राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्णय से व्यथित व्यक्ति कितने दिनों के भीतर उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है?
- A.तीस दिन
- B.पैंतालीस दिन
- C.साठ दिन
- D.नब्बे दिन
सही उत्तर
D. नब्बे दिन
व्याख्या
सही उत्तर है D, नब्बे दिन। राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 22 के अनुसार अधिकरण के किसी अवार्ड, आदेश या निर्णय से व्यथित व्यक्ति उसकी सूचना मिलने की तारीख से नब्बे दिन के भीतर उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है; देर का पर्याप्त कारण होने पर न्यायालय बाद में भी अपील स्वीकार कर सकता है। अधिकरण की स्थापना 2010 में इसी उद्देश्य से हुई थी कि पर्यावरण से जुड़े मामले जल्दी सुने जाएँ; इसकी प्रधान पीठ नई दिल्ली में है और इससे छह महीने में निर्णय की अपेक्षा की जाती है। A गलत है क्योंकि तीस दिन की अवधि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे निकाय के आदेश के विरुद्ध अधिकरण में जाने के लिए है, उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए नहीं। B और C गलत हैं क्योंकि अधिनियम में ऐसी अपील के लिए पैंतालीस या साठ दिन की कोई अवधि तय नहीं है। परीक्षा टिप: एनजीटी अधिनियम 2010 – अधिकरण में अपील तीस दिन, उच्चतम न्यायालय में अपील नब्बे दिन।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंNGT का पूरा नाम क्या है?
- A.नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (राष्ट्रीय हरित अधिकरण)
- B.नेशनल जनरल ट्राइब
- C.न्यू जनरल ट्रिब्यूनल
- D.नेशनल ग्रीन ट्राइब
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (राष्ट्रीय हरित अधिकरण)
व्याख्या
सही उत्तर है A, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (राष्ट्रीय हरित अधिकरण)। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत हुई, ताकि पर्यावरण, वन, जल, वायु और जैव विविधता से जुड़े मामलों का निपटारा तेजी से हो सके; ऐसा विशेष पर्यावरण न्यायालय बनाने वाले पहले देशों में भारत भी शामिल हो गया। इसकी प्रधान पीठ नई दिल्ली में है और अन्य पीठें भोपाल, पुणे, कोलकाता तथा चेन्नई में हैं; इससे अपेक्षा की जाती है कि वह मामला दायर होने के छह महीने के भीतर निपटा दे। अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता से बँधा नहीं है और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों पर चलता है, जिसमें प्रदूषक भुगतान करे, पूर्वोपाय तथा संपोषणीय विकास के सिद्धांत लागू होते हैं। यह मुआवजा, पर्यावरण की बहाली और प्रदूषण फैलाने वाली इकाई को बंद करने के आदेश दे सकता है। B, C और D गलत हैं क्योंकि ये गढ़े हुए नाम हैं; नाम में ट्रिब्यूनल अर्थात् अधिकरण आता है, ट्राइब नहीं। परीक्षा टिप: एनजीटी अधिनियम 2010, प्रधान पीठ नई दिल्ली, छह महीने में निर्णय।
निम्नलिखित में से कौन-सी जलग्रहण विकास परियोजना केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित है और ग्रामीण आबादी को जल संरक्षण में सक्षम बनाने के लिए चलाई गई है?
- A.अरवरी पानी संसद
- B.हरियाली
- C.जल क्रांति अभियान
- D.नीरू-मीरू
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हरियाली
व्याख्या
सही उत्तर है B, हरियाली। हरियाली केंद्र द्वारा प्रायोजित जलग्रहण विकास परियोजना है, जिसे ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 2003 में शुरू किया था। इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि काम की योजना और उसका निर्माण गाँव की पंचायत खुद करती है। इसके तहत ग्राम पंचायतें चेक डैम, खेत तालाब, रिसाव टैंक और कंटूर बंध बनवाती हैं, ताकि बारिश का पानी वहीं रुक जाए जहाँ वह गिरा है। इससे कुएँ रिचार्ज होते हैं और सूखी जमीन वाले किसानों को दूसरी फसल के लिए पानी मिल जाता है। जलग्रहण समिति ग्राम सभा चुनती है और गाँव वाले लागत तथा रखरखाव में हिस्सा देते हैं। A गलत है क्योंकि अरवरी पानी संसद राजस्थान के अलवर में अरवरी नदी के गाँवों की अपनी पहल है, केंद्रीय योजना नहीं। C गलत है क्योंकि जल क्रांति अभियान बाद में चला जल जागरूकता अभियान था। D गलत है क्योंकि नीरू-मीरू आंध्र प्रदेश का राज्य कार्यक्रम था। परीक्षा टिप: हरियाली–2003, केंद्रीय और पंचायत संचालित; नीरू-मीरू–आंध्र प्रदेश; अरवरी पानी संसद–राजस्थान।
OTEC विद्युत संयंत्र स्थापित करने के लिए समुद्र की ऊपरी परतों और गहरी परतों के बीच तापमान का अंतर कितना होना चाहिए?
- A.40°C
- B.250°C
- C.50°C
- D.20°C
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 20°C
व्याख्या
सही उत्तर है D, 20°C। महासागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण संयंत्र वहीं काम करता है जहाँ सतह का गर्म जल गहराई से लाए गए ठंडे जल से कम से कम लगभग 20 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो।
OTEC इसी अंतर को अपने ऊष्मा स्रोत की तरह उपयोग करता है। सतह का गर्म जल अमोनिया जैसे कम क्वथनांक वाले द्रव को उबालता है और बनी वाष्प टरबाइन घुमाकर बिजली बनाती है; लगभग एक किलोमीटर गहराई से खींचा गया ठंडा जल इस वाष्प को फिर द्रव में बदल देता है और चक्र दोहराया जाता है। 20 डिग्री का अंतर इसलिए जरूरी है कि इससे कम अंतर में पंप चलाने के बाद बाहर भेजने योग्य बिजली नहीं बचती। ऐसी दशाएँ उष्णकटिबंधीय समुद्रों में मिलती हैं और भारत ने लक्षद्वीप तथा अंडमान के पास OTEC का परीक्षण किया है।
विकल्प A गलत है क्योंकि सतह और गहरे समुद्र के बीच 40 डिग्री का अंतर नहीं होता। विकल्प B गलत है क्योंकि 250 डिग्री भट्ठी का ताप है, समुद्र का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि 50 डिग्री का अंतर किसी भी प्राकृतिक समुद्र में नहीं मिलता।
परीक्षा टिप: OTEC के लिए सतह और गहरे जल में लगभग 20°C का अंतर चाहिए और यह उष्णकटिबंधीय समुद्रों में सबसे उपयुक्त है।
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में 2016 का किगाली संशोधन किसमें चरणबद्ध कमी की व्यवस्था करता है?
- A.क्लोरोफ्लोरो कार्बन
- B.हाइड्रोफ्लोरो कार्बन
- C.सल्फर डाइऑक्साइड
- D.मेथिल ब्रोमाइड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हाइड्रोफ्लोरो कार्बन
व्याख्या
सही उत्तर B, हाइड्रोफ्लोरो कार्बन है। प्रशीतन और वातानुकूलन में क्लोरोफ्लोरो कार्बन के स्थान पर हाइड्रोफ्लोरो कार्बन अपनाए गए क्योंकि वे ओज़ोन परत को हानि नहीं पहुँचाते, परंतु वे बहुत प्रबल ग्रीनहाउस गैस निकले, इसलिए 2016 के किगाली संशोधन ने उन्हें उपयोग घटाने की समय सारणी के साथ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के दायरे में ले लिया। विकल्प A गलत है क्योंकि क्लोरोफ्लोरो कार्बन 1987 के मूल प्रोटोकॉल में ही शामिल थे और उनका उत्पादन उसी के अंतर्गत समाप्त किया जा चुका है। विकल्प C गलत है क्योंकि अम्लीय वर्षा का मुख्य कारण सल्फर डाइऑक्साइड राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता कानूनों और उत्सर्जन मानकों से नियंत्रित होता है, इस संधि से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि मृदा के धूमन में प्रयुक्त मेथिल ब्रोमाइड भी ओज़ोन क्षयकारी पदार्थों की मूल सूची का भाग है। यहाँ यही परखा जा रहा है कि किगाली एक ओज़ोन संधि के माध्यम से जलवायु गैस पर काम करता है।
ओज़ोन परत संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय दिवस किस दिन मनाया जाता है?
- A.5 जून
- B.22 अप्रैल
- C.16 सितंबर
- D.2 दिसंबर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 16 सितंबर
व्याख्या
सही उत्तर C, 16 सितंबर है। यह दिवस 1987 में ओज़ोन क्षयकारी पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर की स्मृति में है और हर वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित विषय के साथ मनाया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पाँच जून विश्व पर्यावरण दिवस है, जो 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन के आरंभ की याद दिलाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि बाईस अप्रैल पृथ्वी दिवस है। विकल्प D गलत है क्योंकि दो दिसंबर भारत में राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की स्मृति में है। पर्यावरण खंड इन चारों तिथियों को प्रायः एक ही प्रश्न में रखता है, इसलिए इन्हें जैव विविधता के लिए बाईस मई और आर्द्रभूमियों के लिए दो फरवरी के साथ एक समूह में याद कीजिए।