कच्छ का सयारा वन कवच वनरोपण की किस पद्धति से विकसित किया गया है?
- A.मियावाकी पद्धति
- B.टौंग्या पद्धति
- C.कॉपिस पद्धति
- D.शेल्टरवुड पद्धति
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर मियावाकी पद्धति है, जिससे बहुत कम जगह में सघन और बहुस्तरीय जंगल तैयार किया जाता है। सयारा वन कवच को 9 दशमलव 46 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित किया गया है और इसमें कच्छ की लवणीय तथा कम जल वाली परिस्थितियों के अनुकूल 47 स्थानीय प्रजातियों के दस हजार से अधिक पौधे हैं। इससे स्थानीय तापमान घटने, भूजल पुनर्भरण में मदद मिलने, मृदा क्षरण रुकने और पक्षियों, कीड़ों तथा छोटे वन्यजीवों को प्राकृतिक वास मिलने की उम्मीद है, साथ ही यह पर्यावरण पर्यटन, पर्यावरण शिक्षा और स्थानीय रोजगार का स्थल भी बनेगा। विकल्प B गलत है, क्योंकि टौंग्या पद्धति में युवा पेड़ों के बीच फसल उगाई जाती है, जो अलग तरह की व्यवस्था है। विकल्प C गलत है, क्योंकि कॉपिस में कटे ठूंठों से पेड़ दोबारा उगाए जाते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि शेल्टरवुड मौजूदा छत्र के नीचे पुनरुद्भवन की तकनीक है।
पूरा लेख पढ़ें: कच्छ में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सॉफ्ट रिलीज सेंटर का उद्घाटन
अभ्यास प्रश्न
सितंबर 2026 में कच्छ के नलिया में शुरू किया गया सॉफ्ट रिलीज सेंटर किस प्रजाति के लिए है?
- A.एशियाई शेर
- B.ग्रेट इंडियन बस्टर्ड
- C.भारतीय जंगली गधा
- D.ऑलिव रिडले कछुआ
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने गुजरात के कच्छ जिले के नलिया स्थित परिसर में इस पक्षी के लिए सॉफ्ट रिलीज सेंटर का उद्घाटन किया, और इस केंद्र में ऐसी सुविधाएं हैं जो संरक्षण, निगरानी और पक्षियों को धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल बनाने में मदद करती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने कच्छ वन सर्कल के लिए कितने नए गश्ती एवं बचाव वाहनों को हरी झंडी दिखाई?
- A.15
- B.25
- C.33
- D.47
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मंत्री ने इतने ही नए गश्ती और बचाव वाहनों को हरी झंडी दिखाई, जिनका उपयोग कच्छ वन सर्कल के विभिन्न प्रभागों में वन संरक्षण, वन विकास, वन्यजीव संरक्षण, क्षेत्रीय गश्त, निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए किया जाएगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2014-15 से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से कितनी विदेशी मुद्रा बची है?
- A.62,000 करोड़ रुपये से अधिक
- B.1.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक
- C.1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक
- D.1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक
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मंत्रालय ने ईएसवाई 2014-15 से कार्यक्रम की चार संचयी उपलब्धियां बताईं - इतनी विदेशी मुद्रा की बचत, लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन, लगभग 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड में कमी और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हस्तांतरण।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कर्नाटक में जांचे गए नमूनों में एथेनॉल की औसत मात्रा कितनी दर्ज हुई?
- A.19.30 प्रतिशत
- B.21.50 प्रतिशत
- C.26 प्रतिशत
- D.31 प्रतिशत
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कर्नाटक में अलग-अलग स्थानों और तीनों तेल विपणन कंपनियों से लिए गए सभी 56 नमूने निर्धारित विनिर्देश के अनुरूप पाए गए, जिनमें एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच रही और औसत यही आंकड़ा निकला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एथेनॉल मिश्रित मोटर गैसोलीन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का कौन-सा विनिर्देश लागू होता है?
- A.आईएस 1460
- B.आईएस 2796
- C.आईएस 17021
- D.आईएस 15607
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यह एथेनॉल मिश्रित मोटर गैसोलीन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का विनिर्देश है और तीनों सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों द्वारा देश भर में आपूर्ति किए जाने वाले ई20 पेट्रोल को इसी के अनुरूप होना जरूरी है।
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