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GK क्विजभारतीय इतिहास

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज: सेट 19

  • 20 प्रश्न
  • 20 मिनट
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इस क्विज के बारे में

भारतीय इतिहास मिश्रित क्विज़ (सेट 19) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 18 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: महाजनपद और मगध का उदय, आंग्ल-मैसूर, आंग्ल-मराठा और आंग्ल-सिख युद्ध, मौर्य साम्राज्य और अन्य। ये सभी प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 21 April 2022, Shift 2आसान

प्राचीन नगर चंपा को _________ महाजनपद की राजधानी माना जाता है।

  1. A.काशी
  2. B.मत्स्य
  3. C.अंग
  4. D.वज्जि
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अंग

व्याख्या

सही उत्तर है C, अंग। चंपा अंग महाजनपद की राजधानी थी और इसका स्थान आज के बिहार के भागलपुर के पास माना जाता है, जहाँ चंपा नदी गंगा से मिलती है। बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय में गिनाए गए सोलह महाजनपदों में अंग भी शामिल है, और बुद्ध के समय के छह बड़े नगरों में चंपा की गणना होती थी। नदी बंदरगाह से होने वाले व्यापार के कारण यह राज्य समृद्ध था, इसीलिए मगध के शासक बिंबिसार ने इसे जीतकर अपने पुत्र अजातशत्रु को यहाँ का शासक बनाया। विकल्प A गलत है क्योंकि काशी की राजधानी वाराणसी थी। विकल्प B गलत है क्योंकि राजस्थान के अलवर-जयपुर क्षेत्र में फैले मत्स्य की राजधानी विराटनगर थी। विकल्प D गलत है क्योंकि लिच्छवियों के नेतृत्व वाले वज्जि संघ का केंद्र वैशाली था। परीक्षा टिप: जोड़ी याद रखें - अंग-चंपा, काशी-वाराणसी, वज्जि-वैशाली, मगध-राजगृह।

Q2.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 02 Aug, 2023, Shift 1मध्यम

निम्नलिखित में से किस आंग्ल-मराठा युद्ध के परिणामस्वरूप पेशवा के क्षेत्र बंबई प्रेसीडेंसी में मिला दिए गए थे?

  1. A.चौथा
  2. B.तीसरा
  3. C.दूसरा
  4. D.पहला
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तीसरा

व्याख्या

सही उत्तर है B, तीसरा। तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध 1817-18 में लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय लड़ा गया और इसी से मराठा शक्ति समाप्त हुई। पेशवा बाजीराव द्वितीय खड़की, कोरेगाँव और अष्टी में पराजित हुआ, पेशवा का पद ही समाप्त कर दिया गया और पूना के आसपास के उसके क्षेत्र लेकर बंबई प्रेसीडेंसी में मिला दिए गए। बाजीराव द्वितीय को पेंशन देकर कानपुर के पास बिठूर भेज दिया गया और शिवाजी के वंशज के लिए सतारा में एक छोटा राज्य बना दिया गया। इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी भारत की सर्वोपरि शक्ति बन गई। विकल्प A गलत है, क्योंकि चौथा आंग्ल-मराठा युद्ध हुआ ही नहीं; मराठों ने तीन युद्ध लड़े। विकल्प C गलत है, क्योंकि 1803-05 का दूसरा युद्ध बसीन की संधि के बाद हुआ और उसमें मराठों ने ओडिशा, दिल्ली तथा आगरा खोए, पर पेशवा अपने पद पर बना रहा। विकल्प D गलत है, क्योंकि 1775-82 का पहला युद्ध सालबाई की संधि से समाप्त हुआ, जिसने युद्ध से पहले की स्थिति बहाल कर दी। परीक्षा टिप: सालबाई 1782, बसीन 1802, पेशवा पद समाप्त 1818।

Q3.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 16 Oct 2020, Shift 1मध्यम

पुष्यमित्र शुंग द्वारा मारा गया अंतिम मौर्य शासक कौन था?

  1. A.देववर्मन
  2. B.बिंदुसार
  3. C.बृहद्रथ
  4. D.दशरथ
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बृहद्रथ

व्याख्या

सही उत्तर है C, बृहद्रथ। बृहद्रथ अंतिम मौर्य सम्राट था और लगभग 185 ईसा पूर्व उसके अपने सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने सेना के निरीक्षण के समय उसकी हत्या कर दी। इसी के साथ वह वंश समाप्त हुआ, जिसे चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 322 ईसा पूर्व में स्थापित किया था। पुष्यमित्र ने इसके बाद पाटलिपुत्र को राजधानी बनाकर शुंग वंश की नींव रखी। यह वृत्तांत बाणभट्ट के हर्षचरित से मिलता है, और पुराणों में मौर्यों का शासन लगभग 137 वर्ष बताया गया है। पुष्यमित्र दो अश्वमेध यज्ञ कराने तथा ब्राह्मण परंपरा के पुनरुत्थान के लिए जाना जाता है; भरहुत का स्तूप और साँची की वेदिका शुंग काल की हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि देववर्मन पहले का अल्पकालिक मौर्य राजा था। विकल्प B गलत है, क्योंकि बिंदुसार दूसरा मौर्य सम्राट, चंद्रगुप्त का पुत्र और अशोक का पिता था। विकल्प D गलत है, क्योंकि अशोक का पौत्र दशरथ पहले शासन कर चुका था और उसने आजीवकों को नागार्जुनी गुफाएँ दी थीं। परीक्षा टिप: चंद्रगुप्त ने मौर्य वंश शुरू किया, बृहद्रथ पर समाप्त हुआ, पुष्यमित्र से शुंग वंश चला।

Q4.भारतीय इतिहासपूछा गया: RRB ग्रुप D · 16 Oct 2018, Shift 3आसान

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान लोकमान्य तिलक ने निम्नलिखित में से कौन-सा समाचार पत्र निकाला था?

  1. A.युगांतर
  2. B.बंगाली
  3. C.केसरी
  4. D.अमृत बाजार पत्रिका
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. केसरी

व्याख्या

सही उत्तर है C, केसरी। बाल गंगाधर तिलक ने 1881 में केसरी आरंभ किया और इसके माध्यम से मराठी पाठकों तक स्वराज का संदेश पहुँचाया।

तिलक ने उसी वर्ष पुणे से दो पत्र निकाले, मराठी में केसरी और अंग्रेजी में मराठा। बंगाल विभाजन तथा मुजफ्फरपुर बम कांड पर केसरी में लिखे उनके लेखों के कारण उन पर राजद्रोह का आरोप लगा और 1908 में उन्हें छह वर्ष के लिए बर्मा के मांडले भेजा गया। तिलक ने ही घोषित किया था कि स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लूँगा, तथा जनसाधारण तक पहुँचने के लिए उन्होंने सार्वजनिक गणपति और शिवाजी उत्सव आरंभ किए।

विकल्प A गलत है क्योंकि युगांतर बंगाली में बारींद्र कुमार घोष और भूपेंद्रनाथ दत्त ने निकाला था। विकल्प B गलत है क्योंकि बंगाली का संपादन सुरेंद्रनाथ बनर्जी करते थे। विकल्प D गलत है क्योंकि अमृत बाजार पत्रिका की स्थापना शिशिर कुमार घोष और मोतीलाल घोष ने की थी।

परीक्षा टिप: तिलक के पत्र केसरी (मराठी) और मराठा (अंग्रेजी); गांधीजी के यंग इंडिया और नवजीवन।

Q5.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 12 April 2021, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से कौन कुषाण वंश का शासक नहीं था?

  1. A.नहपान
  2. B.वासिष्क
  3. C.वासुदेव
  4. D.हुविष्क
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नहपान

व्याख्या

सही उत्तर A, नहपान है। नहपान शकों के क्षहरात कुल का था, अर्थात पश्चिमी भारत में शासन करने वाले पश्चिमी क्षत्रपों का, और उसका कुषाण वंश से कोई संबंध नहीं था। वह इसलिए याद किया जाता है कि सातवाहन राजा गौतमीपुत्र सातकर्णि ने उसे पराजित कर उसके चाँदी के सिक्कों पर अपनी मुहर फिर से अंकित करवाई, जिनका बड़ा भंडार महाराष्ट्र के जोगलथेंबी से मिला है।

विकल्प B वासिष्क कनिष्क के कुल का कुषाण शासक था और अभिलेखों से ज्ञात है। विकल्प C वासुदेव अंतिम प्रमुख कुषाण राजा था, जिसके सिक्के और शिव भक्ति वंश के भारतीयकरण को दिखाते हैं; इसे कण्व वंश के संस्थापक वासुदेव से नहीं मिलाना चाहिए। विकल्प D हुविष्क कनिष्क और वासुदेव के बीच शासक था तथा अपने विपुल सिक्कों के लिए जाना जाता है।

Q6.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 12 Oct 2020, Shift 3आसान

मेवाड़ के किस राजपूत शासक ने 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा था?

  1. A.महाराणा प्रताप
  2. B.राणा अमर सिंह
  3. C.महाराजा उदय सिंह
  4. D.राजा मान सिंह
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. महाराणा प्रताप

व्याख्या

सही उत्तर है A, महाराणा प्रताप। हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को राजस्थान में गोगुंदा के पास मेवाड़ के महाराणा प्रताप और अकबर द्वारा भेजी गई मुगल सेना के बीच लड़ा गया। प्रताप अपने घोड़े चेतक पर सवार थे और उनके साथ राजपूत सैनिकों के अलावा पहाड़ों के भील धनुर्धर भी लड़े; मुगल सेना का नेतृत्व आमेर के राजा मान सिंह और आसफ खान ने किया। युद्धभूमि मुगलों के हाथ रही, पर प्रताप बच निकले और लंबे समय तक छापामार युद्ध चलाकर 1582 में दिवेर में मेवाड़ का बड़ा भाग वापस जीत लिया। विकल्प B गलत है, क्योंकि अमर सिंह प्रताप के पुत्र थे और उनके बाद राणा बने। विकल्प C गलत है, क्योंकि प्रताप के पिता उदय सिंह द्वितीय ने उदयपुर बसाया और 1572 में उनका देहांत हो गया था। विकल्प D गलत है, क्योंकि मान सिंह मुगल पक्ष के सेनापति थे। परीक्षा टिप: हल्दीघाटी 1576 - महाराणा प्रताप बनाम मान सिंह; प्रताप का घोड़ा चेतक।

Q7.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 3 July 2019, Shift 2आसान

गुप्तकाल में स्वर्ण सिक्कों को निम्नलिखित में से किस नाम से पुकारा जाता था?

  1. A.रूपक
  2. B.टंका
  3. C.द्रम्म
  4. D.दीनार
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. दीनार

व्याख्या

सही उत्तर D, दीनार है। गुप्तकालीन स्वर्ण सिक्के दीनार कहलाते थे। यह नाम रोमन देनारियस से आया, जो व्यापार और कुषाण सिक्कों के माध्यम से भारत तक पहुँच चुका था। गुप्तों ने किसी भी अन्य प्राचीन भारतीय राजवंश से अधिक स्वर्ण सिक्के ढाले और धनुर्धर, अश्वमेध तथा वीणावादक जैसे उनके प्रकार इस वंश के इतिहास का बड़ा स्रोत हैं।

विकल्प A, रूपक, गुप्तकालीन चाँदी का सिक्का था, जिसे चंद्रगुप्त द्वितीय ने शक क्षत्रपों को हराकर उनके चाँदी के क्षेत्र पर अधिकार करने के बाद चलाया। विकल्प B, टंका, दिल्ली सल्तनत का चाँदी का सिक्का था, जिसे तेरहवीं शताब्दी में इल्तुतमिश ने मानक रूप दिया। विकल्प C, द्रम्म, पश्चिमी और मध्य भारत के कई गुप्तोत्तर तथा पूर्व मध्यकालीन वंशों का चाँदी का सिक्का था, गुप्तों का स्वर्ण सिक्का कभी नहीं रहा।

Q8.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 02 Jul, 2024, Shift 4कठिन

बिजोलिया शिलालेख में निम्नलिखित में से किस वंश की वंशावली मिली है?

  1. A.चाहमान
  2. B.चंदेल
  3. C.परमार
  4. D.गहड़वाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. चाहमान

व्याख्या

सही उत्तर है A, चाहमान। बिजोलिया शिलालेख राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के बिजोलिया में है और 1170 ईस्वी का माना जाता है, यानी सोमेश्वर के शासनकाल का। इसमें शाकंभरी के चौहानों यानी चाहमान वंश की वंशावली दी गई है। संस्कृत में लिखा यह लेख जैन व्यापारी लोलाक ने पार्श्वनाथ मंदिर के पास उत्कीर्ण कराया था और इसमें सामंतराज से लेकर पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर तक के शासकों के नाम हैं। इतिहासकार इसे इसलिए महत्वपूर्ण मानते हैं कि इसमें चाहमानों को वत्स गोत्र का ब्राह्मण कहा गया है और अजमेर के लिए अजयमेरु जैसे पुराने स्थान-नाम मिलते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि खजुराहो बनवाने वाले बुंदेलखंड के चंदेलों की जानकारी खजुराहो तथा मऊ अभिलेखों से मिलती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि मालवा के परमारों का वर्णन उदयपुर प्रशस्ति में है। विकल्प D गलत है, क्योंकि कन्नौज के गहड़वालों की जानकारी चंद्रावती आदि ताम्रपत्रों से मिलती है। परीक्षा टिप: बिजोलिया - चाहमान; खजुराहो - चंदेल; उदयपुर प्रशस्ति - परमार।

Q9.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 18 April 2022, Shift 3मध्यम

दिल्ली सल्तनत के प्रशासन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा विभाग राजकीय पत्राचार का विभाग था?

  1. A.दीवान-ए-अर्ज
  2. B.दीवान-ए-खैरात
  3. C.दीवान-ए-रिसालत
  4. D.दीवान-ए-इंशा
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. दीवान-ए-इंशा

व्याख्या

सही उत्तर है D, दीवान-ए-इंशा। दिल्ली सल्तनत में दीवान-ए-इंशा राजकीय पत्राचार का विभाग था। यह सुल्तान के पत्र तथा प्रांतीय सूबेदारों और अन्य शासकों को भेजे जाने वाले आदेश तैयार करता था, उनकी प्रतिलिपियाँ सुरक्षित रखता था और इसका प्रमुख दबीर-ए-खास कहलाता था, जिसे फारसी का कुशल लेखक होना पड़ता था क्योंकि फरमान के शब्दों में सुल्तान का अधिकार निहित होता था। विकल्प A गलत है क्योंकि दीवान-ए-अर्ज सैन्य विभाग था, जिसका प्रमुख आरिज-ए-मुमालिक होता था और जो सैनिकों की भर्ती, वेतन तथा घोड़ों को दागने और हुलिया रखने की व्यवस्था देखता था। विकल्प B गलत है क्योंकि दीवान-ए-खैरात दान विभाग था, जिसे फिरोज शाह तुगलक ने गरीबों की सहायता और निर्धन कन्याओं के विवाह के लिए बनाया था। विकल्प C गलत है क्योंकि दीवान-ए-रिसालत धार्मिक मामलों और विद्वानों को दिए जाने वाले अनुदान देखता था। परीक्षा टिप: इंशा पत्राचार के लिए, अर्ज सेना के लिए और विजारत वित्त के लिए।

Q10.भारतीय इतिहासपूछा गया: CTET · 21st Dec 2021आसान

पद, वेतन और सैनिक ज़िम्मेदारियाँ तय करने के लिए मुग़लों द्वारा प्रयुक्त श्रेणी-व्यवस्था किस नाम से जानी जाती थी?

  1. A.मनसबदारी व्यवस्था
  2. B.इक्तादारी व्यवस्था
  3. C.ज़ब्त व्यवस्था
  4. D.जागीरदारी व्यवस्था
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. मनसबदारी व्यवस्था

व्याख्या

सही उत्तर है A, मनसबदारी व्यवस्था। 'मनसब' का अर्थ पद या श्रेणी है, और अकबर ने इसके द्वारा साम्राज्य के प्रत्येक अधिकारी को एक श्रेणीबद्ध सीढ़ी पर रखा। मनसबदार के पद में दो संख्याएँ होती थीं: 'ज़ात', जो उसका व्यक्तिगत स्थान और वेतन तय करती थी, और 'सवार', जो यह तय करती थी कि उसे सेवा के लिए कितने घुड़सवार तैयार रखने हैं। अधिकांश मनसबदारों को नकद वेतन नहीं, बल्कि सौंपी गई भूमि के राजस्व से भुगतान मिलता था, और उनका स्थानांतरण होता रहता था जिससे कोई परिवार किसी क्षेत्र में जड़ें न जमा सके। B गलत है क्योंकि 'इक्ता' दिल्ली सल्तनत की राजस्व-व्यवस्था थी, जिसे मुक्ती रखते थे, और वह अधिकारियों की इस प्रकार श्रेणी नहीं बनाती थी। C गलत है क्योंकि ज़ब्त या टोडरमल के समय बनी दहसाला व्यवस्था नपी हुई भूमि और औसत उपज से लगान आँकने की पद्धति थी, अमीरों की श्रेणी तय करने की नहीं। D गलत है क्योंकि जागीर केवल वह भूमि थी जिसके राजस्व से मनसबदार का वेतन चुकता था। परीक्षा टिप: मनसब = ज़ात + सवार; ज़ब्त या दहसाला = लगान निर्धारण।

Q11.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC MTS · 8 Oct 2021, Shift 2कठिन

बहमनी सल्तनत की स्थापना के तुरंत बाद निम्नलिखित में से कौन सा शहर उसकी राजधानी बना?

  1. A.देवगिरि
  2. B.दौलताबाद
  3. C.अहसनाबाद
  4. D.बरार
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अहसनाबाद

व्याख्या

सही उत्तर है C, अहसनाबाद। गुलबर्गा का नाम बदलकर अहसनाबाद रखा गया और इसे बहमनी राज्य की पहली राजधानी बनाया गया।

बहमनी सल्तनत की स्थापना 1347 में अलाउद्दीन हसन बहमन शाह ने की, जिन्हें हसन गंगू भी कहा जाता है। यह मुहम्मद बिन तुगलक के विरुद्ध दक्कन के अमीरों के विद्रोह के बाद हुआ। उन्होंने वर्तमान कर्नाटक के गुलबर्गा को अपनी राजधानी बनाया और उसका नाम अहसनाबाद रखा। 1425 में अहमद शाह वली ने राजधानी बीदर स्थानांतरित की, जिसका नाम मुहम्मदाबाद रखा गया। तुंगभद्रा के पार विजयनगर साम्राज्य से इसकी लंबी प्रतिद्वंद्विता रही और सोलहवीं सदी के आरंभ तक यह पाँच दक्कन सल्तनतों में बँट गया।

विकल्प A देवगिरि यादवों की राजधानी थी। विकल्प B दौलताबाद वही देवगिरि है, जिसका नाम मुहम्मद बिन तुगलक ने बदला था। विकल्प D बरार एक प्रांत और बाद में उत्तराधिकारी सल्तनत था, पहली राजधानी नहीं।

परीक्षा टिप: बहमनी राजधानियाँ - गुलबर्गा (अहसनाबाद) 1347, फिर बीदर 1425।

Q12.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 17 March 2020, Shift 2आसान

भारत ने पंचशील समझौते पर किस देश के साथ हस्ताक्षर किए थे?

  1. A.पाकिस्तान
  2. B.बांग्लादेश
  3. C.चीन
  4. D.नेपाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. चीन

व्याख्या

सही उत्तर है C, चीन। पंचशील समझौते पर 29 अप्रैल 1954 को भारत और चीन ने हस्ताक्षर किए थे, जो भारत तथा चीन के तिब्बत क्षेत्र के बीच व्यापार संबंधी संधि का भाग था। जवाहरलाल नेहरू और चाउ एन-लाई ने इसे पंचशील नाम दिया। इसके पांच सिद्धांत हैं - एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान, अनाक्रमण, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता और पारस्परिक लाभ, तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व। 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' का नारा इन्हीं वर्षों का है और आगे चलकर इन्हीं सिद्धांतों ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन को दिशा दी। 1962 के युद्ध ने दिखा दिया कि यह समझौता कितना कमजोर सिद्ध हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि पाकिस्तान के साथ मुख्य समझौते 1960 की सिंधु जल संधि और 1972 का शिमला समझौता हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि बांग्लादेश 1971 में बना। विकल्प D गलत है, क्योंकि भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि 1950 में हुई थी। परीक्षा टिप: पंचशील - भारत और चीन, 29 अप्रैल 1954, पांच सिद्धांत।

Q13.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 13 Dec 2022, Shift 2कठिन

निम्नलिखित में से कौन सा क्रांतिकारी 'स्वदेश बांधव समिति' से जुड़ा था?

  1. A.चंद्रशेखर आज़ाद
  2. B.भगत सिंह
  3. C.राजगुरु
  4. D.अश्विनी कुमार दत्त
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. अश्विनी कुमार दत्त

व्याख्या

सही उत्तर है D, अश्विनी कुमार दत्त। उन्होंने बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान 1905 में बारीसाल में स्वदेश बांधव समिति की स्थापना की थी। इस समिति ने गाँव-गाँव स्वयंसेवकों का ऐसा जाल बनाया, जो स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार करता, विदेशी कपड़े के बहिष्कार को लागू कराता, अपनी पंचायतों से स्थानीय झगड़े सुलझाता और राहत कार्य करता था; यही कारण है कि इसे स्वदेशी युग की सबसे मजबूत स्वयंसेवी संस्था माना जाता है। पेशे से शिक्षक दत्त ने बारीसाल में ब्रजमोहन कॉलेज की स्थापना भी की थी, और सरकार ने 1908 में समिति पर प्रतिबंध लगाकर उन्हें निर्वासित कर दिया। विकल्प A गलत है क्योंकि चंद्रशेखर आज़ाद हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के नेता थे और 1931 में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में शहीद हुए। विकल्प B गलत है क्योंकि भगत सिंह नौजवान भारत सभा और एचएसआरए से जुड़े थे। विकल्प C गलत है क्योंकि राजगुरु एचएसआरए के सदस्य थे, जिन्हें 1931 में भगत सिंह और सुखदेव के साथ फाँसी दी गई। परीक्षा टिप: स्वदेशी युग की संस्थाएँ - बारीसाल की स्वदेश बांधव समिति और बंगाल की अनुशीलन समिति।

Q14.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 11 Feb 2019, Shift 1आसान

तीसरे वर्ग द्वारा बैस्तील जेल पर किए गए हमले से _______ की चिंगारी भड़की।

  1. A.रूसी क्रांति
  2. B.फ्रांसीसी क्रांति
  3. C.सोवियत संघ का विघटन
  4. D.ज़ार का पतन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. फ्रांसीसी क्रांति

व्याख्या

सही उत्तर है B, फ्रांसीसी क्रांति। 14 जुलाई 1789 को पेरिस में बैस्तील जेल पर हुए हमले से फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत मानी जाती है। उस समय फ्रांसीसी समाज तीन वर्गों में बँटा था, पहला पादरी वर्ग, दूसरा कुलीन वर्ग और तीसरा वह वर्ग जिसमें किसानों से लेकर व्यापारी तक सब आते थे; कर वही चुकाता था, पर उसे कोई विशेषाधिकार नहीं था। बैस्तील राजा का किलेनुमा कारागार और लुई सोलहवें की निरंकुश सत्ता का प्रतीक था, इसलिए भीड़ ने हथियार और बारूद के लिए उस पर हमला किया। इस क्रांति ने दुनिया को स्वतंत्रता, समता और बंधुता का नारा तथा मानव अधिकारों की घोषणा दी, और 14 जुलाई आज भी फ्रांस का राष्ट्रीय दिवस है। विकल्प A गलत है, क्योंकि 1917 की रूसी क्रांति पेत्रोग्राद की हड़तालों से शुरू हुई। विकल्प C गलत है, क्योंकि सोवियत संघ का विघटन 1991 में हुआ। विकल्प D गलत है, क्योंकि ज़ार निकोलस द्वितीय ने 1917 की फरवरी क्रांति में गद्दी छोड़ी। परीक्षा टिप: 14 जुलाई 1789 बैस्तील, 1917 रूसी क्रांति, 1991 सोवियत संघ का अंत।

Q15.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 20 Aug 2021, Shift 1मध्यम

सी. राजगोपालाचारी ने निम्नलिखित में से किस राज्य में नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया था?

  1. A.महाराष्ट्र
  2. B.तमिलनाडु
  3. C.राजस्थान
  4. D.गुजरात
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तमिलनाडु

व्याख्या

सही उत्तर है B, तमिलनाडु। सी. राजगोपालाचारी ने मद्रास प्रेसीडेंसी के उस क्षेत्र में नमक यात्रा का नेतृत्व किया जो आज तमिलनाडु है।

1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू होने पर राजगोपालाचारी तिरुचिरापल्ली से तंजौर तट पर स्थित वेदारण्यम तक यात्रा पर निकले और अप्रैल 1930 में वहां नमक कानून तोड़ा। इसके कुछ ही समय बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। राजाजी के नाम से प्रसिद्ध राजगोपालाचारी 1948 में भारत के पहले भारतीय तथा अंतिम गवर्नर जनरल बने, और 1954 में सी. वी. रमन तथा एस. राधाकृष्णन के साथ भारत रत्न पाने वाले पहले व्यक्तियों में रहे।

A गलत है: महाराष्ट्र में उनकी कोई नमक यात्रा नहीं हुई। C गलत है: राजस्थान भूमि से घिरा है, इसलिए वहां तटीय नमक सत्याग्रह संभव नहीं था। D गलत है: गुजरात में स्वयं गांधीजी ने साबरमती से दांडी तक यात्रा की थी।

परीक्षा टिप: गुजरात का दांडी - गांधीजी; तमिलनाडु का वेदारण्यम - सी. राजगोपालाचारी; धरासना नमक कारखाना - सरोजिनी नायडू।

Q16.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 05 Jul 2024, Shift 4कठिन

निम्नलिखित में से किस चोल सम्राट ने वेल्लोर के युद्ध में पांड्य राजा मारवर्मन राजसिंह द्वितीय को हराया था?

  1. A.राजराज प्रथम
  2. B.परांतक प्रथम
  3. C.राजेंद्र प्रथम
  4. D.विजयालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. परांतक प्रथम

व्याख्या

सही उत्तर है B, परांतक प्रथम। आदित्य प्रथम के पुत्र परांतक प्रथम (907 से 955 ईस्वी) ने लगभग 915 ईस्वी में वेल्लूर (वेल्लोर) के युद्ध में पांड्य राजा मारवर्मन राजसिंह द्वितीय और उसके श्रीलंकाई सहयोगियों को हराया और 'मदुरैकोंड' यानी 'मदुरै का विजेता' उपाधि ली। उसके शासन की पहचान 919 और 921 ईस्वी के उत्तरमेरुर अभिलेखों से भी है, जो बताते हैं कि गाँव की सभाएँ लॉटरी से कैसे चुनी जाती थीं, और उसने चिदंबरम के नटराज मंदिर को सोने से मढ़वाया। शासन के अंत में वह तक्कोलम के युद्ध (949 ईस्वी) में राष्ट्रकूट राजा कृष्ण तृतीय से हारा, जिसमें उसका पुत्र राजादित्य मारा गया। विकल्प A गलत है क्योंकि राजराज प्रथम (985 से 1014 ईस्वी) बाद में आया और तंजावुर के बृहदीश्वर मंदिर के लिए जाना जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि राजेंद्र प्रथम ने गंगा अभियान किया और 'गंगैकोंड चोल' उपाधि ली। विकल्प D गलत है क्योंकि विजयालय ने लगभग 850 ईस्वी में तंजावुर जीतकर चोल साम्राज्य की नींव रखी थी, इस युद्ध से पहले। परीक्षा टिप: वेल्लूर = परांतक प्रथम (मदुरैकोंड), तक्कोलम = कृष्ण तृतीय से चोल हार।

Q17.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 19 March 2020, Shift 1मध्यम

वायसराय की कार्यकारी परिषद में शामिल होने वाले पहले भारतीय कौन थे?

  1. A.सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा
  2. B.तेज बहादुर सप्रू
  3. C.पी. एस. शिवस्वामी अय्यर
  4. D.सैयद अली इमाम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा

व्याख्या

सही उत्तर है A, सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा। सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा, जो बाद में रायपुर के लॉर्ड सिन्हा कहलाए, वायसराय की कार्यकारी परिषद में नियुक्त होने वाले पहले भारतीय थे; उन्होंने 1909 में लॉर्ड मिंटो के अधीन विधि सदस्य का पद सँभाला। आगे चलकर वे ब्रिटिश उच्च सदन (हाउस ऑफ लॉर्ड्स) में पहुँचने वाले पहले भारतीय बने, भारत के लिए अवर राज्य सचिव रहे, और बिहार तथा ओडिशा के राज्यपाल के रूप में किसी प्रांत का शासन सँभालने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने 1915 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बंबई अधिवेशन की अध्यक्षता भी की। उनकी नियुक्ति भारतीय परिषद अधिनियम, 1909 यानी मॉर्ले-मिंटो सुधारों के साथ हुई, जिसने परिषदों का आकार बढ़ाया और पृथक निर्वाचन मंडल लाए। विकल्प D गलत है, क्योंकि सैयद अली इमाम 1910 में सिन्हा के बाद विधि सदस्य बने। विकल्प B गलत है, क्योंकि तेज बहादुर सप्रू 1920 में विधि सदस्य बने। विकल्प C गलत है, क्योंकि पी. एस. शिवस्वामी अय्यर मद्रास की कार्यकारी परिषद में रहे। परीक्षा टिप: 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधारों से पहला भारतीय वायसराय की कार्यकारी परिषद में आया।

Q18.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 01 Jul, 2024, Shift 4मध्यम

निम्नलिखित में से कौन ‘विक्रमशिला विश्वविद्यालय’ का संस्थापक था?

  1. A.रामपाल
  2. B.गोविंदपाल
  3. C.महिपाल प्रथम
  4. D.धर्मपाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. धर्मपाल

व्याख्या

सही उत्तर है D, धर्मपाल। बंगाल और बिहार के पाल वंश के दूसरे और सबसे प्रतापी शासक धर्मपाल ने आठवीं शताब्दी के अंत में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आज के बिहार के भागलपुर जिले में था। उन्होंने ओदंतपुरी का विहार भी बनवाया और पालों के समय ये नालंदा के बाद बौद्ध शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र बने। विक्रमशिला तांत्रिक बौद्ध धर्म के अध्ययन के लिए प्रसिद्ध था और इसके सबसे जाने-माने आचार्य अतीश दीपंकर श्रीज्ञान थे, जो बौद्ध धर्म को तिब्बत ले गए। लगभग 1193 में बख्तियार खिलजी के आक्रमणों में यह विश्वविद्यालय नष्ट हो गया। धर्मपाल ने कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष में भाग लिया और चक्रायुध को वहाँ गद्दी पर बैठाया। विकल्प C गलत है, क्योंकि महिपाल प्रथम ने केवल पाल शक्ति फिर जगाई और विहारों की मरम्मत कराई। विकल्प A गलत है, क्योंकि रामपाल बहुत बाद के पाल शासक थे, जिन पर संध्याकर नंदी ने रामचरितम् लिखा। विकल्प B गलत है, क्योंकि गोविंदपाल इस वंश के अंतिम शासक थे। परीक्षा टिप: नालंदा कुमारगुप्त प्रथम से और ओदंतपुरी तथा विक्रमशिला धर्मपाल से जुड़े हैं।

Q19.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CHSL · 02 Aug, 2023, Shift 3आसान

मुगलों के प्रशासन में मनसबदारी व्यवस्था किसने आरंभ की?

  1. A.अकबर
  2. B.शाहजहाँ
  3. C.औरंगजेब
  4. D.जहाँगीर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अकबर

व्याख्या

सही उत्तर है A, अकबर। अकबर ने सोलहवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में साम्राज्य के हर अधिकारी का श्रेणीकरण करने के लिए मनसबदारी व्यवस्था शुरू की। मनसब का अर्थ पद या श्रेणी है, और हर मनसबदार के दो अंक होते थे: जात, जो उसका व्यक्तिगत दर्जा और वेतन तय करता था, और सवार, यानी उसे कितने सशस्त्र घुड़सवार तैयार रखने थे। श्रेणियाँ दस से पाँच हजार तक थीं और इससे ऊँची श्रेणियाँ शाही परिवार के राजकुमारों के लिए रखी गई थीं। अकबर ने घोड़ों पर सरकारी छाप लगाने की दाग प्रथा और हर सिपाही का हुलिया लिखने की चेहरा प्रथा भी चलाई, जिससे अधिकारी गिनती के समय उधार के सिपाही न दिखा सकें। विकल्प D गलत है, क्योंकि जहाँगीर ने केवल दु-अस्पा सिह-अस्पा व्यवस्था जोड़ी, जिससे जात बढ़ाए बिना घुड़सवार बढ़ जाते थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि शाहजहाँ ने वेतन ठीक करने के लिए माहवार (महाना) पैमाना चलाया। विकल्प C गलत है, क्योंकि औरंगजेब ने इसे जैसा पाया वैसा ही चलने दिया। परीक्षा टिप: अकबर से मनसबदारी श्रेणियाँ और टोडरमल की दहसाला बंदोबस्त व्यवस्था जुड़ी है।

Q20.भारतीय इतिहासपूछा गया: SSC CGL · 18 Jul 2023, Shift 1मध्यम

ब्रिटिश भारत में वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम किस वर्ष में लागू किया गया था?

  1. A.1876
  2. B.1874
  3. C.1872
  4. D.1878
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 1878

व्याख्या

सही उत्तर है D, 1878। वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम 1878 में पारित हुआ था, जब लॉर्ड लिटन भारत के वायसराय थे।

यह अधिनियम भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों के विरुद्ध लाया गया था, जो 1876-78 के अकाल के बाद ब्रिटिश शासन की तीखी आलोचना करने लगे थे। इसके तहत मजिस्ट्रेट मुद्रक या प्रकाशक से बंधपत्र मांग सकता था और राजद्रोही सामग्री छपने पर प्रेस जब्त कर सकता था। अंग्रेजी अखबारों को इससे बाहर रखा गया, इसलिए इसे 'मुख बंद करने वाला कानून' कहा गया। सुरेंद्रनाथ बनर्जी सहित कई नेताओं ने इसका विरोध किया और अमृत बाजार पत्रिका रातोंरात बंगला से अंग्रेजी में छपने लगी। लॉर्ड रिपन ने 1882 में इसे रद्द कर दिया।

A गलत है: 1876 में रॉयल टाइटल्स अधिनियम आया, जिससे महारानी विक्टोरिया भारत की सम्राज्ञी बनीं। B गलत है: 1874 में कोई प्रेस कानून नहीं बना। C गलत है: 1872 में पहली अखिल भारतीय जनगणना हुई थी।

परीक्षा टिप: वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम - 1878 में लिटन ने लागू किया, 1882 में रिपन ने रद्द किया।

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