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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

सीएसआईआर-टीकेडीएल इकाई से समझौता करने वाला नालंदा विश्वविद्यालय कहाँ स्थित है?

  1. A.बोधगया, बिहार
  2. B.वैशाली, बिहार
  3. C.राजगीर, बिहार
  4. D.पटना, बिहार

सही उत्तर

C. राजगीर, बिहार

व्याख्या

सही उत्तर राजगीर, बिहार है। नालंदा विश्वविद्यालय बिहार के नालंदा जिले में राजगीर में राष्ट्रीय महत्व के अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया गया है और यह विदेश मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। इसके उद्देश्य प्राचीन नालंदा की विरासत और मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित हैं, और यहाँ बौद्धिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक तथा आध्यात्मिक अध्ययन को आगे बढ़ाया जाता है। इस विश्वविद्यालय के पुनर्जीवन का लक्ष्य क्षेत्रीय समझ बढ़ाना और एक-दूसरे की विरासत तथा इतिहास की सराहना करना है, जिससे विद्यार्थी, विद्वान और शोधकर्ता साथ मिलकर काम कर सकें। विकल्प A, B और D गलत हैं क्योंकि ये बिहार के प्रसिद्ध स्थान होते हुए भी इस विश्वविद्यालय के स्थान नहीं हैं; इसका परिसर राजगीर में है, जो प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेषों के सबसे निकट का नगर है। परीक्षा सूत्र: नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर, नालंदा जिला, विदेश मंत्रालय।

पूरा लेख पढ़ें: नालंदा विश्वविद्यालय और सीएसआईआर-टीकेडीएल में समझौता

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

भारत के पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (टीकेडीएल) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?

  1. A.1995
  2. B.2001
  3. C.2008
  4. D.2014
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2001

व्याख्या

सही उत्तर 2001 है। भारत सरकार ने इसी वर्ष सीएसआईआर और आयुष मंत्रालय को साथ लेकर पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय की स्थापना की, और यह अपनी तरह का विश्व का पहला डेटाबेस था। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान पर गलत ढंग से पेटेंट न दिए जाएँ और देश की विरासत के दुरुपयोग पर रोक लगे। इस पुस्तकालय में आज आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा रिग्पा जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों तथा योग के 5.2 लाख से अधिक सूत्र और पद्धतियाँ दर्ज हैं, जिन्हें पारंपरिक ग्रंथों से लेकर आधुनिक वैज्ञानिक शब्दावली से जोड़ा गया है, ताकि पेटेंट परीक्षक उन्हें समझ सके। विकल्प A, C और D गलत हैं क्योंकि इनमें से कोई भी स्थापना वर्ष नहीं है; पहला विकल्प बहुत पहले का है जब यह पुस्तकालय अस्तित्व में ही नहीं था, और शेष दोनों उस समय के हैं जब यह पहले से काम कर रहा था। परीक्षा सूत्र: टीकेडीएल यानी 2001, सीएसआईआर और आयुष, तथा विश्व में पहला।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

गोपनीयता समझौतों के अंतर्गत टीकेडीएल डेटाबेस कितने अंतरराष्ट्रीय पेटेंट कार्यालयों को उपलब्ध कराया गया है?

  1. A.9
  2. B.12
  3. C.18
  4. D.26
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 18

व्याख्या

सही उत्तर 18 है। पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय इस समय इतने ही अंतरराष्ट्रीय पेटेंट कार्यालयों के लिए खुला है, और प्रत्येक को यह पहुँच गोपनीयता समझौते के माध्यम से मिलती है, जिससे यह ज्ञान पेटेंट दावों की जाँच में काम आता है पर सार्वजनिक नहीं होता। यह डेटाबेस पाँच अंतरराष्ट्रीय भाषाओं यानी अंग्रेज़ी, जर्मन, फ़्रेंच, जापानी और स्पेनिश में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे भाषा और लिपि की वह अड़चन दूर हो जाती है जो विदेश के परीक्षक को भारतीय ग्रंथ पढ़ने से रोकती है। इसका परिणाम भी दिखा है: इस पुस्तकालय से मिले पूर्व-ज्ञान के साक्ष्य के कारण दुनिया भर में 375 से अधिक पेटेंट आवेदन रद्द, अस्वीकृत, संशोधित या वापस लिए गए हैं। विकल्प A, B और D गलत हैं क्योंकि इनमें दी गई संख्या वर्तमान पहुँच से कम या अधिक है। परीक्षा सूत्र: 18 पेटेंट कार्यालय, पाँच भाषाएँ और 375 से अधिक आवेदन।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

टीकेडीएल की स्थापना सीएसआईआर ने किस केंद्रीय मंत्रालय के सहयोग से की थी?

  1. A.संस्कृति मंत्रालय
  2. B.आयुष मंत्रालय
  3. C.शिक्षा मंत्रालय
  4. D.विदेश मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आयुष मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर आयुष मंत्रालय है। भारत सरकार ने सीएसआईआर और इसी मंत्रालय के सहयोग से पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय बनाया था, और यह स्वाभाविक साझेदार है क्योंकि इस डेटाबेस में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों, अर्थात आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा रिग्पा तथा योग के सूत्र और पद्धतियाँ दर्ज हैं। पुस्तकालय में ऐसे 5.2 लाख से अधिक सूत्र हैं, जिन्हें पारंपरिक ग्रंथों से लिया गया और आधुनिक शब्दावली से जोड़ा गया है। विकल्प A और C गलत हैं क्योंकि विषय का संबंध विरासत और शिक्षा से होते हुए भी संस्कृति मंत्रालय या शिक्षा मंत्रालय इस डेटाबेस के निर्माण में पक्षकार नहीं थे। विकल्प D इस दृष्टि से ध्यान देने योग्य है कि विदेश मंत्रालय के अधीन नालंदा विश्वविद्यालय स्थापित है, वह टीकेडीएल का साझेदार नहीं है। परीक्षा सूत्र: टीकेडीएल यानी सीएसआईआर और आयुष; नालंदा विश्वविद्यालय यानी विदेश मंत्रालय।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

डिजिटल भारत निधि पहले किस नाम से जानी जाती थी?

  1. A.राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन कोष
  2. B.सार्वभौमिक सेवा बाध्यता कोष
  3. C.दूरसंचार विकास कोष
  4. D.डिजिटल इंडिया अवसंरचना कोष
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सार्वभौमिक सेवा बाध्यता कोष

व्याख्या

सही उत्तर सार्वभौमिक सेवा बाध्यता कोष है। यह कोष भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत बना और दूरसंचार अधिनियम, 2023 ने इसका नाम डिजिटल भारत निधि कर दिया। यह दूरसंचार विभाग का संलग्न कार्यालय है और इसका काम वंचित ग्रामीण, दूरदराज तथा शहरी क्षेत्रों में दूरसंचार सेवा की पहुँच बढ़ाना है। विकल्प A, C और D सुनने में सही लगते हैं, पर इनमें से कोई इस कोष का पुराना नाम नहीं है। याद रखें कि भारतनेट के अलावा यह कोष 4जी सैचुरेशन परियोजना तथा आकांक्षी जिलों, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों, हिमालयी व सीमावर्ती इलाकों, द्वीपों और पूर्वोत्तर राज्यों में मोबाइल सेवाओं के लिए भी धन देता है। महाराष्ट्र का करार इसी कोष ने महाराष्ट्र सरकार, एमडीआईएल, बीएसएनएल और महाआईटी के साथ किया, इसलिए B सही है।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

महाराष्ट्र में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम किस कंपनी के जरिये लागू होगा?

  1. A.महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड
  2. B.भारत संचार निगम लिमिटेड
  3. C.महाराष्ट्र सूचना प्रौद्योगिकी निगम लिमिटेड
  4. D.रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड

व्याख्या

सही उत्तर महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड है, जिसे एमडीआईएल लिखा जाता है। महाराष्ट्र में परियोजना एमडीआईएल के जरिये लागू होगी, इसीलिए वह करार के पाँच पक्षों में से एक है। विकल्प B गलत है: भारत संचार निगम लिमिटेड ने करार पर हस्ताक्षर किए और उसके उद्यम व्यवसाय निदेशक समारोह में मौजूद थे, पर क्रियान्वयन की जिम्मेदारी एमडीआईएल की है। विकल्प C इसी कारण गलत है, क्योंकि महाआईटी हस्ताक्षरकर्ता है और उसकी प्रबंध निदेशक उपस्थित थीं, क्रियान्वयन एजेंसी नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह कंपनी पाँच हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल ही नहीं है; बाकी दो पक्ष हैं दूरसंचार विभाग की डिजिटल भारत निधि और महाराष्ट्र सरकार। ध्यान रखें कि करार संचार भवन, नई दिल्ली में हुआ और इसका पूरा दायरा राज्य की 28,237 ग्राम पंचायतें हैं, जिसके लिए केंद्र ने 10,520 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर की है। हस्ताक्षरकर्ताओं की सूची और क्रियान्वयन एजेंसी की पंक्ति को अलग-अलग पढ़ने पर A ही सही बैठता है।