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GK24

मध्य प्रदेश 2020 पिछले वर्ष के GK प्रश्न

मध्य प्रदेश 2020 में पूछे गए GK प्रश्न, उत्तर और व्याख्या सहित।

पिछले वर्ष के प्रश्न

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2020 Official Papeकठिन

भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत भारतीय विधानमंडल का अंतिम चुनाव किस वर्ष हुआ था?

  1. A.1930
  2. B.1934
  3. C.1945
  4. D.1947
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1945

व्याख्या

सही उत्तर है C, 1945। भारत सरकार अधिनियम 1919 के अंतर्गत बनी केंद्रीय विधानसभा का अंतिम चुनाव 1945 की सर्दियों में हुआ, जब दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हो चुका था और ब्रिटेन की लेबर सरकार भारतीय नेताओं से समझौते की दिशा में बढ़ रही थी। कांग्रेस ने लगभग सभी सामान्य सीटें जीतीं और मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए आरक्षित लगभग सभी सीटें, और इसी परिणाम ने 1946 की वार्ताओं, कैबिनेट मिशन योजना तथा प्रांतीय विधानमंडलों द्वारा चुनी गई संविधान सभा की दिशा तय की। 1935 के अधिनियम ने प्रांतों का पुनर्गठन किया, परंतु केंद्रीय विधानमंडल स्वतंत्रता तक 1919 के अधिनियम के अंतर्गत ही काम करता रहा। A गलत है क्योंकि 1930 में, जो सविनय अवज्ञा आंदोलन का वर्ष था, कोई केंद्रीय चुनाव नहीं हुआ। B गलत है क्योंकि 1934 का चुनाव इससे पहले का था, अंतिम नहीं। D गलत है क्योंकि 1947 में स्वतंत्रता मिली और कोई नया केंद्रीय चुनाव नहीं हुआ। परीक्षा टिप: 1945-46 के चुनावों को विभाजन से पहले के तीखे सांप्रदायिक बँटवारे से जोड़कर याद रखें।

Q2.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2020 Official Papeमध्यम

किसी भी पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का पिरामिड कैसा होता है?

  1. A.सदैव सीधा
  2. B.सीधा और उल्टा दोनों हो सकता है
  3. C.सदैव उल्टा
  4. D.इनमें से कोई नहीं
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सदैव सीधा

व्याख्या

सही उत्तर है A, सदैव सीधा। ऊर्जा का पिरामिड सदैव सीधा होता है, क्योंकि खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक चरण पर ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है, इसलिए हर ऊपरी पोषी स्तर के पास अपने नीचे वाले स्तर से कम ऊर्जा बचती है। एक स्तर की ऊर्जा का लगभग दस प्रतिशत ही अगले स्तर तक पहुँचता है, जिसे लिंडेमान का दस प्रतिशत नियम कहते हैं, और ऊर्जा का यह प्रवाह एकदिशीय है तथा कभी उलट नहीं सकता। इसी कारण ऊर्जा का पिरामिड कभी उल्टा नहीं हो सकता, जबकि संख्या या जैवभार का पिरामिड कभी-कभी उल्टा हो सकता है - तालाब में सूक्ष्म पादप प्लवकों का जैवभार उन्हें खाने वाली मछलियों से कम होता है, और एक बड़ा वृक्ष अपने से कहीं अधिक कीटों का पोषण करता है। B गलत है क्योंकि ऊर्जा के पिरामिड का उल्टा होना संभव नहीं है। C गलत है क्योंकि यह उसका ठीक विपरीत कथन है। D गलत है क्योंकि A नियम को सही बताता है। परीक्षा टिप: ऊर्जा पिरामिड सदैव सीधा; संख्या और जैवभार पिरामिड उल्टे हो सकते हैं।

Q3.भूगोलपूछा गया: मध्य प्रदेश · General Studies 2020आसान

अधात्विक खनिज है:

  1. A.संगमरमर
  2. B.मैंगनीज
  3. C.चाँदी
  4. D.सीसा
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. संगमरमर

व्याख्या

सही उत्तर है A, संगमरमर। संगमरमर अधात्विक खनिज है, अर्थात् इससे कोई धातु नहीं निकाली जाती; इसका उपयोग भवन-निर्माण और मूर्तिकला के पत्थर के रूप में होता है और राजस्थान का मकराना संगमरमर ताजमहल में लगा है। खनिजों को सबसे पहले धात्विक और अधात्विक में बाँटा जाता है। धात्विक खनिज गलाने पर धातु देता है और वह लौह (जिसमें लोहा हो) या अलौह होता है। अधात्विक खनिज में इस प्रकार की धातु नहीं होती; चूना पत्थर, अभ्रक, जिप्सम, डोलोमाइट, संगमरमर और सेंधा नमक इसके सामान्य उदाहरण हैं। संगमरमर स्वयं ताप और दबाव से बदला हुआ चूना पत्थर है। B गलत है क्योंकि मैंगनीज लौह धात्विक खनिज है, जो इस्पात को कठोर बनाने तथा शुष्क सेल और रंग बनाने में काम आता है। C गलत है क्योंकि चाँदी अलौह धात्विक खनिज है, जो आभूषण, सिक्कों और विद्युत संपर्कों में लगती है। D गलत है क्योंकि सीसा भी अलौह धातु है, जो बैटरी और चादर बनाने में काम आता है। परीक्षा टिप: धात्विक – लौह (लोहा, मैंगनीज), अलौह (ताँबा, सीसा, जस्ता, चाँदी); अधात्विक – चूना पत्थर, अभ्रक, जिप्सम, संगमरमर।

Q4.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: मध्य प्रदेश · General Studies 2020मध्यम

राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्णय से व्यथित व्यक्ति कितने दिनों के भीतर उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है?

  1. A.तीस दिन
  2. B.पैंतालीस दिन
  3. C.साठ दिन
  4. D.नब्बे दिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. नब्बे दिन

व्याख्या

सही उत्तर है D, नब्बे दिन। राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 22 के अनुसार अधिकरण के किसी अवार्ड, आदेश या निर्णय से व्यथित व्यक्ति उसकी सूचना मिलने की तारीख से नब्बे दिन के भीतर उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है; देर का पर्याप्त कारण होने पर न्यायालय बाद में भी अपील स्वीकार कर सकता है। अधिकरण की स्थापना 2010 में इसी उद्देश्य से हुई थी कि पर्यावरण से जुड़े मामले जल्दी सुने जाएँ; इसकी प्रधान पीठ नई दिल्ली में है और इससे छह महीने में निर्णय की अपेक्षा की जाती है। A गलत है क्योंकि तीस दिन की अवधि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे निकाय के आदेश के विरुद्ध अधिकरण में जाने के लिए है, उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए नहीं। B और C गलत हैं क्योंकि अधिनियम में ऐसी अपील के लिए पैंतालीस या साठ दिन की कोई अवधि तय नहीं है। परीक्षा टिप: एनजीटी अधिनियम 2010 – अधिकरण में अपील तीस दिन, उच्चतम न्यायालय में अपील नब्बे दिन।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC General Studies 2020 Official Papeमध्यम

"व्योममित्र" नामक भारतीय रोबोट को किस संस्था ने विकसित किया है?

  1. A.सी-डैक, पुणे
  2. B.इसरो
  3. C.टीआईएफआर
  4. D.डीआरडीओ
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. इसरो

व्याख्या

सही उत्तर है B, इसरो। व्योममित्र एक अर्ध-मानवाकार रोबोट है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बनाया और जनवरी 2020 में सार्वजनिक रूप से दिखाया। इसका नाम संस्कृत के दो शब्दों से बना है, व्योम अर्थात आकाश या अंतरिक्ष और मित्र अर्थात दोस्त। यह रोबोट गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की बिना चालक दल वाली परीक्षण उड़ान में भेजा जाना है, जहाँ यह चालक की सीट पर बैठकर पैनल चलाएगा, कैबिन की स्थिति पर नज़र रखेगा और ज़मीन के केंद्र से बात करेगा, ताकि अंतरिक्ष यात्रियों के उड़ान भरने से पहले क्रू मॉड्यूल का व्यवहार समझा जा सके। विकल्प A गलत है, क्योंकि पुणे का सी-डैक परम श्रेणी के सुपर कंप्यूटर बनाता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि मुंबई का टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान भौतिकी और गणित में मूल शोध करता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि डीआरडीओ मिसाइल, रडार और रक्षा प्रणालियाँ बनाता है। परीक्षा टिप: गगनयान और व्योममित्र इसरो के, परम सी-डैक का।

Q6.सामान्य विज्ञानपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 12 Jan 2020मध्यम

एक ही पौधे के एक पुष्प के परागकोश से परागकण का उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरण कहलाता है

  1. A.स्वक युग्मन
  2. B.सजातपुष्पी परागण
  3. C.पर-परागण
  4. D.उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सजातपुष्पी परागण

व्याख्या

सही उत्तर है B, सजातपुष्पी परागण। जब किसी पौधे के एक पुष्प के परागकोश से परागकण उसी पौधे के दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं, तो इसे सजातपुष्पी परागण (गाइटोनोगैमी) कहते हैं। होने के ढंग में यह पर-परागण जैसा है, क्योंकि पराग को कोई बाहरी वाहक, जैसे कीट या हवा, ले जाता है; पर आनुवंशिक रूप से यह स्व-परागण जैसा ही है, क्योंकि पराग उसी पौधे का होता है और कोई नया जीन नहीं लाता। यह शब्द यूनानी शब्द ‘गाइटन’ से बना है, जिसका अर्थ है पड़ोसी; याद रखने का आसान तरीका यही है कि पराग पड़ोसी फूल तक जाता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि स्वक युग्मन (ऑटोगैमी) एक ही पुष्प के भीतर होता है, जहाँ पराग उसी फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचता है, जैसा बंद रहने वाले अनुन्मील्य पुष्पों में होता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि पर-परागण (ज़ीनोगैमी) में पराग किसी दूसरे पौधे के फूल तक जाता है, और यही अकेला प्रकार है जो आनुवंशिक रूप से अलग पराग लाता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस प्रक्रिया का सही नाम सजातपुष्पी परागण ही है। परीक्षा टिप: स्वक युग्मन एक ही फूल, सजातपुष्पी परागण एक ही पौधा, पर-परागण दूसरा पौधा।

Q7.भूगोलपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 12 Jan 2020मध्यम

सूची – I एवं सूची – II को सुमेलित कीजिये एवं नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिये:

सूची – I (खनन क्षेत्र) – सूची – II (खनिज सम्पदा)

1. कालाहांडी – I. सोना

2. जावर – II. तांबा

3. कोलार – III. बॉक्साइट

4. मोसाबनी – IV. जस्ता व सीसा

कूट: 1 2 3 4

  1. A.I II III IV
  2. B.I IV III II
  3. C.III IV I II
  4. D.III II IV I
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. III IV I II

व्याख्या

सही उत्तर है C, III IV I II। ओडिशा का कालाहांडी पूर्वी घाट के बड़े बॉक्साइट भंडारों के लिए जाना जाता है; राजस्थान में उदयपुर के पास जावर भारत की सबसे प्रसिद्ध जस्ता और सीसा खदान है, जहाँ प्राचीन काल से खनन होता आया है; कर्नाटक का कोलार अपनी कोलार स्वर्ण खदानों के लिए प्रसिद्ध है, जो 2001 में बंद होने तक दुनिया की सबसे गहरी सोने की खदानों में थीं; और झारखंड की सिंहभूम ताँबा पट्टी में मोसाबनी ताँबा खनन का बड़ा केंद्र है। पेपर बनाने वाले हर खनिज को एक प्रसिद्ध स्थान से जोड़ना पसंद करते हैं, इसलिए हर खनिज की एक मुख्य जगह याद रखना जल्दी फ़ायदा देता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें कालाहांडी को सोना और कोलार को बॉक्साइट दिया गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें भी कालाहांडी को बॉक्साइट की जगह सोना और कोलार को सोने की जगह बॉक्साइट दिया गया है। विकल्प D गलत है, क्योंकि इसमें जावर को ताँबे से और कोलार को जस्ता-सीसा से जोड़ा गया है। परीक्षा टिप: कालाहांडी बॉक्साइट, जावर जस्ता और सीसा, कोलार सोना, मोसाबनी ताँबा।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 12 Jan 2020आसान

ब्रिटिश भारत में साम्प्रदायिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था निम्नलिखित में से किस अधिनियम द्वारा की गई थी?

  1. A.भारतीय कौंसिल अधिनियम, 1892
  2. B.मिंटो-मार्ले सुधार, 1909
  3. C.मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919
  4. D.भारत सरकार अधिनियम, 1935
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मिंटो-मार्ले सुधार, 1909

व्याख्या

सही उत्तर है B, मिंटो-मार्ले सुधार, 1909। 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम, यानी मार्ले-मिंटो सुधार, ने पहली बार मुसलमानों को पृथक निर्वाचन दिया, जिसमें मुस्लिम सदस्यों को केवल मुस्लिम मतदाता ही चुन सकते थे। इससे पहले 1906 में आगा ख़ाँ के नेतृत्व में शिमला प्रतिनिधिमंडल ने लॉर्ड मिंटो से अलग प्रतिनिधित्व की माँग की थी और उसी वर्ष मुस्लिम लीग बनी थी। इसी कारण लॉर्ड मिंटो को ‘सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक’ कहा जाता है। इस अधिनियम ने विधान परिषदों का आकार भी बढ़ाया और सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा वायसराय की कार्यकारी परिषद में पहुँचने वाले पहले भारतीय बने। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1892 के अधिनियम ने केवल अप्रत्यक्ष चुनाव और बजट पर चर्चा का अधिकार दिया। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1919 के अधिनियम ने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व को सिखों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपीयों तक बढ़ाया, उसकी शुरुआत नहीं की। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1935 के अधिनियम ने इसे दलित वर्गों, महिलाओं और श्रमिकों तक और फैलाया। परीक्षा टिप: पृथक निर्वाचन 1909 में मिंटो से शुरू हुआ, 1919 और 1935 में इसका विस्तार हुआ।

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