टेफ्लॉन का उपयोग बेयरिंग बनाने में किया जाता है, क्योंकि इसका
- A.घर्षण गुणांक कम होता है
- B.ऊष्मा अपवहन बेहतर होता है
- C.कम स्थान लगता है
- D.उपरोक्त सभी
सही उत्तर
A. घर्षण गुणांक कम होता है
व्याख्या
सही उत्तर है A, घर्षण गुणांक कम होता है। टेफ्लॉन पॉलिटेट्राफ्लोरोएथिलीन का व्यापारिक नाम है, और इसकी सतह ठोस पदार्थों में सबसे अधिक चिकनी सतहों में से एक है, जिसका घर्षण गुणांक लगभग 0.04 होता है। बेयरिंग का काम है कि शाफ्ट कम से कम रगड़ के साथ घूमे, इसलिए यही चिकनाई टेफ्लॉन को चुनने का कारण है; इसी गुण से ऐसे कई बेयरिंग तेल या ग्रीस के बिना भी चल जाते हैं। यह बहुलक 1938 में रॉय प्लंकेट को संयोग से मिला था, लगभग हर रसायन के प्रति निष्क्रिय रहता है और करीब 260 डिग्री सेल्सियस तक टिकता है, इसीलिए इसे नॉन-स्टिक बर्तनों पर चढ़ाया जाता है और पाइप के चूड़ों पर सीलिंग टेप के रूप में लपेटा जाता है। B गलत है क्योंकि टेफ्लॉन ऊष्मा का कुचालक है, इसलिए इसे ऊष्मा बाहर निकालने के लिए नहीं चुना जाता। C गलत है क्योंकि स्थान की बचत बेयरिंग के डिज़ाइन पर निर्भर करती है, पदार्थ पर नहीं। D गलत है क्योंकि केवल पहला कारण ही सही है। परीक्षा टिप: टेफ्लॉन यानी PTFE, सबसे कम घर्षण वाला नॉन-स्टिक बहुलक।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंतने की मोटाई में वृद्धि किस विभज्योतक से होती है?
- A.शीर्षस्थ विभज्योतक
- B.अंतर्वेशी विभज्योतक
- C.पार्श्व विभज्योतक
- D.स्थायी ऊतक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पार्श्व विभज्योतक
व्याख्या
सही उत्तर C, पार्श्व विभज्योतक है। पार्श्व विभज्योतक, जिसे एधा कहते हैं, तने और जड़ की लंबाई में वलय के रूप में फैला रहता है और विभाजित होकर भीतर की ओर नया जाइलम तथा बाहर की ओर नया फ्लोएम जोड़ता है, जिससे तना वर्ष दर वर्ष मोटा होता जाता है; यही द्वितीयक वृद्धि है और इसी से वृक्ष की काष्ठ बनती है। विकल्प A गलत है क्योंकि शीर्षस्थ विभज्योतक जड़ और प्ररोह के शीर्ष पर रहकर लंबाई बढ़ाता है, जो प्राथमिक वृद्धि है। विकल्प B गलत है क्योंकि अंतर्वेशी विभज्योतक पत्तियों के आधार और पर्वों पर होता है और घास तथा बांस को कटने के बाद पुनः उगने देता है, जिससे भी लंबाई ही बढ़ती है। विकल्प D गलत है क्योंकि स्थायी ऊतक की कोशिकाएं विभाजन की क्षमता खो चुकी होती हैं। तीनों विभज्योतक एक समूह में याद रखें।
निम्नलिखित में से कौन तरल संयोजी ऊतक है?
- A.उपास्थि
- B.रुधिर
- C.उपकला
- D.तंत्रिका ऊतक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रुधिर
व्याख्या
सही उत्तर B, रुधिर है। रुधिर को संयोजी ऊतक इसलिए माना जाता है कि उसकी कोशिकाएं एक आधात्री में पड़ी रहती हैं, और वह आधात्री अर्थात प्लाज्मा तरल होने के कारण उसे तरल संयोजी ऊतक कहा जाता है; लाल कणिकाएं, श्वेत कणिकाएं और बिंबाणु उसी में तैरते हैं और वह गैसों, भोजन, अपशिष्टों तथा हार्मोनों को ढोकर अंगों को आपस में जोड़ता है। विकल्प A गलत है क्योंकि उपास्थि संयोजी ऊतक तो है, पर उसकी आधात्री ठोस और लचीली होती है, तरल नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि उपकला आवरण और आस्तर बनाने वाला ऊतक है जिसकी कोशिकाएं सटी हुई होती हैं और बीच में आधात्री नाममात्र होती है। विकल्प D गलत है क्योंकि तंत्रिका ऊतक न्यूरॉन से बना चार प्रमुख जंतु ऊतकों में अलग प्रकार है। लसीका दूसरा तरल संयोजी ऊतक है।
निम्नलिखित में से कौन सी अनैच्छिक पेशी रेखित भी होती है?
- A.हृदय पेशी
- B.कंकाल पेशी
- C.चिकनी पेशी
- D.द्विशिर भुजा पेशी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. हृदय पेशी
व्याख्या
सही उत्तर A, हृदय पेशी है। हृदय की पेशी सूक्ष्मदर्शी में हल्की और गहरी धारियां दिखाती है, इसलिए वह रेखित है, फिर भी वह इच्छा के अधीन नहीं होती और जीवन भर बिना विश्राम लयबद्ध रूप से संकुचित होती रहती है, इसलिए अनैच्छिक है; यही असामान्य संयोग प्रश्न का आधार बनता है। विकल्प B गलत है क्योंकि कंकाल पेशी रेखित तो है पर ऐच्छिक है और व्यक्ति की इच्छा से चलती है। विकल्प C गलत है क्योंकि चिकनी या अरेखित पेशी, जो आहार नाल, रक्त वाहिनियों और मूत्राशय की भित्ति में होती है, अनैच्छिक तो है पर उसमें धारियां नहीं होतीं। विकल्प D गलत है क्योंकि द्विशिर भुजा पेशी भुजा की एक कंकाल पेशी है और इसलिए ऐच्छिक है। तीन पंक्तियों की तालिका याद रखें: कंकाल रेखित एवं ऐच्छिक, चिकनी अरेखित एवं अनैच्छिक, हृदय रेखित एवं अनैच्छिक।
मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका निम्नलिखित में से कौन सी है?
- A.लाल रुधिर कणिका
- B.पेशी कोशिका
- C.तंत्रिका कोशिका
- D.अस्थि कोशिका
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. तंत्रिका कोशिका
व्याख्या
सही उत्तर C, तंत्रिका कोशिका है। न्यूरॉन में एक लंबा प्रवर्ध होता है जिसे तंत्रिकाक्ष कहते हैं, और मनुष्य में यह मेरुदंड के निचले भाग से पैर की अंगुली तक जा सकता है, इसलिए एक ही तंत्रिका कोशिका लगभग एक मीटर लंबी हो सकती है; इसी लंबाई से आवेग बिना किसी बीच की कड़ी के दूर तक पहुंच जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि लाल रुधिर कणिका कुछ माइक्रोमीटर की उभयावतल तश्तरी है और परिपक्व अवस्था में उसमें केंद्रक भी नहीं होता। विकल्प B गलत है क्योंकि कंकाल पेशी तंतु लंबा और बहुकेंद्रकी अवश्य है, पर सबसे लंबे न्यूरॉन से छोटा होता है, और वही सबसे प्रचलित भ्रामक विकल्प है। विकल्प D गलत है क्योंकि अस्थि कोशिका छोटी गुहिका में बैठी सघन कोशिका है। दो साथी तथ्य भी याद रखें: सबसे छोटी कोशिका माइकोप्लाज्मा और सबसे बड़ी शुतुरमुर्ग का अंडा।
पौधे में जल और घुले खनिजों का जड़ से ऊपर की ओर संवहन कौन करता है?
- A.फ्लोएम
- B.जाइलम
- C.स्थूलकोण ऊतक
- D.एधा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जाइलम
व्याख्या
सही उत्तर B, जाइलम है। जाइलम वाहिनिका, वाहिका, जाइलम मृदूतक और जाइलम तंतु से बना जटिल स्थायी ऊतक है; वाहिकाएं और वाहिनिकाएं मृत, खोखली तथा सिरे से सिरे तक जुड़ी होती हैं, इसलिए वे जल और खनिजों को जड़ से पत्तियों तक एक ही दिशा में ले जाने वाली नलियों का काम करती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि फ्लोएम पत्तियों में बने भोजन को दोनों दिशाओं में, ऊपर और नीचे, पहुंचाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि स्थूलकोण ऊतक सरल स्थायी ऊतक है जो युवा और आरोही तनों को लचीलापन तथा यांत्रिक सहारा देता है, संवहन नहीं करता। विकल्प D गलत है क्योंकि एधा पार्श्व विभज्योतक है, जिसका कार्य विभाजन करके भीतर नया जाइलम और बाहर नया फ्लोएम जोड़ना तथा तने की मोटाई बढ़ाना है। याद रखें कि जाइलम में केवल मृदूतक जीवित है और फ्लोएम में केवल तंतु मृत हैं।