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GK24
भारतीय इतिहासआसानपूछा गया: SSC CGL · 21 April 2022, Shift 2

प्राचीन नगर चंपा को _________ महाजनपद की राजधानी माना जाता है।

  1. A.काशी
  2. B.मत्स्य
  3. C.अंग
  4. D.वज्जि

सही उत्तर

C. अंग

व्याख्या

सही उत्तर है C, अंग। चंपा अंग महाजनपद की राजधानी थी और इसका स्थान आज के बिहार के भागलपुर के पास माना जाता है, जहाँ चंपा नदी गंगा से मिलती है। बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में गिनाए गए सोलह महाजनपदों में अंग भी शामिल है, और बुद्ध के समय के छह बड़े नगरों में चंपा की गणना होती थी। नदी बंदरगाह से होने वाले व्यापार के कारण यह राज्य समृद्ध था, इसीलिए मगध के शासक बिंबिसार ने इसे जीतकर अपने पुत्र अजातशत्रु को यहाँ का शासक बनाया। विकल्प A गलत है क्योंकि काशी की राजधानी वाराणसी थी। विकल्प B गलत है क्योंकि राजस्थान के अलवर-जयपुर क्षेत्र में फैले मत्स्य की राजधानी विराटनगर थी। विकल्प D गलत है क्योंकि लिच्छवियों के नेतृत्व वाले वज्जि संघ का केंद्र वैशाली था। परीक्षा टिप: जोड़ी याद रखें - अंग-चंपा, काशी-वाराणसी, वज्जि-वैशाली, मगध-राजगृह।

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Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 18 April 2022, Shift 3मध्यम

दिल्ली सल्तनत के प्रशासन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा विभाग राजकीय पत्राचार का विभाग था?

  1. A.दीवान-ए-अर्ज
  2. B.दीवान-ए-खैरात
  3. C.दीवान-ए-रिसालत
  4. D.दीवान-ए-इंशा
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. दीवान-ए-इंशा

व्याख्या

सही उत्तर है D, दीवान-ए-इंशा। दिल्ली सल्तनत में दीवान-ए-इंशा राजकीय पत्राचार का विभाग था। यह सुल्तान के पत्र तथा प्रांतीय सूबेदारों और अन्य शासकों को भेजे जाने वाले आदेश तैयार करता था, उनकी प्रतिलिपियाँ सुरक्षित रखता था और इसका प्रमुख दबीर-ए-खास कहलाता था, जिसे फारसी का कुशल लेखक होना पड़ता था क्योंकि फरमान के शब्दों में सुल्तान का अधिकार निहित होता था। विकल्प A गलत है क्योंकि दीवान-ए-अर्ज सैन्य विभाग था, जिसका प्रमुख आरिज-ए-मुमालिक होता था और जो सैनिकों की भर्ती, वेतन तथा घोड़ों को दागने और हुलिया रखने की व्यवस्था देखता था। विकल्प B गलत है क्योंकि दीवान-ए-खैरात दान विभाग था, जिसे फिरोज शाह तुगलक ने गरीबों की सहायता और निर्धन कन्याओं के विवाह के लिए बनाया था। विकल्प C गलत है क्योंकि दीवान-ए-रिसालत धार्मिक मामलों और विद्वानों को दिए जाने वाले अनुदान देखता था। परीक्षा टिप: इंशा पत्राचार के लिए, अर्ज सेना के लिए और विजारत वित्त के लिए।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 21 Jul 2023, Shift 2मध्यम

दिल्ली के निम्नलिखित सुल्तानों में से किसने सिजदा और पायबोस की प्रथा शुरू की थी?

  1. A.मुहम्मद बिन तुगलक
  2. B.नासिरुद्दीन महमूद
  3. C.ग्यासुद्दीन बलबन
  4. D.कुतुबुद्दीन ऐबक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. ग्यासुद्दीन बलबन

व्याख्या

सही उत्तर है C, ग्यासुद्दीन बलबन। 1266 से 1287 तक शासन करने वाले बलबन ने फारसी दरबारी परंपरा से सिजदा, यानी सुल्तान के सामने झुककर अभिवादन, और पायबोस, यानी उसके पैर चूमना, दिल्ली के दरबार में शुरू किया। ये प्रथाएँ उसकी राजत्व की धारणा के अनुरूप थीं, जिसमें सुल्तान को जिल्ले-इलाही अर्थात् धरती पर ईश्वर की छाया माना जाता था और उसे अमीरों से कहीं ऊपर रखा जाता था। उसने फारसी त्योहार नौरोज भी मनाया, चालीस अमीरों के गुट चालीसा की शक्ति समाप्त की और विद्रोहियों के विरुद्ध रक्त और लौह की नीति अपनाई। विकल्प A गलत है क्योंकि मुहम्मद बिन तुगलक सांकेतिक मुद्रा और दौलताबाद राजधानी स्थानांतरण के लिए जाना जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि नासिरुद्दीन महमूद के शासन में वास्तविक शक्ति नायब के रूप में बलबन के हाथ में थी। विकल्प D गलत है क्योंकि कुतुबुद्दीन ऐबक ने गुलाम वंश की नींव रखी और वह लाखबख्श कहलाता था। परीक्षा टिप: बलबन - सिजदा, पायबोस, नौरोज और जिल्ले-इलाही।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 13 Dec 2022, Shift 2कठिन

निम्नलिखित में से कौन सा क्रांतिकारी 'स्वदेश बांधव समिति' से जुड़ा था?

  1. A.चंद्रशेखर आज़ाद
  2. B.भगत सिंह
  3. C.राजगुरु
  4. D.अश्विनी कुमार दत्त
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. अश्विनी कुमार दत्त

व्याख्या

सही उत्तर है D, अश्विनी कुमार दत्त। उन्होंने बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान 1905 में बारीसाल में स्वदेश बांधव समिति की स्थापना की थी। इस समिति ने गाँव-गाँव स्वयंसेवकों का ऐसा जाल बनाया, जो स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार करता, विदेशी कपड़े के बहिष्कार को लागू कराता, अपनी पंचायतों से स्थानीय झगड़े सुलझाता और राहत कार्य करता था; यही कारण है कि इसे स्वदेशी युग की सबसे मजबूत स्वयंसेवी संस्था माना जाता है। पेशे से शिक्षक दत्त ने बारीसाल में ब्रजमोहन कॉलेज की स्थापना भी की थी, और सरकार ने 1908 में समिति पर प्रतिबंध लगाकर उन्हें निर्वासित कर दिया। विकल्प A गलत है क्योंकि चंद्रशेखर आज़ाद हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के नेता थे और 1931 में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद हुए। विकल्प B गलत है क्योंकि भगत सिंह नौजवान भारत सभा और एचएसआरए से जुड़े थे। विकल्प C गलत है क्योंकि राजगुरु एचएसआरए के सदस्य थे, जिन्हें 1931 में भगत सिंह और सुखदेव के साथ फाँसी दी गई। परीक्षा टिप: स्वदेशी युग की संस्थाएँ - बारीसाल की स्वदेश बांधव समिति और बंगाल की अनुशीलन समिति।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · CTET Feb 2016 Paper 2 Social Studies (L मध्यम

निम्नलिखित में से किसने 'विशिष्टाद्वैत' के सिद्धांत का प्रतिपादन किया?

  1. A.अल्लम प्रभु
  2. B.शंकर
  3. C.रामानुज
  4. D.बासवन्ना
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रामानुज

व्याख्या

सही उत्तर है C, रामानुज। ग्यारहवीं शताब्दी में तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में जन्मे रामानुज ने 'विशिष्टाद्वैत' यानी विशेषता सहित अद्वैत का सिद्धांत दिया। उनका मत था कि आत्मा परम ईश्वर विष्णु से एक होने पर भी अपना पृथक अस्तित्व बनाए रखती है, और मोक्ष का सबसे निश्चित मार्ग विष्णु के प्रति गहन भक्ति है। आलवार संतों से गहरे प्रभावित रामानुज ने मंदिर की उपासना और भक्ति के द्वार सभी जातियों के लिए खोले, और उनके विचारों से आगे चलकर रामानंद तथा उत्तर भारत के भक्ति संत प्रेरित हुए। B गलत है क्योंकि आठवीं शताब्दी में केरल में जन्मे शंकर ने 'अद्वैत' यानी शुद्ध अद्वैतवाद का उपदेश दिया, जिसमें केवल ब्रह्म सत्य है और जगत माया है। A और D गलत हैं क्योंकि अल्लम प्रभु और बासवन्ना कर्नाटक के वीरशैव या लिंगायत आंदोलन से जुड़े थे, जो लिंग रूप में शिव की उपासना करता था तथा जाति और कर्मकांड को अस्वीकार करता था, इस दर्शन का प्रतिपादन नहीं करता था। परीक्षा टिप: शंकर – अद्वैत, रामानुज – विशिष्टाद्वैत, मध्वाचार्य – द्वैत।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · 21st Dec 2021आसान

पद, वेतन और सैनिक ज़िम्मेदारियाँ तय करने के लिए मुग़लों द्वारा प्रयुक्त श्रेणी-व्यवस्था किस नाम से जानी जाती थी?

  1. A.मनसबदारी व्यवस्था
  2. B.इक्तादारी व्यवस्था
  3. C.ज़ब्त व्यवस्था
  4. D.जागीरदारी व्यवस्था
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मनसबदारी व्यवस्था

व्याख्या

सही उत्तर है A, मनसबदारी व्यवस्था। 'मनसब' का अर्थ पद या श्रेणी है, और अकबर ने इसके द्वारा साम्राज्य के प्रत्येक अधिकारी को एक श्रेणीबद्ध सीढ़ी पर रखा। मनसबदार के पद में दो संख्याएँ होती थीं: 'ज़ात', जो उसका व्यक्तिगत स्थान और वेतन तय करती थी, और 'सवार', जो यह तय करती थी कि उसे सेवा के लिए कितने घुड़सवार तैयार रखने हैं। अधिकांश मनसबदारों को नकद वेतन नहीं, बल्कि सौंपी गई भूमि के राजस्व से भुगतान मिलता था, और उनका स्थानांतरण होता रहता था जिससे कोई परिवार किसी क्षेत्र में जड़ें न जमा सके। B गलत है क्योंकि 'इक्ता' दिल्ली सल्तनत की राजस्व-व्यवस्था थी, जिसे मुक्ती रखते थे, और वह अधिकारियों की इस प्रकार श्रेणी नहीं बनाती थी। C गलत है क्योंकि ज़ब्त या टोडरमल के समय बनी दहसाला व्यवस्था नपी हुई भूमि और औसत उपज से लगान आँकने की पद्धति थी, अमीरों की श्रेणी तय करने की नहीं। D गलत है क्योंकि जागीर केवल वह भूमि थी जिसके राजस्व से मनसबदार का वेतन चुकता था। परीक्षा टिप: मनसब = ज़ात + सवार; ज़ब्त या दहसाला = लगान निर्धारण।