मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24

भारतीय वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु में मंगल सदृश स्थल पहचाने

केरल विश्वविद्यालय के दल ने डीएसटी-फिस्ट के लेजर रामन स्पेक्ट्रोमीटर से नेवेली, तिरुचिरापल्ली बैडलैंड्स और चिली के अटाकामा को मंगल सदृश स्थल सिद्ध किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
Read in English
भारतीय वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु में मंगल सदृश स्थल पहचाने

चर्चा में क्यों

16 अक्टूबर 2026 को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि भारतीय वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु और चिली के अटाकामा रेगिस्तान के स्थलों पर मेलेंटेराइट तथा जिप्सम की पहचान कर उन्हें मंगल सदृश स्थल के रूप में स्थापित किया है।

तमिलनाडु और चिली के अटाकामा रेगिस्तान में मिले दो खनिजों की मदद से इन स्थानों को मंगल सदृश स्थल के रूप में स्थापित किया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने यह जानकारी 16 अक्टूबर 2026 को दी। सदृश स्थल का अर्थ है पृथ्वी का ऐसा स्थान, जिसकी भूवैज्ञानिक, रासायनिक और भौतिक स्थितियां मंगल से इतनी मिलती हैं कि उसे मंगल के अध्ययन के लिए प्रतिरूप के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

दो खनिज

अध्ययन में तमिलनाडु के नेवेली में मेलेंटेराइट और चिली के अटाकामा रेगिस्तान तथा तमिलनाडु के अर्ध-शुष्क भूवैज्ञानिक एवं पुराजलवायु क्षेत्र तिरुचिरापल्ली बैडलैंड्स में जिप्सम की पहचान हुई। दोनों जलयुक्त सल्फेट हैं, यानी इनकी क्रिस्टल संरचना में पानी बंधा रहता है और इसीलिए ये बताते हैं कि अतीत में पानी और चट्टान के बीच क्या प्रतिक्रिया हुई।

खनिजकहां मिलाक्या दर्ज करता है
मेलेंटेराइटनेवेली, तमिलनाडुअल्पकालिक आर्द्र, अम्लीय और ऑक्सीकारक परिस्थितियां
जिप्समअटाकामा रेगिस्तान (चिली) और तिरुचिरापल्ली बैडलैंड्सअतीत की जल गतिविधि; जैव संकेत सहेजने की क्षमता

नेवेली में मेलेंटेराइट लिग्नाइट की परत में मौजूद मार्कासाइट से सल्फाइड ऑक्सीकरण के जरिये बनता है। यही प्रक्रिया मंगल पर सल्फेट बनने के पीछे मानी जाती है। दूसरी ओर जिप्सम पुराने जल-बहुल वातावरण का प्रमाण सहेजता है और अपनी खनिज संरचना में जैव संकेत बंद रख सकता है, जिससे जीवन के चिह्न खोजने में उसका महत्व बढ़ जाता है।

किसने और कैसे किया

यह शोध केरल विश्वविद्यालय के दल ने किया, जिसका नेतृत्व डीएसटी-फिस्ट के परियोजना समन्वयक डॉ. सजिन कुमार के. एस. ने किया। मुख्य उपकरण विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में डीएसटी-फिस्ट से मिला लेजर रामन स्पेक्ट्रोमीटर रहा, जो हर खनिज की विशिष्ट वर्णक्रमीय पहचान पकड़कर उसकी पुष्टि करता है। निष्कर्ष जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स में दो शोध पत्रों के रूप में प्रकाशित हुए हैं।

सदृश स्थल क्यों जरूरी

ग्रह विज्ञानियों का मानना है कि केवल कक्षा से मिले आंकड़ों से मंगल के खनिजों का पूरा चरित्र नहीं समझा जा सकता, इसलिए पृथ्वी पर मिलती-जुलती भूमि का उच्च परिशुद्धता वाला प्रयोगशाला अध्ययन जरूरी हो गया है। जल गतिविधि दर्ज करने और जैव संकेत सहेजने वाले खनिज यह आंकने में मदद करते हैं कि मंगल के कौन से हिस्से कभी रहने योग्य थे और भविष्य के अभियानों को कहां उतारा जाए। केरल का दल अब दुनिया के अन्य अतिशय वातावरणों में दुर्लभ सदृश स्थलों का अध्ययन कर रहा है।

महत्वपूर्ण तथ्य

निष्कर्षतमिलनाडु और चिली के स्थल मंगल सदृश स्थल के रूप में स्थापित
खनिजमेलेंटेराइट और जिप्सम, दोनों जलयुक्त सल्फेट
मेलेंटेराइट स्थलनेवेली, तमिलनाडु (लिग्नाइट परत के मार्कासाइट से बना)
जिप्सम स्थलअटाकामा रेगिस्तान, चिली तथा तिरुचिरापल्ली बैडलैंड्स, तमिलनाडु
संस्थानभूविज्ञान विभाग, केरल विश्वविद्यालय
नेतृत्वडॉ. सजिन कुमार के. एस., परियोजना समन्वयक, डीएसटी-फिस्ट
उपकरणडीएसटी-फिस्ट से मिला लेजर रामन स्पेक्ट्रोमीटर
प्रकाशनजर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स (दो शोध पत्र)

परीक्षा की दृष्टि से

दोनों खनिज (मेलेंटेराइट और जिप्सम), तीनों स्थल (नेवेली, तिरुचिरापल्ली बैडलैंड्स और चिली का अटाकामा रेगिस्तान), संस्थान (केरल विश्वविद्यालय, भूविज्ञान विभाग), नेतृत्वकर्ता (डॉ. सजिन कुमार के. एस.), उपकरण (डीएसटी-फिस्ट का लेजर रामन स्पेक्ट्रोमीटर) और पत्रिका का नाम याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

तमिलनाडु के नेवेली को मंगल सदृश स्थल सिद्ध करने में किस खनिज की पहचान सहायक रही?

  1. A.मेलेंटेराइट
  2. B.जिप्सम
  3. C.हेमेटाइट
  4. D.ओलिवीन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मेलेंटेराइट

नेवेली में यह खनिज लिग्नाइट की परत में मौजूद मार्कासाइट से सल्फाइड ऑक्सीकरण के जरिये बनता है और अल्पकालिक आर्द्र, अम्लीय तथा ऑक्सीकारक परिस्थितियों को दर्ज करता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

लेजर रामन स्पेक्ट्रोमीटर से मंगल सदृश स्थलों की पहचान किस संस्थान के दल ने की?

  1. A.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद
  2. B.केरल विश्वविद्यालय, भूविज्ञान विभाग
  3. C.भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बेंगलुरु
  4. D.राष्ट्रीय पृथ्वी विज्ञान अध्ययन केंद्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केरल विश्वविद्यालय, भूविज्ञान विभाग

इस शोध में प्रयुक्त लेजर रामन स्पेक्ट्रोमीटर इसी विभाग में डीएसटी-फिस्ट कार्यक्रम के तहत उपलब्ध है, और शोध दल का नेतृत्व डीएसटी-फिस्ट के परियोजना समन्वयक डॉ. सजिन कुमार के. एस. ने किया।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

इस अध्ययन में जिप्सम वाला कौन सा मंगल सदृश रेगिस्तान भारत से बाहर है?

  1. A.अटाकामा रेगिस्तान, चिली
  2. B.सहारा रेगिस्तान, अफ्रीका
  3. C.गोबी रेगिस्तान, मंगोलिया
  4. D.कालाहारी रेगिस्तान, बोत्सवाना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अटाकामा रेगिस्तान, चिली

वहां और तमिलनाडु के अर्ध-शुष्क भूवैज्ञानिक एवं पुराजलवायु क्षेत्र तिरुचिरापल्ली बैडलैंड्स में जिप्सम की पहचान हुई, इसलिए दोनों स्थान अतीत की जल गतिविधि के अध्ययन के लिए मंगल सदृश स्थल माने गए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगल सदृश स्थल क्या होता है?

यह पृथ्वी का ऐसा स्थान है, जिसकी भूवैज्ञानिक, रासायनिक और भौतिक विशेषताएं मंगल से मिलती हैं। ऐसे क्षेत्रों के उच्च परिशुद्धता वाले अध्ययन से मंगल के खनिजों को समझने में मदद मिलती है, क्योंकि केवल कक्षा के आंकड़े पर्याप्त नहीं होते।

कौन से खनिज कहां पहचाने गए?

मेलेंटेराइट तमिलनाडु के नेवेली में और जिप्सम चिली के अटाकामा रेगिस्तान तथा तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली बैडलैंड्स में पहचाना गया। दोनों जलयुक्त सल्फेट हैं, जो पानी और चट्टान की प्रतिक्रिया दर्ज करते हैं।

इस शोध में कौन सा उपकरण और संस्थान शामिल रहे?

केरल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में डीएसटी-फिस्ट से मिला लेजर रामन स्पेक्ट्रोमीटर। शोध दल का नेतृत्व डीएसटी-फिस्ट के परियोजना समन्वयक डॉ. सजिन कुमार के. एस. ने किया और परिणाम जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स में प्रकाशित हुए।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 16 अक्टूबर 2026

  1. 111 राष्ट्रीय जलमार्ग: सुरक्षित नौवहन की नई व्यवस्थाराष्ट्रीय
  2. एपीडा ने बुल्गारिया भेजी जैविक ताड़ गुड़ पाउडर की पहली खेपअर्थव्यवस्था
  3. जामसाहेब स्मृति युवा आदान-प्रदान का दूसरा संस्करण संपन्नअंतरराष्ट्रीय
  4. आयुष पेटेंट रिपोर्ट: 4,077 आवेदन, 711 पेटेंट मंजूररिपोर्ट और सूचकांक
  5. पहली कांदा एक्सप्रेस 440 टन प्याज लेकर अगरतला पहुंचेगीअर्थव्यवस्था
  6. भाषिणी और आईआईएससी ने सौराष्ट्र भाषा के टीटीएस मॉडल बनाएविज्ञान और प्रौद्योगिकी
  7. वस्त्र मंत्रालय की विशेष अभियान 6 के तहत कार्यशालाएंराष्ट्रीय
  8. आईएनएस समर्थक नौसेना का पहला स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत बनारक्षा
आज का क्विज25 प्रश्नपूरा संस्करण पढ़ें →
इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS