साँची और उसकी पुरातात्विक खोजों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब 1818 में साँची की खोज हुई, तब उसके चार तोरणद्वारों में से तीन खड़े थे, चौथा उसी स्थान पर पड़ा था जहाँ वह गिरा था 2. साँची में चित्रित पशुओं में हाथी, घोड़े, बंदर और मवेशी शामिल हैं ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, 1 और 2 दोनों। दोनों कथन मध्य प्रदेश में स्थित साँची के महान स्तूप के उस विवरण से मेल खाते हैं जो NCERT कक्षा 12 के इतिहास में दिया गया है। जब 1818 में यह स्थल प्रकाश में आया, तब इसके चार तोरणद्वारों में से तीन खड़े थे और चौथा वहीं पड़ा था जहाँ वह गिरा था; स्तूप का टीला अच्छी हालत में था। नक्काशीदार तोरणद्वार बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं के दृश्यों से भरे हैं, और उनमें हाथी, घोड़े, बंदर और मवेशी जैसे अनेक पशु दिखाए गए हैं, जो बताते हैं कि मूर्तिकार प्रकृति को कितनी बारीकी से देखते थे। बाद में स्तूप का जीर्णोद्धार हुआ और भोपाल की शासिकाओं शाहजहाँ बेगम और सुल्तान जहाँ बेगम ने इसके संरक्षण के लिए धन दिया, इसलिए यह यूरोप ले जाए जाने के बजाय अपनी जगह बचा रहा। विकल्प A गलत है, क्योंकि कथन 2 भी सही है। विकल्प B गलत है, क्योंकि कथन 1 भी सही है। विकल्प D गलत है, क्योंकि दोनों कथन सही हैं। Exam tip: साँची की खोज 1818 में हुई; स्तूप अशोक के समय शुरू हुआ, चार तोरणों पर जातक दृश्य हैं; 1989 से यूनेस्को विश्व धरोहर।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा वैष्णव परंपरा का मंदिर है?
- A.श्रीरंगम
- B.चिदंबरम
- C.गंगैकोंड चोलपुरम
- D.तंजावुर
उत्तर देखें
तिरुचिरापल्ली के पास कावेरी और कोल्लिडम नदियों के बीच एक द्वीप पर स्थित श्रीरंगम का श्री रंगनाथस्वामी मंदिर शेषनाग पर लेटे रंगनाथ रूप में विष्णु को समर्पित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →1931 में तंजावुर के बृहदीश्वर मंदिर में खोजी गई निम्नलिखित में से कौन-सी एक महत्वपूर्ण आरंभिक चोल चित्रकृति रही है?
- A.दोनों ओर चँवरधारियों के साथ बुद्ध
- B.योग-दक्षिणामूर्ति के रूप में शिव
- C.यक्षी काली
- D.सिंहासन पर सर्प-फन के साथ पार्श्वनाथ
उत्तर देखें
तंजावुर का बृहदीश्वर मंदिर राजराज चोल प्रथम ने बनवाया था और यह शिव को समर्पित है, इसलिए इसके आरंभिक चोल भित्तिचित्रों में शैव विषय ही दिखते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा/से स्थान सूर्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है/हैं? 1. अरसवल्ली 2. अमरकंटक 3. ओंकारेश्वर नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- A.केवल 1
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
तीनों में से केवल अरसवल्ली सूर्य मंदिर के लिए जाना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में धार्मिक प्रथाओं के संदर्भ में, "स्थानकवासी" संप्रदाय किससे संबंधित है?
- A.बौद्ध धर्म
- B.जैन धर्म
- C.वैष्णव धर्म
- D.शैव धर्म
उत्तर देखें
स्थानकवासी जैन धर्म की श्वेतांबर शाखा का एक उप-संप्रदाय है जो मूर्ति पूजा को नहीं मानता। जैन धर्म आरंभ में ही दो मुख्य शाखाओं, दिगंबर और श्वेतांबर, में बँट गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चोल काल की नटराज कांस्य मूर्ति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. शिव को तिरोभाव को दर्शाते हुए अपने दाएँ पैर पर संतुलन बनाए दिखाया गया है।
2. शिव को भुजंगत्रासित मुद्रा में अपना बायाँ पैर उठाए दिखाया गया है, जो भक्त के मन से माया को ठोकर मारकर दूर करने का प्रतीक है।
3. मुख्य दायाँ हाथ डमरू पकड़े है, जो शिव का प्रिय वाद्य है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
चोल नटराज में भुजंगत्रासित मुद्रा में उठा बायाँ पैर ही तिरोभाव का प्रतीक है, यानी भक्त के मन से माया के पर्दे को ठोकर मारकर हटाना।
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