सितंबर 2015 में लाइगो द्वारा पहली बार संसूचित गुरुत्वीय तरंगों की भविष्यवाणी एक शताब्दी पूर्व किसने की थी?
- A.आइजैक न्यूटन
- B.अल्बर्ट आइंस्टीन
- C.नील्स बोर
- D.स्टीफन हॉकिंग
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, अल्बर्ट आइंस्टीन है। गुरुत्वीय तरंगें दिक्काल में उठने वाली लहरें हैं, जो दो कृष्ण विवरों के विलय जैसी प्रचंड घटनाओं से निकलती हैं, और ये उस सामान्य सापेक्षता सिद्धांत से निकलती हैं जिसे आइंस्टीन ने 1915 में प्रकाशित किया तथा तरंगों की भविष्यवाणी 1916 में रखी। लाइगो ने पहला सीधा संकेत 14 सितंबर 2015 को दर्ज किया और फरवरी 2016 में उसकी घोषणा की, तथा 2017 का भौतिकी नोबेल रेनर वाइस, बैरी बैरिश और किप थॉर्न को मिला। विकल्प A, आइजैक न्यूटन, ने गुरुत्वाकर्षण का व्युत्क्रम वर्ग नियम दिया, जिसमें गुरुत्व तत्क्षण कार्य करता है और तरंगों का कोई स्थान नहीं है। विकल्प C, नील्स बोर, ने परमाणु और क्वांटम सिद्धांत पर कार्य किया। विकल्प D, स्टीफन हॉकिंग, कृष्ण विवर विकिरण और ब्रह्मांड विज्ञान के लिए प्रसिद्ध हैं, इसीलिए उनका नाम भ्रमित करता है, परंतु उनका जन्म इस भविष्यवाणी के बहुत बाद हुआ।
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अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंसर्न का वृहद हैड्रॉन संघट्टक लगभग कितनी परिधि वाला छल्ला है?
- A.7 किलोमीटर
- B.17 किलोमीटर
- C.27 किलोमीटर
- D.47 किलोमीटर
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व्याख्या
सही उत्तर C, 27 किलोमीटर है। वृहद हैड्रॉन संघट्टक लगभग 27 किलोमीटर परिधि वाली गोलाकार सुरंग में है, जो जेनेवा के निकट स्विट्जरलैंड और फ्रांस की सीमा पर धरातल से करीब 100 मीटर नीचे है, और यह अब तक बना सबसे बड़ा तथा सर्वाधिक शक्तिशाली कण त्वरक है; यह सुरंग मूलतः सर्न की पुरानी मशीन वृहद इलेक्ट्रॉन-पॉजिट्रॉन संघट्टक के लिए खोदी गई थी। विकल्प A, 7 किलोमीटर, बहुत छोटा है और किसी मध्यम आकार के त्वरक छल्ले के करीब बैठता है। विकल्प B, 17 किलोमीटर, लोकप्रिय भ्रामक विकल्प है, क्योंकि संख्या पास की है और जिन्हें केवल इतना याद रहता है कि आंकड़ा बीस के ऊपर है, वे यही चुन बैठते हैं। विकल्प D, 47 किलोमीटर, एलएचसी से बड़ा है और इस प्रकार का आंकड़ा भविष्य के प्रस्तावित संघट्टकों की चर्चा में आता है। जोड़ी याद रखें: 27 किलोमीटर और 100 मीटर गहराई, तथा भीतर प्रोटॉन को द्रव हीलियम से ठंडे अतिचालक चुंबक नियंत्रित करते हैं।
वृहद हैड्रॉन संघट्टक चलाने वाले सर्न की प्रयोगशाला किस शहर के निकट है?
- A.जेनेवा
- B.वियना
- C.डार्मस्टाट
- D.ग्रेनोबल
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व्याख्या
सही उत्तर A, जेनेवा है। वर्ष 1954 में स्थापित यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन का परिसर स्विट्जरलैंड में जेनेवा के बाहरी भाग मेरिन में है, और चूंकि उसकी सुरंगें सीमा के नीचे जाती हैं, प्रयोगशाला का कुछ भाग फ्रांस में भी पड़ता है। विकल्प B, वियना, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का मुख्यालय है, जो परमाणु सुरक्षा और सुरक्षोपायों से जुड़ी पूरी तरह भिन्न संस्था है। विकल्प C, जर्मनी का डार्मस्टाट, जीएसआई प्रयोगशाला तथा फेयर अर्थात एंटीप्रोटॉन और आयन अनुसंधान सुविधा का स्थान है, जिसमें भारत भागीदार है, इसलिए वह इसी परिवार के प्रश्नों में आता है, परंतु सर्न से उसका संबंध नहीं है। विकल्प D, फ्रांस का ग्रेनोबल, यूरोपीय सिंक्रोट्रॉन विकिरण सुविधा और इंस्टीट्यूट लाउए-लांजेवां का घर है। स्मरण सूत्र है सर्न, जेनेवा, 1954 और 27 किलोमीटर का छल्ला।
वर्ष 2012 में हिग्स बोसॉन की खोज की घोषणा सर्न के किन दो प्रयोगों ने की थी?
- A.एलिस और एलएचसीबी
- B.एटलस और सीएमएस
- C.सुपर-कामिओकांडे और एसएनओ
- D.आईकैल और आरपीसी
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व्याख्या
सही उत्तर B, एटलस और सीएमएस है। ये एलएचसी के छल्ले पर लगे दो सर्वोद्देश्यीय संसूचक हैं, और जुलाई 2012 में दोनों ने स्वतंत्र रूप से लगभग 125 गिगा इलेक्ट्रॉनवोल्ट का नया कण पाने की सूचना दी, जो हिग्स बोसॉन से मेल खाता था, अर्थात उस क्षेत्र से जुड़ा कण जिससे अन्य कणों को द्रव्यमान मिलता है; सिद्धांत के लिए 2013 का भौतिकी नोबेल पीटर हिग्स और फ्रांस्वा एंगलर को मिला। विकल्प A, एलिस और एलएचसीबी, भी एलएचसी के प्रयोग हैं, परंतु एलिस भारी आयनों के टकराव में क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज्मा का अध्ययन करता है और एलएचसीबी बॉटम क्वार्क वाले कणों का। विकल्प C, जापान का सुपर-कामिओकांडे और कनाडा का एसएनओ, न्यूट्रिनो संसूचक हैं, जिनके न्यूट्रिनो दोलन संबंधी कार्य को 2015 का नोबेल मिला। विकल्प D भारत आधारित न्यूट्रिनो वेधशाला के प्रस्तावित संसूचक और पठन चैंबरों के नाम हैं, सर्न से इनका संबंध नहीं। बोसॉन शब्द स्वयं सत्येंद्रनाथ बोस के सम्मान में है।
विश्व का सबसे बड़ा संलयन प्रयोग आईटीईआर किस देश में बनाया जा रहा है?
- A.जापान
- B.जर्मनी
- C.फ्रांस
- D.संयुक्त राज्य अमेरिका
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व्याख्या
सही उत्तर C, फ्रांस है। आईटीईआर दक्षिणी फ्रांस के कादाराश क्षेत्र में सेंट-पॉल-ले-दुरांस में बन रहा है, और इसके सात भागीदार हैं यूरोपीय संघ, चीन, भारत, जापान, रूस, दक्षिण कोरिया तथा संयुक्त राज्य अमेरिका; इस नाम का लैटिन में अर्थ मार्ग है। विकल्प A, जापान, भागीदार है और यूरोप के साथ व्यापक समझौते के अंतर्गत जेटी-60एसए टोकामाक जैसे संलयन कार्य का आतिथेय भी है, इसलिए यह विकल्प लुभाता है, परंतु आईटीईआर मशीन फ्रांस में है। विकल्प B, जर्मनी, ग्राइफ्सवाल्ड में वेंडेलश्टाइन 7-एक्स स्टेलरेटर चलाता है, जो चुंबकीय परिरोध की भिन्न युक्ति है। विकल्प D, अमेरिका, भागीदार है और पहले टीएफटीआर जैसे बड़े टोकामाक का आतिथेय रहा, परंतु आईटीईआर का नहीं। कड़ी याद रखें: आईटीईआर, टोकामाक, फ्रांस का कादाराश, भारत 2005 से। आईटीईआर का उद्देश्य बिजली बेचना नहीं, बल्कि यह सिद्ध करना है कि चुंबकीय परिरोध से संलयन को औद्योगिक पैमाने पर चलाया जा सकता है, इसलिए इसे प्रायोगिक रिएक्टर कहा जाता है और इसकी लागत सातों भागीदार मिलकर उठाते हैं।
आईटीईआर में भारत का योगदान आईटीईआर-इंडिया देता है, जो किस संस्थान की इकाई है?
- A.प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान, गांधीनगर
- B.भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई
- C.भारतीय तारा भौतिकी संस्थान, बेंगलुरु
- D.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, गांधीनगर का प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान है। परमाणु ऊर्जा विभाग का यह संस्थान प्लाज्मा और संलयन अनुसंधान का राष्ट्रीय केंद्र है, इसमें वह घरेलू अभिकरण आईटीईआर-इंडिया है जो मशीन में भारत का हिस्सा देता है, और यही संस्थान भारत के अपने टोकामाक आदित्य तथा एसएसटी-1 अर्थात स्टेडी स्टेट सुपरकंडक्टिंग टोकामाक चलाता है। विकल्प B, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, विखंडन रिएक्टरों, रेडियो समस्थानिकों और नाभिकीय ईंधन चक्र का प्रमुख केंद्र है, आईटीईआर का घरेलू अभिकरण नहीं। विकल्प C, भारतीय तारा भौतिकी संस्थान, दूरबीनों और सौर भौतिकी पर काम करता है तथा थर्टी मीटर टेलीस्कोप जैसी परियोजनाओं से जुड़ा है। विकल्प D, भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान की जन्मस्थली है और ग्रहीय तथा वायुमंडलीय विज्ञान पर कार्य करती है। सूत्र यह है कि प्लाज्मा और संलयन का अर्थ गांधीनगर है।