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GK24

बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई पहली बाघिन, बिहार से लाई गई

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई बाघिन को पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया, जिससे चरणबद्ध बाघ पुनर्वास कार्यक्रम शुरू हुआ।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई पहली बाघिन, बिहार से लाई गई — GK24 title card

चर्चा में क्यों

2 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई बाघिन को बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ा, जिससे चरणबद्ध बाघ पुनर्वास कार्यक्रम और वन्यजीव सप्ताह 2026 आरंभ हुआ।

पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन को छोड़ा गया। यह इस रिजर्व के लिए बने चरणबद्ध बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के तहत छोड़ा गया पहला वन्यजीव है। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव तथा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी उपस्थित रहे। इसी के साथ देश में वन्यजीव सप्ताह 2026 की शुरुआत भी हुई। टी138 के नाम से पहचानी गई इस बाघिन को बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाया गया था।

बक्सा में पुनर्वास की जरूरत क्यों पड़ी

बक्सा उत्तर बंगाल के महत्वपूर्ण बाघ क्षेत्रों में गिना जाता रहा है और इसे 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। यह एक बड़े पारिस्थितिक क्षेत्र का हिस्सा है, जो भूटान और असम के जंगलों तथा संरक्षित क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। दशकों के दौरान आवास का क्षरण और विखंडन, भूमि उपयोग में बदलाव तथा शिकार आधार में गिरावट ने वे परिस्थितियां कमजोर कर दीं, जो बाघों की स्थायी आबादी के लिए आवश्यक होती हैं। इसके बाद रिजर्व में लंबे समय तक बाघों की स्थायी आबादी नहीं रही।

छोड़ने से पहले की तैयारी

यह पुनर्वास बाघ संवर्धन एवं पुनरुद्धार परियोजना पर आधारित है, जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से 2018 से संयुक्त रूप से चलाया है। इसमें आवास सुधार, शिकार आधार बढ़ाना, सुरक्षा और निगरानी मजबूत करना, वैज्ञानिक आकलन तथा क्षमता निर्माण पर काम हुआ।

तैयारीआंकड़ा
शिकार आधार के लिए छोड़े गए चीतल800 से अधिक
बहाल या परिवर्तित घास के मैदानआठ वर्षों में लगभग 380 हेक्टेयर
जन भागीदारी के लिए जुड़ी समितियां64 पर्यावरण विकास एवं संयुक्त वन प्रबंधन समितियां
टाइगर रिजर्व घोषित1983

बाघों की आवाजाही के प्रमाण

कैमरा ट्रैप में इस क्षेत्र में 2021, 2023 और 2026 में बाघ दर्ज हुए। 2023 में जिस बाघ की तस्वीर मिली, उसका मिलान असम के मानस टाइगर रिजर्व के एक बाघ से हुआ, जिससे यह सामने आया कि बाघ आसपास के क्षेत्रों के बीच स्वाभाविक रूप से आते-जाते हैं। वर्तमान कार्यक्रम का उद्देश्य इस प्राकृतिक पुनरुद्धार की जगह लेना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक ढंग से नियोजित कदमों से उसे सहारा देना है।

आगे क्या होगा

छोड़ी गई बाघिन पर टेलीमेट्री, कैमरा ट्रैप और क्षेत्रीय निगरानी के जरिए गहन नजर रखी जाएगी, जिससे उसकी आवाजाही, अनुकूलन, स्वास्थ्य और व्यवहार का आकलन हो सके। आगे का संवर्धन चरणों में होगा और हर बार आवास तथा शिकार की उपलब्धता, सुरक्षा की तैयारी, आबादी की व्यवहार्यता, निगरानी के नतीजों और विशेषज्ञों की सलाह को परखा जाएगा। मंत्री ने कहा कि बक्सा में बाघ लौटाने का वादा पूरा हुआ और उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तथा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। सफलता का पैमाना छोड़े गए बाघों की संख्या नहीं, बल्कि रिजर्व में स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाली आत्मनिर्भर आबादी बनना है।

महत्वपूर्ण तथ्य

रिजर्वबक्सा टाइगर रिजर्व, पश्चिम बंगाल
छोड़ा गया वन्यजीवटी138 के नाम से पहचानी गई बाघिन
कहां से लाई गईवाल्मीकि टाइगर रिजर्व, बिहार
उपस्थित गणमान्यकेंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी
अवसरदेश में वन्यजीव सप्ताह 2026 की शुरुआत
टाइगर रिजर्व घोषित1983
परियोजनाबाघ संवर्धन एवं पुनरुद्धार परियोजना, एनटीसीए व डब्ल्यूआईआई के साथ 2018 से
शिकार आधार800 से अधिक चीतल छोड़े गए
घास के मैदानआठ वर्षों में लगभग 380 हेक्टेयर बहाल
जुड़ी समितियां64 पर्यावरण विकास एवं संयुक्त वन प्रबंधन समितियां
क्षेत्रीय जुड़ावउत्तर बंगाल, असम और भूटान
निगरानी के साधनटेलीमेट्री, कैमरा ट्रैप और क्षेत्रीय निगरानी

परीक्षा की दृष्टि से

रिजर्व यानी पश्चिम बंगाल का बक्सा और बाघिन का स्रोत यानी बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, साथ में उसकी पहचान टी138 याद रखें। यह भी याद रखें कि बक्सा 1983 में टाइगर रिजर्व बना, यह भूटान और असम से जुड़ा है तथा बाघ संवर्धन एवं पुनरुद्धार परियोजना एनटीसीए और डब्ल्यूआईआई के साथ 2018 से चल रही है। आंकड़ों में 800 से अधिक चीतल, लगभग 380 हेक्टेयर घास के मैदान और 64 समितियां महत्वपूर्ण हैं। कैमरा ट्रैप के वर्ष 2021, 2023 और 2026 हैं तथा 2023 की तस्वीर का मिलान मानस टाइगर रिजर्व से हुआ।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के तहत बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई बाघिन किस रिजर्व से लाई गई थी?

  1. A.मानस टाइगर रिजर्व, असम
  2. B.वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, बिहार
  3. C.सुंदरबन टाइगर रिजर्व, पश्चिम बंगाल
  4. D.कान्हा टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, बिहार

व्याख्या

सही उत्तर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, बिहार है। टी138 के नाम से पहचानी गई बाघिन को पारिस्थितिक, पशु चिकित्सा और प्रबंधन मानकों के आकलन तथा निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन के बाद बिहार के वाल्मीकि से पश्चिम बंगाल के बक्सा लाया गया, और पर्यावरण मंत्री ने इस कार्य में सहयोग के लिए बिहार के मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। विकल्प A यानी असम का मानस टाइगर रिजर्व भ्रमित करने वाला विकल्प है, क्योंकि बक्सा के कैमरा ट्रैप में दर्ज एक बाघ का मिलान मानस के बाघ से हुआ था, लेकिन वह क्षेत्रों के बीच स्वाभाविक आवाजाही का प्रमाण था, इस बाघिन का स्रोत नहीं। विकल्प C यानी सुंदरबन उसी राज्य में है जिसमें बक्सा है, पर उसका इस पुनर्वास से कोई संबंध नहीं बताया गया। विकल्प D यानी कान्हा मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध रिजर्व है और इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। याद रखने योग्य जोड़ी यही है कि स्रोत बिहार का वाल्मीकि और गंतव्य पश्चिम बंगाल का बक्सा है।

Q2.पर्यावरणमध्यम

बक्सा को किस वर्ष टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था?

  1. A.1973
  2. B.1983
  3. C.1992
  4. D.2018
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1983

व्याख्या

सही उत्तर 1983 है। उत्तर बंगाल के महत्वपूर्ण बाघ क्षेत्र के रूप में लंबे समय से पहचाने जाने वाले बक्सा को इसी वर्ष टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला, और यह एक बड़े पारिस्थितिक क्षेत्र का हिस्सा है जो भूटान तथा असम के जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से जुड़ा है। विकल्प A आकर्षक लगता है, क्योंकि वह वर्ष देश के राष्ट्रीय बाघ कार्यक्रम की शुरुआत से जुड़ा है, पर उस समय अधिसूचित रिजर्वों में बक्सा शामिल नहीं था। विकल्प C रिजर्व से जुड़े किसी पड़ाव का वर्ष नहीं है। विकल्प D यानी 2018 वह वर्ष है जिससे पश्चिम बंगाल सरकार राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ बाघ संवर्धन एवं पुनरुद्धार परियोजना संयुक्त रूप से चला रही है, इसलिए वह पुनरुद्धार प्रयास की शुरुआत का वर्ष है, रिजर्व की अधिसूचना का नहीं। इन दोनों वर्षों को अलग रखना ही इस प्रश्न की कुंजी है।

Q3.पर्यावरणकठिन

बक्सा टाइगर रिजर्व में शिकार आधार मजबूत करने के लिए कितने घास के मैदान बहाल या परिवर्तित किए गए?

  1. A.लगभग 180 हेक्टेयर
  2. B.लगभग 280 हेक्टेयर
  3. C.लगभग 380 हेक्टेयर
  4. D.लगभग 800 हेक्टेयर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. लगभग 380 हेक्टेयर

व्याख्या

सही उत्तर लगभग 380 हेक्टेयर है, जो बक्सा में बाघों के पुनरुद्धार की तैयारी के तहत पिछले आठ वर्षों में बहाल या परिवर्तित किए गए। इसके साथ शिकार आधार बढ़ाने के लिए 800 से अधिक चीतल भी छोड़े गए और वैज्ञानिक निगरानी में शिकार की संख्या बढ़ने का रुझान दिखा, इसी आधार पर रिजर्व को पहली बाघिन छोड़ने के लिए तैयार माना गया। विकल्प A और B इसके निकट पर कम आंकड़े हैं, जिन्हें परीक्षक यह परखने के लिए रखते हैं कि परीक्षार्थी ने संख्या अनुमान से पढ़ी है या ध्यान से। विकल्प D एक ही कहानी के दो आंकड़ों को मिला देता है, क्योंकि 800 छोड़े गए चीतल की संख्या है, घास के मैदान का क्षेत्र नहीं। दोहराते समय हेक्टेयर को घास के मैदान से और संख्या को चीतल से जोड़कर रखें।

Q4.पर्यावरणआसान

बक्सा में बाघिन को छोड़ने के साथ किस आयोजन की शुरुआत हुई?

  1. A.वन्यजीव सप्ताह
  2. B.राष्ट्रीय वन शहीद दिवस
  3. C.विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस
  4. D.राष्ट्रीय वन्यजीव गणना सप्ताह
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. वन्यजीव सप्ताह

व्याख्या

सही उत्तर वन्यजीव सप्ताह है। बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघिन को छोड़ने को देश में वन्यजीव सप्ताह की सटीक शुरुआत बताया गया और इसी के साथ रिजर्व के लिए चरणबद्ध बाघ पुनर्वास कार्यक्रम का पहला चरण भी आरंभ हुआ। विकल्प B यानी राष्ट्रीय वन शहीद दिवस उन लोगों की स्मृति से जुड़ा है जिन्होंने वनों और वन्यजीवों की रक्षा में प्राण दिए, और वह एक अलग आयोजन है जिसका इस कार्यक्रम से संबंध नहीं है। विकल्प C यानी विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन है और यहां उसका उल्लेख नहीं है। विकल्प D कोई आयोजन ही नहीं है, क्योंकि वन्यजीव गणना जानवरों की संख्या आंकने की प्रक्रिया है, पंचांग में दर्ज सप्ताह नहीं, और इस बाघिन की निगरानी टेलीमेट्री, कैमरा ट्रैप तथा क्षेत्रीय निरीक्षण से होगी। इस घटना को वन्यजीव सप्ताह और पहले पुनर्वास चरण से जोड़कर याद रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई बाघिन कहां से लाई गई थी?

बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से। टी138 के नाम से पहचानी गई इस बाघिन को पारिस्थितिक, पशु चिकित्सा और प्रबंधन संबंधी मानकों के आकलन के बाद पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व लाया गया।

बक्सा को टाइगर रिजर्व कब घोषित किया गया था?

1983 में। यह लंबे समय से उत्तर बंगाल का महत्वपूर्ण बाघ क्षेत्र रहा है और भूटान तथा असम के जंगलों व संरक्षित क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है।

बक्सा की बाघ संवर्धन परियोजना में कौन संस्थान सहयोग कर रहे हैं?

पश्चिम बंगाल सरकार इसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ 2018 से संयुक्त रूप से चला रही है।

बक्सा में शिकार आधार मजबूत करने के लिए क्या किया गया?

शिकार आधार बढ़ाने के लिए 800 से अधिक चीतल छोड़े गए और आठ वर्षों में लगभग 380 हेक्टेयर घास के मैदान बहाल या परिवर्तित किए गए, जिससे निगरानी में शिकार की संख्या बढ़ती दिखी।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS