सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत द्वितीय अपील सूचना आयोग को कितने दिन के भीतर की जाती है?
- A.30 दिन
- B.45 दिन
- C.60 दिन
- D.90 दिन
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है D, 90 दिन। अधिनियम दो अपीलों की व्यवस्था करता है। धारा 19(1) के अंतर्गत प्रथम अपील उत्तर मिलने या समय-सीमा बीतने के तीस दिन के भीतर की जाती है और वह उसी लोक प्राधिकारी में लोक सूचना अधिकारी से वरिष्ठ अधिकारी, यानी प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को जाती है। धारा 19(3) के अंतर्गत उस निर्णय के विरुद्ध द्वितीय अपील केंद्रीय या राज्य सूचना आयोग को नब्बे दिन के भीतर की जाती है। विकल्प A, तीस दिन, प्रथम अपील की सीमा है, इसीलिए यह सबसे आकर्षक जाल है। विकल्प B, पैंतालीस दिन, वह बाहरी सीमा है जिसके भीतर प्रथम अपीलीय प्राधिकारी को अपील निपटानी होती है, सामान्य सीमा तीस दिन है। विकल्प C, साठ दिन, अपील के प्रावधानों में कहीं नहीं आता। ध्यान रखें कि आयोग के पास ही जुर्माना लगाने और अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश करने की शक्ति है, इसलिए द्वितीय अपील की नब्बे दिन की सीमा और प्रथम अपील की तीस दिन की सीमा को जोड़े में याद रखना चाहिए।
पूरा लेख पढ़ें: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 और सुशासन कानून
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंसूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 पूर्ण रूप से किस तारीख को लागू हुआ?
- A.15 जून 2005
- B.12 अक्टूबर 2005
- C.1 जनवरी 2006
- D.26 नवंबर 2005
उत्तर देखें
सूचना का अधिकार अधिनियम को राष्ट्रपति की स्वीकृति 15 जून 2005 को मिली थी और इसकी धारा 1(3) में कहा गया था कि शेष प्रावधान अधिनियमन के एक सौ बीसवें दिन लागू होंगे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी सूचना कितने समय में देनी होती है?
- A.48 घंटे
- B.7 दिन
- C.30 दिन
- D.35 दिन
उत्तर देखें
अधिनियम की धारा 7(1) दो समय-सीमाएं देती है। सामान्य सीमा आवेदन प्राप्ति से तीस दिन है, परंतु जहां मांगी गई सूचना किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी हो, वहां लोक सूचना अधिकारी को अड़तालीस घंटे के भीतर सूचना देनी होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20 के अंतर्गत लोक सूचना अधिकारी पर अधिकतम कितना जुर्माना लगाया जा सकता है?
- A.10,000 रुपये
- B.25,000 रुपये
- C.50,000 रुपये
- D.1,00,000 रुपये
उत्तर देखें
धारा 20(1) कहती है कि यदि सूचना आयोग पाता है कि लोक सूचना अधिकारी ने बिना उचित कारण आवेदन अस्वीकार किया, निर्धारित समय में सूचना नहीं दी, गलत या भ्रामक सूचना दी अथवा सूचना नष्ट कर दी, तो वह विलंब के प्रत्येक दिन के लिए दो सौ पचास रुपये का…
पूरी व्याख्या पढ़ें →सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की कौन सी धारा इसे शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 पर अध्यारोही प्रभाव देती है?
- A.धारा 8
- B.धारा 18
- C.धारा 22
- D.धारा 24
उत्तर देखें
धारा 22 कहती है कि इस अधिनियम के प्रावधान शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923, किसी अन्य प्रवृत्त विधि अथवा किसी अन्य विधि के अधीन प्रभावी किसी लिखत में असंगत बात के होते हुए भी प्रभावी होंगे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 ने किस पूर्व कानून को निरसित किया?
- A.शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923
- B.सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम, 2002
- C.केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003
- D.लोक अभिलेख अधिनियम, 1993
उत्तर देखें
यह अधिनियम 2002 में पारित हुआ था, परंतु कभी अधिसूचित न होने के कारण लागू ही नहीं हुआ; सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 ने उसकी जगह अधिक सशक्त व्यवस्था दी, जिसमें समय-सीमाएं, जुर्माना और स्वतंत्र सूचना आयोग जोड़े गए, और नए अधिनियम की धारा 31 ने उसे निरसित कर दिया।
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