ट्राई इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर किस प्रावधान के तहत रखता है?
- A.ट्राई अधिनियम, 1997 की धारा 11(1)(ख)
- B.भारतीय तार अधिनियम की धारा 4
- C.ट्राई अधिनियम, 1997 की धारा 14
- D.संविधान का अनुच्छेद 246
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर ट्राई अधिनियम, 1997 की धारा 11(1)(ख) है। इस खंड के उपखंड (vii) और (viii) ट्राई को, अन्य बातों के साथ, इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर रखने और निर्धारित शुल्क लेकर इसे सार्वजनिक निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराने का अधिकार देते हैं। इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर विनियमन, 1999 इसी आधार पर बना, और 2026 का संशोधन इसमें चौथा बदलाव है। विकल्प B, भारतीय तार अधिनियम की धारा 4, रजिस्टर के लिए बताया गया प्रावधान नहीं है। विकल्प C, धारा 14, ट्राई अधिनियम का अलग हिस्सा है और इस अधिकार का स्रोत नहीं है। विकल्प D, संविधान का अनुच्छेद 246, विधायी विषयों के बंटवारे से जुड़ा है और रजिस्टर से इसका कोई संबंध नहीं है। इंटरकनेक्शन का अर्थ वे व्यवस्थाएं हैं जिनसे अलग-अलग नेटवर्क के बीच ट्रैफिक चलता है और विभिन्न कंपनियों के ग्राहक एक-दूसरे से जुड़ पाते हैं।
पूरा लेख पढ़ें: ट्राई: इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर 1 जनवरी 2027 से ऑनलाइन
अभ्यास प्रश्न
ट्राई का इंटरकनेक्ट समझौतों का रजिस्टर (चौथा संशोधन) विनियमन, 2026 किस तारीख से लागू होगा?
- A.6 नवंबर 2026
- B.1 दिसंबर 2026
- C.1 जनवरी 2027
- D.1 अप्रैल 2027
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ट्राई ने संशोधन विनियमन 6 नवंबर 2026 को जारी किए और उनके लागू होने की तारीख 1 जनवरी 2027 तय की।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संशोधित विनियमन के अनुसार ट्राई के इंटरकनेक्ट समझौतों के रजिस्टर के निरीक्षण का नया शुल्क कितना है?
- A.500 रुपये प्रति घंटा
- B.1,000 रुपये प्रति घंटा
- C.1,500 रुपये प्रति घंटा
- D.2,500 रुपये प्रति घंटा
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संशोधन में रजिस्टर की प्रतियों या उद्धरणों के लिए 500 रुपये प्रति पृष्ठ का शुल्क भी तय किया गया है, और ट्राई के अनुसार ये संशोधित शुल्क मोटे तौर पर ट्राई (सूचना तक पहुंच) विनियमन, 2005 के अनुरूप हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एससीडीपीएम 6 के अंतर्गत इस्पात मंत्रालय ने लंबित मामलों की किन श्रेणियों को लिया?
- A.केवल आंतरिक विभागीय लेखा परीक्षा कंडिकाएं
- B.केवल अधिकरणों में लंबित अदालती मामले
- C.सांसदों, प्रधानमंत्री कार्यालय, विशिष्ट व्यक्तियों, मंत्रिमंडल तथा राज्य सरकारों के संदर्भ और सीपीग्राम्स मामले
- D.केवल लंबित निविदा और खरीद फाइलें
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अभियान का उद्देश्य स्वच्छता को संस्थागत बनाना तथा इन विविध श्रेणियों के लंबित मामलों का समाधान करना था, इसलिए इसकी रिपोर्ट में कागजी कार्य और लोक शिकायतें दोनों आती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एससीडीपीएम 6 में कबाड़, ई-कचरे और अनुपयोगी फाइलों के निपटान से इस्पात मंत्रालय ने लगभग कितनी दफ्तरी जगह खाली की?
- A.लगभग 17,501 वर्ग फुट
- B.लगभग 21,164 वर्ग फुट
- C.लगभग 7,501 वर्ग फुट
- D.लगभग 1,750 वर्ग फुट
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मंत्रालय ने बताया कि अभियान के दौरान कबाड़, इलेक्ट्रॉनिक कचरे तथा अनावश्यक फाइलों को हटाकर लगभग इतनी दफ्तरी जगह खाली की गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एससीडीपीएम 6 के दौरान इस्पात मंत्रालय ने कितनी भौतिक फाइलों की समीक्षा की और यह लक्ष्य का कितना हिस्सा रहा?
- A.17,107 फाइलें, लक्ष्य का 95 प्रतिशत
- B.21,164 फाइलें, लक्ष्य का 101 प्रतिशत
- C.17,501 फाइलें, लक्ष्य का 100 प्रतिशत
- D.12,164 फाइलें, लक्ष्य का 110 प्रतिशत
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मंत्रालय ने अभियान के दौरान इतनी भौतिक फाइलों की समीक्षा की और उपलब्धि नियत संख्या से कुछ आगे रही, इसलिए इसे निर्धारित लक्ष्य का 101 प्रतिशत दर्ज किया गया।
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