया गया। विकल्प C गलत है, क्योंकि बेंगलुरु की संस्था का नाम इस परीक्षण में नहीं आता। विकल्प D भी इसी कारण गलत है; इस प्रणाली के संदर्भ में ऐसे किसी केंद्र का उल्लेख नहीं है। याद रखने का सरल तरीका यह है कि आगरा की यह प्रयोगशाला हवाई आपूर्ति और हवा से हल्की प्रणालियों पर काम करती है, इसलिए एयरशिप परियोजना भी उसी के पास है। परीक्षण भारतीय वायु सेना, सीईएमआईएलएसी, डीजीसीए और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सहयोग से हुआ।

Q2.रक्षाआसान

उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म के बारे में कौन सा कथन सही है?

  1. A.यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है
  2. B.यह हवा से हल्की समतापमंडलीय निगरानी प्रणाली है
  3. C.यह पनडुब्बी से छोड़ा जाने वाला ड्रोन है
  4. D.यह उपग्रह प्रक्षेपण यान है
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. यह हवा से हल्की समतापमंडलीय निगरानी प्रणाली है

व्याख्या

सही उत्तर यह है कि यह हवा से हल्की समतापमंडलीय निगरानी प्रणाली है। विज्ञप्ति में उच्च ऊंचाई वाले प्लेटफॉर्म को हवा से हल्की प्रणाली बताया गया है, जिसे लंबे समय तक टिके रहने वाले समतापमंडलीय हवाई निगरानी मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है, और रक्षा मंत्री ने इसे समतापमंडलीय एयरशिप की दिशा में उपलब्धि कहा। विकल्प A गलत है, क्योंकि यह किसी प्रकार की मिसाइल नहीं है; इस पर जड़त्वीय मापन इकाई, जीपीएस रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊंचाई नियंत्रण तंत्र जैसे उपकरण लगे थे। विकल्प C गलत है, क्योंकि यह न पनडुब्बी से छोड़ा जाता है और न छोटा ड्रोन है; यह समतापमंडल तक गया और निर्देश मिलने पर नीचे आकर सुरक्षित प्राप्त किया गया। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह उपग्रह प्रक्षेपित नहीं करता। ध्यान रखें कि पूरी उड़ान के दौरान आंकड़े ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक पहुंचते रहे।

Q3.रक्षाआसान

2,000वां विमान इंजन सौंपने वाला एचएएल प्रभाग किस राज्य में स्थित है?

  1. A.ओडिशा
  2. B.कर्नाटक
  3. C.उत्तर प्रदेश
  4. D.तेलंगाना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ओडिशा

व्याख्या

सही उत्तर ओडिशा है। एचएएल का कोरापुट प्रभाग इसी राज्य में है और सुपुर्दगी कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी शामिल हुए। रक्षा मंत्री ने ओडिशा की लंबी तटरेखा, बंदरगाहों, खनिज संसाधनों और कुशल मानव शक्ति की चर्चा की, चांदीपुर की एकीकृत परीक्षण रेंज का उल्लेख किया तथा ढेंकानाल के गजमारा में एयरोस्पेस और रक्षा उपकरण निर्माण परिसर को राज्य की मंजूरी का स्वागत किया। विकल्प B यानी कर्नाटक में एचएएल की अन्य इकाइयां हैं, इसलिए यह भ्रम पैदा करता है, पर कोरापुट वहां नहीं है। विकल्प C और विकल्प D इस प्रभाग के स्थान नहीं हैं। परीक्षार्थी कोरापुट को ओडिशा से जोड़कर याद रखें और राज्य में चांदीपुर तथा गजमारा जैसे रक्षा से जुड़े स्थानों को भी।

Q4.रक्षामध्यम

लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से स्वदेशी उच्च थ्रस्ट इंजन किस विमान कार्यक्रम के लिए विकसित किया जा रहा है?

  1. A.तेजस एमके-1ए
  2. B.उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए)
  3. C.प्रचंड हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर
  4. D.सुखोई-30 एमकेआई उन्नयन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए)

व्याख्या

सही उत्तर उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कार्यक्रम है। रक्षा मंत्री ने कहा कि एयरोस्पेस में आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी विमान इंजन क्षमता जरूरी है, विशेष रूप से एएमसीए के लिए, और इसी संदर्भ में लगभग 5,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश, मिश्र धातु निगम लिमिटेड के साथ कच्चे माल के स्वदेशीकरण तथा देश की पहली स्वदेशी उच्च थ्रस्ट इंजन परीक्षण सुविधा का उल्लेख किया। विकल्प C यानी प्रचंड हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर की जरूरत शक्ति इंजन लाइन से पूरी होती है, इसलिए वह गलत है। विकल्प D मौजूदा सुखोई-30 एमकेआई बेड़े के लिए मंगाए गए एएल-31एफपी इंजनों से जुड़ा अलग विषय है। विकल्प A इस उच्च थ्रस्ट इंजन के लिए नामित कार्यक्रम नहीं है। हेलीकॉप्टर इंजन, सेवा में मौजूद लड़ाकू इंजन और भविष्य के उच्च थ्रस्ट इंजन का अंतर याद रखना उपयोगी है।

Q5.रक्षामध्यम

दूसरी शक्ति इंजन उत्पादन लाइन के लिए घोषित निवेश कितना है?

  1. A.135 करोड़ रुपये
  2. B.218 करोड़ रुपये
  3. C.335 करोड़ रुपये
  4. D.661 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 218 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 218 करोड़ रुपये है। दूसरी शक्ति इंजन लाइन पर यही राशि लगेगी और 2028-29 तक पूरी तरह तैयार होने पर यह सालाना 100 इंजन तक बना सकेगी, जो ध्रुव उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर और प्रचंड हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर जैसे स्वदेशी हेलीकॉप्टरों के लिए होंगे। विकल्प C यानी 335 करोड़ रुपये उसी दिन की दूसरी घोषणा से जुड़ा है, जिसमें एएल-31एफपी की वार्षिक क्षमता 30 से 50 इंजन करने के लिए निवेश तय हुआ, इसलिए यह आम भ्रम का कारण बनता है। विकल्प A घोषित आंकड़ों में शामिल नहीं है। विकल्प D भी इस लाइन से संबंधित नहीं है। दोनों आंकड़े अलग रखें - शक्ति लाइन के लिए 218 करोड़ रुपये और एएल-31एफपी क्षमता के लिए 335 करोड़ रुपये। यह नई लाइन स्वदेशी हेलीकॉप्टर बेड़े के लिए भरोसेमंद प्रणोदन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।