डीआरडीओ ने उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट की पहली लाइव जंप किस ड्रॉप जोन पर की?
- A.आगरा
- B.न्योमा (मुध डीजेड)
- C.पोखरण
- D.चांदीपुर
सही उत्तर
B. न्योमा (मुध डीजेड)
व्याख्या
सही उत्तर न्योमा (मुध डीजेड) है, जिसे सबसे ऊंचाई वाले ड्रॉप जोन में गिना गया है। जंप समुद्र तल से 16,000 फीट की ऊंचाई से की गई, पैराशूट 15,500 फीट पर खोला गया और लैंडिंग उसी ड्रॉप जोन पर हुई, जो स्वयं 13,700 फीट पर स्थित है। इस अभ्यास से अत्यधिक ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में पैराशूट की कार्यक्षमता और सामरिक उपयोगिता सिद्ध हुई। विकल्प A गलत है, क्योंकि आगरा में डिजाइन करने वाली प्रयोगशाला है, जंप वहां नहीं हुई। विकल्प C गलत है, क्योंकि रेगिस्तानी परीक्षण क्षेत्र का नाम इस परीक्षण में नहीं आता और यहां उद्देश्य ऊंचाई था, खुला मैदान नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि समुद्र तट वाला परीक्षण क्षेत्र मिसाइल परीक्षणों के लिए उपयोग होता है, ऊंचाई वाली पैराशूट जंप के लिए नहीं। ड्रॉप जोन के नाम के साथ तीनों ऊंचाइयां भी याद रखें।
पूरा लेख पढ़ें: डीआरडीओ का उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट पहली बार जंप में
अभ्यास प्रश्न
एएचएपी की जंप समुद्र तल से कितनी ऊंचाई पर की गई?
- A.10,000 फीट
- B.13,700 फीट
- C.16,000 फीट
- D.22,000 फीट
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 16,000 फीट
व्याख्या
सही उत्तर 16,000 फीट है। जंप समुद्र तल से इसी ऊंचाई से की गई, इसके बाद पैराशूट 15,500 फीट पर खोला गया और लैंडिंग न्योमा ड्रॉप जोन पर हुई। विकल्प A गलत है, क्योंकि जंप इस आंकड़े से काफी ऊपर से हुई। विकल्प B सावधानी से रखा गया भ्रामक विकल्प है: यह लैंडिंग जोन की ऊंचाई है, वह ऊंचाई नहीं जहां से जंप की गई, और प्रश्नों में दोनों को आपस में मिला दिया जाता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस जंप के लिए ऐसी कोई ऊंचाई दर्ज नहीं है, यद्यपि प्रणाली एक विस्तृत ऊंचाई सीमा के लिए स्वीकृत है। इतनी ऊंचाई पर स्टेटिक लाइन जंप खुलते समय के तेज झटके और अवतरण की अधिक गति के कारण जटिल तथा जोखिम भरी होती है, इसी कारण स्वदेशी प्रणाली की यह पहली लाइव जंप उपलब्धि मानी गई।
उन्नत उच्च ऊंचाई पैराशूट का निर्माण कौन करता है?
- A.ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री, कानपुर
- B.हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु
- C.भारत डायनामिक्स लिमिटेड, हैदराबाद
- D.मिश्र धातु निगम, हैदराबाद
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री, कानपुर
व्याख्या
सही उत्तर ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री, कानपुर है। इस प्रणाली का डिजाइन और विकास आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट ने किया है और निर्माण कानपुर की इसी फैक्ट्री में होता है; निरीक्षण डीजीएक्यूए करता है तथा प्रमाणन सीईएमआईएलएसी, आरसीएमए कानपुर से मिला है। विकल्प B गलत है, क्योंकि विमान बनाने वाली कंपनी इस पैराशूट के उत्पादन में शामिल नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि वह उपक्रम मिसाइल और उससे जुड़ी प्रणालियां बनाता है, पैराशूट नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि वह कंपनी विशेष धातुओं और मिश्र धातुओं पर काम करती है। कार्य विभाजन को एक श्रृंखला के रूप में याद रखें: डिजाइन आगरा में, निर्माण कानपुर में, निरीक्षण डीजीएक्यूए और प्रमाणन सीईएमआईएलएसी से। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस स्वदेशी पैराशूट प्रणाली की सफल पहली लाइव जंप को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम बताया और डीआरडीओ, सशस्त्र बलों, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों तथा उद्योग को बधाई दी।
2,000वां विमान इंजन सौंपने वाला एचएएल प्रभाग किस राज्य में स्थित है?
- A.ओडिशा
- B.कर्नाटक
- C.उत्तर प्रदेश
- D.तेलंगाना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ओडिशा
व्याख्या
सही उत्तर ओडिशा है। एचएएल का कोरापुट प्रभाग इसी राज्य में है और सुपुर्दगी कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी शामिल हुए। रक्षा मंत्री ने ओडिशा की लंबी तटरेखा, बंदरगाहों, खनिज संसाधनों और कुशल मानव शक्ति की चर्चा की, चांदीपुर की एकीकृत परीक्षण रेंज का उल्लेख किया तथा ढेंकानाल के गजमारा में एयरोस्पेस और रक्षा उपकरण निर्माण परिसर को राज्य की मंजूरी का स्वागत किया। विकल्प B यानी कर्नाटक में एचएएल की अन्य इकाइयां हैं, इसलिए यह भ्रम पैदा करता है, पर कोरापुट वहां नहीं है। विकल्प C और विकल्प D इस प्रभाग के स्थान नहीं हैं। परीक्षार्थी कोरापुट को ओडिशा से जोड़कर याद रखें और राज्य में चांदीपुर तथा गजमारा जैसे रक्षा से जुड़े स्थानों को भी।
लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से स्वदेशी उच्च थ्रस्ट इंजन किस विमान कार्यक्रम के लिए विकसित किया जा रहा है?
- A.तेजस एमके-1ए
- B.उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए)
- C.प्रचंड हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर
- D.सुखोई-30 एमकेआई उन्नयन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए)
व्याख्या
सही उत्तर उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) कार्यक्रम है। रक्षा मंत्री ने कहा कि एयरोस्पेस में आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी विमान इंजन क्षमता जरूरी है, विशेष रूप से एएमसीए के लिए, और इसी संदर्भ में लगभग 5,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश, मिश्र धातु निगम लिमिटेड के साथ कच्चे माल के स्वदेशीकरण तथा देश की पहली स्वदेशी उच्च थ्रस्ट इंजन परीक्षण सुविधा का उल्लेख किया। विकल्प C यानी प्रचंड हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर की जरूरत शक्ति इंजन लाइन से पूरी होती है, इसलिए वह गलत है। विकल्प D मौजूदा सुखोई-30 एमकेआई बेड़े के लिए मंगाए गए एएल-31एफपी इंजनों से जुड़ा अलग विषय है। विकल्प A इस उच्च थ्रस्ट इंजन के लिए नामित कार्यक्रम नहीं है। हेलीकॉप्टर इंजन, सेवा में मौजूद लड़ाकू इंजन और भविष्य के उच्च थ्रस्ट इंजन का अंतर याद रखना उपयोगी है।
दूसरी शक्ति इंजन उत्पादन लाइन के लिए घोषित निवेश कितना है?
- A.135 करोड़ रुपये
- B.218 करोड़ रुपये
- C.335 करोड़ रुपये
- D.661 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 218 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 218 करोड़ रुपये है। दूसरी शक्ति इंजन लाइन पर यही राशि लगेगी और 2028-29 तक पूरी तरह तैयार होने पर यह सालाना 100 इंजन तक बना सकेगी, जो ध्रुव उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर और प्रचंड हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर जैसे स्वदेशी हेलीकॉप्टरों के लिए होंगे। विकल्प C यानी 335 करोड़ रुपये उसी दिन की दूसरी घोषणा से जुड़ा है, जिसमें एएल-31एफपी की वार्षिक क्षमता 30 से 50 इंजन करने के लिए निवेश तय हुआ, इसलिए यह आम भ्रम का कारण बनता है। विकल्प A घोषित आंकड़ों में शामिल नहीं है। विकल्प D भी इस लाइन से संबंधित नहीं है। दोनों आंकड़े अलग रखें - शक्ति लाइन के लिए 218 करोड़ रुपये और एएल-31एफपी क्षमता के लिए 335 करोड़ रुपये। यह नई लाइन स्वदेशी हेलीकॉप्टर बेड़े के लिए भरोसेमंद प्रणोदन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।