पेप्टाइड को मजबूत पीजोइलेक्ट्रिक बनाने वाले शोध का नेतृत्व किस संस्थान ने किया?
- A.सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज, बेंगलुरु
- B.भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, कोलकाता
- C.जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च
- D.भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज, बेंगलुरु है, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। विज्ञप्ति इसी संस्थान को बताती है जिसके शोधकर्ताओं ने पेप्टाइड पर ध्यान केंद्रित किया, और वहां डॉ. गौतम घोष ने अपनी पीएचडी स्कॉलर अपर्णा रमेश के साथ इस काम का नेतृत्व किया। विकल्प ख और ग सहयोगी संस्थान हैं और इसीलिए सबसे तेज भ्रम पैदा करते हैं। आईआईएसईआर कोलकाता तथा जेएनसीएएसआर बेंगलुरु दोनों ने योगदान दिया और दोनों के शोधकर्ताओं का नाम है, पर नेतृत्व किसी ने नहीं किया। विकल्प घ का विज्ञप्ति में कोई उल्लेख नहीं है। छात्रों को संस्थान के साथ उसका मूल विभाग भी याद रखना चाहिए, क्योंकि समाचार में आए किसी शोध संस्थान का विभाग पूछा जाता है। यह भी ध्यान रखें कि खोज एंजवेन्टे केमी इंटरनेशनल एडिशन में प्रकाशित हुई।
पूरा लेख पढ़ें: सीईएनएस बेंगलुरु ने पेप्टाइड से पीजोइलेक्ट्रिक जैवसामग्री बनाई
अभ्यास प्रश्न
शोधकर्ताओं ने पेप्टाइड सामग्री में मजबूत पीजोइलेक्ट्रिक प्रतिक्रिया कैसे शुरू की?
- A.पेप्टाइड की रासायनिक संरचना बदलकर
- B.उपयुक्त सह-विलायक का एक प्रतिशत मिलाकर
- C.पेप्टाइड पर सिरेमिक की परत चढ़ाकर
- D.पेप्टाइड को 500 डिग्री सेल्सियस से अधिक गर्म करके
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दल ने पाया कि पानी में पेप्टाइड अणु नैनोफाइबर बनाते हैं और कोई पीजोइलेक्ट्रिक प्रतिक्रिया नहीं दिखाते। सह-विलायक की इतनी छोटी मात्रा मिलाने से अणु एक अत्यधिक व्यवस्थित सुपरमॉलिक्यूलर संरचना में पुनर्गठित हो गए और प्रतिक्रिया तुरंत शुरू हो गई।
पूरी व्याख्या पढ़ें →शोध के अनुसार पीजोइलेक्ट्रिसिटी के लिए मूलभूत संरचनात्मक शर्त कौन सी है?
- A.केंद्रसममितीय क्रिस्टल संरचना
- B.बिना किसी क्रम वाली अक्रिस्टलीय संरचना
- C.गैर-केंद्रसममितीय संरचना
- D.अंतःकेंद्रित घनीय संरचना
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विज्ञप्ति बताती है कि नियंत्रित काइरल स्व-संयोजन आणविक द्विध्रुवों को ऐसी ही संरचना में संरेखित करता है और इसे पीजोइलेक्ट्रिसिटी की मूलभूत संरचनात्मक आवश्यकता कहती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →6 नवंबर 2026 तक I-STEM पोर्टल पर कितने उपकरण सूचीबद्ध थे?
- A.4,044
- B.18,250
- C.31,540
- D.45,000
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6 नवंबर 2026 तक, यानी जिस दिन स्टार्टअप इंडिया पोर्टल के साथ इसका एपीआई एकीकरण शुरू हुआ, I-STEM पर 4,044 पंजीकृत संस्थानों के 31,540 उपकरण दर्ज थे, जो शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों के लिए बड़ा राष्ट्रीय संसाधन है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →6 नवंबर 2026 को स्टार्टअप इंडिया और I-STEM पोर्टल के एपीआई एकीकरण के शुभारंभ की अध्यक्षता किसने की?
- A.डॉ. परविंदर मैनी
- B.प्रो. अजय कुमार सूद
- C.अतीश कुमार सिंह
- D.डॉ. विशाल चौधरी
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उन्होंने इस एकीकरण को संस्थाओं का तालमेल बताया, जिससे शोध और विकास का खर्च घटेगा, महंगी सुविधाओं का दोहराव रुकेगा और सार्वजनिक धन से बने ढांचे का बेहतर उपयोग होगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नवंबर 2026 में स्टार्टअप इंडिया पोर्टल से जोड़े गए I-STEM पोर्टल का पूरा नाम क्या है?
- A.इंडियन स्कीम फॉर टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग मेंटरशिप
- B.इंडियन साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग फैसिलिटीज मैप
- C.इंटीग्रेटेड स्टार्टअप टेक्नोलॉजी एनेबलमेंट मिशन
- D.इंडियन सोसाइटी फॉर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग एंड मैथमेटिक्स
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I-STEM वह पोर्टल है जो शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक उपकरणों और शोध सुविधाओं का नक्शा तैयार करता है, ताकि उन्हें साझा किया जा सके।
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