संशोधित नियमों के तहत इंटरकनेक्शन किस स्तर पर आ जाएगा?
- A.शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (एसडीसीए) स्तर
- B.लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (एलडीसीए) स्तर
- C.लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (एलएसए) स्तर
- D.जिला स्तर
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (एलएसए) स्तर है। संशोधन ट्रैफिक सौंपने और लेने की व्यवस्था को पुराने चार्जिंग एरिया वाले भूगोल से हटाकर लाइसेंस्ड सर्विस एरिया पर ले आता है, और इंटरकनेक्शन देने वाले तथा लेने वाले को आपसी सहमति से स्थान तय करने की छूट देता है। विकल्प A और B गलत हैं, क्योंकि शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया और लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया स्तर ही वे व्यवस्थाएं हैं जिनसे नियम आगे बढ़ रहे हैं, और ऐसे पीओआई पर चल रहा मौजूदा ट्रैफिक तीन वर्ष के भीतर चरणों में एलएसए स्तर पर ले जाना होगा। विकल्प D गलत है, क्योंकि जिला स्तर पर इंटरकनेक्शन की कोई व्यवस्था तय नहीं की गई। ट्राई का अनुमान है कि इससे रूटिंग सरल होगी, नंबरिंग संसाधनों का उपयोग बेहतर होगा और विलंब घटेगा।
पूरा लेख पढ़ें: ट्राई ने दूरसंचार इंटरकनेक्शन तीसरा संशोधन विनियम जारी किए
अभ्यास प्रश्न
दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 किस तिथि से लागू होंगे?
- A.1 दिसंबर 2026
- B.1 जनवरी 2027
- C.1 अप्रैल 2027
- D.3 नवंबर 2026
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भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने ये संशोधन विनियम जारी करते हुए बताया कि ये जनवरी 2027 के पहले दिन से प्रभावी होंगे, जिससे कंपनियों को नई इंटरकनेक्शन जिम्मेदारियां शुरू होने से पहले तैयारी का समय मिल जाएगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →इंटरकनेक्शन शुल्क के विलंबित भुगतान पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा क्या है?
- A.आरबीआई रेपो दर में एक प्रतिशत जोड़कर
- B.एसबीआई की एक वर्षीय एमसीएलआर में दो प्रतिशत जोड़कर
- C.सालाना 18 प्रतिशत की निश्चित दर
- D.बैंक दर में तीन प्रतिशत जोड़कर
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एक नया प्रावधान इंटरकनेक्शन शुल्क और इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क के देर से भुगतान से निपटता है, जिसमें दोनों सेवा प्रदाता ब्याज दर आपस में तय कर सकते हैं, मगर वह इस मानक से ऊपर नहीं जा सकती।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ई1 या टीडीएम लिंक पर चल रहे मौजूदा पीओआई को आईपी आधारित इंटरकनेक्शन पर कितने समय में बदलना होगा?
- A.एक वर्ष
- B.दो वर्ष
- C.तीन वर्ष
- D.पांच वर्ष
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संशोधन विनियमों में कहा गया है कि नियम लागू होने के बाद स्थापित हर इंटरकनेक्शन आईपी आधारित होगा, और जो पीओआई अब भी ई1 या टीडीएम तकनीक पर काम कर रहे हैं उन्हें चरणबद्ध तरीके से तीन वर्ष के भीतर आईपी आधारित इंटरकनेक्शन में बदलना होगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में पहली मेट्रो सेवा किस वर्ष शुरू हुई थी?
- A.1972
- B.1984
- C.1991
- D.2002
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देश में शहरी रेल के फैलाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में पहली मेट्रो 1984 में चली थी, और उन्होंने इस शुरुआत की तुलना उसके बाद की धीमी रफ्तार से की, यह बताते हुए कि 2014 तक मेट्रो सेवा पांच शहरों तक ही सीमित रही।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रधानमंत्री के अनुसार देश में अब कितने शहरों में मेट्रो सेवा चल रही है?
- A.15 शहर
- B.21 शहर
- C.26 शहर
- D.32 शहर
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प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में देश के केवल पांच शहरों में मेट्रो चलती थी और अब यह सेवा 26 शहरों तक फैल गई है।
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