प्रसंस्कृत स्टील स्लैग गिट्टी से बनी दुनिया की सबसे लंबी सड़क का गिनीज विश्व रिकॉर्ड किस स्थान पर बना?
- A.अंगुल, ओडिशा
- B.रायगढ़, छत्तीसगढ़
- C.हजीरा, गुजरात
- D.भिलाई, छत्तीसगढ़
सही उत्तर
B. रायगढ़, छत्तीसगढ़
व्याख्या
सही उत्तर रायगढ़, छत्तीसगढ़ है। रिकॉर्ड वाली यह सड़क 1.85 किलोमीटर लंबी है और इसे नई दिल्ली के सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान तथा जिंदल स्टील लिमिटेड ने मिलकर बनाया। रिकॉर्ड उस कार्यक्रम में दिया गया जिसे डॉ. जितेंद्र सिंह ने संबोधित किया। विकल्प A यानी ओडिशा का अंगुल इस कहानी का हिस्सा तो है, पर अगले चरण का: सीएसआईआर-सीआरआरआई को वहां के जिंदल स्टील संयंत्र से ओडिशा में 40 किलोमीटर सड़क का कार्यादेश मिला है, जो इस रिकॉर्ड से कहीं आगे ले जाएगा। विकल्प C यानी गुजरात का हजीरा वह जगह है जहां यह तकनीक पहली बार बंदरगाह तक जाने वाली छह लेन सड़क पर आजमाई गई, और बाद में बंदरगाह के भीतर 1.1 किलोमीटर की सड़क भी बनी, पर रिकॉर्ड वाली सड़क वह नहीं है। विकल्प D भिलाई एक प्रसिद्ध इस्पात नगर है, जिसे यहां केवल भ्रम के लिए रखा गया है।
पूरा लेख पढ़ें: रायगढ़ की स्टील स्लैग सड़क ने गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाया
अभ्यास प्रश्न
डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार स्टील स्लैग सड़क तकनीक से निर्माण लागत लगभग कितनी घट सकती है?
- A.10 प्रतिशत
- B.25 प्रतिशत
- C.40 प्रतिशत
- D.60 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 40 प्रतिशत
व्याख्या
सही उत्तर 40 प्रतिशत है। मंत्री ने कहा कि यह तकनीक निर्माण लागत को लगभग इतनी घटा सकती है और साथ ही सामान्य सड़क से चार गुना मजबूती देती है। उन्होंने यह भी कहा कि उपयुक्त स्थितियों में मरम्मत चक्र इतना लंबा हो जाता है कि बड़ी मरम्मत लगभग पंद्रह वर्ष बाद ही जरूरी होती है। उन्होंने इसे केवल सड़क अभियांत्रिकी नहीं, बल्कि पूरी अवसंरचना अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी उपलब्धि बताया, क्योंकि इससे पैसा बचता है और खनन तथा उत्खनन से मिलने वाली प्राकृतिक गिट्टी का संरक्षण भी होता है। बाकी विकल्पों में इससे कम या अधिक प्रतिशत दिए गए हैं, ताकि यह परखा जा सके कि अभ्यर्थी को सही आंकड़ा याद है या नहीं। ये तीनों दावे प्रश्नपत्रों में साथ-साथ आते हैं, इसलिए इन्हें एक समूह में याद रखना बेहतर है।
रिकॉर्ड वाली सड़क किन दो संस्थाओं ने मिलकर बनाई और कार्यक्रम में किनके बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौता हुआ?
- A.सीएसआईआर-सीआरआरआई और जिंदल स्टील लिमिटेड
- B.आईआईटी रुड़की और भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड
- C.सीएसआईआर-एनएमएल और टाटा स्टील
- D.एनएचएआई और राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड
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सही उत्तर: A. सीएसआईआर-सीआरआरआई और जिंदल स्टील लिमिटेड
व्याख्या
सही उत्तर सीएसआईआर-सीआरआरआई और जिंदल स्टील लिमिटेड है। नई दिल्ली के सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान ने वैज्ञानिक दिशानिर्देश, प्रसंस्करण प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण का ढांचा दिया, जबकि इस्पात कंपनी ने प्रसंस्कृत स्लैग और स्थल उपलब्ध कराया। उसी कार्यक्रम में सड़क का वर्चुअल उद्घाटन हुआ, वैज्ञानिक वृत्तचित्र जारी हुआ, स्टील ग्रिट ब्रांड शुरू हुआ और दोनों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर हुए। डीएसआईआर की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि यह उपलब्धि तब आई है जब संस्था अपने पचासीवें वर्ष में प्रवेश कर रही है, और उन्होंने अंगुल संयंत्र से ओडिशा में 40 किलोमीटर सड़क के कार्यादेश की जानकारी दी। विकल्प B, C और D में ऐसी शोध संस्थाएं और इस्पात कंपनियां जोड़ी गई हैं जो इस रिकॉर्ड की साझेदार नहीं थीं।
जीएसएलवी-एफ17 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो को किसने बधाई दी?
- A.राष्ट्रपति
- B.उपराष्ट्रपति
- C.प्रधानमंत्री
- D.शिक्षा मंत्री
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सही उत्तर: C. प्रधानमंत्री
व्याख्या
सही उत्तर प्रधानमंत्री है। यह विज्ञप्ति प्रधानमंत्री कार्यालय ने जारी की थी और इसमें बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस प्रक्षेपण को इसरो की एक और शानदार उपलब्धि तथा देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने अपनी बात एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से रखी। उनके अनुसार यह सफल प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की उत्कृष्टता, नवाचार और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसरो और भारतीय उद्योग के बीच गहरी होती साझेदारी अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ताकत और विस्तार दे रही है तथा पूरे अंतरिक्ष इकोसिस्टम में देश की क्षमताएं बढ़ा रही है। विकल्प क में दिए राष्ट्रपति और विकल्प ख में दिए उपराष्ट्रपति वे दो पद हैं जिन्हें छात्र अक्सर प्रधानमंत्री की जगह चुन लेते हैं, पर ये कथन उनके नहीं हैं। विकल्प घ में दिए शिक्षा मंत्री का इस प्रक्षेपण से कोई संबंध नहीं है।
ईओएस-05 किस कक्षा से काम करने वाला भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है?
- A.निम्न भू कक्षा
- B.सूर्य तुल्यकालिक कक्षा
- C.जियोसिंक्रोनस कक्षा
- D.ध्रुवीय कक्षा
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सही उत्तर: C. जियोसिंक्रोनस कक्षा
व्याख्या
सही उत्तर जियोसिंक्रोनस कक्षा है। इस विज्ञप्ति में ईओएस-05 की सबसे बड़ी विशेषता यही बताई गई है कि यह जियोसिंक्रोनस कक्षा से काम करने वाला भारत का पहला इमेजिंग उपग्रह है। यही एक तथ्य इस प्रक्षेपण को परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है और प्रधानमंत्री ने भी अपने संदेश में यही शब्द इस्तेमाल किए। इस कक्षा में रखा गया उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन के साथ चलता है, इसलिए वह लगभग एक ही क्षेत्र के ऊपर बना रहता है। विकल्प क में दी निम्न भू कक्षा में बहुत से उपग्रह काम करते हैं, लेकिन विज्ञप्ति में ईओएस-05 को वहां नहीं बताया गया है। विकल्प ख में दी सूर्य तुल्यकालिक कक्षा और विकल्प घ में दी ध्रुवीय कक्षा पहले के दूर संवेदन उपग्रहों से जुड़ी हैं, इसीलिए ये आकर्षक भ्रामक विकल्प बनते हैं। इनमें से कोई भी इस विज्ञप्ति में नहीं है। उपलब्धि के शब्द ठीक से याद रखें।
ईओएस-05 उपग्रह को किस प्रक्षेपण यान से अंतरिक्ष में भेजा गया?
- A.पीएसएलवी-सी58
- B.जीएसएलवी-एफ17
- C.एलवीएम3-एम4
- D.एसएसएलवी-डी3
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जीएसएलवी-एफ17
व्याख्या
सही उत्तर जीएसएलवी-एफ17 है। विज्ञप्ति के अनुसार इसरो ने ईओएस-05 उपग्रह ले जा रहे जीएसएलवी-एफ17 का सफल प्रक्षेपण किया और प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि पर अंतरिक्ष एजेंसी की सराहना की। जीएसएलवी का पूरा नाम जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल है और एफ17 इसी रॉकेट परिवार की इस विशेष उड़ान को दर्शाता है। विकल्प क में दिया पीएसएलवी यानी पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल एक अलग रॉकेट परिवार है और इस विज्ञप्ति में उसका कोई उल्लेख नहीं है। विकल्प ग में दिया एलवीएम3 भारी उपग्रहों के लिए प्रयुक्त यान है, जिसका इस प्रक्षेपण से कोई संबंध नहीं है। विकल्प घ में दिया एसएसएलवी छोटे उपग्रहों के लिए बना यान है और वह भी यहां नहीं आता। छात्र अक्सर रॉकेट और उपग्रह के नाम आपस में मिला देते हैं, इसलिए जीएसएलवी-एफ17 और ईओएस-05 को हमेशा एक जोड़ी के रूप में याद रखना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस उड़ान को देश के लिए गर्व का क्षण बताया था।