बल आघूर्ण का एसआई मात्रक क्या है?
- A.न्यूटन
- B.न्यूटन मीटर
- C.न्यूटन प्रति मीटर
- D.जूल प्रति सेकंड
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, न्यूटन मीटर। बल आघूर्ण बल और उसकी क्रिया रेखा की घूर्णन अक्ष से लंबवत दूरी का गुणनफल है, इसलिए इसका मात्रक बल के मात्रक गुणा लंबाई के मात्रक अर्थात न्यूटन मीटर होता है और विमीय सूत्र M L वर्ग T की घात ऋण दो है। विकल्प A, न्यूटन, स्वयं बल का मात्रक है, जो धक्का या खिंचाव मापता है, उसका घुमाव प्रभाव नहीं। विकल्प C, न्यूटन प्रति मीटर, पृष्ठ तनाव तथा स्प्रिंग नियतांक जैसी राशियों का मात्रक है, जिनमें बल को लंबाई से गुणा करने के स्थान पर भाग दिया जाता है। विकल्प D, जूल प्रति सेकंड, वाट अर्थात शक्ति का मात्रक है। यहां एक जाल ध्यान रखें: बल आघूर्ण की विमाएं कार्य तथा ऊर्जा जैसी हैं और दोनों न्यूटन मीटर में लिखे जा सकते हैं, परंतु आघूर्ण सदिश और कार्य अदिश है, इसलिए आघूर्ण के लिए जूल कभी प्रयोग नहीं होता।
पूरा लेख पढ़ें: गुरुत्व केंद्र, बल आघूर्ण और संतुलन: परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंकिसी दृढ़ पिंड पर लगने वाले तीन बल परिमाण, दिशा और क्रिया रेखा में एक त्रिभुज की तीन भुजाओं से क्रम में निरूपित हैं। ये बल एक युग्म के तुल्य हैं, जिसका आघूर्ण किसके बराबर होगा?
- A.त्रिभुज के क्षेत्रफल का तीन गुना
- B.त्रिभुज के क्षेत्रफल का दो गुना
- C.त्रिभुज का क्षेत्रफल
- D.त्रिभुज के क्षेत्रफल का आधा
उत्तर देखें
जब तीन बल त्रिभुज की भुजाओं से क्रम में निरूपित होते हैं, तो उनका सदिश योग शून्य होता है, क्योंकि तीन भुजाएं त्रिभुज को बंद कर देती हैं, इसलिए पिंड हटाया नहीं जा सकता; परंतु क्रिया रेखाएं भिन्न हैं, इसलिए निकाय एक युग्म में बदल जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एकसमान वृत्तीय छल्ले का गुरुत्व केंद्र कहां होता है?
- A.छल्ले पर ही, किसी भी बिंदु पर
- B.छल्ले के केंद्र पर, उसके पदार्थ से बाहर
- C.केंद्र से त्रिज्या के एक तिहाई पर
- D.कहीं नहीं, क्योंकि छल्ले का गुरुत्व केंद्र नहीं होता
उत्तर देखें
गुरुत्व केंद्र वह ज्यामितीय बिंदु है जिससे पिंड का परिणामी भार कार्य करता है, और सममिति के कारण एकसमान छल्ले के लिए वह बिंदु उसका ज्यामितीय केंद्र है, जो छल्ले के भीतर की खाली जगह में पड़ता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी अक्ष के परितः बल द्वारा उत्पन्न आघूर्ण अधिकतम तब होता है जब बल और भुजा के बीच का कोण हो
- A.0 अंश
- B.45 अंश
- C.90 अंश
- D.180 अंश
उत्तर देखें
बल आघूर्ण का परिमाण r गुणा F गुणा भुजा और बल के बीच के कोण की साइन होता है, और साइन का मान 90 अंश पर सबसे अधिक अर्थात एक होता है, इसलिए तब संपूर्ण बल पिंड को घुमाने में लगता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लंबा पाना कसे नट को छोटे पाने से आसानी से खोल देता है, क्योंकि वह
- A.आघूर्ण भुजा बढ़ाकर आवश्यक बल घटा देता है
- B.नट पर घर्षण घटा देता है
- C.नट पर लगने वाला द्रव्यमान बढ़ा देता है
- D.नट के भार की दिशा बदल देता है
उत्तर देखें
बल आघूर्ण बल और उसकी क्रिया रेखा की अक्ष से लंबवत दूरी का गुणनफल है, इसलिए यदि यह दूरी बढ़ा दी जाए तो उतना ही घुमाव प्रभाव कम बल से पाया जा सकता है; लंबा हत्था वही काम कम जोर में कर देता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कोई दृढ़ पिंड पूर्ण यांत्रिक संतुलन में कब कहा जाता है?
- A.जब उस पर परिणामी बल शून्य हो
- B.जब उस पर परिणामी आघूर्ण शून्य हो
- C.जब उस पर परिणामी बल और परिणामी आघूर्ण दोनों शून्य हों
- D.जब उसका गुरुत्व केंद्र उसके ज्यामितीय केंद्र पर हो
उत्तर देखें
परिणामी बल शून्य होने से रैखिक संतुलन मिलता है, अर्थात पिंड समग्र रूप से त्वरित नहीं होता, और परिणामी आघूर्ण शून्य होने से घूर्णी संतुलन मिलता है, अर्थात वह घूमना आरंभ नहीं करता; पूर्ण संतुलन के लिए दोनों साथ चाहिए।
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