यदि अमोनियम आयन की संयोजकता (+1) और कार्बोनेट ऋणायन की संयोजकता (-2) है, तो अमोनियम कार्बोनेट का सही आण्विक सूत्र निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.(NH₄)₂CO₃
- B.NH₄(CO₃)₂
- C.(NH₃)₂CO₃
- D.NH₄CO₃
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, (NH₄)₂CO₃। -2 आवेश वाले एक कार्बोनेट आयन को संतुलित करने के लिए +1 आवेश वाले दो अमोनियम आयन चाहिए।
आयनिक यौगिक का सूत्र लिखने के लिए दोनों आयनों की संयोजकता को आपस में बदल दिया जाता है और सबसे छोटा पूर्ण संख्या अनुपात रखा जाता है। अमोनियम (NH₄⁺) की संयोजकता 1 और कार्बोनेट (CO₃²⁻) की 2 है, इसलिए हर एक CO₃ के लिए दो NH₄ चाहिए। जो बहुपरमाणुक आयन एक से अधिक बार आता है, उसे कोष्ठक में रखकर संख्या बाहर लिखी जाती है, जिससे (NH₄)₂CO₃ बनता है। अमोनियम कार्बोनेट सफेद ठोस है जो अमोनिया छोड़ता है; पहले इसका उपयोग स्मेलिंग सॉल्ट और बेकिंग में खमीर उठाने के लिए होता था।
B गलत है: इसमें एक अमोनियम के लिए दो कार्बोनेट हैं, जिससे कुल आवेश शून्य नहीं, -3 हो जाता है।
C गलत है: NH₃ उदासीन अमोनिया है, अमोनियम आयन नहीं।
D गलत है: एक NH₄⁺ एक CO₃²⁻ को संतुलित नहीं कर सकता; कुल आवेश -1 रहता है।
परीक्षा टिप: संयोजकता आपस में बदलें और दोहराए गए बहुपरमाणुक आयन को कोष्ठक में लिखें, जैसे (NH₄)₂SO₄ और Ca(OH)₂।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा कोशिकीय प्रक्रियाओं के लिए 'ऊर्जा मुद्रा' है?
- A.ग्लूकोज़
- B.ATP
- C.ADP
- D.पाइरुविक अम्ल
उत्तर देखें
एडिनोसिन ट्राइफ़ॉस्फ़ेट अपने फ़ॉस्फ़ेट आबंधों में ऊर्जा संचित रखता है और कोशिका को जहाँ ज़रूरत हो वहाँ उसे मुक्त करता है, इसलिए इसे कोशिका की ऊर्जा मुद्रा कहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तनु HCl के साथ अभिक्रिया करने वाली धातुओं का सही अभिक्रियाशीलता क्रम निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- A.Mg > Al > Zn > Fe
- B.Mg < Al < Zn < Fe
- C.Mg > Zn > Fe > Al
- D.Fe > Mg > Al > Zn
उत्तर देखें
सक्रियता श्रेणी में ये धातुएँ इसी क्रम में हैं, और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन निकालने की इनकी तीव्रता भी इसी क्रम में है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लौह (आयरन) की कमी से क्या होता है?
- A.एनीमिया (रक्ताल्पता)
- B.स्कर्वी
- C.रिकेट्स
- D.हैज़ा
उत्तर देखें
हीमोग्लोबिन बनाने के लिए लौह ज़रूरी है, इसलिए लौह की कमी से हीमोग्लोबिन कम बनता है और रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता घट जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तरंगों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. यदि माध्यम के कण तरंग की गति की दिशा में गति करते हैं, तो तरंग अनुदैर्ध्य तरंग कहलाती है। 2. यदि माध्यम के कण तरंग की गति की दिशा के लंबवत गति करते हैं, तो तरंग अनुप्रस्थ तरंग कहलाती है। 3. अनुप्रस्थ तरंगों में माध्यम के आकार में परिवर्तन हो सकता है, जबकि अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम के घनत्व में परिवर्तन होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 1
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
तीनों कथन दोनों प्रकार की यांत्रिक तरंगों में कणों की गति का सही वर्णन करते हैं। अनुदैर्ध्य तरंग में, जैसे हवा में ध्वनि, कण उसी दिशा में आगे-पीछे कंपन करते हैं जिसमें तरंग चलती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कागज़ निर्माण में कच्चे माल का गोंद-निष्कासन (डीगमिंग) किसके द्वारा किया जाता है?
- A.सल्फ़्यूरिक अम्ल
- B.विरंजक चूर्ण
- C.कास्टिक सोडा
- D.नाइट्रिक अम्ल
उत्तर देखें
कागज़ बनाने में कच्चे वनस्पति पदार्थ को कास्टिक सोडा के साथ पकाया जाता है, जो सेल्यूलोज़ रेशों को आपस में बाँधने वाले गोंद, रेज़िन और लिग्निन को घोल देता है।
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