बीएसआईपी ने 4600 वर्षों के मानसून इतिहास का पुनर्निर्माण किया
बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने लखनऊ के पास करेला झील से मध्य गंगा मैदान के 4600 वर्षों के मानसून इतिहास का पुनर्निर्माण किया।

चर्चा में क्यों
16 अक्टूबर 2026 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने बीएसआईपी का वह अध्ययन सामने रखा, जिसमें लखनऊ के पास करेला झील से 4600 वर्षों के मानसून इतिहास का पुनर्निर्माण किया गया।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) के वैज्ञानिकों ने मध्य गंगा मैदान की एक झील से 4600 वर्षों के जलवायु और पर्यावरणीय इतिहास को फिर से जोड़ा है। 16 अक्टूबर 2026 को सामने आए इस अध्ययन से पता चलता है कि भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून के उतार-चढ़ाव ने झील के जलस्तर, तलछट की आवाजाही, वनस्पति, सूक्ष्मजीव गतिविधि तथा क्षेत्र के आरंभिक किसानों के तौर-तरीकों को किस तरह आकार दिया।
अभिलेख कहां से मिला
अध्ययन करेला झील पर हुआ, जो उत्तर प्रदेश में लखनऊ के निकट मोहनलाल गंज के हुलास खेड़ा में स्थित एक गोखुर झील है। ऐसी झीलों की तलछट में उत्तर होलोसीन काल के पर्यावरणीय बदलाव परतों में सुरक्षित रहते हैं। झील के पास ही हुलास खेड़ा पुरातात्विक स्थल है, जो कुषाणकालीन बस्ती रही है, इसलिए प्राकृतिक और मानवीय दोनों अभिलेख साथ-साथ पढ़े जा सके।
अध्ययन कैसे किया गया
- समय-क्रम तय करने के लिए त्वरक द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमिति आधारित रेडियोकार्बन डेटिंग
- वनस्पति और कार्बनिक पदार्थ जानने के लिए कार्बन तथा नाइट्रोजन के स्थिर समस्थानिक
- तलछट की आवाजाही समझने के लिए कण-आकार विश्लेषण और एंड-मेंबर मॉडलिंग
- वनस्पति आवरण के पुनर्निर्माण के लिए परागकण विज्ञान
क्या पाया गया
शोधकर्ता बिस्वजीत ठाकुर, आनंद राजोरिया और मनीषा एम ने रेडियोकार्बन डेटिंग प्रयोगशाला की टीम के साथ चार प्रमुख पर्यावरणीय चरणों की पहचान की, जो जानी-मानी जलवायु घटनाओं से जुड़े हैं। इनमें 4.2 हजार वर्ष की शुष्क घटना, रोमन गर्म अवधि और लघु हिमयुग शामिल हैं। लघु हिमयुग के ठंडे दौर में पश्चिमी हवाओं से आई नमी ने क्षेत्र में बाढ़ के स्पष्ट निशान छोड़े। मानसून के उतार-चढ़ाव से सी3 और सी4 वनस्पति के बीच बदलाव हुआ तथा झील की तलहटी में जमा कार्बनिक पदार्थ का स्वरूप भी बदला।
महत्व क्यों है
सिंधु घाटी सभ्यता के उत्थान और पतन को मानसून परिवर्तन से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन गंगा मैदान के बाद के समुदायों की प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी कम रही। इस क्षेत्र में 4500 से 1000 वर्ष पूर्व के बीच कई मानव प्रवास दर्ज हैं, इसलिए यह जलवायु और मानव अंतःक्रिया के अध्ययन की आदर्श प्रयोगशाला है। जर्नल ऑफ एशियन अर्थ साइंसेज में प्रकाशित इस अध्ययन ने दिखाया कि मैदान की छोटी गोखुर झीलें अत्यंत संवेदनशील प्राकृतिक अभिलेखागार हैं, और इनसे मिला आधार आंकड़ा जलवायु मॉडलिंग, जल सुरक्षा, आर्द्रभूमि संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा भूमि उपयोग नियोजन में काम आ सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| संस्थान | बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी), लखनऊ |
|---|---|
| संबंधित विभाग | विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग |
| अध्ययन स्थल | करेला झील, हुलास खेड़ा, मोहनलाल गंज, लखनऊ के पास |
| पुनर्निर्मित अवधि | 4600 वर्षों का जलवायु और पर्यावरणीय इतिहास |
| पहचानी गई घटनाएं | 4.2 हजार वर्ष की शुष्क घटना, रोमन गर्म अवधि, लघु हिमयुग |
| पत्रिका | जर्नल ऑफ एशियन अर्थ साइंसेज |
| क्षेत्र | मध्य गंगा मैदान, उत्तर प्रदेश |
परीक्षा की दृष्टि से
संस्थान (बीएसआईपी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन), झील (हुलास खेड़ा की करेला गोखुर झील), 4600 वर्षों की अवधि, चार चरण तथा 4.2 हजार वर्ष की शुष्क घटना, रोमन गर्म अवधि और लघु हिमयुग याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
करेला झील से 4600 वर्षों के मानसून और पर्यावरणीय इतिहास का पुनर्निर्माण किस संस्थान ने किया?
- A.वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान
- B.बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान
- C.राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान
- D.भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान
उत्तर देखें
इसके वैज्ञानिकों ने करेला झील पर स्थिर समस्थानिकों, वनस्पति परिवर्तनों तथा पुरातात्विक और अवसादी अभिलेखों की मदद से पुरा-पर्यावरणीय स्थितियों का पता लगाया और हजारों वर्ष पुराना अभिलेख तैयार किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अध्ययन का स्थल करेला झील किस शहर के पास स्थित है?
- A.पटना
- B.प्रयागराज
- C.लखनऊ
- D.कानपुर
उत्तर देखें
करेला झील उत्तर प्रदेश में लखनऊ के निकट मोहनलाल गंज के हुलास खेड़ा में स्थित एक गोखुर झील है और मध्य गंगा मैदान में आती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अध्ययन में पहचाने गए चार चरणों में निम्नलिखित में से कौन-सी जलवायु घटना शामिल थी?
- A.लघु हिमयुग
- B.कार्बनी हिमनदन
- C.क्रिटेशस तापीय चरम
- D.पर्मियन विलुप्ति
उत्तर देखें
शोधकर्ताओं ने झील के अभिलेख में चार प्रमुख पर्यावरणीय चरण पहचाने, जो प्रमुख जलवायु घटनाओं से जुड़े हैं और जिनमें लगभग चार दशमलव दो हजार वर्ष पहले की शुष्क घटना, रोमन गर्म अवधि तथा लघु हिमयुग शामिल हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बीएसआईपी के वैज्ञानिकों ने किस झील का अध्ययन किया?
करेला झील का, जो लखनऊ के पास मोहनलाल गंज के हुलास खेड़ा में स्थित एक गोखुर झील है। इसकी तलछट में उत्तर होलोसीन काल के पर्यावरणीय बदलाव सुरक्षित हैं।
कितने वर्षों के जलवायु इतिहास का पुनर्निर्माण हुआ?
लगभग 4600 वर्षों का, जिसके लिए स्थिर समस्थानिक, परागकण, अवसादी तथा पुरातात्विक अभिलेखों का उपयोग किया गया। इस अवधि में चार प्रमुख पर्यावरणीय चरण पहचाने गए।
यह अध्ययन किस संस्थान ने किया और वह किस विभाग के अधीन है?
लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान ने, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है। निष्कर्ष जर्नल ऑफ एशियन अर्थ साइंसेज में प्रकाशित हुए।
स्रोत
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