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भूतापीय ऊर्जा: लद्दाख की पुगा घाटी में पहले दो कुएं

सितंबर 2025 की राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति और लद्दाख की पुगा घाटी के पहले दो कुएं भारत की भूतापीय पहल का आधार हैं; जीएसआई ने 381 गर्म जलस्रोत चिह्नित किए।

लेखक प्रकाशित · 3 मिनट
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भूतापीय ऊर्जा: लद्दाख की पुगा घाटी में पहले दो कुएं

चर्चा में क्यों

2 नवंबर 2026 को जारी सरकारी पृष्ठभूमि दस्तावेज में भारत की भूतापीय ऊर्जा यात्रा का विवरण है, जो सितंबर 2025 की राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति से लेकर जुलाई 2026 में लद्दाख की पुगा घाटी में शुरू हुए पहले दो कुओं तक फैली है।

पृथ्वी के भीतर संचित ताप ही भूतापीय ऊर्जा का आधार है, और 2 नवंबर 2026 को जारी सरकारी पृष्ठभूमि दस्तावेज में बताया गया है कि भारत इसका उपयोग किस तरह करना चाहता है। धूप या हवा के विपरीत यह ताप मौसम के साथ नहीं बदलता, इसलिए भूतापीय संयंत्र चौबीसों घंटे चल सकते हैं। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय इसका नोडल मंत्रालय है तथा राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति सितंबर 2025 में अधिसूचित की गई, जो 2070 के नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में अन्वेषण और विकास का मार्ग तय करती है।

पहले दो कुएं

जुलाई 2026 में ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने लद्दाख की पुगा घाटी में देश के पहले दो भूतापीय कुएं शुरू किए। यह स्थल गर्म जलस्रोतों और भूमिगत ताप भंडार के लिए जाना जाता है और समुद्र तल से 14,000 फुट से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। प्रत्येक कुआं 1,000 मीटर गहरा है और इसका उपयोग भंडार के आकलन में होगा। इनसे प्रस्तावित 1 मेगावाट प्रदर्शन परियोजना का रास्ता भी खुलता है, जो देश की पहली भूतापीय बिजली परियोजना होगी।

ताप कहां से आता है

पृथ्वी की चार परतें होती हैं। केंद्र में लोहे और निकल का ठोस आंतरिक कोर है, जिसका व्यास लगभग 2,400 किलोमीटर है; उसके चारों ओर लगभग 2,400 किलोमीटर मोटा तरल बाहरी कोर, फिर गर्म और घनी चट्टान का मैंटल, जो करीब 2,900 किलोमीटर तक फैला है, और सबसे बाहर पतली भूपर्पटी। महासागरों के नीचे यह परत लगभग 5 से 8 किलोमीटर और महाद्वीपों के नीचे 24 से 56 किलोमीटर मोटी होती है। गहराई के साथ तापमान बढ़ता है और मैंटल तथा कोर की सीमा पर यह लगभग 3,700 डिग्री सेल्सियस तथा कोर में 5,000 से 6,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। यूरेनियम, थोरियम और पोटैशियम के रेडियोसक्रिय क्षय तथा ग्रह के निर्माण से बची ऊष्मा से यह ताप बना रहता है। संवहन धाराएं गर्म पदार्थ को ऊपर लाती हैं और जहां भ्रंश या दरारें होती हैं, वहां यह सतह के पास पहुंचकर गर्म जल तथा भाप के भंडार बनाता है।

भारत का संसाधन आधार

  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 381 गर्म जलस्रोत और 10 भूतापीय प्रांत चिह्नित किए हैं
  • देश की सैद्धांतिक भूतापीय संभावना लगभग 10.6 गीगावाट यानी करीब 10,600 मेगावाट है और 42 स्थल बिजली या सीधे ताप उपयोग के लिए संभावनाशील माने गए हैं
  • इन प्रांतों में हिमालयी पट्टी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, नागा-लुसाई, पश्चिमी तट, कैम्बे ग्रैबेन और सोन-नर्मदा-ताप्ती अर्थात सोनाटा क्षेत्र के साथ अरावली, महानदी, गोदावरी तथा दक्षिण भारतीय क्रैटोनिक क्षेत्र शामिल हैं
  • 2025 के अंत तक विश्व में स्थापित भूतापीय क्षमता 15.67 गीगावाट रही, जिसमें इंडोनेशिया, अमेरिका, फिलीपींस, तुर्किये और न्यूजीलैंड की हिस्सेदारी करीब 67 प्रतिशत है

परियोजनाएं और साझेदारी

मंत्रालय ने जुलाई से अगस्त 2025 के बीच पांच अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं मंजूर कीं। गुजरात के अंकलेश्वर में एक पायलट परियोजना अनुत्पादक तेल और गैस कुओं से बिजली उत्पादन परख रही है; गांधीनगर की प्रदर्शन परियोजना में तीन कुएं खोदे गए, जिनसे 70 से 80 डिग्री सेल्सियस का द्रव मिला और 50 से 90 किलोवाट बिजली उत्पादन दिखाया गया; अरुणाचल प्रदेश में तवांग के पास पांच स्थलों का अध्ययन चल रहा है; तथा हैदराबाद की परियोजना वातानुकूलन के लिए भूतापीय शीतलन प्रणाली विकसित कर रही है। परित्यक्त तेल और गैस कुओं को भी भूतापीय उपयोग में बदला जा सकता है, जिससे मौजूदा खनन कौशल और आंकड़ों का लाभ मिलता है। भारत ने ऑस्ट्रेलिया और आइसलैंड के साथ सहयोग में भूतापीय ऊर्जा को प्रमुख क्षेत्र बताया है और सऊदी अरब के साथ समझौता ज्ञापन में भी इसे केंद्रीय विषय रखा गया है।

महत्वपूर्ण तथ्य

नोडल मंत्रालयनवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई)
नीतिराष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति, सितंबर 2025 में अधिसूचित
पहले कुएंपुगा घाटी, लद्दाख में दो कुएं, ओएनजीसी एनर्जी सेंटर द्वारा जुलाई 2026 में शुरू
कुएं की गहराईप्रत्येक 1,000 मीटर
स्थल की ऊंचाईसमुद्र तल से 14,000 फुट से अधिक
अगला चरणदेश की पहली 1 मेगावाट भूतापीय प्रदर्शन बिजली परियोजना
चिह्नित गर्म जलस्रोत381, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा
भूतापीय प्रांत10, जिनमें हिमालयी पट्टी, सोनाटा, कैम्बे ग्रैबेन और पश्चिमी तट शामिल
सैद्धांतिक संभावनाकरीब 10,600 मेगावाट, 42 स्थल संभावनाशील
विश्व क्षमता2025 के अंत तक 15.67 गीगावाट; इंडोनेशिया, अमेरिका, फिलीपींस, तुर्किये और न्यूजीलैंड की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत
साझेदार देशऑस्ट्रेलिया, आइसलैंड और सऊदी अरब

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि नोडल मंत्रालय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय है, नीति सितंबर 2025 में आई, पहले दो कुएं ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने जुलाई 2026 में पुगा घाटी (लद्दाख) में शुरू किए, उनकी गहराई 1,000 मीटर और स्थल की ऊंचाई 14,000 फुट से अधिक है, 1 मेगावाट की प्रदर्शन परियोजना प्रस्तावित है, जीएसआई ने 381 गर्म जलस्रोत तथा 10 प्रांत चिह्नित किए, संभावना लगभग 10,600 मेगावाट है और 2025 के अंत तक विश्व क्षमता 15.67 गीगावाट रही।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

भारत के पहले दो भूतापीय कुएं किस घाटी में शुरू किए गए?

  1. A.नुब्रा घाटी
  2. B.पुगा घाटी
  3. C.स्पीति घाटी
  4. D.सुरू घाटी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पुगा घाटी

यह घाटी समुद्र तल से चौदह हजार फुट से अधिक ऊंचाई पर है और अपने गर्म जलस्रोतों तथा भूमिगत ताप भंडार के लिए लंबे समय से जानी जाती है, इसीलिए इसे भारत के सबसे संभावनाशील भूतापीय स्थलों में गिना जाता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने कितने गर्म जलस्रोत और कितने भूतापीय प्रांत चिह्नित किए हैं?

  1. A.340 गर्म जलस्रोत और 7 प्रांत
  2. B.381 गर्म जलस्रोत और 10 प्रांत
  3. C.412 गर्म जलस्रोत और 12 प्रांत
  4. D.381 गर्म जलस्रोत और 14 प्रांत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 381 गर्म जलस्रोत और 10 प्रांत

ये प्रांत बहुत भिन्न भूभागों में फैले हैं, जिनमें हिमालयी पट्टी और अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह से लेकर पश्चिमी तट, कैम्बे ग्रैबेन, सोन-नर्मदा-ताप्ती क्षेत्र और दक्षिण भारत का क्रैटोनिक क्षेत्र शामिल हैं।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

2025 के अंत तक विश्व की स्थापित भूतापीय क्षमता के बारे में कौन कथन सही है?

  1. A.यह 15.67 गीगावाट थी और इंडोनेशिया अग्रणी देशों में शामिल था
  2. B.यह 159.8 गीगावाट थी और चीन अग्रणी था
  3. C.यह 45.2 गीगावाट थी और भारत अग्रणी था
  4. D.यह 8.9 गीगावाट थी और आइसलैंड अग्रणी था
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. यह 15.67 गीगावाट थी और इंडोनेशिया अग्रणी देशों में शामिल था

उस वर्ष के अंत तक विश्व में स्थापित भूतापीय क्षमता पंद्रह गीगावाट से कुछ अधिक रही और इंडोनेशिया, अमेरिका, फिलीपींस, तुर्किये तथा न्यूजीलैंड नामक पांच देशों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब सड़सठ प्रतिशत थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत के पहले भूतापीय कुएं कहां शुरू किए गए?

लद्दाख की पुगा घाटी में, ओएनजीसी एनर्जी सेंटर द्वारा जुलाई 2026 में। यह स्थल समुद्र तल से 14,000 फुट से अधिक ऊंचाई पर है और दोनों कुएं 1,000 मीटर गहरे हैं।

भारत में भूतापीय ऊर्जा का नोडल मंत्रालय कौन है?

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय। यही राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति लागू करता है, जो सितंबर 2025 में अधिसूचित हुई थी।

भारत की भूतापीय संभावना कितनी है?

सैद्धांतिक संभावना करीब 10,600 मेगावाट है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने 381 गर्म जलस्रोत और 10 भूतापीय प्रांत चिह्नित किए हैं तथा 42 स्थल बिजली या सीधे ताप उपयोग के लिए संभावनाशील माने गए हैं।

भूतापीय बिजली में कौन देश आगे हैं?

इंडोनेशिया, अमेरिका, फिलीपींस, तुर्किये और न्यूजीलैंड मिलकर विश्व क्षमता का लगभग 67 प्रतिशत रखते हैं, जो 2025 के अंत तक 15.67 गीगावाट थी।

स्रोत

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