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GK24
पर्यावरणआसान

सितंबर 2026 में कच्छ के नलिया में शुरू किया गया सॉफ्ट रिलीज सेंटर किस प्रजाति के लिए है?

  1. A.एशियाई शेर
  2. B.ग्रेट इंडियन बस्टर्ड
  3. C.भारतीय जंगली गधा
  4. D.ऑलिव रिडले कछुआ

सही उत्तर

B. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड

व्याख्या

सही उत्तर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने गुजरात के कच्छ जिले के नलिया स्थित परिसर में इस पक्षी के लिए सॉफ्ट रिलीज सेंटर का उद्घाटन किया, और इस केंद्र में ऐसी सुविधाएं हैं जो संरक्षण, निगरानी और पक्षियों को धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल बनाने में मदद करती हैं। बाकी तीनों विकल्प गुजरात से जुड़ी प्रजातियां हैं, इसीलिए वे विश्वसनीय लगते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि एशियाई शेर गिर क्षेत्र से जुड़ा है, इस परिसर से नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि भारतीय जंगली गधा रण से जुड़ा है और उसके लिए ऐसे किसी केंद्र की घोषणा यहां नहीं हुई। विकल्प D गलत है, क्योंकि इस विज्ञप्ति में समुद्री कछुओं का उल्लेख ही नहीं है, हालांकि मंत्री ने उसी दिन जखाऊ में मैंग्रोव और समुद्री शैवाल से जुड़े स्थलों का दौरा किया। इस पक्षी को थार के साथ-साथ गुजरात के कच्छ से भी जोड़कर याद रखें।

पूरा लेख पढ़ें: कच्छ में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सॉफ्ट रिलीज सेंटर का उद्घाटन

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Q1.पर्यावरणमध्यम

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कच्छ वन सर्कल के लिए कितने नए गश्ती एवं बचाव वाहनों को हरी झंडी दिखाई?

  1. A.15
  2. B.25
  3. C.33
  4. D.47
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 33

व्याख्या

सही उत्तर 33 है। मंत्री ने इतने ही नए गश्ती और बचाव वाहनों को हरी झंडी दिखाई, जिनका उपयोग कच्छ वन सर्कल के विभिन्न प्रभागों में वन संरक्षण, वन विकास, वन्यजीव संरक्षण, क्षेत्रीय गश्त, निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए किया जाएगा। बाकी विकल्प इसी विज्ञप्ति में मौजूद दूसरे आंकड़ों से लिए गए हैं, इसीलिए वे भ्रमित करते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि 15 वर्ग किलोमीटर वह क्षेत्र है जिसे संरक्षण क्षेत्र में बने शिकारी-रोधी बाड़ ने घेरा है। विकल्प D गलत है, क्योंकि 47 सयारा वन कवच में लगाई गई स्थानीय प्रजातियों की संख्या है, वाहनों की नहीं। विकल्प B विज्ञप्ति के किसी आंकड़े से मेल नहीं खाता। जब एक ही समाचार में कई संख्याएं हों, तो हर संख्या को उसकी वस्तु से जोड़कर याद रखना सबसे सुरक्षित तरीका है: 11 वर्ग किलोमीटर घास का मैदान, 30 किलोमीटर बाड़, 15 वर्ग किलोमीटर घिरा क्षेत्र, 33 वाहन और 47 प्रजातियां।

Q2.पर्यावरणकठिन

कच्छ का सयारा वन कवच वनरोपण की किस पद्धति से विकसित किया गया है?

  1. A.मियावाकी पद्धति
  2. B.टौंग्या पद्धति
  3. C.कॉपिस पद्धति
  4. D.शेल्टरवुड पद्धति
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मियावाकी पद्धति

व्याख्या

सही उत्तर मियावाकी पद्धति है, जिससे बहुत कम जगह में सघन और बहुस्तरीय जंगल तैयार किया जाता है। सयारा वन कवच को 9 दशमलव 46 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित किया गया है और इसमें कच्छ की लवणीय तथा कम जल वाली परिस्थितियों के अनुकूल 47 स्थानीय प्रजातियों के दस हजार से अधिक पौधे हैं। इससे स्थानीय तापमान घटने, भूजल पुनर्भरण में मदद मिलने, मृदा क्षरण रुकने और पक्षियों, कीड़ों तथा छोटे वन्यजीवों को प्राकृतिक वास मिलने की उम्मीद है, साथ ही यह पर्यावरण पर्यटन, पर्यावरण शिक्षा और स्थानीय रोजगार का स्थल भी बनेगा। विकल्प B गलत है, क्योंकि टौंग्या पद्धति में युवा पेड़ों के बीच फसल उगाई जाती है, जो अलग तरह की व्यवस्था है। विकल्प C गलत है, क्योंकि कॉपिस में कटे ठूंठों से पेड़ दोबारा उगाए जाते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि शेल्टरवुड मौजूदा छत्र के नीचे पुनरुद्भवन की तकनीक है।

Q3.पर्यावरणमध्यम

राज्य जैव विविधता बोर्डों को मिली एबीएस राशि किस प्रावधान के तहत खर्च करनी होती है?

  1. A.पर्यावरण संरक्षण कानून की धारा 21
  2. B.जैव विविधता कानून, 2002 की धारा 32(2)
  3. C.वन्यजीव संरक्षण कानून की धारा 6
  4. D.वन संरक्षण कानून की धारा 15
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. जैव विविधता कानून, 2002 की धारा 32(2)

व्याख्या

सही उत्तर जैव विविधता कानून, 2002 की धारा 32(2) है। विज्ञप्ति कहती है कि बोर्डों और परिषदों को यह राशि उसी प्रावधान में दर्ज कामों पर खर्च करनी होगी, और वह सूची भी देती है। इसमें लोक जैव विविधता रजिस्टरों का दस्तावेजीकरण और अद्यतन, जैव संसाधनों का प्राकृतिक आवास में तथा उससे बाहर संरक्षण, क्षरित पारिस्थितिकी तंत्रों की बहाली, जैव विविधता विरासत स्थलों को मजबूत करना, जैव विविधता प्रबंधन समितियों की क्षमता बढ़ाना और सामुदायिक आजीविका में सुधार शामिल हैं। विकल्प A, विकल्प C और विकल्प D भारत के जाने-पहचाने पर्यावरण कानूनों के नाम हैं, और जब सही कानून याद न रहे तो विद्यार्थी इन्हीं में से कोई चुन लेता है, पर एबीएस का पूरा ढांचा जैव विविधता कानून के भीतर ही है। नोट्स में पूरी कड़ी जोड़ें, क्योंकि यही कानून राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव विविधता बोर्ड और जैव विविधता प्रबंधन समितियां बनाता है।

Q4.पर्यावरणकठिन

चारों फसलों को मिलाकर इस एबीएस राशि का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता राज्य कौन है?

  1. A.महाराष्ट्र
  2. B.मध्य प्रदेश
  3. C.आंध्र प्रदेश
  4. D.कर्नाटक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मध्य प्रदेश

व्याख्या

सही उत्तर मध्य प्रदेश है। विज्ञप्ति की तालिका प्राप्तकर्ताओं का क्रम देती है, जिसमें मध्य प्रदेश सबसे ऊपर है और उसके बाद महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा गुजरात आते हैं। कारण भी विज्ञप्ति बताती है, यानी मध्य प्रदेश इसलिए पहले स्थान पर है कि वहां चारों में से तीन फसलें होती हैं, यानी करेला, मिर्च और प्याज। विकल्प A सबसे मजबूत भ्रम है, क्योंकि महाराष्ट्र का नाम उसी वाक्य में बड़े प्राप्तकर्ता के रूप में आता है और देश के प्याज क्षेत्रफल में उसका हिस्सा 49 प्रतिशत से अधिक है, पर चारों फसलों के कुल आंकड़े में वह दूसरे स्थान पर है। विकल्प C और विकल्प D सूची के अगले दो राज्यों आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के नाम हैं, जिन्हें अच्छी राशि मिली है, पर शीर्ष दो से कम। क्रम का कारण भी याद रखें, क्योंकि बंटवारा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्रकाशित क्षेत्रफल आंकड़ों पर आधारित है, और संसाधन खुले बाजार से लिए जाने के कारण किसी एक किसान या समुदाय तक नहीं पहुंचाए जा सके।

Q5.पर्यावरणमध्यम

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने राज्य बोर्डों और केंद्र शासित परिषदों को कितनी नई एबीएस राशि स्वीकृत की?

  1. A.₹8.23 करोड़
  2. B.₹82.3 करोड़
  3. C.₹200 करोड़
  4. D.₹23.8 करोड़
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ₹8.23 करोड़

व्याख्या

सही उत्तर ₹8.23 करोड़ है। विज्ञप्ति दर्ज करती है कि प्राधिकरण ने यह राशि 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों और 5 केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को स्वीकृत की, जो चार सब्जी फसलों के जैव संसाधनों तक पहुंच से प्राप्त हुई। विकल्प C इस प्रश्न का पुराना जाल है, क्योंकि ₹200 करोड़ भी विज्ञप्ति में है, पर वह संचयी आंकड़ा है। ढांचा शुरू होने के बाद से प्राधिकरण का कुल एबीएस वितरण अब ₹200 करोड़ पार कर गया है, और ₹8.23 करोड़ उसी कुल के भीतर की नई किस्त है। विकल्प B और विकल्प D में केवल दशमलव हटाया गया है या अंक उलट दिए गए हैं, जो राशि वाले प्रश्नों में प्रश्न बनाने वालों की पसंदीदा चाल है। दोहराते समय दोनों आंकड़े साथ रखें, यानी ₹200 करोड़ संचयी और ₹8.23 करोड़ इस दौर की राशि। यह भी याद रखें कि राशि उन तीन बीज कंपनियों से मिली जिन्होंने करेला, भिंडी, मिर्च और प्याज के संसाधनों तक पहुंच बनाई थी।