डीआरआई: गुजरात में 19.41 करोड़ का सोना तस्करी गिरोह पकड़ा
राजस्व आसूचना निदेशालय ने गुजरात में सोना तस्करी का गिरोह तोड़ा, जिसमें 13.017 किलो विदेशी सोने का लगभग 19.41 करोड़ रुपये का कारोबार उजागर हुआ।

चर्चा में क्यों
19 अक्टूबर 2026 को राजस्व आसूचना निदेशालय ने बताया कि उसने गुजरात में सोना तस्करी का गिरोह तोड़ दिया है, जिसमें 13.017 किलोग्राम विदेशी मूल के सोने का लगभग 19.41 करोड़ रुपये का लेन-देन सामने आया और सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत तीन लोग गिरफ्तार हुए।
राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने सोना तस्करी का एक संगठित गिरोह तोड़ा है, जो गुजरात के दो हवाई अड्डों, अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और सूरत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रास्ते विदेशी सोना भारत ला रहा था। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जाँच में 13.017 किलोग्राम विदेशी मूल के सोने का लेन-देन सामने आया, जिसका मूल्य लगभग 19.41 करोड़ रुपये है।
42 घंटे की कार्रवाई
पक्की सूचना के आधार पर अधिकारियों ने पहले संदिग्धों पर निगरानी रखी और फिर 16 अक्टूबर 2026 से 42 घंटे तक कई जगह तलाशी ली। इस तलाशी ने पूरी कड़ी खोल दी, हवाई यात्रियों द्वारा सोना लाने और उसे स्थानीय वाहकों को सौंपने से लेकर अवैध गलाई इकाई और आभूषण दुकान के जरिए बिक्री तक।
सोना कैसे छिपाया गया
शुरुआती जाँच में छिपाने के असामान्य तरीके मिले। सोने को पतले तार में खींचकर उस पर रोडियम की परत चढ़ाई गई, जिससे वह सोना दिखे ही नहीं। कुछ हिस्सा ट्रॉली बैग की भीतरी परतों में लगाया गया और कुछ उसी बैग के भीतरी खोल में सोने के पेस्ट के रूप में रखा गया। हवाई अड्डे से बाहर निकलने पर यह सोना बाहर खड़े लोगों को सौंपा जाता, बिचौलियों से होकर वडोदरा की अवैध गलाई इकाई तक पहुँचता और गलाने के बाद अहमदाबाद की एक आभूषण दुकान को नकद के बदले बेच दिया जाता था।
क्या बरामद हुआ
तलाशी में करीब 890 ग्राम सोना जब्त हुआ और ऐसे दस्तावेज भी मिले जो 6.41 किलोग्राम सोना पहले ही अवैध रूप से गलाए जाने की ओर इशारा करते हैं। आभूषण दुकान से अधिकारियों को बिना दस्तावेज वाली विदेशी सोने की छड़ें तथा करीब 5.8 किलोग्राम तस्करी के सोने के लेन-देन के कागज मिले, जो एक अलग वाहक के जरिए गया था। यह वाहक गिरोह के मुख्य वित्तपोषक से जुड़ा था, जो दुबई में बैठा है।
| उजागर लेन-देन में सोना | 13.017 किलो, लगभग 19.41 करोड़ रुपये |
| जब्त सोना | करीब 890 ग्राम |
| अवैध रूप से गलाया सोना | 6.41 किलो |
| गलाई इकाई | वडोदरा |
| प्रयुक्त हवाई अड्डे | अहमदाबाद और सूरत |
| लागू कानून | सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 |
परीक्षा में यह मामला क्यों
यह मामला तस्करी की पूरी कड़ी का उदाहरण है, जिसमें हर हिस्सा नाम से सामने आया, यात्री वाहक, हवाई अड्डे के बाहर खड़ा आदमी, बिचौलिया, गलाई इकाई चलाने वाला, आभूषण कारोबार का रास्ता और विदेश में बैठा वित्तपोषक। दोहराते समय इस एजेंसी के दो कानून अलग-अलग याद रखें, सोने जैसी तस्करी की वस्तुओं के लिए सीमा शुल्क अधिनियम 1962 और नशीले पदार्थों की खेप के लिए एनडीपीएस कानून, और यह भी कि इस मामले का वित्तपोषक दुबई से काम कर रहा था।
महत्वपूर्ण तथ्य
| एजेंसी | राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) |
|---|---|
| राज्य | गुजरात |
| प्रयुक्त हवाई अड्डे | सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, अहमदाबाद और सूरत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा |
| उजागर लेन-देन में सोना | 13.017 किलोग्राम, विदेशी मूल का |
| मूल्य | लगभग 19.41 करोड़ रुपये |
| जब्त सोना | करीब 890 ग्राम |
| अवैध रूप से गलाया सोना | 6.41 किलोग्राम |
| गलाई इकाई | वडोदरा |
| वित्तपोषक का ठिकाना | दुबई |
| लागू कानून | सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 |
| गिरफ्तारियाँ | तीन व्यक्ति |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: एजेंसी (डीआरआई), राज्य (गुजरात), प्रयुक्त दो हवाई अड्डे (अहमदाबाद और सूरत), मात्रा और मूल्य (13.017 किलो, लगभग 19.41 करोड़ रुपये), जब्त सोना (करीब 890 ग्राम), अवैध रूप से गलाया सोना (6.41 किलो), गलाई इकाई का शहर (वडोदरा), वित्तपोषक का ठिकाना (दुबई) तथा लागू कानून सीमा शुल्क अधिनियम 1962।
अभ्यास प्रश्न
डीआरआई के गुजरात सोना तस्करी मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी किस कानून के तहत हुई?
- A.सीमा शुल्क अधिनियम, 1962
- B.एनडीपीएस अधिनियम, 1985
- C.स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम, 1968
- D.विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999
उत्तर देखें
बिना घोषणा और बिना शुल्क चुकाए देश में लाया गया सोना तस्करी का माल होता है, इसलिए इस मामले में हुई तीनों गिरफ्तारियाँ, जिनमें 13.017 किलोग्राम विदेशी मूल के सोने और लगभग 19.41 करोड़ रुपये मूल्य का लेन-देन सामने आया, इसी अधिनियम के तहत की गईं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →गिरोह की अवैध सोना गलाई इकाई गुजरात के किस शहर में चल रही थी?
- A.सूरत
- B.वडोदरा
- C.राजकोट
- D.गांधीनगर
उत्तर देखें
भारत पहुँचने के बाद सोना हवाई अड्डों के बाहर वाहकों को सौंपा जाता, बिचौलियों के रास्ते इसी शहर की अवैध गलाई इकाई तक पहुँचता, और गलाई हुई धातु अहमदाबाद की एक आभूषण दुकान को नकद के बदले दे दी जाती थी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तस्करी के सोने को सोना न दिखने देने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया गया?
- A.रोडियम की परत चढ़े सोने के तार
- B.जूतों के तलवों में सिले सोने के सिक्के
- C.चाय की पत्ती में मिलाया सोने का चूरा
- D.किताब के कवर में छिपी सोने की चादरें
उत्तर देखें
जाँच में सामने आया कि वाहक धातु को पतले तारों में खींचकर उन पर रोडियम की परत चढ़ाते थे, जिससे सोने का रंग छिप जाता है; इसके साथ ही वही यात्री सोना अपने ट्रॉली बैग की भीतरी परतों में लगाते और सोने के पेस्ट को उन बैगों के भीतरी खोल…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुजरात के इस मामले में कितना सोना शामिल था?
उजागर लेन-देन में 13.017 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना था, जिसका मूल्य लगभग 19.41 करोड़ रुपये है, और करीब 890 ग्राम सोना जब्त किया गया।
वाहकों ने सोना कैसे छिपाया था?
रोडियम की परत चढ़े पतले सोने के तारों के रूप में, ट्रॉली बैग की भीतरी परतों में लगाकर, और उन्हीं बैगों के भीतरी खोल में सोने के पेस्ट के रूप में।
गिरफ्तारियाँ किस कानून के तहत हुईं?
सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत। तीन लोग गिरफ्तार हुए और गिरोह की अवैध गलाई इकाई गुजरात के वडोदरा में मिली।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2325125 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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