वैरिग्नन प्रमेय के रूप में कहे जाने वाले आघूर्णों के सिद्धांत से संबंधित दो कथन दिए हैं। कथन एक: प्रमेय कहता है कि किसी बल के आघूर्ण का वर्ग उसके घटकों के आघूर्णों के वर्गों के योग के बराबर होता है। कथन दो: वैरिग्नन प्रमेय लगाने के लिए बल निकाय समतलीय अथवा त्रिविम हो सकता है, परंतु वह संगामी होना चाहिए। इन कथनों को सत्य या असत्य बताकर सही उत्तर चुनिए।
- A.कथन एक और कथन दो दोनों असत्य हैं
- B.कथन एक और कथन दो दोनों सत्य हैं
- C.कथन एक सत्य और कथन दो असत्य है
- D.कथन एक असत्य और कथन दो सत्य है
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, कथन एक असत्य और कथन दो सत्य है। वैरिग्नन प्रमेय कहता है कि किसी बिंदु के परितः किसी बल का आघूर्ण उसी बिंदु के परितः उसके घटकों के आघूर्णों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है; यह आघूर्णों की बात करता है, उनके वर्गों की नहीं, इसलिए कथन एक जैसा लिखा है वैसा असत्य है। कथन दो सत्य है: यह प्रमेय एक ही बिंदु पर लगने वाले बलों के निकाय के लिए सिद्ध किया जाता है, अतः बल संगामी होने चाहिए, जबकि वे एक समतल में हों या त्रिविम रूप से फैले हों, दोनों चलता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि वह सही कथन दो को भी असत्य कहता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि वह कथन एक के वर्ग वाले रूप को स्वीकार कर लेता है। विकल्प C दोनों निर्णय उलट देता है और इसलिए दोनों पर गलत है। व्यवहार में यही प्रमेय किसी तिरछे बल को घटकों में तोड़कर सरल घटक से आघूर्ण निकालने की छूट देता है।
पूरा लेख पढ़ें: गुरुत्व केंद्र, बल आघूर्ण और संतुलन: परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंबल आघूर्ण का एसआई मात्रक क्या है?
- A.न्यूटन
- B.न्यूटन मीटर
- C.न्यूटन प्रति मीटर
- D.जूल प्रति सेकंड
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बल आघूर्ण बल और उसकी क्रिया रेखा की घूर्णन अक्ष से लंबवत दूरी का गुणनफल है, इसलिए इसका मात्रक बल के मात्रक गुणा लंबाई के मात्रक अर्थात न्यूटन मीटर होता है और विमीय सूत्र M L वर्ग T की घात ऋण दो है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी दृढ़ पिंड पर लगने वाले तीन बल परिमाण, दिशा और क्रिया रेखा में एक त्रिभुज की तीन भुजाओं से क्रम में निरूपित हैं। ये बल एक युग्म के तुल्य हैं, जिसका आघूर्ण किसके बराबर होगा?
- A.त्रिभुज के क्षेत्रफल का तीन गुना
- B.त्रिभुज के क्षेत्रफल का दो गुना
- C.त्रिभुज का क्षेत्रफल
- D.त्रिभुज के क्षेत्रफल का आधा
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जब तीन बल त्रिभुज की भुजाओं से क्रम में निरूपित होते हैं, तो उनका सदिश योग शून्य होता है, क्योंकि तीन भुजाएं त्रिभुज को बंद कर देती हैं, इसलिए पिंड हटाया नहीं जा सकता; परंतु क्रिया रेखाएं भिन्न हैं, इसलिए निकाय एक युग्म में बदल जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एकसमान वृत्तीय छल्ले का गुरुत्व केंद्र कहां होता है?
- A.छल्ले पर ही, किसी भी बिंदु पर
- B.छल्ले के केंद्र पर, उसके पदार्थ से बाहर
- C.केंद्र से त्रिज्या के एक तिहाई पर
- D.कहीं नहीं, क्योंकि छल्ले का गुरुत्व केंद्र नहीं होता
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गुरुत्व केंद्र वह ज्यामितीय बिंदु है जिससे पिंड का परिणामी भार कार्य करता है, और सममिति के कारण एकसमान छल्ले के लिए वह बिंदु उसका ज्यामितीय केंद्र है, जो छल्ले के भीतर की खाली जगह में पड़ता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी अक्ष के परितः बल द्वारा उत्पन्न आघूर्ण अधिकतम तब होता है जब बल और भुजा के बीच का कोण हो
- A.0 अंश
- B.45 अंश
- C.90 अंश
- D.180 अंश
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बल आघूर्ण का परिमाण r गुणा F गुणा भुजा और बल के बीच के कोण की साइन होता है, और साइन का मान 90 अंश पर सबसे अधिक अर्थात एक होता है, इसलिए तब संपूर्ण बल पिंड को घुमाने में लगता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लंबा पाना कसे नट को छोटे पाने से आसानी से खोल देता है, क्योंकि वह
- A.आघूर्ण भुजा बढ़ाकर आवश्यक बल घटा देता है
- B.नट पर घर्षण घटा देता है
- C.नट पर लगने वाला द्रव्यमान बढ़ा देता है
- D.नट के भार की दिशा बदल देता है
उत्तर देखें
बल आघूर्ण बल और उसकी क्रिया रेखा की अक्ष से लंबवत दूरी का गुणनफल है, इसलिए यदि यह दूरी बढ़ा दी जाए तो उतना ही घुमाव प्रभाव कम बल से पाया जा सकता है; लंबा हत्था वही काम कम जोर में कर देता है।
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