शीतजल मत्स्य पालन: पिथौरागढ़ क्लस्टर की समीक्षा, पीएमएमएसवाई
मत्स्य पालन सचिव अभिलक्ष लिखी ने पिथौरागढ़ शीतजल मत्स्य क्लस्टर की समीक्षा की; पीएमएमएसवाई से पर्वतीय राज्यों में 2,299 करोड़ रुपये से अधिक निवेश हुआ है।

चर्चा में क्यों
मत्स्य पालन सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में बैठक की अध्यक्षता करते हुए शीतजल मत्स्य क्लस्टर और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की तथा हिमालयी राज्यों के लिए भावी रूपरेखा तय की।
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में समाहर्ता कार्यालय में पिथौरागढ़ शीतजल मत्स्य क्लस्टर पर बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ट्राउट पालक, राज्य मत्स्य विभाग के अधिकारी तथा आईसीएआर-डीसीएफआर भीमताल, नाबार्ड, एनएफडीबी और एमपीईडीए के प्रतिनिधि प्रत्यक्ष व ऑनलाइन रूप से शामिल हुए। बैठक में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) की प्रगति की समीक्षा हुई और हिमालयी राज्यों के लिए आगे की रूपरेखा तय की गई।
शीतजल मत्स्य पालन कहां केंद्रित है
देश का शीतजल मत्स्य पालन छह पर्वतीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में केंद्रित है: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश। यहां की हिमनद से पोषित नदियां, ऊंचाई पर स्थित झीलें और स्वच्छ धाराएं रेनबो ट्राउट तथा अन्य उच्च मूल्य वाली शीतजल प्रजातियों के लिए अनुकूल हैं। इन संसाधनों के व्यवस्थित उपयोग के लिए केंद्र ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग और लद्दाख के कारगिल में शीतजल मत्स्य क्लस्टर अधिसूचित किए हैं।
पीएमएमएसवाई से क्या बना
इन राज्यों में योजना के तहत 5,600 से अधिक रेसवे, 54 हैचरी, 293 शीत भंडार और 260 फीड मिल मंजूर किए गए हैं। बीते एक दशक में ट्राउट उत्पादन छह गुना बढ़कर लगभग 5,000 मीट्रिक टन वार्षिक हो गया है, और जून 2026 में उत्तराखंड ने आईसीएआर-डीसीएफआर भीमताल के वैज्ञानिक सहयोग से नेपाल को पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात किया।
| पर्वतीय राज्यों में पीएमएमएसवाई निवेश | 2,299 करोड़ रुपये से अधिक |
| उत्तराखंड में निवेश (छह वर्ष) | 317 करोड़ रुपये |
| उत्तराखंड में रेसवे | 1,638, साथ में 10 हैचरी और प्रसंस्करण इकाइयां |
| आईटीबीपी को आपूर्ति | 45 मीट्रिक टन से अधिक ट्राउट, मूल्य 2.10 करोड़ रुपये |
बैठक में उठी कमियां
हितधारकों ने मूल्य श्रृंखला की कमजोर कड़ियां गिनाईं। बीज की कमी है, क्योंकि 40 लाख फिंगरलिंग की मांग के मुकाबले 15 लाख का ही उत्पादन होता है; फीड की आपूर्ति सीमित है; उत्पादकता प्रति रेसवे 250 किलोग्राम है, जबकि संभावना 1,000 किलोग्राम की है; और शीत शृंखला ढुलाई कमजोर है। सचिव ने इन अंतरों को भरने के लिए मिनी हैचरी, फीड मिल, रेफ्रिजरेटेड वैन, शीत भंडार और रोग निगरानी प्रयोगशालाओं की जरूरत बताई तथा निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों के पास शीत भंडार की संभावना परखने को कहा। किसानों ने प्रशिक्षण की मांग रखी और महंगे फीड का हवाला देते हुए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस को दी जाने वाली ट्राउट की दर में संशोधन चाहा।
आजीविका और आगे की राह
सचिव ने पारिस्थितिक पर्यटन, फीड लागत घटाने में महिलाओं की अधिक भागीदारी तथा क्लस्टर और मछली-अपशिष्ट के उपयोग में स्टार्टअप व उद्यमियों के प्रवेश पर जोर दिया। उन्होंने पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में खाद्य एवं कृषि संगठन के साथ प्रायोगिक परियोजना का सुझाव दिया, जहां महिला ट्राउट पालक पहले से सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। बैठक में मछली पालक रेखा जोशी ने बताया कि फिश बॉल और फिश फिंगर जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की उनकी दुकान से रोजाना करीब 5,000 रुपये की आय होती है। सचिव ने कहा कि पीएमएमएसवाई को मत्स्य एवं जलकृषि अवसंरचना विकास निधि तथा राज्य की ट्राउट प्रोत्साहन योजना के साथ जोड़ने से शीतजल मत्स्य पालन ग्रामीण समृद्धि और निर्यात प्रतिस्पर्धा का वाहक बन सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| बैठक | पिथौरागढ़ शीतजल मत्स्य क्लस्टर की समीक्षा, समाहर्ता कार्यालय, पिथौरागढ़, उत्तराखंड |
|---|---|
| अध्यक्षता | डॉ. अभिलक्ष लिखी, सचिव, मत्स्य पालन विभाग |
| मंत्रालय | मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय |
| योजना | प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) |
| अधिसूचित क्लस्टर | पिथौरागढ़ (उत्तराखंड), कुल्लू (हिमाचल प्रदेश), अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर), कारगिल (लद्दाख) |
| पीएमएमएसवाई से मंजूर | 5,600 से अधिक रेसवे, 54 हैचरी, 293 शीत भंडार, 260 फीड मिल |
| निवेश | पर्वतीय राज्यों में 2,299 करोड़ रुपये से अधिक; उत्तराखंड में छह वर्ष में 317 करोड़ रुपये |
| ट्राउट उत्पादन | लगभग 5,000 मीट्रिक टन वार्षिक, एक दशक में छह गुना वृद्धि |
| पहला निर्यात | जून 2026 में उत्तराखंड से नेपाल |
| वैज्ञानिक सहयोग | आईसीएआर-डीसीएफआर भीमताल |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें: चार अधिसूचित शीतजल मत्स्य क्लस्टर (पिथौरागढ़, कुल्लू, अनंतनाग, कारगिल), छह शीतजल राज्य व केंद्रशासित प्रदेश, योजना (पीएमएमएसवाई) और पर्वतीय राज्यों में 2,299 करोड़ रुपये का निवेश, लगभग 5,000 मीट्रिक टन वार्षिक ट्राउट उत्पादन, जून 2026 में नेपाल को पहला निर्यात, संस्थान (आईसीएआर-डीसीएफआर भीमताल) तथा 250 किलोग्राम बनाम 1,000 किलोग्राम की उत्पादकता का अंतर।
अभ्यास प्रश्न
केंद्र ने पिथौरागढ़, कुल्लू, अनंतनाग के साथ किस स्थान पर शीतजल मत्स्य क्लस्टर अधिसूचित किया है?
- A.लेह
- B.कारगिल
- C.शिमला
- D.गंगटोक
उत्तर देखें
चार अधिसूचित शीतजल मत्स्य क्लस्टर हैं: उत्तराखंड का पिथौरागढ़, हिमाचल प्रदेश का कुल्लू, जम्मू-कश्मीर का अनंतनाग और लद्दाख का कारगिल।
पूरी व्याख्या पढ़ें →बीते दशक में छह गुना बढ़कर भारत का वार्षिक ट्राउट उत्पादन लगभग कितना हो गया है?
- A.500 मीट्रिक टन
- B.5,000 मीट्रिक टन
- C.15,000 मीट्रिक टन
- D.50,000 मीट्रिक टन
उत्तर देखें
भारत में ट्राउट उत्पादन बीते एक दशक में छह गुना बढ़ा है और अब लगभग 5,000 मीट्रिक टन वार्षिक है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जून 2026 में उत्तराखंड ने ट्राउट का पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात किस देश को किया?
- A.भूटान
- B.बांग्लादेश
- C.नेपाल
- D.श्रीलंका
उत्तर देखें
उत्तराखंड ने जून 2026 में ट्राउट का अपना पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात किया, जब एक खेप नेपाल भेजी गई। आईसीएआर-डीसीएफआर भीमताल को मुनस्यारी में रेनबो ट्राउट की शुरुआत कराने और इस ऐतिहासिक निर्यात में सहयोग देने दोनों का श्रेय मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पर्वतीय राज्यों में शीतजल मत्स्य अवसंरचना पर कितना निवेश हुआ है?
- A.299 करोड़ रुपये से अधिक
- B.1,299 करोड़ रुपये से अधिक
- C.2,299 करोड़ रुपये से अधिक
- D.3,299 करोड़ रुपये से अधिक
उत्तर देखें
यही राशि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत पर्वतीय राज्यों में रेसवे, हैचरी, फीड व्यवस्था, शीत भंडार और कटाई-पश्चात अवसंरचना को मजबूत करने पर निवेश की गई है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
देश में शीतजल मत्स्य क्लस्टर कहां अधिसूचित किए गए हैं?
उत्तराखंड के पिथौरागढ़, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग और लद्दाख के कारगिल में, ताकि हिमालयी क्षेत्र के शीतजल संसाधनों का व्यवस्थित उपयोग हो सके।
भारत में ट्राउट का वार्षिक उत्पादन कितना है?
लगभग 5,000 मीट्रिक टन, जो बीते एक दशक में छह गुना बढ़ा है। जून 2026 में उत्तराखंड ने नेपाल को ट्राउट का पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात किया।
पीएमएमएसवाई से पर्वतीय राज्यों में कितना निवेश हुआ है?
रेसवे, हैचरी, फीड व्यवस्था, शीत भंडार और कटाई-पश्चात अवसंरचना के लिए 2,299 करोड़ रुपये से अधिक, जिसमें उत्तराखंड को बीते छह वर्षों में 317 करोड़ रुपये मिले हैं।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2325058 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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